Vatican Radio HIndi

पास्का रविवार पर चिन्तन

In Sunday Reflection, Uncategorized on April 27, 2011 at 4:07 pm

जस्टिन तिर्की, ये.स.

आज विश्व के तमाम गिरजाघरों में येसु के पुनरूत्थान की पूजनविधि के साथ ही पास्का का पर्व आरम्भ हो गया है। लोग इसे ईस्टर के नाम से भी जानते हैं। गिरजाघरों के घंटे की आवाज़ आज सिर्फ़ एक ही संदेशा बिखेर रही है कि ईसा मसीह जीवित हैं।

ईसा मसीह अपने बोले अनुसार तीसरे दिन महिमा के साथ जी उठे हैं। ईसा मसीह ने पाप और मृत्यु पर विजय प्राप्त कर ली है। सच्चाई, भलाई और अच्छाई की जीत हुई है।

आप जिधर भी कान लगाकर सुनें अगर आपने कलवारी के मार्ग मे करीबी से येसु का साथ दिया है तो आप घंटे की आवाज़ में, पंक्षी के कलरव में और भीनी भीनी खुशबुदार वायु में बस यही विजय गीत सुन पायेंगे।

” प्रभु जी उठे हैं। अल्लेलूईया अल्लेलूईया अल्लेलूईया दुनिया के लोगो खुशी मनाओ। तुम्हारे प्रभु जी उठे हैं।”  

प्रभु के जी उठने की खुशी को सुरों में बाँधा है ईस्टर के लिये ख़ास तौर से बनायी इस गीत ने ।

गीत – मृत्यु के बन्धन तोड़ प्रभु जी उठे हैं…

मुझे याद है वह मार्च का महीना था पास्का का पर्व निकट था। तब मैं हाई स्कूल में था तब मेरे धर्म क्लास की टीचर ने मुझसे पूछा था कि ख्रीस्तीयों का सबसे बड़ा त्योहार कौन सा है ? और मैने तपाक से उत्तर दिया था येसु का जन्म पर्व।

मेरे आत्म विश्वास को देख कर उन्होंने हमसे ही फिर सवाल किया कि जन्म पर्व ईसाईयों का सबसे बड़ा त्योहार क्यों है? मैंने जवाब दिया।

जन्म पर्व ईसाइयों का सबसे बड़ा पर्व इसलिये है क्योंकि इसी दिन ईसाई धर्म के संस्थापक येसु मसीह का जन्म हुआ था और इसी दिन पूरी दुनिया के लोग पर्व मनाते हैं न केवल ख्रीस्तीय पर जो ख्रीस्तीय न भी हों पर सभी इस त्योहार में सरीक होते हैं यह एक सामाजिक पर्व बन गया है।

मैं अति प्रसन्न और संतुष्ट था यह सोचकर कि मैंने सही जवाव दिया। मै कुछ और बोलना चाहता था पर टीचर ने एक दूसरे साथी से जिसका नाम पास्कल था यही सवाल किया कि ईसाइयों का सबसे बड़ा त्योहार कौन-सा है? और उसका जवाब मुझसे भिन्न था। उसने कहा था ईसाईयों का सबसे बड़ा पर्व है पास्का पर्व। टीचर ने उसे भी पूछा कि क्यों तुम सोचते हो कि पास्का पर्व ईसाईयों का सबसे बड़ा त्योहार है ? मेरे उस साथी ने कहा पास्का पर्व ईसाईयों का सबसे बड़ा पर्व है क्योंकि इसी पास्का पर्व के कारण ईसाई धर्म एक धर्म के रूप में मान्यता प्राप्त किया।

टीचर ने कहा उसने समझा नहीं। तब मेरे दोस्त ने बताया कि जन्म पर्व में तो ईसा का जन्म हुआ और उसे उसके अच्छे कार्यों के बावजूद उसे दुःख दिया गया और उसे यहूदियों ने सूली पर लटका दिया और इसके बाद पास्का के समय जो घटना घटी वह अद्वितीय थी ।

