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कार्डिनलों के लिए प्रार्थना और चिंतन का दिवस

In Church on February 17, 2012 at 9:37 pm

जोसेफ कमल बाड़ा

वाटिकन सिटी 17 परवरी 2012 (वी आर वर्ल्ड) वाटिकन प्रेस कार्यालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि कार्डिनल मंडल के सदस्यों के लिए शुक्रवार 17 फरवरी को प्रार्थना और चिंतन का दिवस रहा। 18 फरवरी को सम्पन्न होनेवाले कार्डिनल बनाये जाने के भव्य समारोह से पूर्व 17 फरवरी को वाटिकन के सिनड हाल में कार्डिनलों की बैठक हुई।

प्रातःकालीन सत्र में कार्डिनल मंडल के अध्यक्ष कार्डिनल आंजेलो सोदानो ने स्वागत भाषण दिया। प्रार्थना और चिंतन दिवस का शीर्षक था- आज सुसमाचार की उदघोषणा, मिसियो एड जेन्तेस और नये सुसमाचार प्रचार के मध्य। इस पर कार्डिनल मनोनीत न्यूयार्क के महाधर्माध्यक्ष तिमोथी दोलान ने व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत किया।

नये सुसमाचार प्रचार संबंधी समिति के अध्यक्ष महाधर्माध्यक्ष साल्वातोरे फिसिकेल्ला ने आगामी ” विश्वास के वर्ष ” पर विचार व्यक्त करते हुए प्रेरितिक पत्र ” पोरता फिदेई ” के आलोक में सार्थक बिन्दुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने विश्वास के वर्ष पर विभिन्न रोमी कार्यालयों द्वारा अध्ययन के लिए शुरू किये गये पहलों के बारे में भी जानकारी दी।

प्रातःकालीन सत्र में विभिन्न विषयों पर सात प्रतिभागियों ने अपने मंतव्य व्यक्त किये तथा देवदूत संदेश प्रार्थना का नेतृत्व संत पापा द्वारा किये जाने के साथ ही समाप्त हुआ। अपराहनकाल में कुछेक प्रतिभागियों द्वारा विचार व्यक्त किये गये और संध्या पहल में संध्या वंदना प्रार्थना हुई।

कार्डिनल मंडल के 213 सदस्यों में 133 कार्डिनल (22 नये कार्डिनलों सहित) उपस्थित थे। अन्य कार्डिनल आयु, स्वास्थ्य या पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के कारण इस प्रार्थना और चिंतन दिवस के कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके।

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उड़ीसा में मानवाधिकार कार्यकर्त्ता जुनेश प्रधान गिरफ्तार

In Human Rights on February 17, 2012 at 9:27 am

जोसेफ कमल बाड़ा

कंधमाल 16 फरवरी 2012 (एशिया न्यूज) कंधमाल में आदिवासियों के अधिकारों के लिए काम करनेवाले प्रमुख कार्यकर्त्ता जुनेश प्रधान को पुलिस ने 9 फरवरी को गिरफ्तार कर बालिगुडा के जेल में बंद कर दिया है। उनपर विस्फोटक पदार्थों को रखने का आरोप लगाया गया है और यदि अदालत में आरोप सिद्ध हो जाता है तो इसके परिणामस्वरूप जुनेश को आजीवन कारावास की सज़ा हो सकती है। पुलिस पदाधिकारी जे एन पंकज के अनुसार जुनेश के खिलाफ ठोस सबूत हैं।

ज्ञात हो कि जुनेश प्रधान कंधमाल जिले में जनजातीय समुदाय के अधिकारों के लिए संघर्ष करनेवाले नेता के रूप में जाने जाते हैं। वे सन 2002 से 2007 तक ग्रीनबाड़ी के सरपंच रहे फिर 2007 से 2012 तक दारंगीबाड़ी पंचायत समिति के अध्यक्ष चुने गये।

हाल के वर्षो में चरमपंथी हिन्दुओं ने उनको अपना लक्ष्य बनाया क्योंकि वे सन 2007 और 2008 के ईसाई विरोधी साम्प्रदायिक दंगे में हताहत हुए पीडितों को न्याय दिलाने के अभियान से जुडे थे।

