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माओवादी मुददों के समाधान का रास्ता – वार्ता

In Church on March 31, 2012 at 8:43 pm

जोसेफ कमल बाड़ा

ठाकुरपुकुर 30 मार्च 2012 (ऊकान) कोलकाता के महाधर्माध्यक्ष थोमस डिसूजा ने क्षेत्रीय मिशन कांग्रेस में भाग लेते हुए मीडिया से कहा कि पश्चिम बंगाल में माओवादी मुद्दा का समाधान वार्तालाप द्वारा किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में मानवतावादी राहत कार्यों को आरम्भ कर विद्रोहियों को भी समझौता वार्ता करने के लिए लाया जा सकता है।

माओवादी मुद्दे के लिए क्या कलीसिया के पास कोई समाधान है इस सवाल का जवाब देते हुए महाधर्माध्यक्ष थोमस डिसूजा ने कहा कि इस समस्या का हमारा समाधान प्रार्थना, मेलमिलाप और सेवा है।

शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में चर्च के कार्यों से मेलमिलाप के लिए मदद मिल सकती है तथा इससे वार्ता का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

उन्होंने खेद व्यक्त किया कि मिदनापुर, बांकुड़ा और पूरूलिया जिले के घने जंगलों में सक्रिय माओवादियों तक चर्च नहीं पहुंच पायी है।

उन्होंने कहा कि साम्यवाद या ईसाईयत, निर्धनों के प्रति प्रेम, दोनों में सामान्य है। लेकिन इस लक्ष्य को पाने के लिए साम्यवादी पद्धति संभवत सार्थक न हो।

महाधर्माध्यक्ष डिसूजा ने कहा कि मार्क्सवादी नेता ज्योति बसु और मदर तेरेसा दोनों एक दूसरे को सम्मान देते थे क्योंकि दोनों की परवाह निर्धनों के लिए थी। उन्होंने कहा कि चर्च निर्धनों का जीवन सुधारने के लिए अन्यों के साथ काम करने के खिलाफ नहीं है।

इस सम्मेलन में कोलकाता महाधर्मप्रांत तथा असनसोल, बागडोगरा, बरूईपुर, दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, कृषनगर और रायगंज धर्मप्रांतों के धर्माध्यक्षों, पुरोहितों और लोकधर्मियों ने भाग लिया।

मिशन कांग्रेस के समापन पर भारत में प्रेरितिक राजदूत मान्यर साल्वातोरे पेनाकियो नें समारोही ख्रीस्तयाग की अध्यक्षता की।

भारत में सन् 2010 में कैंसर से 6 लाख मौतें

In Church on March 31, 2012 at 8:42 pm

जोसेफ कमल बाड़ा

नई दिल्ली 30 मार्च 2012 (ऊकान) भारत में 800 विशेषज्ञों द्वारा किये गये एक अध्ययन में पाया गया कि सन 2010 में कैंसर से 6 लाख मरे। लांसेट जरनल में प्रकाशित द न्यू मिलियन डेथ स्टडी में 800 विशेषज्ञों ने योगदान दिया।

उन्होंने शहरी और ग्रामीण इलाकों में लगभग दस लाख मकानों में घर घर जाकर अध्ययन किया। अध्ययन में पाया गया कि कैंसर से होनेवाली मौत के 70 फीसदी मामलों में मृतकों की आयु 30 से 69 वर्ष के बीच थी।

विश्व स्वास्थ्य संगठन और एसईएआरओ की उप क्षेत्रीय निदेशक पूनम सिंह ने कहा कि भारत में युवा कैंसर से अधिक प्रभावित हैं जबकि पाश्चात्य देशों में 70 वर्ष से अधिक आयु के लोग कैंसर से अधिक प्रभावित हैं। एक कारण संभवतः पाश्चात्य देशों में लोगों की जीवन अवधि अधिक है।

भारत में सामान्यतः पुरूषों में पेट और फेफेड़े के जबकि महिलाओं में ग्रीवा तथा स्तन कैंसर होते है। जम्मू और काश्मीर में कैंसर की सबसे कम दर जबकि मिजोरम में सबसे अधिक है।

विशेषज्ञों का कहना है कि देश के विभिन्न भागों में कैंसर के मामलों की उक्त विविधता पर तत्काल अध्ययन करने की जरूरत है। अध्ययन में पाया गया कि कैंसर से होनेवाली पुरूषों की मौत का 40 फीसदी तम्बाकू सेवन के कारण होती है।

रियो दि जनेरो में सम्पन्न होनेवाले विश्व युवा दिवस की तैयारी

In Church on March 31, 2012 at 8:41 pm

जोसेफ कमल बाड़ा

रोम इटली 30 मार्च 2012 (सीएनए) विश्व युवा दिवस 2013 की तैयारी के लिए चारदिवसीय अंतरराष्ट्रीय बैठक रोम के रोक्का दी पापा शहर में 29 मार्च से पहली अप्रैल तक सम्पन्न हो रही है।

रियो दि जनेरो में सन 2013 में सम्पन्न होनेवाला विश्व युवा दिवस कैसा होगा इसके जवाब में आयोजकों का मानना है कि पूर्ण जवाब होगा शहर का विश्वप्रसिद्ध ख्रीस्त मुक्तिदाता की विख्यात मूर्त्ति जो खुली बाहों से सबका स्वागत करती है।

लोकधर्मियों संबंधी परमधर्मपीठीय समिति के अध्यक्ष कार्डिनल स्तानिस्लास रिलको ने 29 मार्च को कहा कि कोरकोवादो स्थित ख्रीस्त मुक्तिदाता की विशाल मूर्ति को देखते हुए हम विश्व युवा दिवस के सार अर्थ को देख सकते हैं।

