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सुप्रीम कोर्ट बलात्कार पीड़िता नन के मामले की जाँच करेगी

In Church on February 12, 2012 at 6:46 pm

सुप्रीम कोर्ट बलात्कार पीड़िता नन के मामले की जाँच करेगी.

Sunday Refection & News

In Podcast VR Programme on February 12, 2012 at 11:55 am

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In Church on February 12, 2012 at 11:53 am

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सुप्रीम कोर्ट बलात्कार पीड़िता नन के मामले की जाँच करेगी

In Peace & Justice on February 12, 2012 at 9:42 am
  • जस्टिन तिर्की,ये.स.

भुवनेश्वर, उड़ीसा, 11 फरवरी, 2012(कैथन्यूज़) सन् 2008 में उड़ीसा में हुए ईसाइविरोधी हिंसा के दौरान सामुहिक बलात्कार की पीड़िता कैथोलिक नन के निवेदन पर अब सुप्रीम कोर्ट निचले कोर्ट के न्यायधीश के द्वारा तथ्यों की ‘ग़लत प्रस्तुति’ का ‘क्रॉस एक्ज़ामिनेशन’ करेगी।न्यायधीश अल्तमस कबीर और चलामेश्वर की अध्यक्षता वाली शाखा ने अगली सुनवाई 13 फरवरी, 2012   निर्धारित की है।

कैथोलिक नन के एक वकील मनस रंजन सिंह ने बतलाया कि उन्हें सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति के लिये एक विशेष आवेदन देना पड़ा ताकि वह उड़ीसा उच्च न्यायालय के उस निर्णय को चुनौती दे जिसमें कोर्ट ने सबडिविज़नल जूडिशियल मजिस्ट्रेट प्रशांत कुमार दास के ‘क्रॉस जाँच’ को ख़ारिज़ कर दिया था।

विदित हो कि प्रशांत कुमार दास ने बलात्कार के अभियुक्त की पहचान के लिये ‘टीआई परेड’ कराया और नन ने संतोष पटनायक की पहचान की थी। पर दास ने ‘ग़लती और बुरे इरादे से’ यह रिपोर्ट बनाया था कि कथित अभियुक्त ने नन को थप्पड़ मारा और उसके साथ बुरा सलुक किया था पर अधिनियमों का कोई खुला उल्लंघन नहीं किया।

मनस रंजन सिंह ने कहा कि जुडिशियल मजिस्ट्रेट का ऐसा करना “तथ्यों की ग़लत प्रस्तुति” है।

नन के वकील सिंह ने कहा कि उन्होंने इसी कार्य के लिये ट्रायल कोर्ट से अपील की थी पर उनके निवेदन को इस आधार पर अस्वीकार कर दिया गया था कि यह मामला सरकार के द्वारा दायर किया गया था और शिकायतकर्ता ने इसकी माँग नहीं की थी।

उधर सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के स्थायी वकील को भी 13 तारीख़ को होने वाली सुनवाई में उपस्थित रहने की सूचना भेजी है।

भुवनेश्वर में कार्यरत समाजिक कार्यकर्ता सिस्टर जस्टिन सेनापति ने सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का स्वागत किया है क्योंकि इसके पूर्व राज्य सरकार हाई कोर्ट में मामले को दर्ज़ करने से भी कतरा रही थी।

उन्होंने यह भी कहा कि न्याय साम्प्रदायिक हिंसा से पीड़ित लोगों के लिये एक सपना बन गया है।

विदित हो सन् 2008 में हुए साम्प्रदायिक हिंसा के दौरान 25 अगस्त को कंधमाल में नन पर हमला किया गया, बलात्कार किया गया और कंधमाल की सड़कों में अर्द्धनग्न घुमाया गया था।

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विश्व युवा दिवस 2013 के ‘लोगो’ या ‘प्रतीक’ का अनावरण

In Church on February 12, 2012 at 9:27 am

जस्टिन तिर्की,ये.स.

रियो दे जनेइरो, ब्राजील, 11 फरवरी, 2012(ज़ेनित) ब्राज़ील के रियो दे जनेइरो में सन् 2013 में होने वाले विश्व युवा दिवस के लिये आधिकारिक ‘लोगो’ या प्रतीक का अनावरण कर दिया गया है।

25 वर्षीय युवा चित्रकार गुस्तावो हुगवेनिन द्वारा निर्मित इस ‘लोगो’ में ब्राज़ील के राष्ट्रीय झंडे और येसु मुक्तिदाता की विश्व प्रसिद्ध प्रतिमा का समावेश है।

3\स्थानीय आधिकारिक वेब के अनुसार कलाकार ने विश्व युवा दिवस के लिये ‘लोगो’ की रचना करते समय विश्व युवा दिवस की विषयवस्तु या ‘थीम’ पर मनन-चिन्तन किया।

विदित हो विश्व युवा दिवस 2013 के ‘थीम’ को संत मत्ती के सुसमाचार के 28वें अध्याय के 19वें पद से लिये गया है जिसमे कहा गया है, “इसलिये, जाओ और दुनिया के सभी राष्ट्रों को शिष्य बनाओ”।

येसु ने उक्त बात उस समय कही जब उन्होंने अपने शिष्यों को पर्वत पर प्रवचन दिये। इसलिये आरंभ से ही येसु मसीह, मुक्तिदाता की यह प्रतिमा मुझे नहीं छोड़ेगी।

येसु जो पर्वत पर हैं जो रियो दे जनेइरो की एक पहचान है और इस मूर्ति में वह सबकुछ निहित है जो वर्ष 2013 का विश्व युवा दिवस की विषयवस्तु, दुनिया को बतलाना चाहती है।

गुस्तावो ने बतलाया कि ‘लोगो’ बनाते समय उन्होंने उन सब बातों को अपने मन में रखा जिन्हें वह लोगों को बतलाना चाहते थे। उसके अनुसार ‘लोगो’ का निर्माण करते समय उन्होंने अपने मन में येसु, येसु के शिष्य और विश्व के राष्टों को अपने मन में रखा क्योंकि उसके अनुसार ये तीन बातों लोगों के लिये अति महत्त्वपूर्ण थीं।

‘लोगो’ में येसु की तस्वीर है, शिष्यों को उसने ह्रदय के रूप में दिखलाया है क्योंकि शिष्य ही येसु को अपने ह्रदम में लेकर चलते हैं और राष्ट्रों को दिखाने के लिये उसने रियो दे जनेइरो शहर के पर्वत और सागर को दिखलाया है।

उसके अनुसार विश्व युवा दिवस के समय विश्व के युवाओं के दिलों का केन्द्रबिन्दु होगा रियो दे जनेरिइयो शहर।

‘लोगो’ या प्रतीक ह्रदय के आकार का है। इसके ऊपर का रंग हरा है जिसेक बाँये भाग में सफेद रंग का क्रूस अंकित है और बीच में पीले रंग से येसु, मुक्तिदाता की प्रतिमा है और ह्रदय का निचला भाग नीला है। ज्ञात हो ब्राज़ील के राष्ट्रीय ध्वज़ में  इन्हीं तीनों रंगों का मिश्रण है।

विश्व युवा दिवस अगले वर्ष रियो दे जिनेइरो में 23 से 28 जुलाई तक सम्पन्न होगा।

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कलीसिया बीमारों की उचित सेवा करे

In Church on February 12, 2012 at 9:19 am

जस्टिन तिर्की,ये.स.

रोम, 11 फरवरी, 2012 (ज़ेनित) स्वास्थ्य सेवा के लिये बनी परमधर्मपीठीय समिति के महाधर्माध्यक्ष ज़िगमुंट ज़िमोवस्की ने कहा है, “विश्व रोगी दिवस मनाने के द्वारा कलीसिया चाहती है कि कलीसिया के सदस्य, स्वास्थ्य सेवा संस्थान और आम लोग यह निश्चित करें कि वे बीमारों की उचित देख-भाल करेंगे”।

उन्होंने कहा, “कलीसिया चाहती है कि इस रोगी दिवस के दिन स्वास्थ्य सेवाकर्मियों  के आध्यात्मिक और नैतिक प्रशिक्षण पर ध्यान दिया जाये और प्रत्येक धर्मप्रांत इस बात को देखे कि रोगियों के साथ-साथ, रोगियों की सेवा करने वालों का भी ख्रीस्तीय  जीवन सुदृढ़ हो”।

महाधर्माध्यक्ष ज़िमोवस्की ने उक्त बातें उस समय कहीं जब उन्होंने 11 फरवरी को लूर्द की माता मरिया के पर्व दिन मनाये जाने वाले रोगी दिवस के अवसर पर एक साक्षात्कार दिया।

उन्होंने बतलाया कि रोगी दिवस की शुरुआत धन्य जोन पौल द्वितीय ने सन् 1992 ईस्वी में की। धन्य जोन पौल द्वितीय ने अपने एक दस्तावेज़ ‘साल्भची दोलोरिस’ में कहा था, “येसु ख्रीस्त में प्रत्येक व्यक्ति कलीसिया का मार्ग बनता है और जब उसके जीवन में दुःख आते हैं तो वह कलीसिया का विशिष्ट मार्ग बन जाता है।”

उन्होंने बताया कि शनिवार 11 फरवरी को पड़ने वाला रोगी दिवस हम सबों को इस बात की याद दिलाता है कि कलीसिया का विश्व में विस्तार हुआ क्योंकि यह दुनिया के लोगों की सेवा करता और बीमारों की विशेष सेवा करता है।

उन्होंने संत पापा बेनेदिक्त की बातों को उनके दस्तावेज़ स्पे साल्वी’ के शब्दों को उद्धृत करते हुए कहा, “मानव जीवन तब अर्थपूर्ण होता है जब उनके साथ अपना रिश्ता मजबूत करते हैं जो बीमार हैं तथा बीमार हैं पर अपने दुःखों के बारे में दूसरों को बताने में असमर्थ हैं।”

उन्होंने कहा, “यह व्यक्ति और समाज दोनों पर लागू होता है। एक समाज जो रोगियों को नहीं स्वीकार कर सकता और जो दूसरे के दुःख में सहभागी नहीं हो सकता या उनके दुःखों की सह-अनुभूति नहीं कर सकता वह अमानुषिक या क्रूर समाज है।”

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‘सेन्टर फोर चाइल्ड प्रोटेक्शन’ नामक इंटरनेट पोर्टल जारी

In Church on February 12, 2012 at 9:05 am

‘सेन्टर फोर चाइल्ड प्रोटेक्शन’ नामक इंटरनेट पोर्टल जारी.

‘येसु, हमारे समकालीन’ पर सम्मेलन की तारीफ़

In Church on February 12, 2012 at 6:35 am

जस्टिन तिर्की,ये.स.

वाटिकन सिटी, 11 फरवरी, 2012 (सीएनए) संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें ने कहा, “येसु इस धरा पर सदा के लिये आये और रहस्यात्मक रूप से मानवीय कमजोरियों से आहत पर दिव्य कृपा से पूर्ण कलीसिया को विशुद्ध करने का उनका मिशन जारी है।”

संत पापा ने उक्त बातें उस समय कहीं जब उन्होंने ‘येसु – हमारे समकालीन’ विषय पर रोम में  9 से 11 फरवरी तक आयोजित तीन दिवसीय सेमिनार के लिये इताली धर्माध्यक्षीय समिति के अध्यक्ष कार्डिनल अन्येलो बान्यास्को को अपने संदेश भेजा।

इस सेमिनार में इस बात पर विचार-विमर्श किया जा रहा है कि येसु आज के युग के लिये क्यों एक ऐतिहासिक व्यक्ति से बढ़कर है?

संत पापा ने कहा, “मुझे खुशी है कि ख्रीस्तीय समुदाय और इताली समाज को लाभ के लिये येसु के व्यक्तित्व पर अन्तःविषयक अध्ययन किये जा रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “येसु का वास्तविक स्वभाव आज यूखरिस्तीय समारोह में विशे, रुप से प्रकट होता है जहाँ वे अपने दुःख, मृत्यु और पुनरुत्थान के द्वारा उपस्थित हैं।”

संत पापा ने कहा, “येसु जो आत्मा से प्रेरित हैं प्रत्येक मानव के समकालीन है इसलिये वे सब युगों के लोगों को स्वीकार कर सकते हैं क्योंकि सभी ऐतिहासिक येसु के मिशन में लगे हुए हैं।”

कार्डिनल बान्यास्को ने सम्मेलन के बारे में कहा कि आज कलीसिया के सामने चुनौती इस बात की है कि लोगों को यह बतलाना की 2000 वर्ष पूर्व के येसु आज के लोगों के लिये किस तरह से प्रासांगिक या समकालीन हैं।

सम्मेलन में भाग ले रही एक शिक्षिका ने कहा,”आज के बच्चों का सोच है कि येसु सिर्फ़ ऐतिहासिक येसु हैं। यह एक बड़ी चुनौती है पर इससे बढ़कर सच बात तो यह है कि येसु ने जो अमर संदेश हमारे लिये छोड़ दिया है वह यह है कि ईश्वर का प्रेम अनन्त है, सर्वव्यापी और असीमित है इसीलिये येसु हमारे समकालीन हैं।”

रोम में आयोजित इस विशेष सभा में संस्कृति के लिये बनी परमधर्मपीठीय समिति के अध्यक्ष कार्डिनल जियान फ्रंको रवासी, रोम के पूर्व विकर जेनरल कार्डिनल कमिल्लो रुइनी और कार्डिनल जोसेफ ज़ेन ज़ेकियुन भी हिस्सा ले रहे हैं।

इसमें जर्मन ईशशास्त्री क्लाउस बेरजेर, फ्रांसीसी एतिहासाकार और दर्शनशास्त्री जाँ लुक मरियोन, इताली फिल्म निदेशिका और पटकथा लेखिका लिलियान कवानी और वाटिकन लेस्प्रेसो के संवाददाता सान्द्रो मजिस्तेर भी इसमें हिस्सा ले रहे हैं।

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