ग्लोबल कौंसिल ओफ इंडियन क्रिश्चियन के अध्यक्ष साजन जोर्ज ने मानवाधिकार कार्यकर्त्ता जुनेश प्रधान की गिरफ्तारी की निन्दा करते हुए इसे ” अवैध ” तथा ” मानवाधिकारों का खुला हनन ” बताया है। उन्होंने एशिया न्यूज से कहा कि जुनेश ने केवल निर्दोष आदिवासियों की गिरफ्तारी के खिलाफ आवाज उठाया था।

हम उसकी अविलम्ब रिहाई, उसके खिलाफ लगाये गये सब आरोपों को वापस लेने, पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा जुनेश प्रधान के परिजनों को सुरक्षा दिये जाने की माँग करते हैं।

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पुरोहित, गरीबों की सहायता करने का ‘सचेतन विकल्प’ चुनें

In Church on February 17, 2012 at 9:24 am

जोसेफ कमल बाड़ा

मुम्बई 16 फरवरी 2012(ऊकान) मुम्बई के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल ओसवाल्ड ग्रेशियस ने भारत के धर्मप्रांतीय पुरोहितों के सम्मेलन की वार्षिक बैठक को समारोही ख्रीस्तयाग के समय सम्बोधित करते हुए कहा पुरोहित, गरीबों की सहायता करने क सचेतन विकल्प चुनें। उन्होंने कहा कि हमारे पास दो इंडिया है और पुरोहितों को इन दोनों के मध्य पुल का निर्माण करना है।

कार्डिनल ग्रेशियस ने खेद व्यक्त किया कि देश की प्रगति का लाभ केवल धनी लोगों को मिला है जिनके पास सबकुछ है लेकिन गरीबों को अमानवीय परिस्थिति में जीवन बिताना पड़ता है तथा उनके पास शिक्षा और न्यूनतम सुविधाएँ भी नहीं होती हैं। कार्डिनल महोदय ने कहा कि हम उनके जीवन में बदलाव ला सकते हैं, हम सचेत होकर निर्धनों की सहायता करना चुनें।

भारत के धर्मप्रांतीय पुरोहितों के सम्मेलन की वार्षिक बैठक 14 से 16 फरवरी तक न्यू इवांजलाईजेशना इटस मीनिंग, रेलेवन्स एंड वेस ओफ डूविंग इन इंडिया शीर्षक के तहत मुम्बई में सम्पन्न हुई।

कार्डिनल ग्रेशियस ने पुरोहितों को मिलकर एक साथ काम करने के लिए उत्साहित किया और कहा कि वे अच्छे विचारों के साथ समर्पित भाव से वापस जायें तथा भारत को बदलें। उन्होंने आतंकवाद को असंतोष की अभिव्यक्ति कहा जो प्रगति के नाम पर निर्धनों का अनैतिक शोषण है।

संसार को वैसे पुरोहितों की जरूरत है जो न्याय शांति और समानता वाले राज्य का निर्माण करें।

कार्डिनल ग्रेशियस ने याजक वर्ग को सुसमाचार प्रचार कार्य़ के लिए लोकधर्मियों को भी विश्वास में लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि लोकधर्मी हमारी ताकत हैं, हमें उन्हें समस्या के रूप में नहीं लेकिन अवसर के रूप में देखना तथा उनका सशक्तिकरण करना चाहिए।

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संत पापा द्वारा रोम के प्रमुख सेमिनरी का दौरा

In Church on February 17, 2012 at 9:20 am
  • जोसेफ कलम बाड़ा

रोम 16 फरवरी 2012, (वीआर वर्ल्ड) संत पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने बुधवार 15 फरवरी की संध्या पहर में रोम स्थित ” अवर लेडी ऑफ कांफिडेन्स ” नामक प्रमुख सेमिनरी का दौरा किया।

उन्होंने विश्वास की माता मरिया की प्रतिमा की वंदना की तथा सेमिनरी छात्रों से मिले। संत पापा ने अपने पूर्वाधिकारी धन्य संत पापा जोन पौल द्वितीय द्वारा सेमिनरी की संरक्षिका के पर्व दिवस पर सेमिनरी का दौरा करने की परम्परा को जारी रखा।

संत पापा के सेमिनरी आगमन पर ‘तू एस पेत्रुस’ गीत का गायन किया गया और इसके बाद संध्या वंदना प्रार्थना का पाठ किया गया। रोमियों के नाम प्रेरित संत पौलुस के पत्र के 12 वें अध्याय का पठन किया गया जिसमें लिखा है – भाईयो, मैं ईश्वर की दया के नाम पर अनुरोध करता हूँ कि आप मन तथा ह्दय से उसकी उपासना करें और एक जीवंत, पवित्र तथा सुग्राह्य बलि के रूप में अपने को ईश्वर के प्रति अर्पित करें।

इस पाठ पर चिंतन प्रस्तुत करते हुए संत पापा ने कहा कि यह नैतिक जीवन जीने के सरल आह्वान से कहीँ अधिक माँग है जिसमें ताड़ना और सांत्वना दोनों है।

उन्होंने साहसपूर्ण सेवा और अपने जीवन में ईश्वर की इच्छा को जानने के लिए यथार्थ मनन चिंतन करने के लिए गुरूकुल छात्रों को प्रोत्साहन दिया तथा उन्हें स्मरण कराया कि वर्तमान युग के जनमत से बंधे नहीं रहें।

‘अवर लेडी ऑफ कांफिडेन्स’ की सहायता की याचना करते हुए उन्होंने कहा कि ईश्वर को हम पूर्ण बदलाव लाने की अनुमति प्रदान करें जो वास्तव में हमें नया प्राणी बनायें। संध्या वंदना प्रार्थना का अंत पवित्र साक्रमेंत की आराधना के साथ हुआ।

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अफ्रीका और यूरोप के धर्माध्यक्षों के लिए संत पापा का संदेश

In Charity on February 17, 2012 at 9:17 am
  • जोसेफ कलम बाड़ा

वाटिकन सिटी 16 फरवरी 2012 (सेदोक, वी आर वर्ल्ड) अफ्रीका और यूरोप के धर्माध्यक्षीय सम्मेंलनों की समिति की 13 फरवरी से आरम्भ 5 दिवसीय दूसरी विचार गोष्ठी जो “सुसमाचार आज: अफ्रीका और यूरोप के बीच एकता और मेषपालीय सहयोग” (“Evangelization today: communinon and pastoral collaboration between Africa and Europe”)  शीर्षक से रोम में सम्पन्न हो रही है। संत पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने इस विचारगोष्ठी के प्रतिभागी कार्डिनलों और धर्माध्यक्षों को गुरूवार 16 फरवरी को वाटिकन स्थित कलेमेंतीन सभागार में सम्बोधित किया।

उन्होंने यूरोपीय धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों की समिति के अध्यक्ष कार्डिनल पीटर एरदो और अफ्रीका तथा मडागास्कर के धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों की समिति के अध्यक्ष कार्डिनल पोलिकार्प पेंगो को उनके हार्दिक उदबोधन के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि सन् 2004 में आयोजित पहली विचारगोष्ठी के बाद से परस्पर सामुदायिकता और मेषपालीय सहयोग के लिए किये जा रहे अध्ययन दिवसों का प्रसार करने के काम से जुड़े सब लोगों को वे धन्यवाद देते हैं।

संत पापा ने कहा कि इन वर्षों में दोंनों महादेशों के कलीसियाई समुदायों के मध्य मैत्री और सहयोग पूर्ण संबंध से मिले आध्यात्मिक फलों के लिए वे ईश्वर को धन्यवाद देते हैं।

सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि भिन्न होने पर भी धर्माध्यक्षों ने प्रभु येसु और और उनके सुसमाचार की उदघोषणा के कार्य़ में भाईचारे की भावना का प्रदर्शन किया है।