ख्रीस्त की खुली बाहें प्रेम और स्वागत का प्रतीक है जो इस समारोह का सच्चा केन्द्र हैं, जिसे युवा पाना चाहते हैं। सन 2013 में आयोजित होनेवाले विश्व युवा दिवस समारोह की तैयारी के लिए आयोजित पहली अंतरराष्ट्रीय तैयारी बैठक के उदघाटन सत्र को सम्बोधित करते हुए कार्डिनल रिल्को ने उक्त बातें कहीं।

29 मार्च को आरम्भ यह चार दिवसीय बैठक रोम शहर से 15 मील दक्षिण में स्थित रोक्का दी पापा नामक छोटे शहर में सम्पन्न हो रही है।

इसमें 98 देशों से आये 300 प्रतिनिधि तथा 45 अंतरराष्ट्रीय काथलिक युवा अभियानों, संगठनों या समुदायों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

पहले दिन के सत्र में मैड्रिड में सम्पन्न विश्व युवा दिवस पर मूल्यांकन किया गया। कार्डिनल रिल्को ने सन 2011 के विश्व युवा दिवस के अविस्मरणीय पलों को याद करते हुए कहा कि उदघाटन समारोह प्लात्सो दि सिबिलेस में हुआ तथा 6 दिवसीय कार्यक्रम का समापन शहर के क्वातरो वियेनतोस हवाई पट्टी क्षेत्र में संत पापा की अध्यक्षता में सम्पन्न समारोही ख्रीस्तयाग से हुआ था।

युवाओं ने दिखाया कि आज भी विश्वास संभव है तथा यह युवा कलीसिया की प्रकाशना है जो आनन्द और मिशनरी उत्साह से भरपूर है। 30 मार्च के सत्र सन 2013 के विश्व युवा दिवस पर केन्द्रित रहा।

ब्राजील में रियो दि जनेरो के महाधर्माध्यक्ष ओरानी होआओ टेम्पेस्टा और ब्राजील धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की युवा प्रेरिताई समिति के अध्यक्ष धर्माध्यक्ष एडुवार्डो पिनहियेरो दा सिल्वा ने आयोजन समिति के अन्य सदस्यों के साथ सन 2013 के विश्व युवा दिवस के सामने प्रस्तुत उम्मीदों और चुनौतियों पर प्रकाश डाला।

शनिवार के सत्रों में युवाओं का मसीही शिक्षण चर्च के मिशन की प्राथमिकता विषय पर विचार विमर्श किया जायेगा तथा अनेक युवा अपना साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे।

प्रतिभागी बैठक के अंतिम दिन 1 अप्रैल को 27 वें विश्व युवा दिवस के उपलक्ष्य में धर्मप्रांतीय स्तर पर रोम में मनाये जा रहे समारोह में शामिल होंगे। संत पेत्रुस बासिलिका के प्रांगण में खजूर रविवार के उपलक्ष्य में आयोजित उक्त समारोही ख्रीस्तयाग की अध्यक्षता संत पापा बेनेडिक्ट 16 वें करेंगे।

बिजनेस लीडर की बुलाहट’ पर कार्डिनल टर्कसन का वक्तव्य

In Church on March 31, 2012 at 8:40 pm

जोसेफ कमल बाड़ा

लियोन फ्रांस 30 मार्च 2012 (सेदोक) फ्रांस के लियोन शहर में ‘बिजनेस लीडर की बुलाहट’ विषय पर आयोजित 24 वें वर्ल्ड काँग्रेस ‘यूनियापाक’ – इंटरनैशनलन क्रिश्चियन यूनियन ऑफ बिजीनेस एक्जेक्यूटिव’ (UNIAPAC) में भाग ले रहे लगभग दो हजार ईसाई बिजनेस प्रतिभागियों को कार्डिनल पीटर टर्कसन ने 30 मार्च को सम्बोधित कहा व्यवसाय करनेवालों में अपने विश्वास और काम को अलग-अलग करने की प्रवृत्ति देखी जाती है।

इसके परिणामस्वरूप विभाजित जीवन होने लगता है।

न्याय और शांति संबंधी परमधर्मपीठीय समिति के अध्यक्ष टर्कसन ने व्यवसायियों को सार्वजनिक हित के लिए पेशेवर जीवन को फलप्रद तरीके से जीने के लिए चर्च द्वारा सहायता दिये जाने की इच्छा को रेखांकित करते हुए कलीसिया की सामाजिक शिक्षा तथा इसके सिद्धान्तों को ठोस तरीके से लागू करने पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि बिजनेस लीडर की बुलाहट शीर्षक से आयोजित बैठक बिजनेस लीडर्स के लिए सहायक निर्देशिका बनने के उस लक्ष्य को पूरा करती है जो अपनी बुलाहट के सुसंगत उदारता के सदगुण में बढना चाहते हैं।

विगत वर्ष के चिंतन से तैयार 30 पृष्ठीय पुस्तक में वर्णित तीन भाग निर्णय प्रक्रिया के बारे में है जो एक दूसरे से जुड़ी हैं- देखना, निर्णय लेना और काम करना।

देखने का अर्थ है भूंडलीकरण कम्यूनिकेशन तकनीकियाँ, वित्तीय व्यवस्था और सांस्कृतिक झुकाव के बदलावकारी विकास पर विशेष ध्यान देते हुए युग के संकेतों को पहचानना और उनकी व्याख्या करना।

निर्णय लेने का अर्थ है कि उद्यमियों को तैयार करना जो व्यवसाय जगत की बिषम वास्तविकताओं के मध्य सुदृढ़ सिद्धान्तों के साथ अच्छे निर्णय लें।

कलीसिया की सामाजिक शिक्षा के दो बुनियादी प्रकाश स्तंभ के समान हैं- मानव प्रतिष्ठा और जनहित। काम करने का आह्वान कार्य करने पर जोर देता है जिसमें सिद्धान्तों को दैनिक जीवन के सामान्य कार्यों के साथ मिलाते हुए जीना है।

उन्होंने कहा सृजित वस्तुएं और सेवा मानव की सच्ची जरूरतों को पूरा करे। बिजनेस लीडर वर्तमान में विद्यमान अंधकार के बावजूद आस्था की पुनर्स्थापना कर आशा जगायेंगे।

