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Archive for February 22nd, 2012|Daily archive page

राखबुध एवं चालीसा काल

In Church on February 22, 2012 at 8:20 am

राखबुध और चालीसा काल की शुभकामनायें और

आध्यात्मिक वरदान की कामना

वाटिकन रेडियो हिन्दी सेवा, रोम

यौन दुराचारियों के बाधियाकरण प्रस्ताव से मचा बवाल

In Church on February 22, 2012 at 8:05 am
  • जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

नई दिल्ली, 21 फरवरी सन् 2012 (ऊका समाचार): नई दिल्ली की एक अदालत की न्यायाधीश ने शुक्रवार को यौन दुराचारियों के लिये बाधियाकरण को उपयुक्त सज़ा बताकर देश में वाद विवाद को उत्पन्न कर दिया है।

एक व्यक्ति को अपनी पोती का अपहरण एवं बलात्कार करने का दोषी पाने के बाद अपर सत्र की न्यायमूर्ति कामिनी लाओ ने कहा, “बच्चों के विरुद्ध यौन दुराचार करनेवाले तथा बलात्कार करनेवाले के लिये बाधियाकरण सर्वाधिक उपयुक्त सज़ा हो सकती है किन्तु इस अदालत के हाथ बन्धे हैं क्योंकि विधान में इसका प्रावधान कोई नहीं है।”

कई लोगों ने न्यायाधीश के वकतव्य को अत्यधिक कठोर बताते हुए इसकी आलोचना की है।

काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के प्रवक्ता फादर बाबू जोसफ ने कहा कि यौन दुराचारी को, निश्चित्त रूप से, कठोर दण्ड दिया जाना चाहिये किन्तु किसी व्यक्ति को अशक्त या अपांग कर देना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की सज़ा अत्यधिक क्रूर एवं हमारे संवैधानिक सिद्धान्तों के विरुद्ध है।

इस बीच कुछ लोगों ने न्यायाधीश के प्रस्ताव को समर्थन भी दिया है।

बन्धुआ मज़दूर मुक्ति मोर्चा संगठन के स्वामी अग्निवेश ने इसे प्रभावशाली समाधान बताया। उनका कहना है कि बच्चों का शील हरण करनेवाले तथा बलात्कार करनेवालों को कड़ी सज़ा मिलनी चाहिये तथा सन्देश ज़ोरदार एवं स्पष्ट होना चाहिये। उन्होंने विधि आयोग से भी निवेदन किया कि इस दिशा में वह उपयुक्त कदम उठाये।


यौन दुराचार से जीवन कष्टकर

In Church on February 22, 2012 at 8:03 am
  • जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

डबलिन, 21 फरवरी सन् 2012 (सी.एन.एस.): आयरलैण्ड के लिये प्रेषित नये परमधर्मपीठीय राजदूत ने कहा कि सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें इस बात के प्रति सचेत हैं कि यौन दुराचार के प्रकरणों ने आयरी काथलिकों के जीवन को कष्टकर बनाया है।

राजधानी डबलिन में, रविवार, 19 फरवरी को, सन्त पापा के प्रतिनिधि रूप में अपने स्वागत के उपलक्ष्य में आयोजित ख्रीस्तयाग के अवसर पर आयरलैण्ड में परमधर्मपीठीय प्रेरितिक राजदूत महाधर्माध्यक्ष चार्ल्स ब्राऊन ने कहा कि सन्त पापा इस बात को समझते हैं, “कि हाल के ये वर्ष आयरलैण्ड के काथलिकों के लिये अत्यधिक कष्टमय सिद्ध हुए हैं।”

महाधर्माध्यक्ष ब्राऊन ने कहा, “कुछेक काथलिक पुरोहितों एवं धर्मसमाजियों द्वारा किये यौन दुराचारों ने सन्त पापा को व्याकुल किया है तथा आघात पहुँचाया है। उन्होंने उन पीड़ितों के घावों को महसूस किया है जिनकी आवाज़ कभी सुनी नहीं गई थी।”

महाधर्माध्यक्ष ब्राऊन इससे पूर्व विश्वास एवं धर्मसिद्धान्त सम्बन्धी परमधर्मपीठीय परिषद में काम कर चुके हैं। अपने अनुभवों के आधार पर उन्होंने कहा, “मैं अपने अनुभव से कह सकता हूँ कि सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें आयरलैण्ड के लोगों से प्रेम करते हैं तथा आयरलैण्ड की कलीसिया, उसके इतिहास, उसके प्रेरितिक उत्साह एवं दृढ़ विश्वास के प्रति सम्मान भाव रखते हैं।”

