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लोकतंत्र का निर्माण तानाशाही को धराशायी करने से अधिक कठिन

In Church on March 2, 2012 at 7:03 pm

जोसेफ कमल बाड़ा

रोम 1 फरवरी 2012 (सीएनएस) टयूनिशिया में परिवर्तन से जुड़े एक नेता रसीद गनुशी ने कहा है कि उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व देशों के मुसलमान और ईसाई पहचानते हैं कि तानाशाही को समाप्त करके लोकतंत्र का निर्माण करना अधिक कठिन काम है लेकिन वे इस स्वपन् को साकार करने के लिए समर्पित हैं।

टयूनिशिया में एन्नाहादा अभियान के बुद्धिजीवी नेता रशीद गनुशी ने अरब क्रांति अभियान पर रोम में आयोजित एक सम्मेलन को 29 फरवरी को सम्बोधित किया जिसका आयोजन रोम आधारित लोकधर्मी समुदाय संत एजेदियो समुदाय ने किया था।

इस सम्मेलन में भूमध्यसागरीय क्षेत्र के अनेक ईसाई और मुसलमान धार्मिक और राजनैतिक नेताओं ने भाग लिया ताकि लोकतंत्र समर्थक अभियान विशेष रूप से ईसाई मुसलमान संबंध पर विचार विमर्श कर सकें। सम्मेलन के प्रतिभागियों का स्वागत संत एजेदियो समुदाय के संस्थापक निदेशक अंद्रेया रिकार्डि ने किया जो इस समय इटली के अंतरराष्ट्रीय सहयोग मंत्रालय के मंत्री हैं।

श्री गनुशी ने कहा कि पाश्चात्य जगत में अनेक लोगों में विश्वास और राजनीति को एकसाथ मुसलमानों द्वारा देखे जाने के बारे में पूर्वाग्रह हैं मानो इस्लाम और लोकतंत्र एक दूसरे के विपरीत हैं।

उन्होंने कहा कि मुसलमान चाहते हैं कि वे ठीक वैसा कर सकें जैसा कि रिकार्डी ने किया है- धार्मिक विश्वासी बने रहें और उनका विश्वास जो उनकी राजनैतिक गतिविधि को सचेत रखे।

अरब क्रांति ने सबसे महत्वपूर्ण काम किया है कि इसने धार्मिक मूल्यों तथा राजनैतिक जीवन में इन मूल्यों को उचित स्थान दिये जाने की पुर्नखोज कराया है।

उन्होंने कहा कि भिन्नताओं के मूल्यों का आंकलन करना उनके लिए नया है। तानाशाही के अंदर बहुत दबाव के तहत व्यवस्था कायम रखी जाती थी। इसलिए नवीन लोकतंत्रों को समन्वित प्रयास करना है कि देश के जीवन में सब नागरिकों को शामिल करते हुए सामाजिक सौहार्द बनायें।

स्व.शाहबाज़ भटटी के नाम पर अल्पसंख्यकों के मध्य सामाजिक नवजागरण

In Church on March 2, 2012 at 6:38 pm
  • Imageजोसेफ कमल बाड़ा

रोम, 1 मार्च 2012 (एशिया न्यूज़) पाकिस्तान के दिवंगत मंत्री शाहबाज भटटी की हत्या के एक साल बाद उनकी याद करते हुए एशिया न्यूज़ को दिये एक साक्षात्कार में उनके भाई तथा अल्पसंख्यक मामलों में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री गिलानी के विशेष सलाहकार पौल भट्टी ने कहा कि वे अपने भाई को साहसी और दृढनिश्चयी राजनीतिज्ञ के रूप में याद करते हैं जिन्होंने चुनौतियों का सामना करने के लिए अपने मसीही विश्वास में शक्ति पाया।

 अत्याचारों से पीडित अल्पसंख्यकों तथा समुदायों ने शाहबाज भटटी में ऐसे नेता को देखा जो उनकी रक्षा करने का इच्छुक था। स्व्रगीय शाहबाज भटटी की पिछले साल चरमपंथियों ने 2 मार्च को हत्या कर दी थी।

पाकिस्तान में ईसाई, मुसलिम, हिन्दु और अन्य समुदायों के लोग तैयारी कर रहे हैं ताकि स्व. शाहबाज भटटी की याद करते हुए उनके प्रति सम्मान व्यक्त कर सकें।

2 मार्च को ख्रीस्तयाग, प्रशाल जुलूस सहित संध्या प्रार्थना समारोह के कार्यक्रम तथा 6 मार्च को देश की राजधानी इस्लामाबाद में एक महत्वपूर्ण राजनैतिक और विभिन्न धर्मों के अनुयायियों का कांफ्रेंस इंटरफेथ कांफ्रेस आयोजित किया जायेगा।

 स्व. शाहबाज भटटी के नाम पर एक नया विश्वविद्यालय तथा ‘वोकेशनल स्कूल’ भी खोला जायेगा।

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