हवाना के होसे मारती हवाई अडडे में संत पापा का विदाई संदेश

In Church on March 30, 2012 at 10:47 pm

जोसेफ कमल बाड़ा

हवाना क्यूबा 28 मार्च 2012 (सेदोक) संत पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने 28 मार्च को क्यूबा की यात्रा के समापन पर रोम प्रस्थान करने से पूर्व हवाना के होसे मारती हवाई अड्डा में आयोजित विदाई समारोह में क्यूबा के राष्ट्रपति राऊल कास्त्रो के संबोधन के बाद उपस्थित विशिष्ट सरकारी और कलीसियाई अधिकारियों, गणमान्य व्यक्तियों और देशवासियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि वे ईश्वर को धन्यवाद देते हैं जिन्होंने उन्हें इस सुंदर द्वीप को देखने का अवसर प्रदान किया जिसने उनके पूर्वाधिकारी संत पापा जोन पौल द्वितीय के दिल में गहन छाप छोड़ी थी जब वे यहाँ सत्य और आशा का संदेश सुनाने के लिए आये थे।

संत पापा ने कहा कि वे भी उदारता के तीर्थयात्री रूप में आना चाहते थे ताकि कुँवारी माता मरिया को उनकी उपस्थिति के लिए धन्यवाद दे सकें जो अल कोब्रे के तीर्थालय में वंदनीय प्रतिमा के रूप में हैं तथा चार सदियों से इस देश में कलीसिया तथा सब क्यूबावासियों को प्रोत्साहन देती है ताकि वे मानव दिल की गहनतम इच्छाओं और आकांक्षाओं के सच्चे अर्थ की खोज कर सकें एवं समावेशी भ्रातृत्वमय समाज का निर्माण करने के लिए जरूरी शक्ति पा सकें।

संत पापा ने कहा कि मृतकों में से पुर्नजीवित हुए येसु ख्रीस्त इस संसार में चमकते हैं और उन स्थलों में और अधिक आलोकित होते हैं जहाँ सबकुछ आशाविहीन है। उन्होंने मृत्यु पर विजय प्राप्त की है, वे जीवित हैं, और उनमें विश्वास करना, एक छोटे बत्ती के समान, जो अंधकार और चुनौतियों को दूर करते हैं।

संत पापा ने इस यात्रा की तैयारी के लिए राष्ट्रपति महोदय और सब अधिकरियों को उनकी रूचि और उदार सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।

उन्होंने क्यूबा के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के सदस्यों को उनकी त्याग और प्रयास के लिए धन्यवाद तथा उन सबलोगों को भी धन्यवाद जिन्होंने विभिन्न रूपों में विशेष रूप से प्रार्थना द्वारा इस यात्रा के लिए मदद किया।

संत पापा ने कहा कि वे सब क्यूबावासियों को उनकी प्रार्थना, स्नेह, हार्दिक आतिथ्य सत्कार एवं साझा वैध आकांक्षाओं के कारण अपने दिल के समीप रखते हैं।

संत पापा ने कहा कि वे यहाँ येसु के साक्षी रूप में इस दृढ़ विश्वास के साथ आये कि येसु जहाँ उपस्थित हैं वहाँ आशा उत्पन्न होती है, भलाई अनिश्चितता को दूर करती है और एक शक्तिशाली ताकत हितकारी तथा अनापेक्षित संभावनाओं के लिए क्षितिज को खोलती है।

ख्रीस्त के नाम में तथा संत पेत्रुस के उत्तराधिकारी के रूप में वे चाहते थे कि मुक्ति के संदेश की उदघोषणा करें और क्यूबा के धर्माध्यक्षों, पुरोहितों, धर्मसमाजियों, पुरोहितीय अथवा धर्मसमाजी जीवन की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों एवं लोकधर्मी विश्वासियों के उत्साह को मजबूत करें।

उनकी यह यात्रा सुसमाचार प्रचार काम में संलग्न लोगों, विशेष रूप से लोकधर्मी विश्वासियों के धैर्य और आत्म बलिदान को नया संवेग प्रदान करे और वे अपने घर और कार्यस्थल में ईश्वर के प्रति अपने समर्पण को नवीकृत कर देश के कल्याण और समग्र विकास के लिए जिम्मेदारपूर्ण योगदान दें।

संत पापा ने कहा कि ख्रीस्त का प्रकाश सबलोगों को सामाजिक सौहार्द को बढाने के लिए मदद करे तथा क्यूबा की भूमि पर सदगुणों को (Noble Values) को विकसित होने की अनुमति प्रदान करे जो नवीकृत तथा मेलमिलाप से पूर्ण व्यापक दर्शन पर आधारित समाज के निर्माण के लिए आधार हो।

संत पापा ने कहा कि अपनी तीर्थयात्रा को समाप्त करते हुए वे क्यूबा और इसके निवासियों के विकास के लिए सतत प्रार्थना करेंगे जहाँ शांतिमय भाईचारा के वातातरण में न्याय और स्वतंत्रता का सहअस्तित्व हो।

आदर और स्वतंत्रता का प्रसार हर व्यक्ति के दिल में मौजूद है ताकि वह अपनी मर्यादा के अनुकूल बुनियादी माँग का यथोचित जवाब दे सके तथा इस प्रकार ऐसे समाज के निर्माण में मदद करे जहाँ सबलोग अपने जीवन, परिवार और देश के भविष्य में सक्रिय भूमिका अदा करते हैं।

धैयपूर्ण और ईमानदार संवाद तथा सबलोगों को जोड़नेंवाले अथक प्रयासों से कठिनाईयों और विवादों को दूर किया जा सकेगा। एक दूसरे को सुनने की इच्छा और लक्ष्य को स्वीकार करना जो नयी आशा लाये।

क्यूबा के लोगो अपने पूर्वजों के विश्वास को देखें तथा अपने दिल को सुसमाचार के लिए खोलें ताकि अपने निजी और सामाजिक जीवन को स्वतःस्फूर्त नवीकृत होने दें।

संत पापा ने कहा कि क्यूबा से विदा लेते हुए वे अल कोब्रे की माता मरिया से सब क्यूबावासियों के लिए प्रार्थना करते हैं कि प्रलोभन और परीक्षा के मध्य धैर्य बनाये रखने के लिए ईश्वरीय कृपा पायें।

क्यूबा ऐसी भूमि है जो अल कोब्रे की माता मरियम की मातृत्वमय उपस्थिति के द्वारा सुंदर बन गयी है। ईश्वर इसके भविष्य को आशीष दें।

हवाना के क्रांति प्रांगण में संत पापा का प्रवचन

In Church on March 30, 2012 at 10:46 pm

जस्टिन तिर्की, ये.स.

