Vatican Radio HIndi

Archive for February 10th, 2012|Daily archive page

‘सेन्टर फोर चाइल्ड प्रोटेक्शन’ नामक इंटरनेट पोर्टल जारी

In Peace & Justice on February 10, 2012 at 11:20 pm

रोम 10 फरवरी 2012 (वी आर वर्ल्ड) रोम के ग्रेगोरियन विश्वविदयालय में बाल यौन दुराचार की समस्या के समाधान की दिशा में चंगाई और नवीनीकरण की ओर शीर्षक के तहत 6 से 9 फरवरी तक आयोजित सेमिनार का समापन गुरूवार को हुआ जिसके अंत में सेन्टर फोर चाइल्ट प्रोटेक्शन नामक एक इंटरनेट पोर्टल को जारी किया गया। चर्च में बच्चों की सुरक्षा से संबंधित सभी जानकारियाँ और शिक्षण इस वेबसाइट में अंग्रेजी, स्पानी, इताली और जर्मन में भाषाओं में उपलब्ध रहेंगी।

सम्मेलन में विश्व के 100 देशों से भी अधिक देशों में कार्य़रत धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों के प्रतिनिधि तथा गुरूकुल प्राचार्या और विभिन्न धर्मसमाजों के प्रमुखों ने भाग लिया।

बाल यौन दुराचार की समस्याओं की गंभीरता और व्यापकता को देखते हुए ब्रिटेन में नेशनल काथलिक सेफगार्डिंग कमीशन के उपाध्यक्ष धर्माध्यक्ष देकलान लांग ने कहा- हम महसूस करते हैं कि यह समस्या पूरी कलीसिया की समस्या है। एक प्रकार की गंभीरता है और यह जागरूकता कि बाल यौन दुराचार के व्रण न केवल इसके शिकार होनेवाले को लेकिन परिवारों, पल्लियों और व्यापक समुदाय को घायल करते हैं।

सेन्टर फोर चाइल्ट प्रोटेक्शन नाम से जारी किया गया बहुभाषी इंटरनेट वेबसाइट जर्मनी के म्यूनिख और फ्रेंइसिंग में आधारित है इसका लक्ष्य सब धर्माध्यक्षों, पुरोहितों और मेषपालीय सेवा देनेवाले नेताओं की सहायता करना है ताकि वे दुराचार की समस्या के लिए वैश्विक अभिगम अपना सकें जो न केवल कलीसियाई परिधि में लेकिन व्यापक समुदाय के लिए हो।

विभिन्न धर्मप्रांतो और अन्य दानदाताओं द्वारा उपलब्ध कराये जा रहे धन से यह केन्द्र अगले तीन वर्षों के लिए चलाया जायेगा। इस केन्द्र का काम जर्मनी के यूनिवर्सिटी ओफ क्लिनिक ओफ उलम तथा परमधर्मपीठीय ग्रेगोरियन विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के विशेषज्ञों के समर्थन और सहयोग से चलाया जायेगा।

http://www.radiovaticana.org/in1/Articolo.asp?c=562151

Advertisements

साहेल क्षेत्र की निर्धनता को दूर करने के लिए संत पापा का आग्रह

In Charity on February 10, 2012 at 9:41 pm

जोसेफ कमल बाड़ा

वाटिकन सिटी 10 फरवरी 2012 (वी आर वर्ल्ड ) जोन पौल द्वितीय साहेल फाउंडेशन विश्व के निर्धनतम क्षेत्रों में सहायता पहुँचाने के लिए काम करता है। इन्में शामिल है अफ्रीका के देश- चाड, गाम्बिया, बुरकीना फासो, केप वेरदे, गिनिया बिसाऊ, माली, माउरितानिया, नाईजर और सेनेगल। इस फाउंडेशन की स्थापना संत पापा जोन पौल द्वितीय ने 1980 में अफ्रीका की अपनी पहली यात्रा के बाद किया था।

इसकी प्रशासक समिति में साहेल क्षेत्र के नौ देशों के धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों के प्रतिनिधि धर्माध्यक्ष तथा जर्मनी और इताली धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। संत पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने फाउंडेशन के सदस्यों को शुक्रवार को सम्बोधित करते हुए रेखांकित किया कि खाद्य संसाधनों में सार्थक गिरावट होने, वर्षा न होने से सुखे की स्थिति और मरूस्थलीय क्षेत्र का दायरा निरंतर बढ़ने से साहेल क्षेत्र में पुनः खतरा उत्पन्न हुआ है।

उन्होंने घोर गरीबी की अवस्था में जीवन जी रहे इस क्षेत्र के लोगों की सहायता करने के लिए गंभीर उपाय करने का अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया। संत पापा ने कलीसियाई निकायों के प्रयासों और कार्य़ों का समर्थन देकर उन्हे उत्साहित किया जो जरूतमंदों की सहायता कर रहे हैं तथा कैसे जोन पौल द्वितीय साहेल फाउंडेशन विशिष्ट रूप से पोप की उपस्थिति का संकेत है जैसा कि उन्होंने कहा था ” हमारे अफ्रीकी बंधु जो साहेल में निवास करते हैं।”

संत पापा ने कहा कि इस फाउंडेशन का अस्तित्व उनके पूर्वाधिकारी की मानवता को दर्शाता है। इसके साथ ही उन्होंने जोर दिया कि परोपकार के काम प्रार्थना से संयुक्त हों ताकि अपनी पूर्ण प्रभावशीलता को प्राप्त करें। जिन देशों में इस्लाम धर्म है और जहाँ साहेल फाउंडेशन के कार्य सम्पन्न होते हैं संत पापा ने कहा कि उन्हें प्रसन्नता है कि यहाँ मुसलमान समुदाय के साथ इसका अच्छा संबंध है तथा साक्ष्य देता है कि ख्रीस्त जीवित हैं और उनका प्रेम धर्म, जाति और संस्कृति की सीमाओं से परे है।

फाउंडेशन की भावी चुनौतियों और समर्पण के बारे में संत पापा ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि यह स्वयं को नवीकृत कर मजबूत करता रहे तथा परमधर्मपीठीय समिति कोर उन्नुम की सहायता से यह महत्वपूर्ण है कि परोपकार तथा उदारता का केन्द्र ख्रीस्तीय प्रशिक्षण और शिक्षण रहे। संत पापा ने कहा कि अब अफ्रीका को शुभ समाचार का घर तथा कलीसिया के लिए आशा का महादेश के रूप में देखा जा रहा है।

http://www.radiovaticana.org/in1/index.asp

In Uncategorized on February 10, 2012 at 10:39 am

VRHINDI

जोसेफ कमल बाड़ा

रोम 9 फरवरी 2012 (वीआर अँग्रेजी) धर्माध्यक्षों के धर्मसंघ के अध्यक्ष कार्डिनल माक ओलेट ने बाल यौन दुराचार की समस्या पर आयोजित 4 दिवसीय अंतरराष्ट्रिय सम्मेलन के तहत आयोजित पश्चाताप धर्मविधि की अध्यक्षता की ।

अंधेरा से प्रकाश, दुःख और घायलावस्था से चंगाई और आशा की ओर बढ़ना यही इस धर्मविधि का सांकेतिक भाव था। 6 से 9 फरवरी तक सम्पन्न इस सम्मेलन का आयोजक येसुसमाजियों द्वारा संचालित परमधर्मपीठीय ग्रेगोरियन विश्वविद्यालय रहा है अतः पूजनविधि का आयोजन बारोक शैली में निर्मित रोम स्थित संत इग्नासियुस चर्च
में किया गया जिसमें धर्माध्यक्षों पुरोहितों और लोकधर्मियों ने भाग लिया।

चर्च में एक स्क्रीन में ईश्वर की सृष्टि का सौंदर्य, प्रकृति और नया जीवन की छवियाँ, विभिन्न देशों और संस्कृतियों के बच्चों की तस्वीरों को दर्शाया गया इसके साथ ही दूसरी ओर मानव द्वारा पर्यावरण का विनाश करना, लालच और हिंसा, नस्लवाद और संघर्षों वाले स्लाइड दिखाये गये जो स्मरण…

View original post 245 more words

Hindi Bible Prgramme & News

In Podcast VR Programme on February 10, 2012 at 7:58 am

http://media01.vatiradio.va/podcast/feed/hindi_090212.mp3

पश्चाताप धर्मविधि की अध्यक्षता कार्डिनल ओलेट ने की

In Church on February 10, 2012 at 7:34 am

जोसेफ कमल बाड़ा

रोम 9 फरवरी 2012 (वीआर अँग्रेजी) धर्माध्यक्षों के धर्मसंघ के अध्यक्ष कार्डिनल माक ओलेट ने बाल यौन दुराचार की समस्या पर आयोजित 4 दिवसीय अंतरराष्ट्रिय सम्मेलन के तहत आयोजित पश्चाताप धर्मविधि की अध्यक्षता की ।

अंधेरा से प्रकाश, दुःख और घायलावस्था से चंगाई और आशा की ओर बढ़ना यही इस धर्मविधि का सांकेतिक भाव था। 6 से 9 फरवरी तक सम्पन्न इस सम्मेलन का आयोजक येसुसमाजियों द्वारा संचालित परमधर्मपीठीय ग्रेगोरियन विश्वविद्यालय रहा है अतः पूजनविधि का आयोजन बारोक शैली में निर्मित रोम स्थित संत इग्नासियुस चर्च
में किया गया जिसमें धर्माध्यक्षों पुरोहितों और लोकधर्मियों ने भाग लिया।

चर्च में एक स्क्रीन में ईश्वर की सृष्टि का सौंदर्य, प्रकृति और नया जीवन की छवियाँ, विभिन्न देशों और संस्कृतियों के बच्चों की तस्वीरों को दर्शाया गया इसके साथ ही दूसरी ओर मानव द्वारा पर्यावरण का विनाश करना, लालच और हिंसा, नस्लवाद और संघर्षों वाले स्लाइड दिखाये गये जो स्मरण कराते हैं कि क्षमा की जरूरत है।

अपने प्रवचन में कार्डिनल औलेट यौन दुराचार की अपर्कीर्ति और अपयश के बारे में कहा कि यह अपराध है जो निर्दोष भुक्तभोगियों के लिए मृत्यु का भाव उत्पन्न करता है।

उन्होंने कलीसियाई अधिकारियों के पाप के बारे में भी कहा जो बहुधा जानते थे कि उनके पुरोहित क्या कर रहे हैं तथा वे दुराचार को रोकने में विफल रहे। हिंसा और दुराचार के ये मामले यदा कदा वैसे लोगों द्वारा किये गये जो बहुत बाधित थे या जो स्वयं दुराचार का शिकार हुए थे।

उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि वैसे उपाय और कदम उठाये जायें जो उन्हें उन प्रेरिताई से दूर रखे जिसके लिए वे उपयुक्त नहीं हैं। यह काम सदैव उचित तरीके से नहीं किया गया और इसके लिए पीडितों से क्षमा याचना करते हैं।

धर्मविधि में क्षमायाचना के क्रम में सात वर्गों के प्रतिनिधियों ने ईश्वर से क्षमा याचना के लिए निवेदन किया। इसमें शामिल थे एक शिक्षक, धर्मसमाजी सुपीरियर, एक अभिभावक, एक लोकधर्मी, एक पुरोहित, एक कार्डिनल तथा दुराचार की शिकार एक भुक्त भोगी, आयरलैंड वासी मारि कोलिसं जिसने सम्मेलन को सम्बोधित किया था।

