Vatican Radio HIndi

आऊशविट्स के स्मरणार्थ जारी होंगे डाक टिकट

In Church on July 30, 2015 at 11:07 am

वाटिकन सिटी, गुरुवार, 30 जुलाई सन् 2015 (सेदोक): वाटिकन के डाक टिकट एवं सिक्का कार्यालय ने घोषणा की है कि आगामी 02 सितम्बर को आऊश्विट्स नज़रबन्दी शिविर को मुक्त किये जाने की 70 वीं बरसी तथा इसकी यादगार में स्थापित विशिष्ट दिवस के दसवें वर्ष के उपलक्ष्य में एक एरोग्राम जारी किया जायेगा।
बुधवार को वाटकिन द्वारा प्रकाशित एक विज्ञप्ति में यह सूचना दी गई।

02 सितम्बर को जारी किये जानेवाले एरोगेराम के बाईं ओर आऊशविट्स नज़रबन्दी शिविर की तस्वीर पर प्रताड़ितों एवं मृतकों के आदर में एक गुलाब का फूल दर्शाया गया है। साथ ही एक जलती हुई मोमबत्ती दर्शायी गई है ताकि भावी पीढ़ियों तक यह सन्देश पहुँचाया जा सके कि जो कुछ हुआ उसकी स्मृति सदैव ताज़ी रखी जाये जिससे फिर कभी इस तरह के भयावह कृत्य न किये जायें।

बुधवार को प्रकाशित विज्ञप्ति में यह भी सूचना दी गई कि 02 सितम्बर को आऊशविट्स के एरोग्राम सहित वाटिकन डाक टिकट कार्यालय द्वितीय वाटिकन महासभा के समापन की 50 वर्षगाँठ  के उपलक्ष्य में चार पोस्ट कार्ड्स जारी करेगा। स्मरण रहे कि सन्त पापा जॉन 23 वें के परमाध्यक्षीय काल में सन् 1962 से 1965 ई. तक द्वितीय वाटिकन महासभा सम्पन्न हुई थी। इन पोस्टकार्डों पर महासभा में घोषित चार प्रमुख संविधानों को दर्शाया गया है।


(Juliet Genevive Christopher)

सन्त पापा के डॉक्टर का प्रतिस्थापन प्रथागत, फादर लोमबारदी

In Church on July 30, 2015 at 11:05 am

वाटिकन सिटी, गुरुवार, 30 जुलाई सन् 2015 (सीएनए): वाटिकन प्रेस के निर्देशक एवं वाटिकन के प्रवक्ता फादर फेदरीको लोमबारदी ने स्पष्ट किया है कि पाँच वर्षीय कार्यकाल समाप्त हो जाने के बाद सन्त पापा फ्राँसिस के डॉक्टर का प्रस्थापन प्रथागत है, यह कोई विचित्र बात नहीं है।

विगत दिनों इताली  मीडिया में सन्त पापा फ्राँसिस के निजी चिकित्सक पातरित्सियो पोलिस्का के पाँच वर्षीय कार्यकाल पूरा होने पर कई अटकलें लगाई गई थी। यह भी कह दिया गया था कि सन्त पापा ने अपने निजी चिकित्सक को निकाल दिया है और अब सितम्बर माह में क्यूबा एवं अमरीका की प्रेरितिक यात्राओं के अवसर पर एक नया चिकित्सक उनके साथ होगा।

डॉ. पातरित्सियो पोलिस्का विगत पाँच वर्षों से सन्त पापा फ्राँसिस के निजी डॉक्टर होने के साथ-साथ वाटिकन की स्वास्थ्य सेवाओं के अध्यक्ष भी थे। इसके अतिरिक्त, वे सेवानिवृत्त सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें के चिकित्सक तथा परमधर्मपीठीय सन्त प्रकरण परिषद के चिकित्सीय आयोग के भी सदस्य हैं।

मई माह के अन्त में डॉ. पातरित्सियो पोलिस्का का पाँच वर्षीय कार्यकाल पूरा हो चुका है तथा सन्त पापा ने उनकी पुनर्नियुक्ति नहीं की है। इसी वजह से मीडिया में अटकलों बाज़ार गर्म रहा।

हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. पातरित्सियो पोलिस्का को सन् 2010 में वाटिकन की स्वास्थ्य सेवाओं के अध्यक्ष तथा सन्त पापा फ्राँसिस का निजी चिकित्सक नियुक्त किया गया था जो उनके साथ प्रेरितिक यात्राओं पर भी जाते रहे थे।

