Vatican Radio HIndi

Archive for February 24th, 2012|Daily archive page

पाठकों व श्रोताओं के पत्र

In Church on February 24, 2012 at 7:03 am

वाटिकन रेडियो के चेतना जागरण कार्यक्रम में प्रस्तुत नाटक एवं सामयिक समीक्षा रोचक और ज्ञानवर्द्धक होते हैं। मुझे रविवारीय धर्मग्रंथ एवं आराधना विधि चिंतन तथा संत पापा के संदेश सार्थक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। वाटिकन रेडियो विश्व प्रसारणों में एक उत्तम प्रसारण है जो बाईबल का संदेश विश्व के लोगों तक अपने प्रसारण के माध्यम से पहुँचाता है। मैं भी अपने क्षेत्र में वाटिकन रेडियो का प्रचार और प्रसार नियमित रूप से कर रहा हूँ।

दीपक कुमार दास ढोली सकरा मुजफ्फरपुर बिहार
मुझे वाटिकन भारती पत्रिका नियमित रूप से मिल रही है इसके लिए मैं आप सभी को धन्यवाद देती हूँ। मैं आशा करती हूँ कि आनेवाले दिनों में भी आप इसी तरह पत्रिका और अन्य सामग्री भेजते रहिएगा। मैं और मेरे परिजन आपके सभी कार्यक्रम पसंद करते हैं। आपके यहाँ से प्रसारित कार्यक्रम हम श्रोताओं के लिए प्रेरणादायक है। मैं समयाभाव के कारण रेडियो कम ही सुन पाती हूँ परन्तु समय निकाल कर आपके कार्यक्रम जरूर सुनने की कोशिश करती हूँ। मैं यह भी कहना चाहती हूँ कि श्रोता सम्मेलन हमारे पटना शहर के रवि भारती में रखिएगा।

बीना तिर्की पटना
प्रभु मसीह के पवित्र और मधुर नाम में सप्रेम नमस्कार और कोटिशः धन्यवाद। 8 जनवरी को मैंने चेतना जागरण के तहत ” रास्ते का सफर ” नामक नाटक सुना जो बहुत ही अच्छा लगा। इस नाटक से यह शिक्षा मिली कि कभी भी झूठ बोलकर, दूसरों को धोखा देकर पैसा नहीं लेना चाहिए। वाटिकन रेडियो श्रोताओं का सच्चा पथ प्रदर्शक है। आपके केन्द्र के साप्ताहिक कार्यक्रम आत्मिक ज्ञान से भरे रहते हैं। युवा कार्यक्रम नई दिशाएं और चेतना जागरण, सामयिक लोकोपकारी चर्चा, आमदर्शन के समय संत पापा का संदेश बहुत ही ज्ञानवर्द्धक और रोचक होता है। हम इन्हें नियमित रूप से सुनते हैं। इन कार्यक्रमों के द्वारा हमें सार्थक मार्गदर्शन मिलता है।
उज्ज्वल सिंह धनबाद

हम वाटिकन रेडियो प्रसारण सुनने के लिए बहुत चिंतित थे कारण कि हमारा रेडियो खराब हो गया था लेकिन फा. विजय एक्का ने हमारे लिए नये रेडियो की व्यवस्था की जो हमें 26 दिसम्बर को मिला। इस तरह हम 27 दिसम्बर से पुनः आपके कार्यक्रम सुनने लगे लेकिन उड़ीसा में हत्या की घटना सुनकर हमें थोड़ा दुःख हुआ। हम खुदा से दुआ करते हैं कि नये साल में ईश्वर हम सब को सभी विपत्तियों से बचाये रखे।
हाबिल और देवनिस मिंज कंसबहाल सुंदरगढ़ ओड़िसा

आप सभी के जीवन में ये वर्ष खुशहाली लेकर आये। वाटिकन रेडियो के कार्यक्रम से आत्मिक शांति मिलती है तथा सुंदर जीवन जीने की शिक्षा मिलती है। मैं वाटिकन रेडियो को जीवन का पथ प्रदर्शक मानता हूँ यह हम श्रोताओं को जीवन की राह दिखाता है। आपके सभी कार्यक्रम ज्ञानवर्द्धक होते हैं। यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि वाटिकन रेडियो की स्थापना के 80 वर्ष हो गये हैं। मेरी कामना है कि यह सूर्य की भाँति चमकता रहे।
नीलेश कुमार सिंह हरपुर बक्सर बिहार

बाईबल कार्यक्रम और समाचार

In Church, Podcast VR Programme on February 24, 2012 at 7:00 am

बुधवारीय संदेश और पाठकों व श्रोताओं के पत्र

In Church on February 24, 2012 at 6:59 am

मान्यवर थोमस डिसूजा कोलकाता के नये महाधर्माध्यक्ष नियुक्त

In Church on February 24, 2012 at 6:56 am

वाटिकन सिटी 23 फरवरी 2012 (सेदोक) संत पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने कोलकाता महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष लुकस सिरकार का त्यागपत्र 23 फरवरी को स्वीकार कर लिया।

