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‘तोरह’ ईश्वर के पिता तुल्य प्रेम को प्रकट करता है

In Church on February 23, 2017 at 4:46 pm


वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 23 फरवरी 17 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने बृहस्पतिवार को अर्जेंटीना के अपने एक पुराने मित्र रब्बी अब्राहम स्कोरका तथा पवित्र धर्मग्रंथ ‘तोरह’ के नये संस्करण की प्रस्तुतिकरण के अवसर पर उपस्थित 89 यहूदी प्रतिनिधियों से, वाटिकन के क्लेमेंटीन सभागार में मुलाकात की तथा कहा कि यह प्रकाशन मात्र अपने आप में विभिन्न देशों, उम्र और धर्मावलम्बियों के बीच व्यवस्थान का फल है।

यहूदी प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों को सम्बोधित कर उन्होंने कहा, ″मैं आपलोगों के इस विचारशील भाव के लिए कृतज्ञ हूँ जिसने आज हमें तोरह के चारों ओर एक साथ लाया है जो हमारे लिए प्रभु का उपहार है उनकी प्रकाशना एवं उनकी पवित्र वाणी।″

यहूदियों के पवित्र धर्मग्रंथ ‘तोरह’ पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने संत पापा जोन पौल द्वितीय के कथन की याद की तथा कहा, ″संत पापा जोन पौल द्वितीय ने इसे जीवन्त ईश्वर की जीवित शिक्षा कही थी जो ईश्वर के पिता तुल्य एवं अत्यधिक प्रेम को प्रकट करता है जिसे शब्दों एवं ठोस चिन्ह द्वारा प्रकट किया गया है और यही प्रेम व्यवस्थान बन जाता है।″ उन्होंने कहा कि व्यवस्थान एक ऐसा शब्द है जो हमें एक साथ लाता है। ईश्वर सबसे महान हैं तथा व्यवस्थान के सबसे निष्ठावान भागीदार। उन्होंने अब्राहम को बुलाया ताकि एक जाति का निर्माण कर सके और उनके द्वारा पृथ्वी पर सभी लोगों को आशीर्वाद प्राप्त हो। ईश्वर एक ऐसी दुनिया चाहते हैं जहाँ स्त्री एवं पुरूष उनके व्यवस्थान से जुड़े हों और जिसके परिणाम स्वरूप वे सृष्टि के साथ एवं आपस में सौहार्द पूर्वक जी सकें। मानव के उन बहुत सारे शब्द के बीच जो विभाजन एवं बदले की भावना लाते हैं, व्यवस्थान का यह पवित्र वचन, एक साथ चलने हेतु अच्छाई का रास्ता खोल दे।

संत पापा ने यहूदियों एवं ख्रीस्तीयों के आपसी संबंध पर दृष्टिपात करते हुए कहा कि दोनों के बीच वार्ता अब अच्छी तरह से स्थापित हो चुका है। उन्होंने इस मुलाकात को वार्ता का हिस्सा मानते हुए उसे उपहार के रूप में स्वीकार किया।

तोरह के नये संस्कारण पर गौर करते हुए संत पापा ने कहा कि इसके व्यापक परिचय एवं संपादकीय प्रकथन में तोरह के आध्यात्मिक संदेश को लेते हुए, संवादात्मक दृष्टिकोण, खुलेपन, आपसी सम्मान और शांति पर जोर दिया गया है। संत पापा ने तोरह के इस नये संस्करण के प्रकाशन में योगदान देने वाले सभी सदस्यों को धन्यवाद दिया एवं उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्ति की।

ज्ञात हो कि प्रचीन विधान के प्रथम पाँच ग्रंथों को बाईबिल के इब्रानी संस्करण में ‘तोरह’ कहा जाता है जिसका अर्थ है संहिता। इसका कारण यह है कि इन पाँच ग्रंथो में मुख्यतः यहूदियों के  विधि निषेध दिये गये हैं।


