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Archive for March 6th, 2012|Daily archive page

चालीसा का तीसरा रविवार

In Church, Sunday Reflection on March 6, 2012 at 7:43 pm

11 मार्च, 2012

निर्गमन ग्रंथ  20, 1-17

कुरिंथियों के नाम  1, 22-25

संत योहन  2, 13-25

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जस्टिन तिर्की,ये.स.

 फादर जोन की कहानी

आज एक पल्ली पुरोहित के बारे बतलाता हूँ जिनका नाम था जोन। जब उन्हें एक नये पारिश में भेजा गया तो वे उस पल्ली के हर एक परिवार में  जाकर, परिवार के सदस्यों से मिलना शुरु किया। वे दिन को पल्ली के कार्य करते और शाम होते ही वह अपनी साईकिल में सवार होकर निकल जाते थे। जब वे उस किसी परिवार में जाकर प्रार्थना समाप्त करते तब ही घर आते और खाना खाते और फिर सो जाया करते थे। फादर जोन की यह दिनचर्या बन गयी थी। चालीसा का समय था। उस शाम को मौसम कुछ ठंढा होने के कारण फादर जोन ने कुछ गर्म कपड़े पहने, सिर में एक टोपी लगायी, अपनी साईकिल में सवार हो पास के एक गाँव की ओर चल पड़े। जब उन्होंने प्रार्थना समाप्त की तब रात के करीब नौ बज चुके थे।जब वे घर लौटने लगे तो रास्ते में किसी ने उन्हें रोका और रिवाल्वर दिखाया और कहा,”पैसा दो नहीं तो गोली मार दूँगा।” फादर जोन घबराये। वह कुछ बोल ही नहीं पा रहा थे। तब उस डकैत ने उसका कॉलर पकड़ा और कहा,”पैसा प्यारी है या जान।” फादर ने सफाया देते हुए कहा,”उसके पास पैसे नहीं हैं वह एक पास के गाँव में प्रार्थना करने गया था और अभी लौट रहा है।” जब उस डकैत को मालूम हुए कि वे एक फादर हैं तब उसने भी दया दिखाते हुए कहा, “ओ… तो आप फादर है तो आप जा सकते हैं। फादर जोन आश्चर्य चकित हो गया और वहाँ से आगे बढ़ने लगा। फिर उस व्यक्ति के द्वारा दिखाये गये स्नेह और आदर के उत्तर में उन्होंने उस व्यक्ति की ओर सिगरेट बढ़ाया और कहा,”सिगरेट पी लीजिये। अभी भी ठंढ है।” तब उस व्यक्ति ने कहा, “फादर मैं चालीसा काल में सिगरेट का सेवन नहीं करता हूँ।” हम कई बार छोटी बातों में धार्मिकता दिखाते हैं किन्तु जिस धार्मिकता से हमारा जीवन सुरक्षित हो सकता है उसे भूल जाते हैं।  कई बार हम रीति रिवाज़ पूरा करने में पीछे नहीं रहते पर वास्तव में दिल से अपने विश्वास को नहीं जीते हैं। प्रभु येसु ने अपने जीवन काल में किसी भी प्रकार के ढोंग का विरोध किया। उनकी इच्छा थी कि व्यक्ति अपने शरीर का, अपने मंदिर का रक्षक बनने का ढोंग न रचे पर दिल से उसकी रक्षा करे, उसे संवारे और हर पल उसे ईश्वर के योग्य बनाने के लिये कार्य करे। Read the rest of this entry »

धर्माध्यक्ष स्तेफन तिड़ु की दफ़न क्रिया में भीड़ उमड़ी

In Church on March 6, 2012 at 7:38 am

राँची, 5 मार्च, 2012 (ऊकान) झारखंड के खूँटी धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष स्तेफन एम. तिरु की दफ़न क्रिया में राँची महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल तेलेस्फोर टोप्पो, 11 धर्माध्यक्ष और 500 पुरोहित और असंख्य धर्मबहनों सहित क़रीब 10 हज़ार लोगों ने भाग लिया।

