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ईराक और सीरिया के काथलिक उदारता संगठन के सदस्यों से संत पापा की मुलाकात

In Church on September 29, 2016 at 3:34 pm


वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 29 सितम्बर 2016 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने काथलिक कलीसिया के कल्याणकारी कार्यों का समन्वय करने वाली वाटिकन स्थित कोर उनुम समिति के तत्वधान में आयोजित, ईराक और सीरिया के काथलिक उदारता संगठनों के 100 सदस्य से 29 सितम्बर को वाटिकन के क्लेमेंटीन सभागार में मुलाकात की।

उनका अभिवादन करते हुए संत पापा ने उन्हें सीरिया एवं ईराक संकट की पृष्ठभूमि पर कलीसिया के कार्यों पर चिंतन करने हेतु धन्यवाद दिया।

संत पापा ने पिछली मुलाकात से लेकर आज तक की स्थिति का अवलोकन करते हुए कहा कि यह अत्यन्त दुःखद है कि कई क्षेत्रों में अनेक प्रयासों के बावजूद इन देशों में, हथियार तथा शोषण एवं हिंसा जारी है। अभी भी, दुःख एवं मानव अधिकार के हनन पर रोक नहीं लगाया जा सका है और जिसका गंभीर परिणाम है विस्थापन। हिंसा से हिंसा उत्पन्न होती है और हम अहंकार की कुंडली तथा जड़ता के घेरे में बंद कर दिये जाते हैं जहाँ से कोई निकासी नहीं दिखाई देता। बुराई जो अंतःकरण एवं इच्छा को जकड़ लेती है, संत पापा ने कहा कि उस पर सवाल किया जाना चाहिए क्योंकि व्यक्ति, मनुष्य, सम्पति तथा पर्यावरण को अनकहे हानि की कीमत के बावजूद झूठ, बदले की भावना तथा हिंसा का पीछा करना जारी रखता है। संत पापा ने कहा कि व्यक्ति एवं इतिहास में उपस्थित बुराई से उसे मुक्ति दिलाये जाने की आवश्यकता है। अतः हम इस वर्ष ख्रीस्त पर अपनी निगाहें टिकायें हुए हैं जो करुणा के ठोस रूप हैं जिन्होंने पाप एवं मृत्यु पर विजय पायी है।

संत पापा ने सीरिया एवं ईराक में हिंसा के शिकार लोगों की याद कर कहा, ″सीरिया, ईराक तथा इनके पड़ोसी देशों में कई पीड़ित चेहरों को देखते हुए जो शरण एवं सुरक्षा की तलाश कर रहे हैं उनमें कलीसिया दुःख भोग रहे प्रभु को देखती है।″

संत पापा ने सभा के प्रतिभागियों से कहा कि उन्हीं की तरह जो लोग सहायता करने एवं उनकी प्रतिष्ठा की रक्षा करने हेतु समर्पित हैं वे निश्चय ही, ईश्वर की करुणा को प्रकट करते हैं। एक चिन्ह को कि बुराई की सीमा है तथा यह अंतिम शब्द नहीं है। यह आशा का महान चिन्ह है जिसके लिए मैं आप सभी को धन्यवाद देना चाहता हूँ। संत पापा ने करुणा के जयन्ती वर्ष में संघर्ष के शिकार लोगों के लिए प्रार्थना करने की सलाह दी, विशेषकर, बच्चों एवं बीमार लोगों के लिए।

संत पापा ने प्रतिभागियों को दूसरी आवश्यक बात बतलाते हुए कहा कि आवश्यक मानवीय सहायता से बढ़कर, सीरिया एवं ईराक में हमारे भाई-बहनों को शांति की बहुत आवश्यकता है। जिसकी मांग उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कई बार की है। संत पापा ने उन्हें शांति निर्माता बनने की सलाह दी क्योंकि हिंसा एवं अन्याय की हर परिस्थिति समस्त मानव परिवार के शरीर में एक घाव है। उन्होंने ईश्वर से शांति के लिए प्रार्थना करने का आग्रह किया ताकि ईश्वर राजनीतिक नेताओं को प्रेरित करे जिससे कि वे व्यक्तिगत लाभ का त्याग महान अच्छाई शांति के खातिर कर सकें।