उन्होंने कहा कि यूरोप की कलीसिया के लिए अफ्रीका की कलीसिया के साथ साक्षात्कार होना आशा और आनन्द से पूर्ण कृपा का कारण है। दूसरी ओर अनेक कठिनाईयों और शांति तथा मेलमिलाप की जरूरत के मध्य भी अफ्रीका की कलीसिया ती जीवंतता तथा अपने विश्वास को दूसरों के साथ बांटने के लिए इच्छुक है।

संत पापा ने कहा कि अफ्रीका में कलीसिया के सामने विश्वास और परोपकार के मध्य लिंक पर ध्यान देना जरूरी है जो एक दूसरे को आलोकित करते हैं। संत पापा ने सुसमाचार और अपने प्रेरितिक पत्र पोरता फिदेई से कथन को उद्धृत करते हुए कहा कि ख्रीस्त का प्रेम दिलों को भर देता है तथा सुसमाचार प्रचार को गति प्रदान करता है।

 उन्होंने धर्माध्यक्षों के सामने प्रस्तुत वर्तमान चुनौतियों को देखते हुए कहा कि धार्मिक उदासीनता, अस्पष्ट धार्मिकता,सत्य और निरंतरता से जुड़े सवालों का सामना नहीं कर सकते हैं। यूरोप और अफ्रीका में भी धार्मिक उदासीनता बहुधा ईसाई धर्म के विरूद्ध है।

उन्होंने कहा कि सुसमाचार प्रचार के सामने अन्य चुनौती सुखवाद है जिसने दैनिक जीवन, परिवार तथा जीवन के अस्तित्व संबंधी मूल्यों को ही प्रभावित कर दिया है। अश्लील साहित्य तथा वेश्यावृत्ति का प्रसार गंभीर सामाजिक अशांति के लक्षण हैं।

संत पापा ने इन चुनौतियों के मध्य धर्माध्यक्षों को प्रोत्साहन दिया कि वे इन मुददों के प्रति सचेत रहें जो उनकी प्रेरितिक जिम्मेदारी के सामने चुनौती प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने धर्माध्यक्षों को निराश नहीं होने तथा अपने समर्पण और आशा का नवीनीकरण करने को कहा क्योंकि ख्रीस्त सदैव हमारे साथ हैं। इसके साथ ही उन्होंने परिवार के महत्व को रेखांकित करते हुए परिवार प्रेरिताई पर विशेष ध्यान देने को कहा।

परिवार में जो कि रीति रिवाजों और परम्पराओं तथा विश्वास से जुडे धार्मिक अनुष्ठानों को धारण करता है यह बुलाहटों के विकसित होने के लिए सबसे उपयुक्त वातावरण देता है।

उपभोक्तावादी मानसिकता का इनपर नकारात्मक असर पड़ सकता है इसलिए पुरोहिताई और धर्मसमाजी जीवन के लिए बुलाहटों का प्रसार करने के लिए विशिष्ट ध्यान देने की जरूरत है।

 उन्होंने कहा कि यूरोप और अफ्रीका में उदार युवाओं की जरूरत है जो अपने भविष्य का उत्तरदायित्व जिम्मेदारीपूर्वक ले सकें तथा संस्थानों के मन में भी हो कि इन युवाओं में भविष्य निहित है तथा यथासंभव उपाय किये जायें कि उनका पथ अनिश्चिचतता और अंधकारमय न हो।

संत पापा ने सांस्कृतिक पहलू के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि कलीसिया यथार्थ संस्कृति के हर रूप का सम्मान कर प्रसार करती है जो ईशवचन की समृद्धि को तथा ख्रीस्त के पास्काई रहस्य से मिलनेवाली कृपा को अर्पित करती है। इसके साथ ही संत पापा ने कहा कि इस विचारगोष्ठी ने धर्माध्यक्षों को दोनों महादेशों में कलीसिया के सामने आनेवाली समस्याओं पर चिंतन करने का अवसर दिया है।

समस्याएँ कम नहीं हो तथा यदा कदा सार्थक हैं लेकिन इसके साथ ही प्रमाण हैं कि कलीसिया जीवित है, बढ़ रही है तथा सुसमाचार प्रचार के मिशन को जारी रखने से डरती नहीं है।

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