हवाना, 29 मार्च, 2012 (सेदोक, वीआर) मेरे अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, धन्य है प्रभु ईश्वर और धन्य है उसका पावन महिमामय नाम (दानियेल, 3: 52) यह गीत जो दानियेल की किताब से लिया गया है पूरी पूजनविधि में प्रतिध्वनित हो रहा है और हमें आमंत्रित कर रहा है कि हम ईश्वर का धन्यवाद दें और उसके नाम की महिमा गायें।

हम आज यहाँ हैं ताकि हमें निरंतर ईश्वर की महिमा गायें। हम आज यहाँ जमा हुए हैं ताकि हम ईश्वर को धन्यवाद दें और उँचे स्वर से अपने हर्ष को व्यक्त करें जो ईश्वर तक पहुँचने की हमारी विश्वास यात्रा को प्रेम और सत्य से सुदृढ़ करे।

ईश्वर धन्य है जिसने हमें इस ऐतिहासिक प्राँगण जमा किया है ताकि हम गहराई से अपने उसके जीवन में प्रवेश कर सकें। ‘आवर लेडी ऑफ चैरिटी ऑफ एल कोबरे’ की जुबिली को समर्पित यह यूखरिस्तीय बलिदान चढ़ाते हुए मुझे अपार खुशी का अनुभव हो रहा है।

सस्नेह. मैं हवाना के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल हइमे ओरतेगा वाय अलामिनो उनके नेक शब्दों के लिये धन्यवाद देता हूँ। इसके साथ ही मैं अन्य कार्डिनलों और क्यूबा तथा निकटवर्ती देशों से आये धर्माध्यक्ष बन्धुओं को अभिवादन करता हूँ हमारे साथ इस समारोही ख्रीस्तयाग के लिये उपस्थित हैं।

मैं पुरोहितों, धर्मबंधुओं, धर्मसमाजी भाई-बहनों, स्थानीय नागरिक अधिकारियों तथा तमाम लोकधर्मियों का स्वागत करते हूँ।

आज के पहले पाठ में हम तीन युवाओं की प्रताड़ना के बारे में सुनते हैं जिन्होंने अपने विश्वास और अंतःकरण के साथ विश्वासघात करने के बदले बबिलोनिया के राजा की आज्ञानुसार आग में झोंका जाना पसन्द किया । उन्होंने अनुभव किया कि विश्व के प्रभु ईश्वर उन्हें मृत्यु तथा विनाश से बचायेंगे, उनका धन्यवाद किया और उनकी महिमा गयीं।

यह सत्य है, कि ईश्वर अपनी संतान को कदापि नहीं छोड़ते, न ही उन्हें भूलते हैं। वे शक्तिशाली हैं और सदा हमारी रक्षा करते हैं। इसके साथ ही वे अपने लोगों के साथ हैं और अपने पुत्र येसु मसीह के द्वारा उन्होंने हमारे बीच निवास किया है।

यदि हम उनके वचनों को सुनते हैं तो हम उनके सच्चे शिष्य हैं और हम सत्य को जानेंगे और सत्य हमें मुक्त कर देगा (योहन, 8, 31) ऐसा कहते हुए येसु हमें अपने आपको ईश्वर के पुत्र और एक ऐसे मसीहा रूप में प्रस्तुत किया है जो एकमात्र सत्य हैं और हमें मुक्ति प्रदान कर सकते हैं।

उनकी शिक्षा का लोगों ने विरोध किया फिर भी उन्होंने उन्हें विश्वास करने के लिये प्रेरित किया, ईशवचन के अनुसार चलने का आमंत्रण दिया ताकि वे सत्य को जानें, जो उन्हें सम्मान और मुक्ति प्रदान करेगा।

प्रिय भाइयो एवं बहनो, सत्य मानव की स्वभाविक इच्छा है जिसकी चाह करना अर्थात सच्ची मुक्ति की तलाश करना। फिर भी कई ऐसा नहीं करते और इस कार्य से बच जाना चाहते हैं। कई लोग पोंतुस पिलातुस के समान यह पूछ बैठते हैं कि क्या सत्य को जानना संभव है? (योहन 18,38)।

उनका सोचना है कि मानव सत्य को जानने को सक्षम नहीं है या हम कहें कोई ऐसा सत्य नहीं है जो सबों के लिये उपयुक्त हो। यह एक ऐसा मनोभाव है जिसे हम सापेक्षवाद या संशयवाद कहते हैं जो ह्रदय को कुंठित और कमजोर करता और व्यक्ति को दूसरों से दूर या बन्द कर देता है। ऐसे लोग रोमी राज्यपाल के समान अपना हाथ धो डालते हैं और अपने जीवन को अर्थहीन कर देते हैं।

दूसरी ओर हम पाते हैं कि कुछ लोग जो सत्य की खोज का सही अर्थ नहीं लगाते और इस तरह से तर्कशून्यता और कट्टरता में वे खुद को “अपने सत्य” में बन्द कर देते हैं और इसी को दूसरों पर लादने का प्रयास भी करते हैं। वे ठीक वैसे सदूकियों के समान हैं जो मार और खून से लथपथ येसु को देखकर चिल्लाते हैं “उसे क्रूस दीजिये!” (योहन19,6)। जो भी तर्कशून्यता में कार्य करता है वह येसु का शिष्य कदापि नहीं हो सकता।

सत्य की खोज करने के लिये विश्वास और विवेक आवश्यक औरये दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। ईश्वर ने जिस मानव की सृष्टि की है उसका जन्मजात स्वभाव या बुलाहट रही है – सत्य की खोज करना। इसीलिये ईश्वर ने उसे विवेक प्रदान किया है। ख्रीस्तीय विश्वास निश्चय ही इसी सत्य की खोज को बढ़ावा देता है – तर्कशून्यता की नहीं।

प्रत्येक मानव को सत्य की खोज करनी है और इसका तब भी आलिंगन करना है जब उसे अपना बलिदान तक करने की ज़रूरत पड़े।

इसके साथ जो सत्य मानवता के ऊपर है वह स्वतंत्रता के प्राप्ति के लिये एक अपरिहार्य शर्त बन जाता है। ऐसा इसलिये क्योंकि हम इसमें एक ऐसी नैतिकता की नींव पाते हैं जिधर सब कुछ का केन्द्रित होता है और जो जीवन और मृत्यु, कर्त्तव्य और अधिकार, विवाह, परिवार और समाज के बारे में स्पष्ट और यथार्थ संकेत देता है।

संक्षेप में यही कहा जा सकता है कि यह मानव के प्रति पवित्र गरिमा के प्रति इंगित करता है। यह नैतिक विरासत विभिन्न संस्कृतियों, लोगों, धर्मों, अधिकारियों, नागरिकों, तथा विश्वासियों और अविश्वासियों – सबों को एक साथ एकत्र करता है।

वे सभी मूल्य जिन्हें नैतिकता पोषित करती है, ख्रीस्तीयता ख्रीस्त का आमंत्रण का प्रस्ताव डालती है न कि किसी पर बस थोप देती है। यह एक आमंत्रण है सत्य को जानने का जो हमें मुक्त करता है।

एक विश्वासी की बुलाहट है कि वह सत्य को हर दूसरे व्यक्ति कि सत्य को बाँटे जैसे कि येसु ने उस समय किया जब उसे अपमानजनक क्रूस ढोना था।

जिस व्यक्ति के पास सत्य है उसके साथ व्यक्तिगत मुलाक़ात करने के बाद हम उस सत्य को दूसरों को बतलाने के लिये बाध्य हो जाते हैं, विशेषकरके अपने साक्ष्य के द्वारा।

प्रिय मित्रो, आप येसु का अनुसरण करने से न हिचकिचाइये। उन्हीं में हम ईश्वर का मानवजीवन की सच्चाई की पूर्णता को पाते हैं। वे हमें इस बात के लिये मदद देते हैं कि हम स्वार्थ पर विजय प्राप्त करें, अपनी आकांक्षाओं से ऊपर उठें और उन्हें जीतें जो हमें दबाते हैं।

जो बुराई करता है वह पाप करता है और पाप का गुलाम बनता और कभी भी मुक्ति प्राप्त नहीं करता है (योहन 8,34) घृणा का त्याग कर ही हमारे कठोर ह्रदय और बंद आखें मुक्ति प्राप्त कर सकती हैं और हमें नया जीवन प्राप्त हो सकता है।

येसु ही मानव की सही माप है और उसको जानकर ही हम वह शक्ति प्राप्त कर सकते हैं जो हमें चुनौतियों के समय शक्ति प्रदान करेंगी, ताकि हम खुलकर यह घोषित कर पायेंगे कि येसु मसीह ही मार्ग सत्य और जीवन हैं। उन्हीं प्रभु येसु में हमें पूर्ण मुक्ति मिलेगी वह प्रकाश मिलेगा जिससे हम सत्य को पहचानें कर अपने को नया कर सकेंगे।

कलीसिया चाहती है कि हम दूसरों के साथ उस सत्य को बाँटे जो और कोई दूसरा नहीं – प्रभु येसु ख्रीस्त ही हैं।(कोल1,27) इस कार्य को पूरा करने के लिये वह चाहती है कि लोगों को धार्मिक स्वतंत्रता मिले जो इस बात पर निर्भर करती है कि व्यक्ति अपने विश्वास को सार्वजनिक रूप से घोषित करे और येसु द्वारा लाये गये प्रेम, मेल-मिलाप और शांति के संदेश को दुनिया को बतलाये।

आज यह कहा जा सकता है कि क्यूबा में कई ऐसे कदम उठाये जा चुके हैं जिसके द्वारा कलीसिया को अपने मिशन को स्वतंत्रतापूर्वक सार्वजनिक रूप से दूसरों को बतलाया जा सके। फिर भी आज ज़रूरत है कि इसे जारी रखा जाये। आज मैं देश के नेताओं और अधिकारियों को प्रोत्साहन देता हूँ कि वे इस दिशा में आगे बढ़ें और क्यूबा और समाज की सच्ची सेवा के लिये आगे आयें।

धार्मिक स्वतंत्रता दोनों निजी और सार्वजनिक दोनों अर्थों में मानव की एकता को प्रकट करता है जो एक नागरिक और विश्वासी दोनों है। यह न्यायसंगत है कि एक विश्वासी समाज निर्माण के क्षेत्र में अपना योगदान देता है।

धार्मिक स्वतंत्रता सामाजिक संबंधों को मजबूत करता बेहत्तर दुनिया की आशा को पोषित करता, शांति और सामंजस्यपूर्ण विकास की स्थितियों को अनुकूल तो बनाता ही है भविष्य में आने वाली पीढ़ी के अधिकारों की नींव को मजबूत करता है।

जब कलीसिया मानव अधिकारों को बढ़ावा देती है तो इसका अर्थ यह नहीं है कि वह कोई विशेष सुविधाओं का दावा कर रही है। यह बस यही चाहती है कि वह अपने दिव्य संस्थापक के प्रति वफ़ादार रहे और इस बात के प्रति जागरुक रहे कि जहाँ येसु उपस्थित है वहाँ मावनजाति मानवीय होता और इसको स्थिरता मिलती है।

इसीलिये कलीसिया चाहती है कि वह अपनी शिक्षा और प्रवचन में इसी बात का साक्ष्य दे। इसीलिये इस बात की आशा की जानी चाहिये कि ऐसा समय आयेगा जब कलीसिया उस बात को दुनिया को बता पायेगी जिसे येसु ने कलीसिया को सौंपा है। इस कार्य की उपेक्षा कलीसिया कदापि नहीं कर सकती है।

इसका सबसे उत्तम उदाहरण हैं इसी शहर हवाना के शिक्षाविद और पुरोहित फादर फेलिक्स वारेला जिन्होंने इस देश में लोगों को चिन्तन करना सिखाया। फादर वारेला ने जो रास्ता दिखलाया वह रास्ता था सच्चे सामाजिक परिवर्तन का – गुणसंपन्न मानवता के निर्माण का जो योग्य और मुक्त राष्ट्र का निर्माण करें।

यह परिवर्तन मानव के आध्यात्मिक जीवन पर निर्भर करता है। जैसा कि एलपीदियो के पत्र में लिखा है, “गुणों के बिना सच्चे राष्ट्र की कल्पना नहीं की जा सकती।”

क्यूबा और दुनिया बदलाव चाहती है लेकिन यह तब ही संभव है जब प्रत्येक व्यक्ति इस स्थिति में हो कि वह सत्य को खोजे, प्रेम के मार्ग को चुने और दुनिया में भ्रातृत्व और मेल-मिलाप का बीज बोया जा सके।

माता मरिया की ममतामयी सुरक्षा की याचना करते हुए आइये हम प्रार्थना करें कि जब भी हम यूखरिस्तीय समारोह में हिस्सा लें हम उस प्रेम का साक्ष्य दें जो बुराई का उत्तर भलाई से दे। (रोमि. 12, 51) और अपने आप को जीवित बलिदान के रूप उन्हें चढ़ा दें जिन्होंने हमारे लिये अपना बलिदान किया।

आइये हम प्रभु के प्रकाश में चलना सीखें जो अंधकार की बुराई का विनाश कर सकता है और उनसे निवेदन करें कि हम संतों के साहस और सहायता से निर्भयता और उदारतापूर्वक अनवरत ईश्वर की ओर आगे बढ़ सकें।

हवानाः सन्त पापा ने फीदेल कास्त्रो से की मुलाकात

In Church on March 30, 2012 at 10:45 pm

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

हवाना, 29 मार्च सन् 2012 (सेदोक): क्यूबा की राजधानी हवाना स्थित परमधर्मपीठीय प्रेरितिक राजदूतावास में बुधवार को, क्यूबा से विदा लेने से पूर्व, सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने पूर्व राष्ट्रपति फीदेल कास्त्रो से मुलाकात की।

ग़ौरतलब है कि अस्वस्थ रहने के कारण, सन् 1959 ई. से क्यूबा के राष्ट्रपति रहे फीदेल कास्त्रो ने चार वर्ष पूर्व राष्ट्रपति पद का त्याग कर अपने भाई राऊल कास्त्रो को क्यूबा का राष्ट्रपति नियुक्त कर दिया था।

सेवानिवृत्त क्यूबा के नेता फादेल कास्त्रो तथा सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें के बीच 30 मिनट तक बातचीत चली जिसके दौरान 85 वर्षीय फादेल कास्त्रो ने सन्त पापा से कलीसिया में आये परिवर्तनों के बारे में पूछा। दोनों नेताओं ने अपनी ढलती उम्र पर भी विनोदपूर्ण सम्वाद किया।

अप्रैल माह में 85 वर्ष पूरे करने वाले सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने कहा कि यह सच है कि वे बूढ़े हो चले हैं किन्तु अब भी वे अपने सारे काम करने में समर्थ हैं।

वाटिकन के प्रवक्ता फादर फेदरीको लोमबारदी ने बाद में पत्रकारों को बताया कि, किशोरावस्था में येसु धर्माजियों से शिक्षा प्राप्त करनेवाले, क्यूबा के फीदेल कास्त्रो ने सन्त पापा से ढेर सारे सवाल कर डाले। उन्होंने कलीसिया की शिक्षा में आये परिवर्तनों के बारे में पूछा।

साथ ही यह भी प्रश्न किया कि सन्त पापा का क्या काम है? उनकी दिनचर्या कैसी होती है? आज विश्व को कौनसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है?

मुलाकात के बाद जारी एक विडियो में 85 वर्षीय कास्त्रो को, काले वस्त्र धारण किये, परमधर्मपीठीय प्रेरितिक राजदूतावास आते हुए दर्शाया गया।

जर्जर आयु में भी कास्त्रो सन्त पापा से मिलने के लिये उत्सुक दिखाई दिये। फादर लोमबारदी ने बताया कि सन्त पापा से मिलते ही कास्त्रो बड़बड़ाये, “मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।”

उन्होंने अपनी जीवन संगिनी डालिया सोतो देल वाले तथा दो सन्तानों का भी परिचय कराया तथा सन्त पापा से निवेदन किया कि वे उन्हें कुछ किताबें प्रेषित करें।

फादर लोमबारदी ने बताया कि सन्त पापा तथा फीदेल कास्त्रो के बीच हुई मुलाकात मैत्री और सौहार्द्रपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुई।

परमधर्मपीठीय प्रेरितिक दूतावास से विदा होने से पूर्व फीदेल कास्त्रो तथा उनके परिवार सदस्यों ने सन्त पापा के साथ तस्वीरें खिंचवाई तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।

मेक्सिको और क्यूबा की यात्रा कर सन्त पापा ने रोम लौटे

In Church on March 30, 2012 at 10:45 pm

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

हवाना, 29 मार्च सन् 2012 (सेदोक): काथलिक कलीसिया के परमधर्मगुरु सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें, मेक्सिको तथा क्यूबा में अपनी छः दिवसीय प्रेरितिक यात्रा समाप्त कर गुरुवार, 29 मार्च को पुनः रोम लौट आये हैं। इन दोनों ही देशों में सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें की यह पहली तथा इटली से बाहर 23 वीं विदेश यात्रा थी।

करीबियाई देश क्यूबा की, अपनी तीन दिवसीय प्रेरितिक यात्रा के अन्तिम दिन, बुधवार को सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने, साम्यवादी पार्टी द्वारा प्रशासित क्यूबा में, काथलिक कलीसिया के लिये और अधिक स्वतंत्रता की मांग की। क्यूबा में अमरीका द्वारा लगाये गये 50 वर्षीय आर्थिक प्रतिबन्धों के अन्त का भी उन्होंने आह्वान किया।

बुधवार को ही सन्त पापा ने राजधानी हवाना स्थित विख्यात क्राँति चौक में ख्रीस्तयाग अर्पित किया जिसमें तीन लाख श्रद्धालु उपस्थित हुए। क्यूबा से विदा लेने के पूर्व उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति फीदेल कास्त्रो से भी मुलाकात की।

सत्य और पुनर्मिलन के चयन का अनुरोध करते हुए सन्त पापा ने कहा, “क्यूबा तथा विश्व में परिवर्तन की आवश्यकता है किन्तु यह तब ही हो सकता है जब दोनों पक्ष सत्य और प्रेम की खोज हेतु तैयार होकर पुनर्मिलन एवं भ्रातृत्व के बीज बोयेँ।” सन्त पापा के इस अनुरोध ने 14 वर्षों पूर्व स्व. सन्त पापा जॉन पौल द्वितीय द्वारा की गई अपील की याद दिला दी जिन्होंने क्यूबा में अपनी प्रेरितिक यात्रा के दौरान कहा था, “क्यूबा को विश्व के प्रति उदार होना चाहिये और विश्व क्यूबा के प्रति उदार हो।”

हवाना के क्रान्ति चौक में क्रान्तिकारी अभिनायक एरनेस्तो चेगेवारा की विशाल तस्वीर के आगे निर्मित वेदी से, पहली पंक्ति में बैठे राष्ट्रपति राऊल कास्त्रो तथा क्यूबा के वरिष्ठ प्रशासनाधिकारियों की उपस्थिति में, सन्त पापा ने कहा कि सभी लोग “यथार्थ स्वतंत्रता” की कामना करते हैं जिसके बिना उस सत्य की प्राप्ति नहीं हो सकती जिसका प्रचार ख्रीस्तीय धर्म करता है।

उन लोगों को भी सन्त पापा ने फटकार बताई जो सत्य की मिथ्या व्याख्या करते तथा अपने आप के कथित सत्य को अन्यों पर थोपने का प्रयास करते हैं। सम्पूर्ण क्रान्ति चौक में श्रद्धालु छोटे बड़े बैनर लिये खड़े थे तथा “वीवा क्यूबा, वीवा एल पापा” के नारे लगा रहे थे। अपने परिवार के साथ ख्रीस्तयाग समारोह में शरीक पर्यटन कार्यकर्त्ता कारलोस हेरेर्रा ने कहा, “हम सन्त पापा के शब्दों को सुनने आये हैं, क्यूबा के लिये उनके विवेकपूर्ण शब्दों को सुनने। ये शब्द हमारी मदद करते हैं, हमें शांति प्रदान करते हैं, एकता के लिये प्रोत्साहन देते हैं।”
ख्रीस्तयाग के अवसर पर सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने भले ही क्यूबा की सरकार की प्रत्यक्ष आलोचना नहीं की तथापि उनके द्वारा उच्चरित शब्दों ने क्यूबा में व्याप्त वास्तविकता की ओर विश्व का ध्यान आकर्षित कराया। सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें के पूर्व छात्र एवं शिष्य काथलिक पुरोहित फादर जोसफ फेस्सियो ने कहा कि सन्त पापा सत्य एवं स्वतंत्रता पर बल दे रहे थे जिसकी क्यूबा को सख़्त ज़रूरत है।
करीबियाई देश क्यूबा में काथलिक कलीसिया की भूमिका को मज़बूत करना तथा पचास वर्षों से साम्यवादी शासन के अधीन रहने वाले काथलिक धर्मानुयायियों के विश्वास को सुदृढ़ करना सन्त पापा की क्यूबा यात्रा का प्रमुख उद्देश्य था। अपने प्रवचन में इसीलिये उन्होंने प्रशासनाधिकारियों से निवेदन किया कि वे कलीसिया को और अधिक उदारता एवं स्वतंत्रता के साथ अपने सन्देश का प्रसार करने दें ताकि कलीसिया स्कूलों, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में युवाओं को नैतिक मूल्यों पर आधारित शिक्षा प्रदान कर सके।

ग़ौरतलब है कि सन् 1959 ई. में फीदेल कास्त्रो के सत्ता में आ जाने के बाद से क्यूबा में स्कूलों में धर्मशिक्षा या नीति शास्त्र का अध्ययन रद्द कर दिया गया था। इस दिशा में नब्बे के दशक के बाद से हुए प्रयासों के लिये सन्त पापा ने क्यूबा सरकार की सराहना की किन्तु कहा कि न्याय, समानता एवं शांति पर आधारित समाज के निर्माण के लिये अभी बहुत कुछ करना बाकी है।

सन्त पापा ने राष्ट्रपति कास्त्रो से की मुलाकात, परिवर्तनों का किया निवेदन

In Church on March 29, 2012 at 5:51 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर
हवाना, 28 मार्च सन् 2012 (सेदोक): क्यूबा की राजधानी हवाना में मंगलवार को सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने राष्ट्रपति राऊल कास्त्रो से औपचारिक मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने साम्यवादी पार्टी द्वारा प्रशासित क्यूबा में काथलिक कलीसिया की भूमिका को समृद्ध बनाने हेतु उपयुक्त परिवर्तनों का निवेदन किया।

