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चुनावी घोषणा पत्रों के लिये फटकार

In Church on February 27, 2012 at 6:41 pm

गोवा, 27 फरवरी, 2012 (कैथन्यूज़) सामाजिक न्याय और शांति के लिये बनी समिति (सीएसजेपी) के महासचिव फादर मावेरिक फर्नान्डेज़ ने राजनीतिक पार्टियों को इस बात के लिये फटकारा है कि पार्टियों ने अपने चुनाव घोषणा पत्रों में राज्य के महत्वपूर्ण मुद्दों को नज़रअंदाज़ कर दिया है।

फादर फ़र्नान्डेज़ नेक कहा, “पार्टियों ने गाँव, परिषदों और नगरपालिकाओं के लिये सड़क, पानी और अन्य सुविधाओं की घोषणायें कीं हैं पर विधान सभा के लिये कुछ नहीं।

उन्होंने कहा कि राज्य के लिये कुछ महत्वपूर्ण अधिनियमों – जैसे परम्परागत समुदायों के भूमि हस्तांतरण और संसाधनों के स्वमित्व संबंधी अधिकारों के बारे में कोई चर्चा नहीं की है।

विदित हो कि गोवा में 3 मार्च को 40 सदस्यीय विधान सभा के लिये वोट डाले जायेंगे।

सीएसजेपी के सदस्यों ने मीडिया के समक्ष अपने कई प्रस्तावों की माँग रखी जिनमें भूमि की बिक्री के रूपांतरण पर अधिस्थगन, राज्य में मानव अधिकार आयोग और अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए कमीशन की स्थापना और क्षेत्रीय योजना 2021 के पुनर्सूत्रीकरण शामिल हैं।

फादर फर्नान्डेज़ ने माँग की कि पंचायत के फंड के विकेद्रीकरण और नगरपालिकाओं में भ्रष्टाचार पर नियंत्रण जैसे मुद्दों को शामिल किया जाना चाहिये।

उन्होंने कहा, “वर्तमान नियम खनिज संबंधी अनियमितताओं और राज्य की अचल सम्पति के उछाल को रोक पाने में असफल रही है।”

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पास्टर यूसेफ नदारखानी को मौत की सजा ‘तुरन्त’

In Church, Human Rights on February 27, 2012 at 6:40 pm

ईरान, 27 फरवरी, 2012 (कैथोलिक हेराल्ड) अमेरिका के एक मानवाधिकार संगठन ने कहा है कि ईरान में ईसाई पास्टर यूसेफ नदारखानी को निकट भविष्य में कभी मौत की सजा दे दी जायेगी।

अमेरिकन सेन्टर फॉर लॉ एंड जस्टिस ने उक्त बात की जानकारी देते हुए कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान से प्राप्त जानकारी के अनुसार नदारखानी को मौत की सज़ा सुनायी जा चुकी है क्योंकि उसने इस्लाम धर्म में वापस आने से इन्कार कर दिया है।

अमेरिकन सेन्टर फॉर लॉ एंड जस्टिस के निदेशक जोर्डन सेकुलो ने अमेरिक न्यूज़ सूत्र एमएसएनबीसी का हवाला देते हुए कहा कि “अब तक इस बात की जानकारी प्राप्त है कि वह जीवित है लेकिन ईरान की न्यायालय के अध्यक्ष अयातोल्ला सदेघ लरिजानी को इस बात की स्वीकृति देनी है मृत्युदंड सार्वजनिक हो। जानकारी के मुताबिक कम ही लोगों को सार्वजनिक फाँसी दी गयी है अधिकतर लोगों के साथ यह प्रक्रिया गुप्त रूप से पूर्ण कर दी जाती है।”

निदेशक जोर्डन ने कहा,”हम अब भी माँग कर रहे हैं कि पास्टर की रिहाई अविलंब कर दी जाये।”

विदित हो कि 34 वर्षीय पास्टर नदारखानी को सन् 2009 में ईरान के उत्तरी शहर राश्त से गिरफ़्तार कर लिया गया था।

एक अपील अदालत ने उसके दंड को सही ठहराया क्योंकि उसने तीन बार दिये अवसर के बाद भी इस्लाम धर्म में वापस आने से इंकार कर दिया।