27 जुलाई को पत्रकारों से बातचीत के दौरान वाटिकन के प्रवक्ता फादर फेदरीको लोमबारदी ने स्पष्ट किया कि सन्त पापा फ्राँसिस ने डॉ. पोलिस्का को अपदस्थ नहीं किया है। उन्होंने कहा, “मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि डॉ. पातरित्सियो पोलिस्का का पाँच वर्षीय कार्यकाल पूरा हो चुका है इसलिये उनके प्रतिस्थापन को प्रथागत समझा जाना चाहिये।”

फादर लोमबारदी ने इस बात की भी पुष्टि की डॉ. पोलिस्का वाटिकन सिटी स्टेट में ही निवास करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि वाटिकन में डॉ. पोलिस्का का बहुत सम्मान किया जाता है तथा यह तथ्य अत्यधिक महत्वपूर्ण है कि अभी भी वे सेवानिवृत्त सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें के निजी डॉक्टर हैं।


(Juliet Genevive Christopher)

लोगों के राष्ट्रपति कलाम के चले जाने पर भारत के काथलिक शोकाकुल

In Church on July 30, 2015 at 11:05 am

नई दिल्ली, गुरुवार, 30 जुलाई सन् 2015 (सीएनए): भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे कलाम के निधन पर राष्ट्र के काथलिक धर्मानुयायियों ने प्रार्थनाओं में एकजुट होकर दिवंगत आत्मा के प्रति भावभीनी श्रद्धान्जलि अर्पित की। 2002 से 2007 तक भारत के राष्ट्रपति पद पर सेवारत एपीजे कलाम, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विभाजनों तथा मतभदों के परे, सभी लोगों के प्रिय राष्ट्रपति थे।

27 जुलाई को मेघालय के शिलोंग में विश्वविद्यालयीन छात्रों के समक्ष व्याख्यान करते समय हृदयाघात से डॉ. एपीजे कलाम का निधन हो गया था। वे 84 वर्ष के थे।

बेल्लारी के काथलिक धर्माध्यक्ष हेनरी डिसूज़ा ने 28 जुलाई को सीएनए समाचार से कहा, “सभी काथलिक युवा तथा सम्पूर्ण काथलिक समुदाय भारत के महान सपूत के निधन पर देश के साथ एकात्मता दर्शाते हुए शोकाकुल हैं। उन्होंने कहा, “डॉ.कलाम, एक राजनेता, एक वैज्ञानिक, एक दूरदर्शी तथा एक महान प्रेरक थे।”

उन्होंने कहा, “भारत रत्न डॉ.एपीजे कलाम के गुज़रने पर सम्पूर्ण देश ग़मगीन है क्योंकि उन्होंने हर वर्ग के लोगों के प्रति स्वतः को समर्पित कर दिया था।”

धर्माध्यक्ष डिसूज़ा ने कहा, “बच्चे और युवा सभी उनके प्रति आकर्षित रहा करते थे। उनका लक्ष्य युवा मन को प्रज्वलित करना था, उन्होंने उनकी कल्पना को सचेत किया।” धर्माध्यक्ष ने कहा, “उनका दोस्ताना व्यवहार तथा अनुकूल जीवन शैली सबके लिये एक समृद्ध धरोहर बनी रहेगी, ईश्वर दिवंगत आत्मा को चिरशांति प्रदान करें!”

इस बीच, पुणे के धर्माध्यक्ष थॉमस डाबरे ने भी डॉ.कलाम के प्रति श्रद्धान्जलि अर्पित करते हुए सीएनए समाचार से कहा कि कई अवसरों पर उन्होंने डॉ. कलाम से मुलाकातें की थी। इन अवसरों पर उन्होंने समाज में शांति एवं प्रगति पर विचार व्यक्त किये थे।

धर्माध्यक्ष डाबरे ने बताया कि विभिन्न धर्मों के बीच शांति, एकता एवं मैत्री को बढ़ावा देने के लिये सूरत तथा पुणे के काथलिकों ने एक संस्था का गठन किया है जिसके संरक्षक डॉ.एपीजे कलाम थे। विशेष रूप से, उन्होंने कहा, सूरत में आयोजित सम्मेलन में विभिन्न धर्मों द्वारा शांति एवं विकास हेतु एक घोषणा पर हस्ताक्षर किये गये थे जिसका नेतृत्व स्वयं डॉ. कलाम ने किया था।


(Juliet Genevive Christopher)

Follow

Get every new post delivered to your Inbox.

Join 70 other followers

%d bloggers like this: