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शरणार्थियों के समाज में एकीकरण का सन्त पापा फ्राँसिस ने किया आह्वान

In Church on June 22, 2018 at 2:55 pm

जिनीवा, शुक्रवार, 22 जून 2018 (रेई,वाटिकन रेडियो): यूरोप में शरणार्थियों के प्रति बढ़ती चिन्ता के बीच सन्त पापा फ्राँसिस ने समाज की मुख्यधारा में शरणार्थियों के एकीकरण का आह्वान किया है।

गुरुवार को स्विटज़रलैण्ड में, काथलिक एवं अन्य ख्रीस्तीय सम्प्रदायों के बीच ख्रीस्तीय एकतावर्द्धक साक्षात्कार हेतु सम्पन्न, एक दिवसीय यात्रा से वापस लौटते समय सन्त पापा फ्राँसिस ने विभिन्न विषयों पर पत्रकारों के सवालों का जवाब दिया। स्पेन की पत्रकार एवा फरनानडेज़ द्वारा विश्व में व्याप्त शरणार्थियों की स्थिति पर पूछे गये सवाल के जवाब में उन्होंने शरणार्थियों के एकीकरण का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मेज़बान राष्ट्र को सूझ-बूझ के साथ उतने ही शरणार्थियों का स्वागत-सत्कार करना चाहिये जितनों का वे एकीकरण कर सकें अर्थात् उन्हें शिक्षा, रोज़गार तथा समाज में प्रतिष्ठापूर्ण स्थान प्रदान कर सके।

सन्त पापा ने इस तथ्य की ओर ध्यान आकर्षित कराया कि इस समय हम अफ्रीकी देशों तथा मध्यपूर्व के देशों में जारी युद्ध एवं क्षुधा के कारण असंख्य लोगों को अपने घरों का परित्याग करते एवं अन्यत्र शरण लेने पर बाध्य होते देख रहे हैं। ऐसी स्थिति में, उन्होंने कहा, शरणार्थियों को सुरक्षा प्रदान करना उस हर राष्ट्र का दायित्व है जिसके समुद्री रास्तों से शरणार्थी गुज़र रहे हैं।

सन्त पापा ने कहा, “मैंने लौटा दिये गये शरणार्थियों की दयनीय तस्वीरें देखी हैं जो मानव तस्करी के शिकार बन रहे हैं। प्रायः महिलाओं को पुरुषों से अलग कर दिया जाता है और बच्चों को तस्करी के पकड़ लिया जाता है। मानव तस्कर उन्हें अपनी खौफ़नाक जेलों में बन्द कर लेते हैं, नाना प्रकार उनका शोषण किया जाता है, उन्हें यातनाएं दी जाती हैं तथा उनके जननांगों का सौदा किया जाता है। यह सब भयावह है। ऐसे भयावह दृश्य केवल द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान देखे गये थे।”

सन्त पापा ने कहा कि सरकारों का दायित्व यह सुनिश्चित्त करना होना चाहिये कि शरणार्थियों को सुरक्षा मिले और वे मानव तस्करों के जाल में न फँसें। उन्होंने कहा, “युद्धों का समस्या सुलझाना कठिन है किन्तु भुखमरी और निर्धनता की समस्या का समाधान ढूँढ़ा जा सकता है, हमें मालूम है कि यूरोपीय देश निर्धन देशों को सहायता प्रदान करने पर विचार कर रहे हैं ताकि अफ्रीकी देशों के लोग अपने ही देशों में शिक्षा, रोज़गार एवं सुविधाजनक जीवन प्राप्त कर सकें।” इसी प्रकार, उन्होंने कहा, “दक्षिणी अमरीका से उत्तरी अमरीका तक आप्रवास करनेवालों को सुरक्षा एवं सहायता प्रदान करने हेतु काम किया जाये।”


(Juliet Genevive Christopher)

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क्षमा से पनपती है एकता, सन्त पापा फ्राँसिस

In Church on June 22, 2018 at 2:52 pm

जिनीवा, शुक्रवार, 22 जून 2018 (रेई,वाटिकन रेडियो): स्विटज़रलैण्ड के जिनीवा में अपनी एक दिवसीय यात्रा के दौरान सन्त पापा फ्राँसिस ने ख्रीस्तयाग अर्पण के अवसर पर अपने प्रवचन में कहा कि “हे पिता हमारे” प्रार्थना हमें ईश्वर के प्रति केन्द्रित कलीसिया होना सिखाती है जो क्षमा में एकता की खोज करती है। जिनिवा के पालेक्सपो सेन्टर में गुरुवार को ख्रीस्तयाग प्रवचन में सन्त पापा फ्राँसिस ने एक दूसरे को क्षमा करने हेतु सभी को आमंत्रित किया।

“हे पिता हमारे” प्रार्थना पर चिन्तन करते हुए उन्होंने कहा कि यह प्रार्थना ईश्वर के प्रति अभिमुख होने की कुँजी है इसलिये कि इस प्रार्थना के शब्द हमें स्मरण दिलाते हैं कि ख्रीस्तानुयायी अनाथ अथवा अकेलेपन में जीवन यापन करनेवाले लोग नहीं हैं। “हे पिता हमारे” प्रार्थना के शब्द हमारी पहचान, अस्मिता और हमारे जीवन के अर्थ को समेटे हुए है तथा हमें इस बात का एहसास दिलाती है कि हम सब ईश्वर की सन्तान हैं।”