ज्ञात हो कि 2 बच्चों के पिता नदारखानी प्रोटेस्टंट एवान्जेलिक चर्च का एक पास्टर है जो कभी भी मुस्लिम नहीं था पर उसके पृष्ठभूमि इस्लाम की रही है।

कुछ उदारवादी मुसलमानो ने स्वधर्म त्याग के मामले को लेकर मौत की सजा का विरोध किया है।

अहमदिय्या मुस्लिम कम्युनिटी राष्ट्रीय प्रवक्ता हैरिस ज़फर के अनुसार ” मुझे मालूम है कि इस्लाम के नाम पर ऐसा करना इस्लाम नहीं है। यह मानवाधिकारों और इस्लाम दोनों का हनन है।

हैरिस ज़फर ने कुरान का उद्धरण करते हुए कहा “जो विश्वास करे उसे विश्वास करने दो और जो भी हो उसे विश्वास न करने दो।” (कुरान, 18:29)

पूर्व अंगलिकनों का दल संत पापा से मिला

In Church, Unity on February 27, 2012 at 6:39 pm

रोम, 27 फरवरी, 2012 (सीएनए) मोन्सिन्योर कीथ न्यूटन के नेतृत्व में पूर्व अंगलिकन कलीसिया के 100 सदस्यों ने 24 फरवरी को रोम की अपनी तीर्थयात्रा की।

इंगलैंड में बनाये गये ‘पर्सनल ऑर्डिनारियेट ऑफ आवर लेडी ऑफ वालसिंगम’ अध्यक्ष मोन्सिन्योर कीथ न्यूटन ने कहा, “यह बहुत ही मह्त्वपूर्ण बात है कि पिछले पास्का तक हममें से प्रत्येक जन काथलि नहीं था और अब वह उस स्थान पर है जहाँ कैथलिक धर्म के केन्द्र है और जहाँ संत पेत्रुस और पौलुस का कब्रस्थान है ताकि वह वहाँ प्रार्थना करां और ईश्वर को धन्यवाद दे।”

मोन्सिन्योर ने बतलाया कि तीर्थयात्रियों के लिये यह एक कृपा का समय था और वे सभी तीर्थस्थलों से बहुत प्रभावित हुए।

विदित हो कि संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें ने पिछले वर्ष अंगलिकन कलीसिया के सदस्यों को अपनी ‘अंगलिकन विरासत को बरकरार’ रखते हुए काथलिक कलीसिया में आने का मार्ग प्रशस्त किया था।

इसी प्रस्ताव के तहत् ‘पर्सनल ओरडिनारियेट ऑफ आवर लेडी ऑफ वालसिंघम’ की स्थापना की गयी जिसमें 57 पुरोहित और करीब 1,000 सदस्य हैं जो इंगलैड वेल्स और स्कॉटलैंड में निवास करते हैं। समाचार के अनुसार 200 लोकधर्मी और 20 पुरोहित शीघ्र ही इस समुदाय के सदस्य बनेंगे।

पूर्व अंगलिकन दल के उपदेशक और स्कोटिश एपिस्कोपालियन फादर लेन ब्लैक ने कहा कि उनके दिल में जो उद्गार है उन्हें सिर्फ़ “अच्छा” कह कर व्यक्त नहीं किया जा सकता।

पिछले बुधवार 22 फरवरी को संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें ने पौल षष्टम् सभागार में पूर्व अंगलिकनों से मुलाक़ात की और तीर्थयात्रियों ने धन्य जोन हेनरी न्यूमन द्वारा रचित गीत ‘प्रेज़ टू द होलियेस्ट’ गया।

ज्ञात हो, धन्य जोन हेनरी न्यूमन 19वीं सदी के अंगलिकन थे जो बाद में काथलिक कार्डिनल बने और जिन्हें इस नये ओरडिनारियेट का संरक्षक बनाया गया है।

मोन्सिन्योर न्यूटन ने कहा, हमने ईश्वर पर भरोसा किया और ईश्वर ने हमें सबकुछ प्रदान किया है।

बांझपन का सामना आशा और गंभीरतापूर्वक हो

In Church on February 27, 2012 at 6:38 pm

वाटिकन सिटी, 27 फरवरी, 2012 (वीआर, रोम) संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें ने कहा, “कलीसिया ऐसे दम्पतियों के साथ जो बांझपन का दुःख झेल रहे हैं उचित देख-भाल करना चाहती और इसीलिये इस संबंध में चिकित्सा अनुसंधान को प्रोत्साहन देती है।”

संत पापा ने उक्त बातें उस समय कहीं जब उन्होंने शनिवार 25 फरवरी को मानव जीवन के लिये बनी परमधर्मीपठीय अकाडेमी के सदस्यों संबोधित किया।

विदित हो जीवन के लिये बनी परमधर्मपीठीय समिति की 18वीं आम सभा रोम में 23 से 25 फरवरी तक आयोजित की गयी थी। इस सभा में विश्व के स्वास्थ्य, वैज्ञानिक शोध, ईशशास्त्र और दर्शन शास्त्र के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया ताकि बांझपन के कारणों, प्रभावों और इसके निदान के उपाय खोजे जा सकें।

संत पापा ने कहा, “प्रजनन की मानव और ख्रीस्तीय मर्यादा ‘उत्पाद’ (परिणाम) नहीं है, पर यह वैवाहिक संसर्ग, दम्पतियों के प्रेम प्रकटन और उनका मिलन है जो न सिर्फ़ जैविक पर आध्यात्मिक भी है।”

उन्होंने कहा, “ऐसा दृष्टिकोण इसलिये केवल नहीं अपनाया गया है कि दम्पति को शिशु दान मिले पर इसलिये ताकि उन्हें प्रजनन शक्ति प्राप्त हो जिसमें वे पूरी मर्यादा के साथ अपने प्रजनन के निर्णय के प्रति ज़िम्मेदार हों और नवशिशु के प्रजनन में ईश्वर के सह-सृष्टिकर्ता बन सकें।”

उन्होंने कहा, ” बांझपन के निदान और चिकित्सा के लिये अनुसंधान करना उचित वैज्ञानिक तरीका है, पर इससे जुड़ी मानवता का भी सम्मान किया जाना चाहिये जो इससे संलग्न है। वास्तव में, नर और नारी का मिलन और प्रेममय जीवन का समुदाय जिसे हम विवाह के रूप में जानते हैं वह उचित ‘स्थान’ है जहाँ नया मावव प्राणी अस्तित्व में आ सकता है और हमेशा एक उपहार बना रहता है।”

संत पापा ने चेतावनी देते हुए कहा, “जब विज्ञान, दम्पतियों की इस इच्छा की पूर्ति नहीं कर सकता है तो कई लोग कृत्रिम वीर्यरोपन के प्रलोभन में फँसते हैं, जिसमें बांझपन के निदान हेतु मानव प्रजनन और वैज्ञानिकवाद के तर्क पर लाभ हावी होता नज़र आता है और इस संबंध में किये जाने वाले संभवित अनुसंधानों को सीमित कर देता है।”

संत पापा ने कहा, “जो दम्पति बांझपन का अनुभव करते हैं वे यह न समझें कि इससे उनके विवाह की बुलाहट महत्वहीन हो गयी है। उन्हें चाहिये कि वे अपने बपतिस्मा और विवाह के बुलाहट को महत्त्व देते हुए एक नयी मानवता के सृजन में सृष्टिकर्ता के साथ पूर्ण सहयोग करें।”

संत पापा ने कहा, “मैं अनुसंधान में लगे विद्वानों को इस बात के लिये प्रोत्साहन देता हूँ कि वे अपने वैज्ञानिक खोज की यात्रा जारी रखें, जो बौद्धिक रूप से ईमानदार हो और मानवहित को समर्पित विश्वास के साथ जुड़ी हो।

संत पापा ने विशेषज्ञों से कहा, “मानव की चिकित्सा करते हुए इस प्रलोभन में ने फँसे कि बांझपन की समस्या तकनीकि मात्र है। सत्य और भला के प्रति तटस्थ होना उचित वैज्ञानिक प्रगति के मार्ग के लिये घातक है।”

‘यूकैट’ की बिक्री जोरों पर

In Church on February 27, 2012 at 6:34 pm

जस्टिन तिर्की, ये.स.

रोम, इटली, 25 फरवरी, 2012 (सीएनए) युवाओँ की धर्मशिक्षा के लिये लिखी गयी काथलिक धर्मशिक्षा की किताब यूकैट विश्व में सबसे ज़्यादा बिकने वाली काथलिक किताब बन गयी है। उक्त बात की जानकारी देते हुए ‘यूकैट’ के जर्मन प्रकाशक ने बताया, “यूकैट की बिक्री 1.7 मिलियन हो चुकी है। जहाँ भी यह प्रकाशित की जा रही है इसकी बिक्री जोरों पर है।

जर्मन प्रकाशक बेर्नार्ड मुईसेर ने कैथोलिक न्यूज़ एजेन्सी को दिय अपने साक्षात्कार में कहा, स्पेन, अमेरिका और जर्मनी में संत पापा की नयी किताब के साथ बिक्री के हिसाब से पहले नम्बर पर है।”

विदित हो कि सन् 2006 ईस्वी में नियेन्ना के कार्डिनल क्रिस्तोफ स्कोनबोर्न जर्मन प्रकाश बेर्नार्ड ने काथलिक धर्मशिक्षा पर एक किताब प्रकाशित करने की योजना बनायी थी।

इस योजना के तहत् वे चाहते थे कि एक धर्मशिक्षा की किताब लिखी जाये जिसे युवा समझ सकें। कार्डिनल क्रिस्तोफ ने योजना बनाते समय कहा था, “यदि आप युवाओं के लिये कुछ करना चाहते हैं तो इसे युवाओं के साथ करें।”

उन्होंने बतलाया कि इसी योजना के तहत् सन् 2011 में स्पेन में आयोजित विश्व युवा दिवस में ‘यूकैट’ धर्मशिक्षा किताब प्रकाशित हुई ईशशास्त्रियों शिक्षाशास्त्रियों और पुरोहितों के अलावा 60 युवाओं ने भी अपना योगदान दिया है। ‘यूकैट’ यूथ कैटेकिज़्म ऑफ द कैथोलिक चर्च का संक्षेप रूप है।

इस किताब में 527 सवालों के उत्तर है जो उद्धरण तस्वीरों उदाहरण और सचित्र व्याख्यान हैं। उन्होंने बतलाया कि यूकैट फेसबुक से 21 हज़ार युवा भी ज़ुड़ चुके हैं।

बेर्नार्ड ने बतलाया कि यूकैट का प्रकाशन 20 भाषाओं में किया जा चुका है । अगले साल इसे चाईनीज़ और अराबिक में भी प्रकाशित कर दिया जायेगा और इसकी संख्या 30 हो जायेगी। इस किताब कई लोगों को बाईबल अध्ययन के लिये प्रेरित किया है। फिलीपीन्स में में एक धर्मशिक्षा अध्ययन दल बनाया है जिसकी सदस्यता 12 हज़ार है। प्रकाशक बेर्नार्ड का मानना है किताब की सफलता के पीछे पवित्र आत्मा की कृपा का हाथ है।

भारत का अगला राष्ट्रपति ईसाई हो

In Church on February 27, 2012 at 6:33 pm

जस्टिन तिर्की, ये.स.

नई दिल्ली, 25 फरवरी, 2012 (कैथन्यूज़) पूर्व प्रशासनिक सेवाकर्मी पी. सिवाकमी ने कहा, वे सरकार से अपील करतीं हैं कि अगला राष्ट्रपति एक ईसाई को बनाया जाये।”
सिवाकमी एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहीं थीँ। उन्होंने का ” ईसाई राष्ट्रपति राष्ट्र में ईसाई समुदाय का प्रतिनिधित्व करेंगे जो देश में असुरक्षित महसूस करते हैं।

तमिलनाडू के समुगा समातुवा पादई दल की अध्यक्षा सिवाकमी ने उक्त बातें उस समय कहीं जब उन्होंने अपनी पार्टी लक्ष्यों के बारे में चर्चा की। उन्होंने कहा उनकी पार्टी चाहती है कि वह अल्पसंख्यकों और उपेक्षित समुदायों के हकों के लिये कार्य करे।

अपनी योजना के बारे में बतलाते हुए पार्टी अध्यक्षा ने कहा कि उनकी योजना है कि वह विभिन्न राज्यों का दौरा करेगी और पार्टी अध्यक्षों से मिलकर इस मुद्दे पर सहमति बनाने का प्रयास करेगी। उन्होंने पार्टी के सदस्यों से कहा है कि वे पोस्टरों और बैनरों के द्वारा लोगों में जागरुकता पैदा करे।

राष्ट्रपति उम्मीदवार की योग्यता के बारे में उन्होंने कहा कि वह साफ चरित्र वाला हो सार्वजनिक कल्याण में रुचि रखता हो और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्य करने की क्षमता रखता हो। उन्होंने यह भी कहा कि यह ज़रूरी नहीं है कि वह राजनीतिक पार्टियों का बड़ा जानकार हो।

भूतपूर्व प्रशासनिक अधिकारी सिवाकमी ने कहा कि ” अभी उसके पास राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिये कोई नाम नहीं है पर जल्द ही उपयुक्त उम्मीदवारी निकल आयेंगे।

सिवाकमी ने कहा, “देश में प्रत्येक अल्पसंख्यक समुदाय से राष्ट्रपति बनाये जा चुके हैं अब ईसाई राष्ट्रपति की बारी है।”

विदित हो कि देश में जुलाई महीने में राष्ट्रपति चुनाव होगा।

‘चिरकोलो दी सान पियेतरो’ के कार्यों की सराहना

In Church on February 27, 2012 at 6:33 pm

जस्टिन तिर्की, ये.स.

रोम, 25 फरवरी, 2012(कैथलिक कल्चर) संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें ने ‘सिरकोलो दी सन पियेतरो’ नामक संगठन को उनके जनहितकारी कार्यों के लिये सराहना की है।

‘चिरकोलो दी सान पियेतरो’ के प्रतिनिधियों ने 24 फरवरी शुक्रवार को संत पापा से मुलाक़ात की।

संत पापा ने प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा, ” सेवा और दयालुता ही सच्चे पड़ोसी प्रेम की माप है, विशेष करके कमजोर और ज़रूरतमंदों की सेवा के लिये प्रयासरत रहना।”

उन्होंने कहा, “सेवा की इच्छा से प्रेरित हो हम ज़रूरतमंदों के आध्यात्मिक कल्याण के लिये भी अपना हाथ बढ़ा सकते हैं।”

“आज की संस्कृति अच्छाई और भलाई के अर्थ को खोती जा रही है फिर भी इस बात का दावा करते हैं कि भलाई जीवित है और वह विजयी होगी।”

संत पापा ने जनकल्याणकारी कार्यों में संस्था द्वारा वाटिकन को मदद देने के लिये आभार प्रकट किया।
विदित हो कि ‘चिरकोला दि सान पियेतरो’ की स्थापना सन् 1869 ईस्वी में हुई थी जिसमें उच्च घराने के काथलिक युवाओं इटली में याजक विरोधी ताकतों का विरोध करने और संत पापा का समर्थन करने का बीड़ा उठाया था।

अब यह संस्था मानव कल्याणकारी कार्यों से जुड़ चुकी है और ग़रीबों की सेवा करती है। सीसी के अनुसार यह संस्था 3 सूप चिकन के द्वारा प्रत्येक वर्ष क़रीब 50 हज़ार लोगों के भोजन की व्यवस्था करती है।

तोन्गा के राजा संत पापा से मिले

In Church on February 27, 2012 at 6:32 pm

जस्टिन तिर्की, ये.स.

वाटिकन सिटी, 25 फरवरी, 2012 (ज़ेनित) दक्षिण पैसिफिक क्षेत्र के एकमात्र राजतंत्र देश तोन्गा के राजा सियावसी तुपोउ ने वाटिकन में संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें से मुलाक़ात की।

वाटिकन सूत्रों के अनुसार राज सियावसी ने संत पापा से देश की सामाजिक और आर्थिक जीवन के बारे में चर्चा की। उन्होंने अपने देश में काथलिक कलीसिया के द्वारा रचनात्मक योगदना की तारीफ़ की।

उन्होंने बताया कि सामाजिक विकास और मानव कल्याण के लिये किये जा रहे काथलिक कलीसिया के प्रयासों की सराहना की।

संत पापा और राजा सियावसी ने अन्तरराष्ट्रीय स्थिति विशेष करके पैसेफिक प्रायद्वीय के राष्ट्रों के बारे में भी विचार-विमर्श किये।

संत पापा से मिलने के बाद तोन्गा के राजा ने वाटिकन के अन्तरराष्ट्रीय मामलों के महासचिव महाधर्माध्यक्ष दोमिनिके मम्बेरती से भी मुलाक़ात की।

विदित हो कि दक्षिण महासागरीय क्षेत्र में अवस्थित तोन्गा न्यूजीलैंड और हवाई के मध्य एक छोटा देश है जहाँ की आबादी है 1लाख के करीब है।

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