संत पापा ने ईराक और सीरिया के काथलिक उदारता संगठनों की सभा की सार्थकता बतलाते हुए कहा कि यह एक रास्ता है जिसपर धीरजपूर्वक एक साथ आगे बढ़ा जा सकता है यह एक बहुत ही आवश्यक बात है और कलीसिया इसके द्वारा अपना सहयोग देना जारी रखेगी।

अंततः संत पापा ने मध्य पूर्व के ख्रीस्तीय समुदाय की याद की जो हिंसा के परिणाम झेल रहे हैं तथा भविष्य को भय के साथ देखते हैं। संत पापा ने उनकी सराहना करते हुए कहा कि इस घोर अंधकार के बीच भी वे विश्वास, आशा एवं उदारता के दीपक को धारण किये हुए हैं तथा साहस के साथ बिना भेदभाव के पीड़ित लोगों की सहायता एवं शांति का निर्माण करते हैं। उन्हें विश्वव्यापी कलीसिया द्वारा सराहे जाने, कृतज्ञता अर्पित किये जाने एवं समर्थन दिये जाने की आवश्यकता है।

संत पापा ने संकट के शिकार लोगों की मदद हेतु कार्य करने वाले सभी सदस्यों को दया और उदारता की आदर्श कलकत्ता की संत तेरेसा के चरणों तले सिपुर्द की।


(Usha Tirkey)

सामाजिक संप्रेषण दिवस विषय पर संचार के सचिवालय से वक्तव्य

In Church on September 29, 2016 at 3:32 pm


वाटिकन, सिटी, बृहस्पतिवार, 29 सितम्बर 2016 (वीआर सेदोक): सामाजिक सम्प्रेषण हेतु बनी परमधर्मपीठीय समिति ने बृहस्पतिवार 29 सितम्बर को, 2017 के लिए विश्व संप्रेषण दिवस की विषयवस्तु की घोषणा की।

विश्व संप्रेषण दिवस हेतु आगामी विषयवस्तु होगी, ″डरो मत, मैं तुम्हारे साथ हूँ। (इसा.43:5) हमारे समय में आशा एवं विश्वास का प्रचार।″

सामाजिक संप्रेषण दिवस पर दिये गये वक्तव्य में वाटिकन संचार के सचिवालय ने कहा, ″विवेक की शून्यता अथवा मायूसी को अपने बीच स्थान देना, ये दो संभावनाएँ हैं जिनके द्वारा आज संचार प्रणाली रोगग्रस्त हो सकती हैं। जैसा कि संत पापा कहते हैं यह सम्भव है कि पेशे की भावना, नेता उन्मुख विचार एवं शहरी केंद्रित हो जाने के कारण हमारा अंतःकरण शून्य हो सकता है, गरीब एवं आवश्यकता में पड़े लोगों से हमारा ध्यान हट सकता है और लोगों के द्वारा झेली जा रही जटिलताओं को नजरंदाज करने के कारण हम उनसे दूर चले जा सकते हैं।कहा गया कि मायूसी तब भी आ सकती है जब संचार पर बहुत ध्यान दिया जाए तथा यह लोगों के लिए कौतूहल का कारण बन जाय।