74 वर्षीय धर्माध्यक्ष स्तेफन तिड़ु की मृत्यु राँची से 35 किलोमीटर दूर अपने धर्माध्यक्षीय निवास स्थान खूँटी में 3 मार्च को हो गयी थी। वे कई बर्षो से उच्च रक्तचाप और मधुमेह की बीमारी से पीड़ित थे।

दफ़न क्रिया के पूर्व यूखरिस्तीय समारोह में उपस्थित विश्वासियों को संबोधित करते हुए कार्डिनल टोप्पो ने कहा, “दुःख के समय भी धर्माध्यक्ष स्तेफन तिड़ु सदा मुस्कुराते हुए लोगों का अभिवादन करते थे। शारीरिक पीड़ा उनके सद्व्यवहार में कभी भी बाधा नहीं बनी।”

मिस्सा के समय ही संत पापा द्वारा प्रेषित शोक संदेश को पढ़कर सुनाया गया।

घटना के बारे जानकारी देते हुए धर्मप्रांत के सचिव और कोषाध्यक्ष फादर अनिल होरो ने उकान को बताया कि 3 मार्च की सुबह आपातकालीन घंटी सुनकर जब वे धर्माध्यक्ष के कमरे में गये तो धर्माध्यक्ष की हालत ख़राब थी। उन्होंने अपनी हालत के बारे में बतलाते हुए ही अंतिम साँस लीं।

धर्माध्यक्ष स्तेफन को सन् 1995 ईस्वी में खूँटी धर्मप्रांत का धर्माध्यक्ष बनाया गयाथा। इसके पूर्व उन्होंने दुमका धर्मप्रांत में 9 वर्षों तक लोगों की सेवा की थी।

वाटिकन ने राँची महाधर्मप्रांत के सहायक धर्माध्यक्ष विनय कन्डुलना को खूँटी का अपोस्तोलिक अडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त कर दिया है।

शाहबाज़ भट्टी को ‘शहीद’ घोषित किये जाने पर विचार हो

In Human Rights on March 6, 2012 at 7:23 am

जस्टिन तिर्की, ये..

रोम, 5 मार्च, 2012 (सीएनए) पाकिस्तान के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री शाहबाज़ भट्टी की हत्या की पहली बरसी पर रोम में कई कार्यक्रम आयोजित किये गये और बहुतों ने इस बात पर बल दिया किया उन्हें ‘शहीद’ घोषित किया जाये।

स्कॉटलैंड के संत अन्ड्रूज़ और एडिनबर्ग के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल कीथ पैट्रिक ‘ओ’ ब्राएन ने कहा,”काथलिक कलीसिया को शाहबाज़ भट्टी को संत घोषित जाने की संभावना पर “गंभीरतापूर्वक विचार” करे।”

‘चर्च इन नीड’ को संबोधित करते हुए कार्डिनल कहा,”शाहबाज़ के बारे मे जो जानकारी हमें प्राप्त हैं उससे कहा जा सकता है कि वे सचमुच ईश्वरीय व्यक्ति थे जिन्होंने साहसपूर्वक अपने ख्रीस्तीय जीवन को जीया।”

उन्होंने कहा,”येसु के प्रति उनका जो समर्पण था वह इस बात का संकेत है कि उनके विश्वास की परख हो और एक सही समय में उसे वेदी का सम्मान प्राप्त हो सके।”

विदित हो कि शाहबाज़ भट्टी ने पाकिस्तान में एक काथलिक कैबिनेट मंत्री के रूप में धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों पर होने वाले उत्पीड़न के विरुद्ध अपनी आवाज उठायी थी।

उन्हें पिछले वर्ष 2 मार्च को भट्टी को उस समय तीन बन्दुकधारियों ने गोली मार कर हत्या कर दी जब उन्होंने अपनी माँ से मिलने के बाद ऑफिस के रास्ते पर थे। Read the rest of this entry »