विश्वास एवं धर्मसिद्धान्त सम्बन्धी परमधर्मपीठीय परिषद में सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें की पूर्व भूमिका के सन्दर्भ में उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आरम्भ से सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें सभी आवश्यक परिवर्तनों को कार्यरूप देने के लिये कृतसंकल्प रहे हैं ताकि कलीसिया विश्वासघात करनेवालों से कठोर एवं प्रभावात्मक ढंग से निपट सके।

ग़ौरतलब है कि विगत जुलाई माह में आयरी प्रधानमंत्री एडवर्ड केनी ने, पुरोहितों के यौन दुराचारों पर वाटिकन की स्थिति को परिकलित तथा तिरस्कारपूर्ण बताया था। इसके बाद वाटिकन ने पूर्व प्रेरितिक राजदूत महाधर्माध्यक्ष जुसेप्पे लेआन्सा को वापस बुला लिया था। उन्हीं के स्थान पर अब सन्त पापा ने महाधर्माध्यक्ष ब्राऊन को आयरलैण्ड में परमधर्मपीठ का नया राजदूत नियुक्त किया है।

वाटिकन में इस सप्ताह “प्रजनन” पर एक कार्यशिविर

In Church on February 22, 2012 at 8:01 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

वाटिकन सिटी, 21 फरवरी सन् 2012 (आन्सा): वाटिकन में इस सप्ताह प्रजनन विषय पर एक कार्यशिविर का आयोजन किया गया है जिसमें विशेष रूप से बाँझपन की समस्या पर ध्यान केन्द्रित किया जायेगा।

वाटिकन स्थित जीवन सम्बन्धी परमधर्मपीठीय अकादमी के तत्वाधान में, शुक्रवार से, विश्व के वैज्ञानिक एवं चिकित्सक बाँझपन की समस्या तथा इसके समाधान की दिशा में किये जा रहे अनुसन्धानों पर विचार विमर्श हेतु वाटिकन में एकत्र हो रहे हैं।

वाटिकन की जीवन सम्बन्धी परमधर्मपीठीय अकादमी की एक विज्ञप्ति में प्रकाशित किया गया कि बांझपन की समस्या से विश्व की लगभग 15 प्रतिशत जनता प्रभावित है।

कुछेक विकासशील देशों में यह समस्या 30 प्रतिशत लोगों को प्रभावित करती है। दम्पत्तियों को पीड़ित करनेवाले इन्हीं आँकड़ों के मद्देनज़र वाटिकन में उक्त कार्यशिविर का आयोजन किया गया है ताकि अनुसन्धान कार्य को बढ़ावा दिया जा सके तथा नये एवं प्रभावशाली समाधानों का लाभ सभी तक पहुँचाया जा सके।

शुक्रवार, 24 फरवरी को आरम्भ होनेवाले इस कार्यशिविर का विषय हैः “बाँझपन का निदान एवं चिकित्सा”। इसमें अन्तरराष्ट्रीय स्तर के विख्यात वैज्ञानिक एवं चिकित्सा जगत के विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।

वाटिकन की विज्ञप्ति के अनुसार विशेषज्ञों से आग्रह किया गया है कि कार्यशिविर से पूर्व वे इस विषय पर उपलब्ध सभी निदानों, निरूपणों, चिकित्सा विकल्पों एवं उपचारों पर अपने अपने दस्तावेज़ तैयार करें।

कार्यशिविर के दौरान विभिन्न व्यावसायिक एवं सांस्कृतिक अंचलों से आनेवाले 16 अनुसन्धान विशेषज्ञों द्वारा प्रतिपादित वैज्ञानिक निदानों को पढ़ा जायेगा तथा उनपर विचार विमर्श को स्थान दिया जायेगा।

नये कार्डिनल एवं उनके परिजनों संत पापा से मिले

In Church on February 22, 2012 at 7:56 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

वाटिकन सिटी, 21 फरवरी सन् 2012 (सेदोक): सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने, सोमवार को, वाटिकन स्थित सन्त पापा पौल षष्टम भवन में 22 नवनियुक्त कार्डिनलों तथा उनके परिवारों एवं मित्रों से मुलाक़ात की।