प्रभु येसु द्वारा सिखाई गई “हे पिता हमारे” प्रार्थना, उन्होंने कहा, हमें “ईश्वर पर केन्द्रित कलीसिया के बारे में सोचना सिखाती है जो हमारे आध्यात्मिक जीवन के लिये एक रोडमैप है। हमें यह एहसास दिलाती है कि हम सब ईश सन्तान, आपस में भाई –बहन और एक ही मानव परिवार के सदस्य हैं।”

उन्होंने कहा, “इसमें अजन्में शिशु, वयोवृद्ध व्यक्ति सभी शामिल हैं जो अपनी वकालात ख़ुद नहीं कर सकते। साथ ही वे लोग भी शामिल हैं जिन्हें माफ करना हमारे लिये मुश्किल है, निर्धन और समाज से बहिष्कृत लोग भी इसमें शामिल हैं।”

प्रार्थना में निहित रोटी शब्द पर चिन्तन करते हुए सन्त पापा ने कहा, “रोटी, जीवन के लिये एक अनिवार्य तत्व है, इसलिये “उन लोगों को धिक्कार जो रोटी पर अटकलें लगाते हैं!” उन्होंने कहा कि “रोटी की सादगी” हमें “चुप्पी के साहस, प्रार्थना तथा मानव जीवन के यथार्थ ख़मीर की खोज में मदद प्रदान कर सकती है।”

सन्त पापा ने कहा, “रोटी न केवल एक भौतिक वस्तु है जो जीवित रहने के लिये ज़रूरी है बल्कि यह एक आध्यात्मिक आवश्यकता भी है, जो स्वयं येसु हैं।” उन्होंने कहा कि यदि “ख्रीस्त हमारी दैनिक रोटी नहीं है, हमारे दिनों का केंद्र नहीं हैं तो जिस हवा की हम सांस लेते हैं और बाकी सबकुछ व्यर्थ है।”

हमारे अपराध हमें क्षमा कर उक्त प्रार्थना के शब्दों के बारे में सन्त पापा ने कहा कि क्षमा करना हालांकि सरल नहीं है तथापि, ख्रीस्तानुयायी होने के नाते क्षमा करना हमारा धर्म है जो केवल हमारे आततायी के लिये नहीं अपितु हमारे लिये भी एक वरदान है। क्षमा द्वारा, उन्होंने कहा, “ईश्वर  सभी पापों से हमारे दिलों को मुक्त कर देते तथा हमारे हर अपराध को क्षमा कर हममें एकता के भाव को भर देते हैं।”


(Juliet Genevive Christopher)

स्विटज़रलैण्ड एवं इटली के राष्ट्रपतियों को सन्त पापा फ्राँसिस का तार सन्देश

In Church on June 22, 2018 at 2:50 pm


जिनीवा, शुक्रवार, 22 जून 2018 (रेई,वाटिकन रेडियो): स्विटज़रलैण्ड के जिनिवा में एक दिवसीय यात्रा से लौटते समय सन्त पापा फ्राँसिस ने, गुरुवार को, स्विटज़रलैण्ड और इटली के राष्ट्रपतियों के नाम अलग-अलग तार सन्देश प्रेषित कर इन देशों के नागरिकों के प्रति हार्दिक शुभकामनाएँ अर्पित कीं।

स्विटज़रलैण्ड के राष्ट्रपति ऐलेन बेरसेट के नाम प्रेषित तार सन्देश में सन्त पापा ने लिखा, ” स्विटरलैंड से विदा लेते हुए,  मैं अपने स्वागत-सत्कार के लिये राष्ट्रपति महोदय और आपके साथी नागरिकों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करना चाहता हूं। अपनी प्रार्थनाओं का आश्वासन देते हुए,  मैं सम्पूर्ण राष्ट्र पर सर्वशक्तिमान ईश्वर के आशीर्वाद का आह्वान करता हूँ।”

इटली के राष्ट्रपति सरजियो मात्तारेल्ला के नाम प्रेषित तार सन्देश में सन्त पापा फ्राँसिस ने लिखा, “जिनिवा से लौटते समय, जहाँ मुझे एकता एवं शांति हेतु क्रियाशील विभिन्न ख्रीस्तीय कलीसियाओं एवं ख्रीस्तीय सम्प्रदायों के लोगों से मुलाकात करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, मैं आपके प्रति, राष्ट्रपति महोदय, एवं सम्पूर्ण इटली की जनता के प्रति हार्दिक शुभकामना व्यक्त करता हूँ। सम्पूर्ण इटली राष्ट्र के कल्याण एवं समृद्धि हेतु मैं अपनी विशिष्ट प्रार्थना का आश्वासन देता हूँ तथा सभी पर स्वर्गिक पिता ईश्वर के आशीर्वाद की मंगलयाचना करता हूँ।”

इसी बीच, वाटिकन के प्रेस प्रवक्ता ग्रेग बुर्के ने एक ट्वीट प्रकाशित कर बताया कि जिनिवा यात्रा से लौटने के उपरान्त अपनी परम्परा का पालन करते हुए सन्त पापा फ्राँसिस रोम के मरिया माज्जोरे महागिरजाघर गये जहाँ उन्हें अपनी यात्रा की सफलता के लिये मां मरियम के चरणों में श्रद्धार्पण किया।


(Juliet Genevive Christopher)

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