उन्होंने कलीसियाई विधान की धारा 401 की उपधारा 1 के तहत सेवानिवृति के लिए 75 वर्ष की आयु पूरी होने पर महाधर्माध्यक्ष सिरकार का त्यागपत्र स्वीकार कर उनके स्थान में कोलकाता के सहयोगी धर्माध्यक्ष रहे मान्यवर थोमस डिसूजा कोलकाता महाधर्मप्रांत को नया महाधर्माध्यक्ष नियुक्त किया है।

26 अगस्त 1950 को मंगलोर धर्मप्रांत के अयापद्दी में जन्मे 61 वर्षीय मान्यवर थोमस डिसूजा कर्नाटक राज्य के हैं। वे 1966 में पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग धर्मप्रांत में मिशनरी काम में सहयोग करने के लिए आये और 1977 में पुरोहित अभिषिक्त हुए। उन्होंने 1994 में दार्जिलिंग के धर्माध्यक्ष एरिक बेंजामिन का निधन हो जाने से सन 1997 तक धर्मप्रांतीय प्रशासक के रूप में काम किया।

इसके बाद वे नये बागडोगरा धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष नियुक्त किये गये तथा जनवरी 1998 में धर्माध्यक्ष अभिषिक्त हुए. पिछले साल 12 मार्च को संत पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने उन्हें कोलकाता का सहयोगी धर्माध्यक्ष नियुक्त किया। महाधर्माध्यक्ष लुकस सिरकार जो पहले कृषनगर धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष थे वे सन 2002 को कोलकाता के महाधर्माध्यक्ष के पद पर स्थानांतरित किये गये थे।

राख तपस्या और पुनरूत्थान का प्रतीक

In Church on February 24, 2012 at 6:54 am

जोसेफ कमल बाड़ा
रोम 23 फरवरी 2012 सीएनएस) संत पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने रोम के अवन्तीन पहाडी पर पांचवी सदी में निर्मित संत सबीना गिरजाघर में 22 फरवरी को राखबुध के दिन प्रवचन करते हुए पवित्र धर्मशास्त्र तथा ख्रीस्तीय विचार के तहत राख के अर्थ पर प्रकाश डाला। राख संस्कारीय चिह्न नहीं है लेकिन यह प्रार्थना और ईसाईयों के पवित्रीकरण से जुड़ा है।

राखबुध के राख इसलिए हमें मानव की सृष्टि का स्मरण कराते हैं। पाप के कारण इसे नकारात्मक अर्थ मिलता है लेकिन पतन से पूर्व भूमि पूरी तरह अच्छी है लेकिन आदम और हेवा द्वारा पाप करने के बाद यह कांटे और ऊँटकटारे उत्पन्न करती है। ईश्वर की सृजनकारी स्थिति का स्मरण कराने के स्थान पर यह मृत्यु का संकेत बन जाती है।

संत पापा ने कहा कि यह परिवर्तन दिखाता है कि धरती स्वयं मानव की नियति में सहभागी होती है। भूमि को शाप दिया जाना मनुष्य को अपनी सीमितता तथा मानव स्वभाव को पहचानने के लिए मदद करता है। यह शाप पाप के द्वारा आता है न कि ईश्वर से । इस सज़ा में भी ईश्वर की ओर से अच्छा मनोरथ है। तुम मिट्टी हो और मिट्टी में मिल जाओगे इन शब्दों में न केवल सज़ा है लेकिन मुक्ति के पथ की उदघोषणा भी है।

संत पापा ने चालीसाकाल के बारे में कहा कि यह तपस्या का पवित्र संकेत है जो पाप के कारण शाप पाने तथा गिरे हुए विश्व में पुनरूत्थान की प्रतिज्ञा को भी प्रतिबिम्बित करता है। पवित्र धर्मशास्त्र के शब्द ” तुम मिट्टी हो और मिट्टी में मिल जाओगे ” पश्चाताप करने, विनम्र बनने तथा हमारी मरणशील अवस्था के बारे में जागरूक होने के लिए निमंत्रण है।

संत पापा ने कहा कि हमें निराश या हताश नहीं होना है लेकिन अपनी मरणशील अवस्था में स्वागत करें ईश्वर की निकटता का जो पुनरूत्थान के लिए रास्ता खोलती है, हम मृत्यु से परे स्वर्ग पुनः पा सकते हैं। यही भाव जो पुनर्जीवित येसु से हमें मिलती है हमारे दिलों को पाषाण हृदय से बदलकर कोमल दिलों में बदल सकती है। चालीसाकाल पास्का के पुनरूत्थान की ओर यात्रा है।

उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि चालीसाकाल के आरम्भ में राख का विलेपन पाना या मस्तक पर भस्म रमाना पश्चाताप करने तथा विनम्र बनने का बुलावा है साथ ही यह चिह्न है कि विश्वासी जानते हैं कि उनके जीवन में मृत्यु अंतिम शब्द नहीं है।

राखबुध का ख्रीस्तयाग संत सबीना चर्च में

In Church on February 24, 2012 at 6:53 am

रोम 23 फरवरी 2012 (सीएनएस) कलीसियाई परम्परा को जारी रखते हुए बुधवार, 22 फरवरी की सन्ध्या सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें, रोम स्थित सन्त आनसेलमो गिरजाघर जाकर राख बुध की धर्मविधि सम्पन्न किया तथा इसके बाद सन्त सबिना गिरजाघर में ख्रीस्तयाग अर्पित किया।
संत पापा की अध्यक्षता में संत सबीना गिरजाघर में सम्पन्न ख्रीस्तयाग से पूर्व संत अन्सेल्म चर्च से शोभायात्रा निकाली गयी। अन्य वर्षों के समान 84 वर्षीय संत पापा बेनेडिक्ट 16 वें इन दोनों चर्चों के मध्य चल कर नहीं गये लेकिन पोपमोबाईल पर चले ताकि अपनी ऊर्जा बचा सकें। वे अक्तूबर माह से इस पोप मोबाईल का प्रयोग संत पेत्रुस बासिलिका में आने जाने के लिए कर रहे हैं। वाटिकन प्रवक्ता फादर फेदेरिको लोम्बार्दी ने कहा कि इस प्लेटफोर्म का उपयोग करने से संत पापा को अपनी ताकत बचाने के लिए सहायता मिलती है और उन्हें स्वास्थ्य संबंधी कोई गंभीर समस्या नहीं है।
राखबुध को ख्रीस्तयाग के दौरान संत पापा ने संत सबीना गिरजाघर के प्रमुख अधिकारी पुरोहित सेवानिवृत्त स्लोवाकिया के कार्डिनल जोसेफ तोमको से अपने मस्तक पर राख का लेपन ग्रहण किया।

रोम धर्मप्रांत के पुरोहितों के साथ संत पापा की वार्षिक मुलाकात

In Church on February 24, 2012 at 6:50 am

जोसेफ कमल बाड़ा

वाटिकन सिटी 23 फरवरी 2012 (सेदोक, वीआर अंग्रेजी) रोम के धर्माध्यक्ष संत पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने चालीसाकाल के आरम्भ में रोम धर्मप्रांत के पुरोहितों के साथ अपनी वार्षिक मुलाकात गुरूवार 23 फरवरी को सम्पन्न की।

संत पापा पौल षष्टम सभागार में सम्पन्न यह बैठक प्रेरित संत पौलुस द्वारा एफेसियों को लिखे पत्र से लिये गये पाठ और चिंतन पर केन्दित रहा।

प्रभु के कारण कैदी बनाये गये जंजीरों में बंधे प्रेरित संत पौलुस एफेसियों से आग्रह करते हैं कि वे अपने बुलावे के अनुसार दीनता और विनम्रता में जीवन जीयें, धैर्यपूर्वक प्रेम में एक दूसरे को सहन करें तथा शांति के बंधन में एकता में रहें।

एक शरीर और एक आत्मा है। वे एक ही आशा में अपने बुलावे को एक प्रभु, एक विश्वास, एक बपतिस्मा, एक ही ईश्वर जो सबके पिता हैं उनमें जीयें। ख्रीस्त के उपहार में प्रत्येक जन को ईश्वरीय कृपा मिली है।

संत पापा ने प्रेरित संत पौलुस के उक्त भावों को जो विभाजित मसीही समुदाय को सम्बोधित था इसे पुरोहितों से अपनी प्रेरिताई क्षेत्र में लागू करने को कहा। उन्होंने कहा कि पुरोहितों को अपनी बुलाहट के अनुसार बुलाया गया है तथा बपतिस्मा में मिले बुलावे को गहन बनायें।

संत पापा ने विनम्रता और भद्रता के महत्व पर जोर दिया ताकि सब विश्वासियों के मध्य एकता का प्रसार हो। उन्होंने कहा कि विनम्रता एकता की कुँजी है। जंजीर में बंधे कैदी संत पौलुस पीड़ा सह रहे सबलोगों के साथ सामुदायिकता की भावना में हमें ख्रीस्त की पीड़ा में सहभागी होने का आह्वान करते हैं। मेषपाल और नबी के रूप में पुरोहितों को चाहिए कि इस पवित्र चालीसाकाल में ख्रीस्त के दुखभोग और मृत्यु के द्वारा अपनी रेवड़ को पुनरूत्थान की महिमा को ओर ले चलें

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