(Usha Tirkey)

दल की भावना जीवन के लिए महत्वपूर्ण, फुटबॉल खिलाड़ियों से संत पापा

In Church on February 23, 2017 at 4:45 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 23 फरवरी 17 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने बृहस्पतिवार 23 फरवरी को वाटिकन स्थित क्लेमेंटीन सभागार में, स्पेन के विल्लारेयल फुटबॉल क्लब के सदस्यों से मुलाकात की जो आज दोपहर को खेलने वाली है।

52 सदस्यों के इस दल को सम्बोधित कर संत पापा ने कहा, ″अन्य खेलों की तरह फुटबॉल भी जीवन और समाज का प्रतीक है। खेल मैदान में आप सभी को एक दूसरे की आवश्यकता होती है। प्रत्येक खिलाड़ी अपनी क्षमता एवं व्यावसायिकता, आम हित के लिए अर्पित करता है अर्थात् जीतने हेतु खेल का उत्तम प्रदर्शन करने का प्रयास करता है।″

संत पापा ने कहा कि इस मनोभाव में बढ़ने के लिए बहुत अधिक प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है साथ ही, समय देना, परिश्रम करना तथा टीम की भावना को मजबूत करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि खेल में सफलता तभी संभव है जब इसे मित्रता की भावना से खेली जाए तथा व्यक्तिगत अथवा निजी लाभ की भावना को दूर रखा जाए।

संत पापा ने फुटबॉल खेल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि फुटबॉल खेल के दौरान मूल्यों की शिक्षा देती एवं उन्हें हस्तांतरित करती है। बहुत सारे लोग खासकर, युवा खेल देखना पसंद करते हैं अतः वे इन मूल्यों से प्रभावित होते हैं। अपनी व्यावसायिकता के द्वारा खिलाड़ी एक ऐसा आकर्षण उत्पन्न करते हैं जिनकी ओर लोग स्वतः खिंच जाते हैं। संत पापा ने खेल के सभी अधिकारियों से कहा कि यह उनकी जिम्मेदारी है कि वे खिलाड़ियों को इस तरह प्रशिक्षित करें कि वे भाईचारा, व्यक्तिगत प्रयास, खेल की खूबसूरती एवं टीम में अपना उत्तम देने के लिए प्रेरित हों।

संत पापा ने खेल में कृतज्ञता की भावना को भी प्रमुख बतलाया। उन्होंने कहा, ″यदि हम अपने जीवन पर चिंतन करते हैं तो कई लोगों की याद करते हैं जिन्होंने हमें मदद किया है तथा जिनकी सहायता के बिना हम यहाँ तक नहीं पहुँच पाते।″ उन्होंने कहा कि यह स्मृति हममें सकारात्मक भावना लाती है, अपने को दूसरों से अच्छा कहलाने के लिए नहीं किन्तु इस बात के प्रति जागरूक होने के लिए कि हम एक बड़े टीम के खिलाड़ी हैं। इस प्रकार की भावना हमें सच्चे इंसानियत में बढने में मदद देगी क्योंकि हमारा खेल न केवल खुद का खेल है किन्तु अनेक दूसरे भी शामिल हैं जो किसी न किसी तरह हमारे जीवन के हिस्से हैं।

संत पापा ने सभी खिलाड़ियों को प्रोत्साहन दिया कि वे अपनी उत्तमता को अर्पित करते हुए खेलना जारी रखें जिससे कि दूसरे उसका आनन्द उठा सकें जो जीवन यात्रा को अलग अनुभव दे जाता है। उन्होंने खिलाड़ियों के लिए ईश्वर के आनन्द एवं शांति की कामना की।


(Usha Tirkey)