वक्तव्य में कहा गया है कि इस कोलाहल के बीच भी एक दबी आवाज सुनाई देती है, ″डरो मत मैं तुम्हारे साथ हूँ। (इसा.43:5) अपने पुत्र द्वारा ईश्वर प्रत्येक मानव परिस्थिति में अपनी एकात्मता व्यक्त करते हैं तथा यह प्रकट करते हैं कि हम अकेले नहीं हैं क्योंकि हमारे एक पिता हैं जो अपने पुत्र-पुत्रियों को कभी नहीं भूलते। जो लोग ख्रीस्त के साथ संयुक्त होकर जीते हैं वे अंधकार एवं मृत्यु के बीच भी प्रकाश एवं जीवन के लिए स्थान प्राप्त करते हैं। हर घटना में वे यह देखने का प्रयास करते हैं कि ईश्वर और मानवता के बीच क्या हो रहा है, यह समझने के लिए की किस तरह, इस दुनिया की नाटकीय परिदृश्य के द्वारा वे मुक्ति का इतिहास लिख रहे हैं। ख्रीस्तीयों के पास लोगों को बतलाने के लिए सुसमाचार है क्योंकि हम ईश राज्य की आशा पर सच्चाई से चिंतन करते हैं।″

वक्तव्य में बतलाया गया है कि, ″आगामी विश्व संप्रेषण दिवस की विषयवस्तु एक निमंत्रण है यह बतलाने के लिए कि विश्व का इतिहास तथा स्त्री एवं पुरुषों का इतिहास सुसमाचार के तर्क के अनुरूप है जो स्मरण दिलाता है कि ईश्वर का पितृत्व का गुण किसी परिस्थिति एवं व्यक्ति के लिए कभी समाप्त नहीं होता अतः आइये, हम इतिहास के प्रति निष्ठा एवं आशा का प्रचार करना सीख़ें।″

 


(Usha Tirkey)

राष्ट्रपति पेरेज़ के निधन पर संत पापा का शोक संदेश

In Church on September 29, 2016 at 3:31 pm


वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 29 सितम्बर 2016 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने इसराइल के पूर्व राष्ट्रपति शिमोन पेरेज़ के निधन की खबर सुन शोक व्यक्त करते हुए वहाँ के लोगों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना प्रकट की। 93 साल की आयु में बुधवार की सुबह उनका निधन हो गया।

संत पापा ने तार संदेश में कहा, ″मैं वाटिकन में पेरेस के साथ बीताये क्षण को सप्रेम याद करता हूँ तथा शांति स्थापना हेतु उनके अथक प्रयासों की सराहना करता हूँ।″

8 जून 2014 को संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन की वाटिका में प्रार्थना सभा का आयोजन किया था जहाँ राष्ट्रपति पेरेज़ तथा फिलीस्तीन के राष्ट्रपति मोहम्मद अब्बास भी उपस्थित थे। प्रार्थना सभा संत पापा की पवित्र भूमि में प्रेरितिक यात्रा (मई 2014) के दौरान राष्ट्रपति के स्वागत के कुछ ही दिनों बाद आयोजित की गयी थी।

संत पापा से राष्ट्रपति पेरेज़ की मुलाकात पहले ही 30 अप्रैल 2013 को भी वाटिकन में हो चुकी थी। वे पुनः 2014 से सितम्बर माह में मिले थे तथा 20 जून 2016 को अंतिम बार मिले।

संत पापा ने संदेश में कहा, ″जब इस्राएल मिस्टर पेरेज़ के लिए शोक मना रहा है मैं आशा करता हूँ कि उनकी याद तथा कई सालों तक उसकी सेवा, लोगों के बीच मेल-मिलाप तथा शांति के लिए उनसे भी बढ़कर काम करने हेतु हमें प्रेरणा प्रदान करे।″

उन्होंने कहा, ″इस तरह उनकी विरासत सचमुच सम्मानित होगी तथा सार्वजनिक भलाई जिसके लिए उन्होंने तत्परता पूर्वक कठिन काम किया, जब मानव चिरस्थायी शांति के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है, उसे नयी अभिव्यक्ति मिलेगी। सभी शोकित जनों के लिए मेरी प्रार्थनाओं का आश्वासन देती हूँ, विशेषकर, पेरेज़ के परिवार के लिए मैं देश पर सांत्वना एवं शक्ति हेतु दिव्य आशीर्वाद की कामना करता हूँ।″


(Usha Tirkey)

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