इस अवसर पर उपस्थित लगभग चार हज़ार लोगों को सम्बोधित कर सन्त पापा ने कहा कि काथलिक कलीसिया के नेता प्रेरितों द्वारा हस्तान्तरित विश्वास तथा प्रभु ख्रीस्त के प्रति निष्ठा को सुनिश्चित्त रखने के लिये बुलाये गये हैं।

उन्होंने कहा कि इस कठिन कार्य को साहस पूर्वक सम्पादित करने के लिये कलीसियाई नेताओं को काथलिक कलीसिया के सभी सदस्यों के समर्थन की नितान्त आवश्यकता है।

नये कार्डिनलों को उन्होंने बधाई दी तथा सभी से निवेदन किया कि प्रतिदिन प्रार्थना द्वारा वे कलीसिया के इन धर्माधिकारियों को समर्थन दें जो नई ज़िम्मेदारियों का वहन करने जा रहे हैं।

सन्त पापा ने आशा व्यक्त की कि नये कार्डिनलों की रचना कलीसिया के सभी सदस्यों के लिये, प्रभु ख्रीस्त में अपने विश्वास को सुदृढ़ करने का एक महत्वपूर्ण अवसर सिद्ध हो। उन्होंने कहा, “नये कार्डिनलों के सभी परिजनों एवं मित्रों सहित सम्पूर्ण कलीसिया के सदस्य इन धर्मशिक्षकों एवं प्रेरितिक मेषपालों की प्रेरितिक उत्कंठाओं को समझें, उनके शब्दों को जीवन्त आशा के साथ सुनें तथा उनके लिये प्रभु ईश्वर से प्रार्थना करें।”

विश्व के सभी काथलिक धर्मानुयायियों का सन्त पापा ने आह्वान किया कि वे नये कार्डिनलों के लिये प्रार्थना करें ताकि वे सूझबूझ एवं विवेक के साथ सार्वभौमिक कलीसिया एवं परमधर्मपीठ के प्रति अपनी सेवाएँ अर्पित कर सकें।

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

वाटिकन सिटी, 21 फरवरी सन् 2012 (सेदोक): सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने, सोमवार को, वाटिकन स्थित सन्त पापा पौल षष्टम भवन में 22 नवनियुक्त कार्डिनलों तथा उनके परिवारों एवं मित्रों से मुलाक़ात की।

इस अवसर पर उपस्थित लगभग चार हज़ार लोगों को सम्बोधित कर सन्त पापा ने कहा कि काथलिक कलीसिया के नेता प्रेरितों द्वारा हस्तान्तरित विश्वास तथा प्रभु ख्रीस्त के प्रति निष्ठा को सुनिश्चित्त रखने के लिये बुलाये गये हैं।

उन्होंने कहा कि इस कठिन कार्य को साहस पूर्वक सम्पादित करने के लिये कलीसियाई नेताओं को काथलिक कलीसिया के सभी सदस्यों के समर्थन की नितान्त आवश्यकता है।

नये कार्डिनलों को उन्होंने बधाई दी तथा सभी से निवेदन किया कि प्रतिदिन प्रार्थना द्वारा वे कलीसिया के इन धर्माधिकारियों को समर्थन दें जो नई ज़िम्मेदारियों का वहन करने जा रहे हैं।

सन्त पापा ने आशा व्यक्त की कि नये कार्डिनलों की रचना कलीसिया के सभी सदस्यों के लिये, प्रभु ख्रीस्त में अपने विश्वास को सुदृढ़ करने का एक महत्वपूर्ण अवसर सिद्ध हो। उन्होंने कहा, “नये कार्डिनलों के सभी परिजनों एवं मित्रों सहित सम्पूर्ण कलीसिया के सदस्य इन धर्मशिक्षकों एवं प्रेरितिक मेषपालों की प्रेरितिक उत्कंठाओं को समझें, उनके शब्दों को जीवन्त आशा के साथ सुनें तथा उनके लिये प्रभु ईश्वर से प्रार्थना करें।”

विश्व के सभी काथलिक धर्मानुयायियों का सन्त पापा ने आह्वान किया कि वे नये कार्डिनलों के लिये प्रार्थना करें ताकि वे सूझबूझ एवं विवेक के साथ सार्वभौमिक कलीसिया एवं परमधर्मपीठ के प्रति अपनी सेवाएँ अर्पित कर सकें।

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