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प्रेस कार्यालय के निदेशक, ग्रेग बर्क द्वारा चार्ली गार्ड पर घोषणा

In Church on July 25, 2017 at 2:42 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार 25 जुलाई 2017 (रेई) : प्रेस कार्यालय के निदेशक, ग्रेग बर्क ने सोमवार 24 जुलाई को घोषित किया कि संत पापा फ्राँसिस चार्ली गार्ड और उसके माता-पिता के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। विशेष रुप से इतने बड़े दुख की घड़ी में संत पापा उनके दुःख को महसूस करते हैं और वे उन्हें अपना आध्यात्मिक सामीप्य प्रदान करते हैं।

ग्रेग बर्क ने कहा कि संत पापा हम सभी से प्रार्थना की अपील करते हैं जिससे कि वे पिता ईश्वर की सांत्वना और प्रेम को अनुभव कर सकें।

विदित हो कि अमेरिकी न्यूरोलॉजिस्ट द्वारा एक अक्षम चिकित्सा हालत के साथ पैदा हुए ब्रिटिश बच्चे चार्ली गार्ड के परीक्षण के बाद निर्धारित किया गया कि बच्चे को प्रायोगिक चिकित्सा संभावित सहायता नहीं दे सकता है। न्यूरोलॉजिस्ट के इस परीक्षण के बाद चार्ली गार्ड के माता-पिता ने इलाज के लिए उसे अमेरिका ले जाने हेतु एक कानूनी चुनौती के केस को वापस ले लिया है।

ब्रिटिश और यूरोपीय अदालतों ने भी अंग्रेजी अस्पताल के अधिकारियों का साथ दिया जिन्होंने चार्ली गार्ड के माता-पिता द्वारा विदेशी उपचार की मांग को स्वीकार नहीं किया।

ग्यारह महीने के चार्ली गार्ड एक दुर्लभ आनुवंशिक स्थिति से पीड़ित होता है जिसे मिटोकोन्ड्रियल डिप्लेमेंट सिंड्रोम कहा जाता है, जिससे प्रगतिशील मांसपेशियों की कमजोरी होती है। माना जाता है कि यह विकार दुनियाभर में 20 से कम बच्चों को प्रभावित करता है। चार्ली अक्टूबर 2016 से ही अस्पताल के गहन देखभाल में है। इस बीमारी के कारण उसका मस्तिष्क क्षतिग्रस्त हो रहा है। वर्तमान में एक ट्यूब के माध्यम से खिलाया है। वह एक कृत्रिम वेंटीलेटर के साथ साँस लेता है और हाथ पैर हिलाने डुलाने में असमर्थ है।

अगले कुछ दिनों में बच्चे के जीवन समर्थन को बंद करने की उम्मीद है।

बच्चे के माता-पिता अब मिटोकॉन्ड्रियल सिंड्रोम का मुकाबला करने के लिए एक उदार शोध केंद्र स्थापित करना चाहते हैं।


(Margaret Sumita Minj)

पाकिस्तान में वृक्षारोपन अभियान

In Church on July 25, 2017 at 2:39 pm

पाकिस्तान, मंगलवार 25 जुलाई 2017 (वाटिकन रेडियो) : पाकिस्तानी सरकार ने रविवार को मानसून अभियान को मंजूरी दी जिसका लक्ष्य देश भर में 100 लाख से अधिक पौधे लगाने का है। जलवायु परिवर्तन मंत्री ज़ाहिद हमीद ने बैठक में हरित पाकिस्तान योजना को स्वीकृति दी जिसमें विभिन्न सरकारी संस्थाओं और गैर सरकारी संगठनों द्वारा सुझाए गए लक्ष्यों का मूल्यांकन किया गया और चर्चा की गई।

जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद सलीम ने बाद में मीडिया को बताया कि जलवायु परिवर्तन के संघीय मंत्री द्वारा अगस्त में मानसून वृक्षारोपन अभियान शुरू करने के लिए एक समारोह आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि विभिन्न संस्थाएं पहले से ही देश के विभिन्न हिस्सों में नर्सरी में पौधों की पर्याप्त मात्रा के साथ मानसून वृक्षारोपन करने की तैयारी कर चुकी हैं।

