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दम्पतियों के लिए विशेष तैयारी की आवश्यकता

In Church on January 21, 2017 at 3:35 pm

 


वाटिकन सिटी, शनिवार, 21 जनवरी 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 21 जनवरी को काथलिक कलीसिया के अपोस्तोलिक अदालत ‘रोता रोमाना’ के अधिकारियों से मुलाकात कर उन्हें उदारता तथा कलीसिया के प्रति प्रेम से प्रेरित होकर कार्य करने की सलाह दी।

अपोस्तोलिक अदालत के न्यायिक वर्ष की शुरूआत करते हुए संत पापा ने उनका ध्यान विश्वास एवं विवाह के संबंध की ओर आकृष्ट किया। उन्होंने संत पापा जॉन पौल द्वितीय के शब्दों का स्मरण दिलाते हुए कहा कि उन्होंने इस संबंध को पवित्र धर्मग्रंथ पर आधारित करते हुए, ″विश्वास एवं तर्क के ज्ञान के बीच गहरा संबंध बतलाया था।″ उन्होंने कहा था कि यह अत्यन्त प्रगाढ़ एवं अटूट संबंध है अतः विश्वास की भावना से हम जितनी दूर चले जाते हैं उतना ही हम मानवीय असफलता तथा मूर्खता की स्थिति की जोखिम उठाते हैं। बाईबिल में मूर्ख व्यक्ति के जीवन के खतरे को प्रस्तुत किया गया है। मूर्ख सोचता है कि वह सब कुछ जानता है किन्तु हकीकत में वह आवश्यक चीजों की ओर नजर भी नहीं उठा पाता है। इस प्रकार न तो वह अपने मन को काबू में रख सकता है और न ही अपने तथा अपने आप-पास के लोगों के प्रति सकारात्मक मनोभाव रख पाता है। अपने ज्ञान की अपूर्णता के कारण वह ईश्वर के अस्तित्व को स्वीकार भी नहीं कर सकता है। जो दर्शाता है कि वह पूर्ण सत्य, अपने उद्गम एवं लक्ष्य से कितना दूर है।

संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें की बातों का हवाला देते हुए संत पापा ने प्रेम और सच्चाई के महत्व को प्रकट किया तथा कहा कि ईश्वर की सच्चाई के प्रति खुला होकर ही हम वैवाहिक जीवन एवं परिवार में जीवन की सार्थकता को समझ और अनुभव कर सकते हैं जिसे उनके पुत्र ने बपतिस्मा द्वारा हमें पुनः प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि ईश्वर की योजना का बहिष्कार वास्तव में मानवीय रिश्तों में बहुत अधिक गड़बड़ी उत्पन्न कर देता है। अतः यह अति आवश्यक है कि हम प्रेम एवं सच्चाई द्वारा संबंधों को मजबूत बनायें।

संत पापा ने चेतावनी दी कि धार्मिक मूल्यों एवं विश्वास का अभाव वैवाहिक सहमति को प्रभावित किये बिना नहीं रह सकता।

संत पापा ने विश्वास के अभाव के कारण वैवाहिक जीवन में आने वाली समस्याओं से छुटकारा पाने हेतु युवाओं के प्रशिक्षण पर बल दिया। उन्हें परिवार तथा वैवाहिक जीवन को ईश्वर की योजना के अनुसार बतलाते हुए शादी जीवन के लिए तैयारी करने की सलाह दी ताकि परिवार में कृपा, सच्चे प्रेम का आनन्द एवं सुन्दरता का एहसास किया जा सके एवं वे येसु द्वारा मुक्ति के सहभागी हो सकें।


(Usha Tirkey)

महाधर्माध्यक्ष जॉमबात्तिस्ता दीक्वात्रो भारत के नये प्रेरितिक राजदूत

In Church on January 21, 2017 at 3:33 pm


वाटिकन सिटी, शनिवार, 21 जनवरी 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने भारत एवं नेपाल के लिए शनिवार 21 जनवरी को एक नये प्रेरितिक राजदूत की घोषणा की।

उन्होंने जिरोमोनते के महाधर्माध्यक्ष तथा बोलिविया के प्रेरितिक राजदूत जॉमबात्तिस्ता दीक्वात्रो को भारत एवं नेपाल के लिए नया प्रेरितिक राजदूत नियुक्त किया है।

नवनियुक्त प्रेरितिक राजदूत का जन्म इटली के बोलोनिया शहर में 18 मार्च 1954 ई. में हुआ था।

24 अगस्त 1981 ई. में रगुसा धर्मप्रांत के लिए उनका पुरोहिताभिषेक हुआ और 2 अप्रैल 2005 को धर्माध्यक्ष नियुक्त किये गये।

इसके पूर्व महाधर्माध्यक्ष सलावातोरे पेन्नाक्यो भारत एवं नेपाल के प्रेरितिक राजदूत थे।


(Usha Tirkey)

पादुआ कैदखाने के कैदियों के नाम संत पापा का पत्र

In Church on January 21, 2017 at 3:32 pm


वाटिकन सिटी, शनिवार, 21 जनवरी 2017 (वीआर सेदोक): पादुआ के ‘दूवे पलात्सी’ कैदखाने में नियुक्त पुरोहित डॉन मार्को पोत्सा को एक पत्र प्रेषित कर, संत पापा ने कैदियों के प्रति अपना आध्यात्मिक सामीप्य प्रकट किया।

17 जनवरी को निर्गत इस पत्र में सज़ा, खासकर, आजीवन कारावास की सज़ा पर चिंतन करने हेतु 20 जनवरी को आयोजित सम्मेलन के प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा है, ″मुझे मालूम हुआ कि पादुआ के दूवे पलात्सी कैदखाने में सज़ा पर विचार-विमर्श करने हेतु हुए एक सम्मेलन का आयोजन किया गया है विशेषकर, आजीवन कारावास की सज़ा पर। इस अवसर पर मैं सभी प्रतिभागियों का हार्दिक अभिवादन करता हूँ तथा कैदियों के प्रति अपना आध्यात्मिक सामीप्य व्यक्त करता हूँ।″

पत्र में उन्होंने लिखा है, ″मैं आपके करीब हूँ तथा आपके लिए प्रार्थना करता हूँ। मैं आपकी आँखों में कठोर काम, भार तथा निराशा देख सकता हूँ किन्तु उसके साथ ही आशा की एक किरण भी। मैं आपको प्रोत्साहन देता हूँ कि जब आप अपने अंदर झांक कर देखें तो इस आशा को कभी न बुझायें।″

संत पापा ने सम्मेलन के प्रतिभागियों से कहा कि आशा को बनाये रखना हमारा कर्तव्य है।

संत पापा ने सम्मेलन को प्रोत्साहन देते हुए कहा कि यह मानवीय राह की शिक्षा दे, मानवता सुलभ हो तथा सुरक्षा के रास्ते से पार होते हुए सभी के लिए बेहतर भविष्य की आशा प्रदान करे।

संत पापा ने कैदियों को प्रोत्साहन दिया कि ईश्वर में हमेशा नई शुरूआत करने का अवसर है, सांत्वना प्राप्त करने एवं उनकी करुणा द्वारा पहले की स्थिति में पुनः लौटने की, अतः वे अपने आचरण, विचार तथा आशा को ईश्वर के चरणों सिपूर्द करें।


(Usha Tirkey)

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