Vatican Radio HIndi

प्रत्येक का कर्तव्य है सृष्टि की देखभाल करना

In Church on May 30, 2016 at 3:44 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार, 30 मई 2016 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 30 मई को अपने ट्वीट संदेश में सृष्टि की रक्षा करने की हमारी जिम्मेदारी का स्मरण दिलाया।

उन्होंने लिखा, ″हम करिन्दे हैं हमारी पृथ्वी के स्वामी नहीं। प्रत्येक व्यक्ति का एक व्यक्तिगत जिम्मेदारी है कि वह ईश्वर के अमूल्य वरदान सृष्टि की देखभाल करे।″


(Usha Tirkey)

कलीसिया और विश्वासी नियम क़ानूनों के दायरे से बाहर निकले

In Church on May 30, 2016 at 3:23 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार, 30 मई 2016 (सेदोक) संत पापा ने सोमवार को वाटिकन, संत मार्था के प्रार्थनालय में अपने प्रातःकालीन ख्रीस्तयाग के दौरान प्रवचन में कहा कि विश्वास की अपनी यात्रा में कलीसिया और विश्वासी नियम क़ानूनों के दायरे से बाहर निकल ईश्वर प्रदत्त कृपाओं की याद करें और उसके लिए उनका धन्यवाद करें।

उन्होंने कहा कि आज का सुसमाचार पट्टाधारियों के दृष्टान्त की चर्चा करता है जो स्वामी द्वारा भेजे गये सेवकों और स्वयं दाखबारी के स्वामी के पुत्र की हत्या कर देते हैं, धर्मग्रंथ में नबियों और येसु के जीवन के साथ घटित कथित घटनाओं की ओर हमारा ध्यान आकृष्ट करता है। यह अपने में एक बंद देश का चित्रण हमारे सामने प्रस्तुत करता है जो अपने को ईश्वर की प्रतिज्ञा हेतु खोलना नहीं चाहता जो ईश्वर की प्रतिज्ञाओं को अपने में ग्रहण नहीं चाहता, जहाँ लोग याददाश्त विहीन, भविष्यवाणी के बिना निराशा में जीवन यापन करते हैं।

आप की यादें महत्वपूर्ण नहीं हैं, अच्छा होता कि कोई नबी नहीं होता लेकिन सभी आशा में बने रहना चाहते हैं। ये सारी चीजें हैं जिन्हें वकील और ईशशास्त्रीगण बहुधा कानून का रूप देते और पवित्र आत्मा की स्वतंत्रता को खारिज कर देते हैं। वे ईश्वर से मिले उपहारों को नहीं मानते क्योंकि वे आशा में की जाने वाली भविष्यवाणी को नहीं स्वीकारते हैं।

येसु ऐसी ही अधार्मिक प्रणाली की बात करते हैं जिसकी चर्चा संत पेत्रुस का पत्र करता है जहाँ दुनियादारी, भ्रष्टाचार और काम-वासना भरी हुए है।

संत पापा ने कहा कि येसु को स्वयं अपने प्रेरितिक याददाश्त को खोने, भविष्यवाणी को स्वीकार नहीं करने की चुनौती, आशा के बदले सुरक्षा में बने रहने की परीक्षा ली गई थी जो मरुभूमि में तीन परीक्षाओं का सार है।
संत पापा ने कहा, “दाखबारी ईश्वर की प्रजा का प्रतीक है, यह कलीसिया और हमारी आत्मा का भी प्रतीक है जिसकी चिंता पिता अपने असीम करुणा और प्रेम में करते हैं।” उनके खिलाफ विद्रोह की भावना जैसे कि पट्टाधारियों ने किया, ईश्वर से मिले कृपाओं को खोना है जबकि कृपा दानों की याद और अपने जीवन के राह में गलतियाँ नहीं करना हमें हमारी जड़ों तक ले चलता है।

हमें अपने जीवन में ईश्वर के द्वारा किये गये आश्चर्यजनक कामों की याद करनी है। हमें अपना दिल ईश्वर के नबियों हेतु खोलना है जो हमें बतलाते हैं कि हमारे जीवन में क्या गलत है। हमें ईश्वर की प्रतिज्ञा पर विश्वास करने की जरूरत है जिस तरह इब्राहीम ने किया था, उसने बिना जाने कि उसे कहाँ जाना है अपना घर-बार छोड़ दिया, यह इसलिए संभव हुआ कि उन्होंने ईश्वर पर विश्वास किया।


(Dilip Sanjay Ekka)

सीरिया के बच्चों हेतु संत पापा की अपील

In Church on May 30, 2016 at 3:21 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार, 30 मई 2016 (सेदोक) संत पापा फ्राँसिस ने अपने रविवारीय देवदूत प्रार्थना के उपरान्त आगामी बुधवार 01 जून को अन्तराष्ट्रीय बाल दिवस के अवसर पर सीरिया के बच्चों हेतु विशेष प्रार्थना की अपील की।

देवदूत प्रार्थना के बाद संत पापा ने संत पेत्रुस के प्रांगण में एकात्रित विश्वासियों और सभी तीर्थयात्रियों को अन्तराष्ट्रीय बाल दिवस की याद दिलाते हुए कहा, “सीरिया के बच्चे विश्व के सभी बच्चों को अपने साथ शांति हेतु प्रार्थना करने का निमंत्रण देते हैं।” उन्होंने कहा कि यह सीरिया के ख्रीस्तीय समुदायों हेतु एक विशेष दिन होगा जब काथलीक और रूढ़िवादी समुदाय ने देश में शांति हेतु एक विशेष प्रार्थना का आयोजन किया है जिसका संचालन बच्चे करेंगे।

उन्होंने जयन्ती वर्ष के उपलक्ष में विश्व के कोने-कोने से रोम में जमा हुए सभी उपयाजकों का अभिवादन किया और कलीसिया में उनकी उपस्थिति और सेवा हेतु उन्हें धन्यवाद अर्पित किया।


(Dilip Sanjay Ekka)

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