देवदूत संदेश प्रार्थना में संत पापा का संदेश

In Audience on March 6, 2012 at 7:05 am

जोसेफ कमल बाड़ा

वाटिकन सिटी 5 मार्च 2012 (सेदोक, एशिया न्यूज) संत पापा बेनेडिरक्ट 16 वें ने रविवार 4 मार्च को संत पेत्रुस बासिलिका के प्रांगण में देश विदेश से आये लगभग 20 हज़ार तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को देवदूत संदेश प्रार्थना का पाठ करने से पूर्व सम्बोधित किया। उन्होंने इताली भाषा में सम्बोधित करते हुए कहा-

अतिप्रिय भाईयो और बहनो, चालीसाकाल का यह दूसरा रविवार, येसु के रूपान्तरण का रविवार है। वस्तुतः चालीसाकाल की यात्रा में पूजनधर्मविधि मरूभूमि में येसु का अनुसरण करने तथा प्रलोभनों पर विजय पाने के लिए हमें आमंत्रित करते हुए सुझाव देती है कि हम पर्वत के ऊपर जायें अर्थात् प्रार्थना के पर्वत पर उनके साथ जायें तथा उनके मानवीय चेहरे में ईश्वर के महिमामय प्रकाश पर मनन चिंतन करें। Read the rest of this entry »

वाटिकन गुप्त संग्रहालय रहस्यात्मक नहीं

In Church on March 6, 2012 at 7:00 am

जस्टिन तिर्की, ये..

वाटिकन सिटी, 5 मार्च, 2012 (सीएनए) वाटिकन के गुप्त संग्रहालय के प्रीफेक्ट मोन्सिनयोर सेरजियो पगानो का कहना है कि “वाटिकन गुप्त संग्रहालय में कोई ऐसी रहस्यात्मक चीज़ नहीं है पर इसमें संग्रहित अनगिनत मूल्यवान वस्तुओं के कारण असार्वजनिक था।”

उन्होंने कहा,”वाटिकन गुप्त संग्रहालय को सन् 1881 से खोला गया ताकि आधिकारिक शोधकर्ता इसमें अपना ऐतिहासिक शोध कार्य कर सकें।”

उन्होंने बतलाया कि गुप्त संग्रहालय की 400वीं वर्षगाँठ मनाने के लिये रोम के कपीतोलिने संग्रहालय में “लक्स इन अरकाना “प्रदर्शनी लगायी गयी है जिसमें संत पापा लेवो दसवें द्वारा सन् 1521 ईस्वी जारी की गयी आज्ञप्ति है जिसके द्वारा जर्मन मठवासी मार्टिन लूथर को कलीसिया से बाहर करने कर दिया गया था।

मोन्सिन्योर पगानो ने कहा इस प्रदर्शनी में आम लोग वाटिकन संग्रहालय के कई गुप्त दस्तावेज़ों को देख पायेंगे।

कई मह्त्वपूर्ण जो इस प्रदर्शनी में रखे गये हैं उनमें स्कॉटलैंड कीरानी मेरी के वे दस्तावेज़ भी शामिल हैं जिसमें उन्होंने संत पापा सिक्सतुस पंचम को लिखा था कि वे काथलिक विश्वास की रक्षा के लिये अपना जीवन बलिदान कर रहीं हैं।

महारानी मेरी ने लिखा था कि वे प्रोटेस्टंट इंगलैंड और अपने पापों के प्रायश्चित लिये अपने जीवन का बलिदान कर रही हैं।

इस संग्रहालय में गलीलियो से संबंधित दस्तावेज़, इंगलैंड की पार्लियामेंट से संत पापा क्लेमेन्ट सातवें को हेनरी अष्टम् के विवाह को रद्द करने संबंधी पत्र और द्वितीय विश्व युद्ध के समय संत पापा पीयुस बारहवें द्वारा लिखे गये दस्तावेज़ भी शामिल हैं।

वाटिकन संग्रहालय के निदेशक कार्डिनल रफाएले फरीना का मानना है कि गुप्त संग्रहालय को आम लोगों के लिये खोल देने से उन्हें इसके संबंध में सही जानकारी प्राप्त हो सकेगी।

प्रदर्शनी 9 सितंबर तक आम लोगों के लिये खुली रहेगी।

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