क्यूबा के राष्ट्रपति तथा सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें की बातचीत लगभग आधे घण्टे तक चली जिसके बाद वाटिकन ने इस बात की पुष्टि की कि बातचीत के दौरान क्यूबा से “मानवतावादी निवेदन” किया गया। इससे इन अटकलों को तूल मिला है कि वाटिकन क्यूबा में क़ैद राजनैतिक बन्दियों की अथवा कारावास में बन्द अमरीका के एलेन ग्रॉस की रिहाई चाहता है।

हवाना के क्राँति भवन में, मुलाकात के अवसर पर सन्त पापा ने राऊल कास्त्रो से यह भी अनुरोध किया कि वे प्रभु येसु के दुखभोग दिवस यानि गुड फ्रायडे को सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दें ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार 14 वर्ष पूर्व, सन् 1998 में, धन्य सन्त पापा जॉन पौल द्वितीय की क्यूबा यात्रा के समय पूर्व राष्ट्रपति फीदेल कास्त्रो ने क्रिसमस को सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दिया था।

पूर्व राष्ट्रपति फीदेल कास्त्रो ने मंगलवार रात को एक वेब साईट पर प्रकाशित किया था कि वे बुधवार को सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें से मुलाकात करेंगे। वाटिकन प्रवक्ता फादर फेदरीको लोमबारदी ने कहा कि इस बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है क्योंकि अब तक फीदेल कास्त्रो सन्त पापा के किसी भी समारोह में शरीक नहीं हो पाये थे।

चार वर्षों पूर्व अपनी बीमारी के कारण फीदेल कास्त्रो ने राष्ट्रपति पद त्याग कर अपने भाई राऊल कास्त्रो को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त कर दिया था।

राऊल कास्त्रो ने क्यूबा की सोवियत शैली वाली अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिये अनेक सराहनीय कदम उठाये हैं तथा सामाजिक मुद्दों पर काथलिक कलीसिया को एक प्रभावशाली मध्यस्थ घोषित कर कलीसिया के साथ सम्बन्धों में सुधार का प्रयास किया है।

क्यूबा की कलीसिया तथा यहाँ के नागरिकों की आशा है कि आर्थिक और सामाजिक सुधारों के साथ साथ राजनैतिक सुधारों की भी बहाली हो ताकि सभी नागरिक स्वतंत्रता में जीवन यापन का आनन्द प्राप्त कर सकें।

‘आवर लेडी ऑफ एल कोब्रे’ तीर्थस्थल में संत पापा का संदेश

In Church on March 29, 2012 at 5:50 am

जस्टिन तिर्की, ये.स.

सान्तियागो दि क्यूबा, 28 मार्च, 2012 (सेदोक, वीआर) मेरे अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, कुँवारी मरियम के जिस तीर्थस्थल को आप प्यार से ‘ला ममबीसा’ कहते हैं, उस ‘आवर लेडी ऑफ चैरिटी’ के तीर्थस्थल पर मैं एक तीर्थयात्री रूप में आया हूँ। कुँवारी मरियम की उपस्थिति एल कोब्रे के लिये एक ईश्वरीय वरदान है।

मुझे खुशी है कि मैं यहाँ उपस्थित प्रत्येक जन का हार्दिक अभिवादन करुँ। आप मेरे स्नेह को ग्रहण कीजिये और आप जहाँ भी जायें इसे लेकर जायें ताकि दूसरे इससे सांत्वना और अपने विश्वास में दृढ़ता का अनुभव कर सकें।

आज प्रत्येक व्यक्ति चाहे वह यहाँ हो या न हो यह जाने कि मैंने आपके प्रिय राष्ट्र के भविष्य को ईशमाता मरिया को सौंप दिया है ताकि आशा और नवीनीकरण के मार्ग में आगे बढ़ते हुए आपका राष्ट्र क्यूबावासियों के हित के लिये कार्य करे।

मैंने कुँवारी मरियम से उन लोगों के लिये प्रार्थनायें कीं हैं जो दुःख उठा रहे हैं, जो पूर्ण रूप से स्वतंत्र नहीं है, जो अपने प्रिय जन से बिछुड़े हुए हैं और जो विभिन्न कष्ट झेल रहे हैं।

मैंने देश के युवाओं को निष्कलंक माता मरिया के ह्रदय में चढ़ा दिया ताकि वे प्रभु येसु के वफ़ादार मित्र बनें और उन कमजोरियों के शिकार न बनें जिन्हें जानने के बाद परेशानी होती है।

आज मैं उन लोगों की भी याद करता हूँ जो अफ्रीकी तथा हैती के आसपास के राष्ट्र के लोगों की वंशज हैं जिन्होंने हाल दो वर्ष पहले भयंकर भूकंप का विनाश झेला है।

आज मैं उन्हें भी नहीं भूल सकता जो अपने घरों में सुसमाचार के वचनों के अनुसार जीना चाहते हैं और जिन्होंने अपने घरों को यूखरिस्तीय बलिदान के केन्द्र रूप में प्रयोग करने के लिये उपलब्ध कर दिया है।

मैं आप सभी बेटे – बेटियों को इस बात के लिये प्रोत्साहन देता हूँ कि आप कुँवारी माता मरिया के उदाहरण के अनुसार चलते हुए अपना घर उस चट्टान पर बनाइये जो और कोई दूसरा नहीं, प्रभु येसु ही हैं, न्याय के लिये कार्य कीजिये, विपत्तियों के समय धैर्यवान बने रहिये और प्रेम के सेवक बनिये।

आपके आन्तरिक आनन्द को कोई भी न छीन ले जो क्यूबाई जीवन की आत्मा है है। आप सबों को बहुत धन्यवाद। ईश्वर आपको आशीर्वाद प्रदान करे।

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