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नागालैण्डः नागा चर्च कौंसिल ने उपवास व प्रार्थना का किया आह्वान

In Church on February 1, 2012 at 7:26 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफ़र

नागालैण्ड, 31 जनवरी सन् 2012 (ऊका): नागालैण्ड में “नागालिम कलीसियाओं की समिति” ने क्षेत्र में व्याप्त समस्या के लिये उपवास एवं प्रार्थनाओं का आह्वान किया है।सोमवार को, उक्त कलीसियाओं की समिति ने राज्य के सभी ख्रीस्तीय धर्मानुयायियों से अपील की कि वे पाँच फरवरी को उपवास एवं प्रार्थना दिवस रूप में मनायें। समिति द्वारा जारी एक वक्तव्य में कहा गया, “ईश्वर के कोप से बचने के लिये पश्चाताप करना नितान्त आवश्यक है।”

नागालैण्ड स्थित कलीसियाओं की समिति नागालिम के इस आह्वान को, राज्य के नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काऊन्सल, अलगाव दल ने समर्थन दिया है। इस दल की सूचना शाखा ने एक परिपत्र जारी कर कलीसियाओं की समिति की पहल के साथ जुड़ने का सभी से निवेदन किया है।

नागालिम समिति के महासचिव आरशिल सांखिल ने कहा नागालैण्ड के सभी गिरजाघरों को एकजुट होकर प्रार्थना करना चाहिये ताकि “ईश्वर हमारी प्रार्थना सुनें, हमारे पापों को क्षमा करें तथा हमारी भूमि को चंगाई प्रदान करें।”

उन्होंने कहा, “नागालिम कलीसियाई समिति का उद्देश्य नागालैण्ड के लोगों, अलगाववादियों तथा भारतीय सरकार के लिये प्रार्थना करना है। नागा लोगों की राजनैतिक समस्याओं का शीघ्रातिशीघ्र समाधान ढूँढ़ने के लिये भी प्रार्थना का आह्वान किया गया है।”

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वाटिकन सिटीः यहूदी नरसंहार को नकारनेवालों की प्रवक्ता ने की निन्दा

In Church on February 1, 2012 at 7:24 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

वाटिकन सिटी, 31 जनवरी सन् 2012 (सेदोक): वाटिकन के प्रेस प्रवक्ता फादर फेदरिको लोमबारदी ने यहूदी नरसंहार को नकारनेवालों की निन्दा की है।

सन् 1945 ई. में 27 जनवरी को पोलैण्ड स्थित आऊशविट्स के नाज़ी नज़रबन्दी शिविरों को बन्द कर दिया गया था। इन शिविरों में हिटलर के अधीन नाज़ी प्रशासन ने लगभग छः लाख यहूदियों की हत्या कर दी थी।

27 जनवरी को नाज़ी शिविरों के बन्द किये जाने की 67 वीं बरसी के दिन वाटिकन टेलेविज़न के “ओक्तावा दियेज़” कार्यक्रम के दौरान वाटिकन के प्रवक्ता फादर लोमबारदी ने कहा, “बर्बर यहूदी नरसंहार को न तो हम भुला सकते हैं और न ही इसे भुलाया जाना चाहिये।”

फादर लोमबारदी ने कहा कि इस बात के प्रति सावधानी बरती जानी चाहिये कि यहूदी नरसंहार से इनकार न किया जाये बल्कि इससे आगे के लिये शिक्षा ग्रहण की जाये। उन्होंने कहा, “इससे इनकार अज्ञान का परिणाम है और इस प्रकार का अज्ञान ख़तरनाक है, विशेष रूप से, जब इसका स्रोत राजनैतिक स्वार्थ होता है।”

यहूदी नरसंहार पर सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें के शब्दों को उद्धृत कर फादर लोमबारदी ने कहा कि सन्त पापा ने आशा व्यक्त की है, “शोआ अर्थात् यहूदी नरसंहार की याद मानव जाति को इस तथ्य पर चिन्तन हेतु प्रेरित करेगी कि जब बुराई मानव हृदय पर कब्ज़ा करती है तब उसकी शक्ति कितनी ख़तरनाक होती है।”

फादर लोमबारदी ने कहा कि हिंसा, असहिष्णुता तथा अत्याचारों की भयानक दुष्टता के समक्ष ख्रीस्तीय धर्म का उत्तर एक ही है और वह है ईश्वर में विश्वास, ईश्वर के पुत्र येसु ख्रीस्त के दुखभोग में विश्वास। उन्होंने कहा कि विश्व एवं उसके इतिहास के समक्ष, मानव के निर्णायक एवं गहन प्रश्न ईश्वर में विश्वास से ही जुड़े हैं।

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बेहतर भारत के लिये काथलिक कलीसिया की भूमिका पर सी.बी.सी.आइ.में विचार विमर्श

In Church on February 1, 2012 at 7:21 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफ़र

बैंगलोर, 31 जनवरी सन् 2012 (ऊका): बैंगलोर में, सम्पूर्ण भारत के 160 काथलिक धर्माध्यक्ष “एक बेहतर भारत के लिए कलीसिया की भूमिका” पर विचार विमर्श हेतु एकत्र हो रहे हैं।

1 से 8 फरवरी तक बैंगलोर स्थित स्वास्थ्य विज्ञान सम्बन्धी सेंट जॉन्स नेशनल एकेडमी में भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की 30 वीं आम सभा का आयोजन किया गया है।

भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के उप महासचिव फादर थॉमस सिक्वेरा ने बताया कि इस वर्ष धर्माध्यक्षीय सम्मेलन तथा भारत की कारितास शाखा की पचासवीँ जयन्ती है। इसी के उपलक्ष्य में आम सभा में चर्चा हेतु “एक बेहतर भारत के लिए कलीसिया की भूमिका” विषय चुना गया।

भारत के लैटिन राईट धर्माध्यक्षों सहित सिरो मलाबार तथा सिरो मलंकार काथलिक धर्माध्यक्ष, भारतीय धर्माध्यक्षीय सम्मेलन सी.बी.सी.आय. के सदस्य हैं।

फादर सिक्वेरा ने कहा, “विश्व में बढ़ते भौतिकतावाद, राष्ट्र निर्माण के समक्ष प्रस्तुत चुनौती, सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी के साथ साथ कलीसिया के समाज कल्याण कार्य जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य तथा सामाजिक विकास आदि पर विचार विमर्श किया जायेगा।”

न्याय और शांति सम्बन्धी परमधर्मपीठीय समिति के अध्यक्ष वाटिकन के वरिष्ठ कार्डिनल पीटर टर्कसन, विश्व के कल्याकारी कार्यों को आर्थिक सहायता प्रदान करनेवाली संस्था मिज़ेरेओर के निर्देशक जोसफ सायर तथा येसु धर्मसमाज के फादर रूडी हेरेडिया आम सभा को सम्बोधित करेंगे। इस आम सभा की अन्य विशेषताओं में फादर ने बताया कि सूचना के त्वरित प्रसार के लिए एक मज़बूत राष्ट्रीय नेटवर्क स्थापित किये जाने के बारे में भी चर्चा की जायेगी।

भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की 30 वीँ आम सभा का उदघाटन, पहली फरवरी को, भारत में परमधर्मपीठ के राजदूत महाधर्माध्यक्ष साल्वातोर पेन्नाखियो के नेतृत्व में अर्पित ख्रीस्तयाग से किया जा रहा है।

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