पेड़ बाढ़ के प्रभाव को कम करते हैं

सलीम ने बताया कि सरकार बाढ़ के प्रभाव को कम करने के लिए सबसे प्रभावी तरीके देश में वन को बढाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस कार्य में सभी संघीय और प्रांतीय सरकारी संगठनों, शैक्षिक संस्थानों,  गैर सरकारी संगठनों और मीडिया से संपर्क किया जा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) के मुताबिक, जंगल लगभग 72 घंटे तक बाढ़ के पानी को पकड़े रख सकता है। जंगल जल की तीव्रता को कम करती है मौतों की संभावना कम करती है और सड़कों, मकानों, पुलों और खड़ी फसलों पर होने वाले नुकसान भी कम होते हैं। उन्होंने कहा कि 4 महीने के लंबे मानसून का मौसम देश के जंगल को बढ़ाने के लिए सबसे अच्छा समय है क्योंकि गीले मौसम में पौधे तेजी से बढ़ते और मिट्टी पर अपनी पकड़ मजबूत करते हैं।


(Margaret Sumita Minj)

10 अगस्त, भेदभाव के शिकार दलित ख्रीस्तीयों के लिए ‘काला दिन’, धर्माध्यक्ष

In Church on July 25, 2017 at 2:38 pm

नई दिल्ली, मंगलवार 25 जुलाई 2017 (एशिया न्यूज) : अगस्त 10 दलित ख्रीस्तीयों के 67 वर्षों के भेदभाव को उजागर करने के लिए “काला दिवस” होगा। यह भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के दलित और पिछड़े वर्ग हेतु बने विभाग द्वारा शुरू की गई पहल है। हाल के दिनों में, धर्माध्यक्षों ने दलित मूल नए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त की थी। वे भी लोगों को याद दिलाना चाहते हैं कि देश उन दलितों के खिलाफ संवैधानिक-आधारित भेदभाव को लागू करता है जिन्होंने ख्रीस्तीय धर्म को स्वीकार किया है।

भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद  द्वारा 10 अगस्त 1950 को हस्ताक्षरित “अनुसूचित जाति” पर 1950 का संवैधानिक आदेश कहता है कि “हिंदू धर्म के अलावा अन्य धर्म का कोई भी व्यक्ति अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता” इसके बाद सन् 1956 में सिख और सन् 1990 में बौद्ध धर्म को अनुसूचित जाति में शामिल करने के लिए इस आदेश को संशोधित किया गया। ख्रीस्तीय और मुस्लिम दलित हाशिए पर हैं।

धर्माध्यक्षों की शिकायत हैं कि नागरिक याचिका 180/2004, जिसमें 1950 के आदेश के अनुच्छेद 3 को हटाने का अनुरोध किया है, अभी भी सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है। उनका तर्क हैं कि “धर्म के कारण ख्रीस्तीय और मुस्लिम दलितों के संवैधानिक अधिकारों को 67 साल से वंचित किया गया है।

विशेष रूप से, ख्रीस्तीय धर्माधिकारियों का मानना है कि अनुच्छेद 3 “असंवैधानिक है, यह संविधान के बाहर लिखा गया और एक कार्यकारी आदेश के काले दरवाजे के माध्यम से डाला गया एक काला पृष्ठ है।”

भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के दलित और पिछड़े वर्ग हेतु बने विभाग के अध्यक्ष धर्माध्यक्ष अन्तोनीसामी नीथीनाथन भारत के सभी ख्रीस्तीयों को आमंत्रित करते हुए कहा,  आप अपने क्षेत्र, धर्मप्रांतों और संस्थानों में 10 अगस्त को एक काला दिवस के रूप में लें।” धर्माध्यक्ष ने कहा,″अपने क्षेत्रों में आप उन ख्रीस्तीयों को समर्थन और एकजुटता दिखायें जो दलित मूल होने के कारण भेद-भाव से पीड़ित हैं। मैं आपको समाज में समाचार प्रसारित करने के लिए मीडिया, और विशेष रूप से सोशल मीडिया का उपयोग करने का आग्रह करता हूँ।”

 


(Margaret Sumita Minj)

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