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पाने की आशा किये बिना दूसरों की चिंता करना

In Church on June 22, 2017 at 4:29 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 22 जून 2017 (रेई): एक चरवाहे को उत्साही होना एवं उसे आत्म परीक्षण तथा बुराई की परख करने जानना चाहिए। यह बात संत पापा फ्राँसिस ने 22 जून को वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में कही।

प्रवचन में उन्होंने संत पौलुस एवं डॉन मिलानी के आदर्शों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बारबियाना के पल्ली पुरोहित की तरह पड़ोसियों की देखभाल करनी चाहिए।

संत पापा ने कहा, ″भला चरवाहा अपनी भेड़ों के लिए अपना जीवन अर्पित कर देता है।″

प्रवचन में संत पापा ने कोरिंथियों को लिखे संत पौलुस के पत्र से लिए गये पाठ पर चिंतन किया। जहाँ उन्होंने संत पौलुस को एक भले चरवाहे के रूप में प्रस्तुत किया जो अपनी भेड़ों को मजदूर के समान नहीं छोड़ देता है। अतः उन्होंने उत्साह को एक भले चरवाहे के पहले गुण के रूप में प्रस्तुत किया। ″ऐसा उत्साह जो व्यक्ति को अपने लोगों के लिए मूर्ख एवं पागल के समान बना देता है।″ जिसे हम प्रेरितिक उत्साह कहते हैं इसके अभाव में वह एक सच्चा चरवाहा नहीं बन सकता।

चरवाहे की दूसरी विशेषता है ‘परख करने की क्षमता।’ वह जीवन में प्रलोभन को पहचानता है। झूठ का पिता लालची है किन्तु एक चरवाहा प्रेम करता है। शैतान जो झूठ का पिता है ईर्ष्या के लिए प्रलोभन देता है। वह निष्ठा से पीछे हट जाता है किन्तु संत पौलुस का उत्साह सभी लोगों को ख्रीस्त के पास एक साथ लाना था, अपने दुल्हे ख्रीस्त के साथ वफादार बने रहना। मुक्ति इतिहास में कई बार लोग ईश्वर से अलग हो गये, ईश्वर के प्रति विश्वस्त नहीं रह सके, उन्होंने मूर्ति पूजा की।

संत पापा ने कहा कि एक अच्छा चरवाहा हमेशा भेड़ों का साथ देता है खुशी के क्षण में तथा दुःख  घड़ी में भी उस समय भी जब वे लालच में पड़ जाते हैं। वह लालच का परित्याग कर सकता है।

संत पापा ने डॉ मिलानी का उदाहरण देते हुए कहा, ″भला चरवाहा पर आरोप लगाया जा सकता है।″ संत पापा ने बोजोलो एवं बारबियानी का दौरा करते हुए डॉन मिलानी एवं डॉन प्रीमो को चरवाहा कहकर सम्बोधित किया था।

संत पापा ने बतलाया कि वे अपने जीवन एवं अन्य चीजों की देखभाल करने की सलाह दिया करते थे।

उन चीजों का परित्याग किस तरह किया जाए जो हमारे जीवन के लिए हानिकारक हैं संत पापा ने कहा, ″जो हमारे जीवन के विरूद्ध होता है उसको दूर करने की क्षमता को कई बार हम खो देते हैं तथा भेड़ों को उसी स्थिति में आगे ले जाना चाहते हैं जो न केवल निष्कपटता है किन्तु उन्हें चोट पहुँचाती है। यह समझौता या तो लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए होता है अथवा विश्वासियों का स्नेह जीतने के लिए।


(Usha Tirkey)

विज्ञान हेतु परमधर्मपीठीय अकादमी के लिए नये अध्यक्ष की नियुक्ति

In Church on June 22, 2017 at 4:28 pm

 

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 22 जून 17 (वीआर अग्रेजी): संत पापा फ्राँसिस ने बुधवार को प्रोफेसर ज्वाकिम वॉन ब्राऊन को विज्ञान के लिए परमधर्मपीठीय अकादमी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया।

प्रोफेसर वॉन ब्राऊन अर्थशास्त्र एवं तकनीक संबंधी परिवर्तन के प्राध्यापक हैं, साथ ही साथ, वे जर्मनी में बॉन विश्वविद्यालय में विकास अनुसंधान केंद्र के निदेशक भी हैं।

उन्होंने वाटिकन रेडियो से एकादमी के अध्यक्ष के रूप में अपना लक्ष्य साक्षा करते हुए कहा कि वे असमानता के समाधान और पर्यावरण के विनाश के लिए कार्य करना चाहते हैं।

प्रोफेसर वॉन ब्राऊन ने कहा कि विज्ञान के लिए परमधर्मपीठीय अकादमी की विज्ञान जगत में एक अद्वितीय भूमिका है यह एक वैश्विक अकादमी है एवं किसी राष्ट्र विशेष से जुड़ा नहीं है।

उन्होंने कहा कि अकादमी के 80 सदस्य विभिन्न देशों एवं धार्मिक पृष्ठभूमि से आते हैं और जिनमें से कई को विज्ञान में उनके बहुमूल्य योगदान के लिए नोबल पुरस्कार भी मिल चुका है। इसका अर्थ है कि विज्ञान जगत में अकादमी एक बहुत प्रभावशाली ईकाई बन चुका है। प्रोफेसर ने साक्षात्कार में कहा कि अकादमी मानव समाज द्वारा सामना की जा रही बड़ी समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करती है।

उन्होंने कहा, ″मैं इसमें खास महत्व देखता हूँ क्योंकि इसमें एक ओर असमानता, न्याय की कमी, भूख एवं गरीबी तथा दूसरी ओर पर्यावरण एवं प्रकृति के विनाश, जैसी दो बड़ी समस्याओं का समाधान पाता हूँ।″

उन्होंने कहा कि चूँकि ये दोनों मुद्दे आपस में जुड़े हुए हैं ″विविध विज्ञान पृष्ठभूमि से शिक्षाविद इन समस्याओं को नए तरीके से देख सकते और उन्हें दूर करने के लिए समाधान प्राप्त कर सकते हैं।″


(Usha Tirkey)

येसु में जीवन का सच्चा अर्थ

In Church on June 22, 2017 at 4:26 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 22 जून 2017 (रेई): संत पौलुस कुरिंथियों से कहते हैं ″यदि आपलोगों में से कोई अपने को संसार की दृष्टि से ज्ञानी समझता है तो वह सचमुच ज्ञानी बनने के लिए अपने को मूर्ख बना ले क्योंकि इस संसार का ज्ञान ईश्वर की दृष्टि में मूर्खता है।″

संत पापा ने इसी बात को ध्यान में रखते हुए 22 जून को एक ट्वीट प्रेषित कर कहा, ″हम इस संसार की गलत प्रज्ञा से विचलित न हों किन्तु एक सच्चे अगुवे येसु का अनुसरण करें जो हमारे जीवन को अर्थ प्रदान करते हैं।″


(Usha Tirkey)

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