दोहरी जिंदगी का त्याग करें

In Church on February 23, 2017 at 4:44 pm


वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 23 फरवरी 2017 (वीआर सेदोक): दोहरी जिंदगी द्वारा छोटे लोगों को बुरा उदाहरण न दें क्योंकि बुरा उदाहरण नष्ट करता है। यह बात संत पापा फ्राँसिस ने बृहस्पतिवार को वाटिकन स्थित संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में कही।

उन्होंने कहा, ″हमें मन-परिवर्तन को नहीं रोकना चाहिए।″

प्रवचन में संत पापा ने संत मारकुस रचित सुसमाचार से लिए गये पाठ पर चिंतन किया जहाँ येसु शरीर के उन अंगों को काट देने की सलाह देते हैं जो हमारे लिए पाप का कारण बनते हैं।

उन्होंने कहा, ″बुरा उदाहरण क्या है? ठोकर वह है जिसमें हम कहते कुछ हैं और करते कुछ और। यह दोहरी जिंदगी है।″ संत पापा ने उन लोगों की जिंदगी को दोहरी करार दिया जो कहते हैं कि वे काथलिक हैं प्रत्येक दिन गिरजा जाते हैं संगठनों में भाग लेते हैं किन्तु अपने मजदूरों को उचित वेतन नहीं देते, लोगों का शोषण करते तथा अपने व्यापार में बेईमानी करते हैं।″ उन्होंने कहा कि बहुत सारे ख्रीस्तीय जो इस तरह का बर्ताव करते हैं, दूसरों को बुरा उदाहरण देते हैं। वे विनाश लाते हैं और यह हर दिन हो रहा है जिन्हें हम समाचार पत्रों और टेलीविज़न में देख सकते हैं।

संत पापा ने कहा कि सुसमाचार में येसु ठोकर शब्द का प्रयोग किये बिना इसके दुष्प्रभाव के बारे बतलाते हैं कि जब हम स्वर्ग पहुँच कर द्वार पर दस्तक देंगे और अंदर प्रवेश करने हेतु आग्रह करेंगे तो प्रभु कहेंगे कि मैं तुम्हें नहीं जानता कि तुम कौन हो? तब हम सफाई देने का प्रयास करेंगे कि मैं रोज गिरजा जाता था, आपके नजदीक रहता था और संगठनों में भी भाग लेने से नहीं चूकता था, मैंने बहुत सारे दान दिये हैं, क्या आप उन्हें याद नहीं करते? तब प्रभु कहेंगे- हाँ में याद करता हूँ उन लोगों की याद जो दोहरी जिंदगी जीते थे।

संत पापा ने दोहरी जिंदगी के उद्गम के बारे बतलाया कि यह हृदय की लालसा को पूरा करने के द्वारा उत्पन्न होता है। आत्मा मारू पाप आदी पाप का घाव है जिसमें लालसा को छिपाने का प्रयास किया जाता है किन्तु उन्हें पूरा करने का प्रयास भी जारी रहता है। पहला पाठ हमें बतलाता है कि यह लालसा कभी संतुष्ट नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि मन-परिवर्तन को नहीं रोकना चाहिए।

उन्होंने दोहरी जिंदगी के बारे सचेत करते हुए कहा कि यह अच्छा होगा कि हम अपने आप पर गौर करें कि कहीं हमारा जीवन भी दोहरा तो नहीं है जिसके तहत हम एक अच्छे ख्रीस्तीय की तरह दिखाई तो देते किन्तु अंदर में कुछ और करते हैं। यदि मुझमें किसी कारण वश दोहरापन है तो हम यह निश्चित जान लें कि प्रभु हमारे हर पाप क्षमा कर देंगे। फिर भी हमें अपने में परिवर्तन लाने की आवश्यकता है। संत पापा ने विश्वासियों का आह्वान किया कि प्रभु के इस वचन से अपने जीवन में लाभ उठायें तथा याद रखें कि इस मामले में प्रभु बहुत सख्त हैं क्योंकि बुरा उदाहरण विनाश लाता है।


(Usha Tirkey)

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