उन्होंने कहा कि क्षमा देना कितना कठिन है तथा जिन्होंने पाप किया है उन्हें क्षमा देने के लिए ईश्वर से शक्ति की याचना करें। इन सातों समूहों के प्रतिनिधियों ने मोमबत्ती जलाकर क्रूस के चरणों में रखा तथा सबने मिलकर चंगाई, दया और आशा के लिए प्रार्थना अर्पित किया ताकि यौन दुराचार के पाप फिर कदापि नहीं हों।

http://www.radiovaticana.org/in1/index.asp

यौन दुराचार मामलों में सत्य की खोज करना नैतिक और कानूनी दायित्व

In Peace & Justice on February 10, 2012 at 7:32 am

जोसेफ कमल बाड़ा

रोम 9 फरवरी 2012 (वीआर वर्ल्ड) बाल यौन दुराचार को रोकने संबंधी मामले पर रोम में आयोजित 4 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के प्रतिभागियों के लिए सुसमाचार प्रसार संबंधी परमधर्मपीठीय धर्मसंघ के अध्यक्ष कार्डिनल मनोनीत फेरनान्दो फिलोनी ने बुधवार संध्या रोम स्थित चर्च ओफ द होली अपोश्ल में ख्रीस्तयाग अर्पित किया।

6 से 9 फरवरी तक सम्पन्न इस सम्मेलन का आयोजन परमधर्मपीठीय ग्रेगोरियन विश्वविद्यालय के द्वारा किया गया।

बच्चों की सुरक्षा संबंधी केन्द्र की स्थापना करने के साथ ही इस सम्मेलन का समापन गुरूवार को हुआ जो सम्पूर्ण विश्व के धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों को मूल्यवान संसाधन उपलब्ध करायेगा।

बुधवार के सत्रों में विचार विमर्श का केन्द्र बिन्दु रहा कि यह कलीसियाई नेताओं का नैतिक और कानूनी कर्तव्य है कि यौन दुराचार के सब मामलों का प्रत्युत्तर दें।

विश्वास संबंधी परमधर्मपीठीय समिति में न्याय प्रसार से संबंधित धर्मसंघ के अधिकारी महाधर्माध्यक्ष चार्ल्स सिकलुना ने कहा कि बाल यौन दुराचार को रोकने के लिए कोई भी रणनीति कारगर नहीं हो सकती है यदि समर्पण और जिम्मेदारी निर्धारित नहीं हो।

उन्होंने कहा कि सत्य के लिए प्रेम को न्याय के प्रति प्रेम में तथा इसके परिणामस्वरूप मानव समाज में संबंधों में सच्चाई की स्थापना के लिए समर्पण में व्यक्त किया जाना जरूरी है।

उन्होंने बल देते हुए कहा कि सम्मेलन के प्रतिभागियों ने विश्व के विभिन्न भागों से आये लोगों द्वारा प्रस्तुत भाषणों में सुना कि यह कितना महत्वपूर्ण है कि वे मौन की घातक संस्कृति का सामना करें जो अब भी कुछ स्थानों में कायम है। हमें जरूरत है कि आगे बढ़ें और इसकी निन्दा करें क्योंकि यह सत्य और न्याय का शत्रु है।

यौन दुराचार के पीडितों को न्याय और क्षतिपूर्ति दिलाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि स्थानीय कलीसिया देश के नागरिक कानून के साथ पूरी तरह सहयोग करें तथा चर्च के दिशानिर्देशों को भी निकटता से देखें।

उन्होंने पोप जोन पौल द्वितीय के शब्दों को उद्धृत करते हुए कहा कि पुरोहिताई या धर्मसमाजी जीवन में उनके लिए कोई भी स्थान नहीं है जो युवाओं को हानि पहुँचायें।

मान्यवर सिकलुना ने बल दिया कि संघर्ष के केन्द्र में प्रशिक्षण है जो कि बच्चों की सुरक्षा के लिए जागरूकता और समर्पण की नयी संस्कृति की रचना करे। न केवल गुरूकुल छात्रों, पुरोहितों और लोकधर्मियों का प्रशिक्षण लेकिन धर्माध्यक्षों का भी ताकि चर्च के सब नेताओं की भी बेहतर जिम्मेदारी सुनिश्चित हो।

उन्होंने कहा कि धर्माध्यक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका के लिए उम्मीदवार का चयन करते समय सजग रहने की जरूरत है तथा धर्माध्यक्षों की जिम्मेदारी से संबंधित पहले से विद्यमान दिशानिर्देशों का उपयोग किया जाये।

http://www.radiovaticana.org/in1/index.asp

 

%d bloggers like this: