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Archive for February 14th, 2012|Daily archive page

Angelus Message of Pope & News

In Audience on February 14, 2012 at 10:55 am

देवदूत प्रार्थना के पूर्व संत पापा का संदेश

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Youth Program & Drama

In Podcast VR Programme on February 14, 2012 at 10:50 am

नई दिशायें और चेतना जागरण

http://media01.vatiradio.va/podcast/feed/hindi_120212.mp3

संत पापा ने न्याय और शांति का अर्थ समझाया

In Peace & Justice on February 14, 2012 at 7:51 am

वाटिकन सिटी, 14 जनवरी, 2012 (ज़ेनित) संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें ने कहा है, “न्याय केवल मानव समझौता नहीं और न ही शांति युद्ध की अनुपस्थिति है।”

संत पापा ने उक्त बातें उस समय कहीं जब उन्होंने वाटिकन सिटी में परंपरागत रूप से आयोजित एक समारोह नागरिक सुरक्षा अधिकारियों को नये वर्ष की शुभकामनायें दीं।

संत पापा ने कहा, “रोम जैसे शहर में जहाँ विश्वभर से पर्यटक और तीर्थयात्री लगातार आते रहते हैं, सुरक्षा व्यवस्था बनाये रखना एक साधारण कार्यमात्र नहीं है। संत पीटर का प्रांगण ख्रीस्तीयता का केन्द्र है और विश्व भर के काथलिक चाहते हैं कि जीवन में कम से कम एक बार रोम का दौरा करें और प्रेरित संत पीटर की कब्र के दर्शन कर प्रार्थना चढ़ायें। रोम में ईसाइयों के धर्मगुरु का होना और दुनिया भर के लोगों का यहाँ आना निश्चिय ही रोमवासियों और इटली के लिये कोई समस्या नहीं है, ठीक इसके विपरीत यह एक गर्व की बात और समृद्धि का श्रोत है।”

संत पापा ने कहा, “मेरे शांति संदेश में मैंने युवा को न्याय और शांति के बारे में शिक्षित करने के बारे में कहा है। इन दोनों शब्दों ‘न्याय और शांति’ का प्रयोग आज सब लोग करते हैं पर कई बार इसका प्रयोग उचित रूप से नहीं किया जाता है।”

संत पापा ने कहा, “‘न्याय’ सिर्फ़ मानव समझौता नहीं है। जब तथाकथित न्याय का मापदंड उपयोगिता, मुनाफ़ा और धन संपति बन जाते हैं तब मानव मूल्य और मर्यादा मानव के पौ तले कुचल दिये जाते हैं। न्याय एक ऐसा गुण है जो मानव इच्छा का मार्गदर्शक है जो हमें इस बात की प्रेरणा देता है कि हम दूसरे को वह चीज़ प्रदान करें जो उसको उसकी अस्तित्व और कार्यों के आधार पर देय है।”

“इसी प्रकार शांति युद्ध की अनुपस्थिति नहीं मात्र नहीं है या झगड़ों को समाप्त करने के मानव प्रयास का परिणाम मात्रन नहीं पर पर इससे बढ़कर यह ईश्वरीय वरदान है जिसे विश्वास के साथ ग्रहण किया जाना चाहिये जिसकी परिपूर्णता येसु मसीह में है। सच्ची शांति पाने के लिये प्रत्येक व्यक्ति सहानुभूति, भाईचारा, सहयोग और सेवा का अनवरत योगदान दे।”

संत पापा ने कहा, “एक पुलिस का दायित्व है कि वह सदा न्याय और शांति का सच्चा प्रचारक बने।” Read the rest of this entry »

ईसाई सिद्धांतों पर पंजाबी में लघु-कथा संकलन

In Church on February 14, 2012 at 7:22 am

जस्टिन तिर्की, ये.स.

फ़ैसलाबाद, 13 फरवरी, 2012(एशियान्यूज़) पाकिस्तान के फ़ैसलाबाद के फादर मुख़तार आलम ने कहानियों का एक संकलन पंज़ाबी में प्रकाशित किया है ।

कहानियों के लक्ष्य है ईसाई सिद्धांत आधार पर  मानव कल्याण को बढ़ावा देना। कहानी संकलन का शीर्षक है “बेनुरान चोन नूर” अर्थात् ‘ अंधकार में रहने वालों के लिये प्रकाश’।

अंतरधार्मिक वार्ता के लिये बनी आयोग के निदेशक फादर आफ़ताब जेम्स पौल ने इस क़िताब की तारीफ़ करते हुए कहा कि इससे कलीसिया की शिक्षा का प्रचार होगा।

फ़ैसलाबाद के विकर जेनरल फादर ख़ालिद रशीद असी ने कहा,”पाकिस्तान के इतिहास में ख्रीस्तीय लेखकों की ओर से यह एक महत्वपूर्ण योगदान है।”

इस लघु कथा संकलन में एक ओर जानवरों को पात्र बना कर जीवन में ‘उत्तम चुनाव’ करने की प्रेरणा है दूसरी ओर सामाजिक बुराइयों की आलोचना भी की गयी है। कहानी में उपमाओं का प्रयोग कर हिंसा और भेदभाव से ऊपर उठकर शांतिमय जीवन जीने की प्रेरणा दी गयी है।

‘एशियान्यूज़’ से बात करते हे लेखक और कवि फादर आलम ने कहा, उन्होंने अपनी माँ से कहानियाँ सुनी थी और इन कहानियों में वह उन बातों को जोड़ने का प्रयास किया है। उनकी आशा है कि लोग विभिन्न्ताओं का सम्मान करेंगे और अपने जीवन और दूसरों विशेष करके समाज के दरकिनार लोगों के प्रति सकारात्मक परिवर्तन लायेंगे।

लाहौर के मुस्लिम लेखक प्रवीन मलिक ने कहा, “फादर मुख़तार आलम की कहानी पंजाबी भाषा के लिये एक अनुपम भेंट है जिसमें प्रेम, शांति और सद्भावना का  अनोखा संयोग है।”

पेशावर के नज़ीब अली शाह ने कहा, “प्रत्येक लेखक का यह दायित्व है वह समाज के विभिन्न समुदायों को एक साथ जोड़े।”

एक अन्य लेखक अल्लमा गुलाम रसूल ने लेखक फादर आलम की सराहना वैसी  ‘कटु शब्दों’ के लिये की जिन्हें लेखक ने उनके लिये प्रयुक्त किया है जो दूसरे धर्मों भाषाओं और विचारों के साथ असहिष्णुता दिखाते और हिंसक वारदातें करते।

सीबीआइ जाँच की माँग

In Church on February 14, 2012 at 7:20 am

जस्टिन तिर्की, ये.स.

नई दिल्ली, 13 फरवरी, 2012 (कैथन्यूज़) सिस्टर वाल्सा जोन की हत्या के संबंध में तथ्य खोजने वाली चार सदस्यीय टीम ने झारखंड सरकार से माँग की है कि वह सीबीआइ जाँच के आदेश जारी करे।

दिल्ली में आयोजित संवाददाता सम्मेलने में संयुक्त रूप से जारी वक्तव्य में चार सदस्यीय दल का नेतृत्व कर रहे जोन दयाल ने कहा, “हम झारखंड सरकार से आग्रह करते हैं कि वह सिस्टर वाल्सा जोन की हत्या की जाँच सेन्ट्रल ब्यूरो ऑफ इनवेस्टीगेशन(सीबीआइ)से कराने का आदेश दे।

अपनी रिपोर्ट में चार सदस्यीय दल ने कहा कि सिस्टर वाल्सा जोन कोयला खान के विस्तार के लिये आदिवासियों की ज़मीन हस्तगत करने के मार्ग में कोल माफिया की योजना के लिये बाधा थी।

जोन दयाल ने कहा, “चूँकि झारखंड सरकार द्वारा लीज़ में खान के लिये ज़मीन उपलब्ध करायी गयी थी इसलिये यह महत्त्वपूर्ण है कि सरकार न केवल हत्या के मूल कारणों का पता लगाये पर उन परिस्थितियों की भी गहन छानबीन करे जिसके कारण हत्या को अंजाम दिया गया।”

उन्होंने हत्या की खोजबीन पर ‘लापरवाह’ और ‘पक्षपातपूर्ण’ होने का आरोप लगाया है।

चार सदस्यीय समिति में सीबीसीआइ के महिला विभाग की महासचिव सिस्टर हेलेन सल्दान्हा, सुप्रीम कोर्ट वकील सिस्टीर मेरी स्कारिया और फोटोग्राफ़र और रिपोर्टर जोन मैथ्यू और जोन दयाल शामिल थे।

चारों सदस्यों ने 6 जनवरी2012 को झारखंड के पाकुड़ जिले के पचवारी गाँव का दौरा किया जहाँ 15 नवम्बर, 2011 को सिस्टर वाल्सा की बेरहमी से हत्या कर दी गयी थी।

विदित हो कि 53 वर्षीय वाल्सा ‘सिस्टर्स ऑफ चैरिटी ऑफ ज़ीजस एंड मेरी’ धर्मसमाज की एक सक्रिय सदस्या थी जिन्होंने कोयला कम्पनी ‘पानेम’ के ख़िलाफ़ आदिवासियों को संगठित किया था ताकि उनकी ज़मीन के बदले में उन्हें उचित मुआवज़ा मिले और पुनर्वास की उचित व्यवस्था हो।

सिस्टर सलदान्हा ने कहा, “स्थानीय लोगों को नन की हत्या के लिये भड़काया गया।”अब तक सात लोगों को हत्या के मामले में गिरफ़्तार किया गया है।

उधर ऑल इंडिया कैथोलिक यूनियन एआइसीयू) ने में सीबीआइ से जाँच का समर्थन किया है।

मंगलोर धर्मप्रांत की स्थापना के 125 वर्ष

In Church on February 14, 2012 at 7:13 am
  • जस्टिन तिर्की, ये.स.

मंगलोर, 13 फरवरी, 2012(कैथन्यूज़) मुम्बई के महाधर्माध्यक्ष और सीबीसीआइ के अध्यक्ष कार्डिनल ऑस्वाल्ड ग्रेशियस ने मंगलोर धर्मप्रांत की 125वीं जयन्ती पर इसके सेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा, “मंगलोर धर्मप्रांत की 125 वर्षीय जुबिली एक बहुत बड़ी ‘सफलता’ है पर “सफलता एक यात्रा है मंजिल नहीं।”

विदित हो कि 12 फरवरी, रविवार को ‘पूर्व का वाटिकन’ कहे जाने वाले मंगलोर शहर के नेहरु मैदान में आयोजित जुबिली समारोह में भारत में वाटिकन के प्रेरितिक राजदूत महाधर्मध्यक्ष साल्वातोरे पेन्नाकियो, 25 धर्माध्यक्षों और 300 पुरोहितों सहित करीब 50 हज़ार लोगों ने हिस्सा लिया।

इस अवसर पर कार्डिनल ग्रेशियस ने कहा कि मंगलोर धर्मप्रांत देश के साथ पूरे विश्व का गौरव है जिसने विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहल किये हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अपोस्तोलिक नुनसिया महाधर्माध्यक्ष साल्वातोर ने कहा, “धर्मप्रांत ने स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, समाज-कल्याण और अभियांत्रिकी या इंजीनियरिंग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिये हैं।

वाटिकन प्रतिनिधि और जुबिली समारोह के विशिष्ट अतिथि, सुसमाचार प्रचार के लिये बनी परमधर्मीठीय समिति के सचिव महाधर्माध्यक्ष सावियो होन ताई-फाई कहा,”वे इस बात का साक्ष्य दे सकते हैं कि येसु उस विशाल जनसमूह में उपस्थित हैं।”

समारोह में उपस्थित कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.वी सदानन्द गौडा ने कहा कि राज्य सरकार ईसाइयों के विकास के लिये 500 मिलियन की राशि और अन्य सहायता देने का वचन देती है।

केन्द्रीय मंत्री एम वीराप्पा मोइली ने कहा, “चाहे उत्तर या दक्षिण भारत में मैं जहाँ भी जाता हूँ एक पुरोहित को ग़रीबों की सेवा करते हुए पाता हूँ।”

समारोह में वाटिकन प्रतिनिधि ने उपस्थित 24 धर्माध्यक्षों को सम्मानित किया 300 कलाकारों ने ‘चैतन्योदया’ नामक एक नृत्य प्रस्तुत किया जिसमें धर्मप्रांत को समृद्ध ऐतिहासिक विकास को दर्शाया गया था।

विदित हो कि कलीसिया और राष्ट्र को मंगलोर धर्मप्रांत ने 42 धर्माध्यक्षों और करीब    4 हज़ार धर्मसमाजी प्रदान किये हैं।

 

 

विश्व रेडियो दिवस पर यूनेस्को को बधाइयाँ

In Media on February 14, 2012 at 7:11 am

जस्टिन तिर्की, ये.स.

पारिस, 13 फरवरी, 2012(यूनेस्को) 13 फरवरी को सोमवार को पूरे विश्व में विश्व रेडियो दिवस मनाया जा रहा है।

यूरोपियन ब्रोडकास्टिंग यूनियन (इबीयू) के निदेश इनग्रिद देल्तेरने ने ‘यूनेस्को’ और ‘आइटीयू’ (अन्तरराष्ट्रीय टेलेकम्यूनिकेशन यूनियन) को इस बात के लिये बधाइयाँ दी हैं कि उन्होंने 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस घोषित कर इसके व्यापक प्रभाव को मान्यता प्रदान की।

देलतेरने ने कहा, “यूनेस्को और आइटीयू द्वारा संयुक्त रूप से दिये गये वक्तव्य इस बात की पुष्टि करते हैं कि ‘रेडियो ही एक ऐसा जनमाध्यम है जिसके द्वारा संदेश असंख्य लोगों तक पहुँचाया जाता है विशेषकर के समाज के कमजोर तबके के लोगों तक’।”

उन्होंने कहा, “आज ज़रूरत है, मुक्त, स्वतंत्र और बहुलवादी रेडियो की ताकि इससे मानवाधिकार और मूलभूत स्वंत्रताओं की रक्षा हो सके।”विदित हो कि 3 नवम्बर 2011 ईस्वी को यूनेस्को के 36वें सत्र में 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस मनाये जाने का निर्णय हुआ। यह भी ज्ञात हो कि 13 फरवरी को ही सन् 1946 ईस्वी को यूएनओ ने अपनी रेडियो सेवा आरंभ की थी।

 

 

देवदूत संदेश प्रार्थना से पूर्व संत पापा का संदेश

In Audience on February 14, 2012 at 7:07 am
  • जोसेफ कमल बाड़ा

वाटिकन सिटी 13 फरवरी 2012 (सेदोक, एशिया न्यूज ) संत पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने रविवार 12 फरवरी को संत पेत्रुस बासिलिका के प्रांगण में देश विदेश से आये तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को देवदूत संदेश प्रार्थना का पाठ करने से पूर्व सम्बोधित किया।

उन्होंने इताली भाषा में सम्बोधित करते हुए कहा – अतिप्रिय भाईयो और बहनो, पिछले रविवार को हमने देखा कि येसु अपने सार्वजनिक जीवन में अनेक बीमार लोगों को चंगा किये, वे मानव जीवन के लिए ईश्वर की इच्छा को प्रकट करते तथा बहुतायत में जीवन देते हैं।

इस रविवार के सुसमाचार में येसु हमें दिखाते हैं कि बीमारी जो तात्कालीन समय में सबसे गंभीर बीमारी समझी जाती थी व्यक्ति को अशुद्ध बनाती तथा सामाजिक संबंधों से अलग कर देती थी। हम कुष्ठ रोग के बारे में कह रहे हैं।

एक विशेष संहिता थी जिसके तहत याजक को अधिकार था कि वे कुष्ठ रोगी के बारे में घोषणा कर उसे अशुद्ध करार देते थे और याजक को ही अधिकार था कि रोग मुक्त होने पर मरीज के चंगा होने की घोषणा करें तथा सामान्य जीवन में उसके पुर्नवास के लिए स्वीकृति प्रदान करें।

जब येसु गलीलिया के गाँवों में उपदेश दे रहे थे तो एक कुष्ठ रोगी उसके पास आया और कहा- यदि आप चाहते हैं तो मुझे शुद्ध कर सकते हैं।

येसु इस व्यक्ति के संपर्क से परहेज नहीं करते हैं वस्तुतः उसकी परिस्थिति में आंतरिक रूप से शामिल होकर अपना हाथ बढाकर उसका स्पर्श करते हैं – संहिता के द्वारा लागू किये गये प्रतिबंध पर विजय प्राप्त करते हुए कहते हैं- मैं यही चाहता हूँ-शुद्ध हो जाओ।

उस संकेत और येसु के शब्दों में ही मुक्ति का इतिहास है इसमें ईश्वर की इच्छा निहित है चंगा करने, बुराई से शुद्ध करने में जो कि हमें विकृत करती तथा हमारे संबंध को नष्ट करती है।

येसु के हाथ और कुष्ठ रोगी के उस स्पर्श ने सब बाधाओं को गिरा दिया जो ईश्वर और मनुष्य की अशुद्धियों के मध्य, पवित्र और अपवित्र के मध्य है।

येसु बुराई और इसकी नकारात्मक शक्तियों से इंकार किये बिना ही हमें दिखाते हैं कि ईश्वर का प्रेम किसी भी प्रकार की बुराई से यहाँ तक कि सबसे अधिक संक्रामक और भयानक बीमारी से भी अधिक शक्तिशाली है। येसु ने अपने ऊपर हमारी कमजोरियों को ले लिया, कुष्ठ रोगी बने ताकि हम शुद्ध हों।

इस सुसमाचार पर एक विस्मयकारी टिप्पणी है असीसी के संत फ्रांसिस के अस्तित्व संबंधी अनुभव में जिसे वे अपने साक्ष्य के शुरू में वर्णित करते हैं-प्रभु ने मुझे बंधु फ्रांसिस को इस प्रकार से तपस्या करने का रास्ता दिया-जब मैं पाप में था कुष्ठ रोगियों को देखना मुझे बहुत कड़ुवा महसूस हुआ और प्रभु स्वयं मुझे उनके मध्य ले चले और मैंने उनके प्रति दया दिखायी। जब मैं उनको छोड़ा तब जो कड़ुवा प्रतीत होता था वह आत्मा और शरीर की मधुरता में बदल गया था।

उसके बाद मैं कुछ समय के लिए रूका और इस संसार से प्रस्थान किया। वे कुष्ठ रोगी जो फ्रांसिस से मिले और जब वे पाप में थे कहते हैं येसु उपस्थित थे और जब फ्रांसिस उन्में से एक के पास पहुँचे और अपनी वीभत्स प्रतिक्रिया पर विजय पाकर, कुष्ठ रोगी को गले लगाया ।

येसु ने उसे उसकी कुष्ठ बीमारी अर्थात उसके घमंड से चंगा किया और उसे ईश्वर के प्रेम में परिवर्तित कर दिया जो ख्रीस्त की विजय है, यह हमारी गहन चंगाई है और नये जीवन में हमारा पुनरूत्थान है।

प्रिय मित्रो, हम प्रार्थना में कुँवारी माता मरिया की ओर मुखातिब हों जिनका समारोही स्मरण हमने लूर्द में उनके दर्शन देने की स्मृति में कल किया। संत बेर्नादेत्त को कुँवारी माता मरियम ने समयातीत संदेश दिया- प्रार्थना और तपस्या करने का बुलावा।

येसु अपनी माता के द्वारा हमेशा हमारे पास आते हैं ताकि हमें शरीर और आत्मा की सब बीमारियों से मुक्त कर सकें। हम उनका स्पर्श करें और शुद्ध हों तथा अपने भाईयों के प्रति उदारता दिखायें।

इतना कहने के बाद संत पापा ने देवदूत संदेश प्रार्थना का पाठ किया और सबको अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।

अफ्रीकी और यूरोपीय धर्माध्यक्षों की द्वितीय विचार गोष्ठी

In Church on February 14, 2012 at 7:03 am

जस्टिन तिर्की, ये.स.

रोम, 13 फरवरी, 2012 (एजेन्सिया फिदेस) अफ्रीकी और यूरोपीय धर्माध्यक्षों की द्वितीय विचार गोष्ठी 13 फरवरी को रोम में आरंभ हो गयी है जिसकी विषयवस्तु है – “सुसमाचार आजः अफ्रीका और यूरोपीय धर्माध्यक्षों का मेषपालीय सहयोग एवं एकता।”

सभा में मानव और ईश्वर, चर्च का मिशन  ईश्वरीय उपस्थिति और प्रेम के प्रचार करने आदि के बारे में भी विचार-विमर्श किये जायेंगे।

विचार गोष्ठी का उद्घाटन संयुक्त रूप से अफ्रीका और मडागास्कर के धर्माध्यक्षीय समिति (एसइसीएएम) के अध्यक्ष कार्डिनल पोलीकार्प पेंगो और यूरोपीय धर्माध्यक्षीय समति (सीसीइइ) के उप अध्यक्ष कार्डिनल अन्येलो बान्यास्को ने किया

कार्यक्रम के अनुसार शांति और न्याय के लिये बनी परमधर्मपीठीय समिति के अध्यक्ष कार्डिनल के.ए. तुर्कसन ‘अफ्रीकाए मुनुस’ नामक पोस्ट सिनोदल प्रेरितिक प्रोत्साहन प्रस्तुत किया।

सभा के आरंभ में ही ‘सेकाम’ के उपाध्यक्ष कार्डिनल थियोदोर अडरियेन सार और ‘सीसीइइ’ के पूर्व उपाध्यक्ष जोसिप बोज़ानिक ने पूर्वायोजित सभाओं की प्रगति और चुनौतियों का एक व्यौरा प्रस्तुत किया।

उन्होंने सभा के  भाग ले रहे प्रतिनिधियों को विचारगोष्ठी की भविष्य कार्ययोजना के बारे में भी जानकारी दी।

विदित हो कि दोनों कार्डिनल सन् 2004 से ही दोनों महादेशों की सहयोग-प्रक्रिया से जुड़े रहे हैं।

अजेन्सिया फीदेस’ के अनुसार पाँच दिवसीय विचार-गोष्ठी में अफ्रीका और यूरोप में सुसमाचार प्रचार, ईशशास्त्रीय एवं समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण, विश्वासी, अविश्वासी, येसु का व्यक्तिगत अनुभव और परिवर्तन आदि विषयों पर भी चर्चा की जायेगी।

सेमिनार में युवाओं, परिवारों और पल्लियों तथा धर्मप्रांतों के बीच आपसी तालमेल के बारे में अफ्रीकी और यूरोपयीय धर्माध्यक्षों द्वारा उठाये जाने वाले कुछ ठोस कदमों पर भी निर्णय लिये जायेंगे।

विचार गोष्ठी का समापन 17 फरवरी को मनोप्पेल्लो के ‘होली फेस’ अर्थात् ‘पवित्र चेहरा’ की तीर्थयात्रा से सम्पन्न हो जायेगा।

 

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