इतना सुनते सुनते पूरे क्लास के छात्रों के कान खड़े हो गये थे। मेरे उस मित्र ने जो जिसके पिताजी गाँव में धर्म शिक्षक थे कहा कि येसु मारे जाने के बाद तीसरे दिन जी उठे और उसके शिष्यों ने उसे देखा और फिर येसु का प्रचार-प्रसार करने कि लिये निकल पड़े और इस प्रकार ईसाई धर्म पूरी दुनिया में फैल गया।

ईसा का जीवन समाप्त नहीं हुअ पर वे सदा-सदा के लिये जीवित हो गये। तब टीचर ने मेरे उस मित्र की शाबाशी देते हुए कहा था कि शाबाश पास्कल तुम्हारा जवाब बिल्कुल सही है।

पास्का पर्व में धूम-धड़ाका और खुशियों का इज़हार जन्म पर्व से जरा कम होता है पर ईसाईयों का सबसे बडा पर्व है पास्का पर्व। येसु ने जैसा कहा, वैसा ही दुःख उठाया, मारा गया, सलीब पर ठोंका गया और तीसरे दिन जी भी उठे।

आज हम लोग रविवारीय आराधना विधि चिन्तन कार्यक्रम के अंतर्गत पूजन विधि पंचांग के वर्ष ‘अ’ के पास्का पर्व के लिये प्रस्तावित पाठों के आधार पर मनन चिन्तन कर रहें हैं।

आज के पाठ हमें बताएँगे कि सत्य के लिये जीने वाले सत्य के लिये कार्य करने वाले लोगों की भलाई और दुनिया की अच्छाई के लिये अपना जीवन अर्पित करने वाले मरते नहीं हैं पर वे सिर्फ इस दुनिया से चले जाते हैं और ईश्वर उन्हें अनन्त जीवन प्रदान करता है।

ईसा मसीह का जीवनकाल अल्प रहा पर उनके जीवन का प्रभाव युगानुयुग तक बना रहेगा। इसीलिये क्योंकि उन्होंने सत्य के लिये कार्य किया प्रेम का मार्ग दिखाया और दुनिया को सुन्दर और बेहतर बनाने के लिये दुःखों को गले लगाया।

सच्चाई, अच्छाई और भलाई की कमाई बेकार नहीं जाती है। और यही हुआ ईसा मसीह को। ईसा के ईश्वर ने जिसे ईसा मसीह ‘पिता’ कह कर पुकारते थे मृत्यु के तीसरे दिन जीवित कर दिया।

आईये येसु के पुनर्जीवित होने और चेलों को दिखाई देने की अनेक घटनाओं में से एक का वर्णन सुनें। आईये हम प्रभु के उस वचन पर मनन करें जिसे संत योहन के सुसमाचार के 20वें अध्याय से लिया गया है।

मेरा पूरा विश्वास है कि आपने येसु के जी उठने की घटना को ध्यान से सुना है और इसके द्वारा आपको और आपके परिजनों को आध्यात्मिक लाभ हुए हैं।

आपको मैं बता दूँ कि कि येसु की मृत्यु कोई साधारण मृत्यु नहीं थी इससे लोग दुःखी और निराश तो हुए पर इसके तीन दिन बाद जो विस्मयकारी, चमत्कारिक और ऐतिहासिक घटना घटी और इससे लोगों को जो ताकत मिली उससे पूरी दुनिया के लोगों का जीवन, दुःख और मृत्यु और नया जीवन के संबंध में जो विचार और धारणायें थी उसे एक नयी दिशा मिली।

तब से ईसा मसीह के समान जीने उसके समान परहित में जीने और सत्य के लिये तकलीफ़ झेलने वालों की लम्बी कतार बनी जो न तो छोटी हुई है न ही इसके समाप्त होने के कोई आसार दिखाई पड़ते हैं।

आपने सुना सुसमाचार की बातों को येसु जिस कब्र में रखे गये थे वह शिष्यों के द्वारा खाली पाया गया। येसु कब्र में नहीं थे। येसु कब्र छोड़ चुके थे। येसु दुनिया के बन्धन को तोड़ चुके थे।येसु ने पाप और मृत्यु पर विजय प्राप्त की थी।येसु ने अपने बैरियों पर विजय पायी थी।

येसु ने अपने जीवन को ऐसा जीया था

प्रेम दया क्षमा और सदभाव से सबको ऐसा सींचा था

कि बैरियों के भी दिल पिघल गये

कब्रों के पत्थर लुढ़क गये

चेलों के नयन खुल गये

भय और दहशत के दिन पूरे हुए

धर्मग्रंथ के शब्द अक्षरशः बस बोले अनुसार पूरे हुए

बड़े तड़के

नाज़रेत के ईसा – क्रूसित येसु से जगत मसीहा बन गये।

कई बार हमने लोगों को कहते हुए सुना है कि सत्य इतनी सुखद है कि विश्वास नहीं होता है। जब येसु का मृतकों में से जी उठे तो सभी चेलों की एक ही मनोभावना थी।और वह थी आश्चर्य की कि प्रभु जी उठे हैं।

काथलिक कलीसिया येसु के जी उठने को ईसा का पुनरूत्थान कहती है। येसु का पुनरूत्थान अर्थात् येसु और फिर कभी नहीं मरेंगे पर सदा-सदा तक वे राज्य करेंगे।

कभी-कभी मन हिचकिचाता है यह विश्वास करने से कि प्रभु जी उठे हैं। कई बार तो मेरा मन भी इस सत्य को नहीं समझ पाता है कि मृ्त्यु के बाद प्रभु के शरीर को क्या हुआ। प्रभु कहाँ चले गये। क्या ईसा सचमुच जी उठे। जब मैं ऐसा सोचने लगता हूँ तो मैं सन्त पौलुस की उन पंक्तियों को याद करता हूँ जिसमें उसने बहुत ही विश्वास के साथ कहा है कि अगर ईसा मसीह जीवित नहीं हुए हैं तो मेरा विश्वास बेकार है मेरा सुसमाचार प्रचार करना बेकार है।

आज मैं काथलिक कलीसिया के एक महान लेखक संत अगुस्टीन की बातों की भी याद करता हूँ जिनका कहना था पहले तुम विश्वास करो तो तुम्हें खुद ही समझ में आ जायेगा। मैं अनुभव करता हूँ कि कई बार मैं अपने आप से कहता हूँ कि मैं पहले समझ लूँगा तब विश्वास करुँगा। श्रोताओ, अच्छी भली और आध्यात्मिक बातों को जब हम विश्वास करने के लिये लालायित हो जाते हैं तो हमें समझने की अन्तर्दृष्टि मिलती है और इस आन्तरिक ज्ञान से हमें नया जीवन मिलता है।

बाईबल में प्रभु के पुनरुत्थान का कोई तार्किक प्रमाण नही मिलता है। सुसमाचार लेखकों ने अपने ही तौर तरीके से इस घटना का वर्णन किया है। कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य भी नहीं मिलता है। हम यही पाते हैं कि शिष्यों ने देखा कि कब्र खाली थी और उनके दिल में यह गहरा आभास होने लग कि येसु जीवित है। उन्हें लगने लगा कि येसु की शक्ति उन पर व्याप्त हो गयी है।

उन्हें लगा येसु की बातें शिक्षा और कार्य में दम हैं उन बातों और कार्यों को आग बढ़ाये जाने की ज़िम्मेदारी उनकी है। हम बाइबल में पाते हैं कि येसु की मृत्यु के बाद शिष्य पूरी तरह से हताश और निराश तो थे ही भय से मारे-मारे फिर रहे थे। उन्हें लगा कि सबकुछ का अन्त हो गया है।

बस जो कुछ बचा है वह है दुःख-तकलीफ़, भय-दहशत निराशा और मृत्यु। पर येसु की कब्र खाली मिलने के बाद उन्हें जो ताकत मिली और उससे जो कुछ हुआ इससे पूरी दुनिया की दिशा ही बदल गयी। वे निर्भीक हो गये उन्होंने येसु के जीवन दुःख मृत्यु और पुनरुत्थान की बातें दुनिया को बताने के लिये अपना सबकुछ छोड़ दिया।

येसु के मुक्ति संदेश को दुनिया को बताने के लिये उन्होंने अपने जीवन कुर्बान करना भी सौभाग्य समझा। येसु के सत्य प्रेम दया क्षमा और मुक्ति के संदेश के प्रचार करने उन्होंने ईश्वरीय वरदान माना और येसु के लिये लहू बहाने को सबसे बड़ा पुरस्कार। इसलिये ईसा का पुनरूत्थान को समझना ईश्वर की ओर से दिया गया एक अनुपम वरदान है जिसके गहरे अनुभव से हमारा जीवन बदल जाता है और हम इस धरा में ही अलौकिक सुख का अनुभव करने लगते हैं।

तो फिर क्या है पास्का पर्व मेरे लिये और आपके लिये। मेरे लिये तो पास्का का पर्व सिर्फ एक त्योहार नहीं हैं जिस समय हम खाते-पीते और खुशियाँ मनाते हैं। पर यह है ईश्वर की ओर से दिया गया एक सुनहला अवसर जब हम येसु की मृत्यु के द्वारा अपने जीवन का सही अर्थ समझते हैं। हम समझते हैं कि क्यों हम इस दुनिया में हैं।

मेरे लिये तो पास्का पर्व है खुद को यह याद दिलाना की कि येसु ने मेरे लिये अपना जीवन दिया और इस दुनिया में जीने और इसे मृत्यु के द्वार से पार होने के एक ऐसा रास्ता दिखाया जिसमें प्रवेश करने से मेरे जीवन का अन्त नहीं होता है पर मूझे एक ऐसा जीवन मिलता है जो सदा सदा के लिये जीवित रहता है।

पास्का पर्व मेरे लिये केवल तीन दिनों में येसु के दुःख दर्द पीड़ा और महिमामय विजय की घटना को सिर्फ याद कर लेने का त्योहार नहीं है। पास्का या ईस्टर तो है नये जीवन पाने का त्योहार, खुद को बदलने का त्योहार खुद के पापों कमजोरियों और झुकाओं पर विजयी होने का त्योहार और नये उत्साह और आशा से परहितमय और सेवामय जीने के लिये खुद को समर्पित करने का त्योहार जिससे हम जहाँ भी रहें या काम करें दुनिया को लगे कि जीवित येसु उनके साथ में हैं।

अगर हर व्यक्ति ऐसा सोचकर कि उसे खुदा के पास जाना है येसु में अमरत्व को प्राप्त करना है परहितमय और प्रेममय जीवन जीये तो मेरे हाईस्कूली दोस्त पास्कल का कथन सच हो जायेगा कि पास्का पर्व ईसाईयों का सबसे बड़ा त्योहार है जो जीवन को बदल डालता है।

पास्का पर्व या ईस्टर के शुभ अवसर पर मैं वाटिकन रेडियो हिन्दी विभाग की ओर से आपको, आपके परिवार को और देश-विदेश के हमारे तमाम श्रोताओं को पास्का पर्व की शुभकामनाएँ देता हूँ और विन्ती करता हूँ कि जीवित येसु ख्रीस्त आपको नया जीवन जीने का उत्साह और अच्छाई और भलाई करते हुए आशामय जीवन का आशीर्वाद प्रदान करे।

 

Advertisements
%d bloggers like this: