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6000 भारतीय एवं श्री लंकाई काथलिकों ने मिलकर मनाया सन्त अन्तोनी का पर्व

In Church on March 7, 2012 at 11:41 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

कच्छादीव, 06 मार्च सन् 2012 (एशियान्यूज़): भारत और श्री लंका के बीच स्थित कच्छादीव द्वीप पर, 03 और 04 मार्च को, भारत एवं श्री लंका के लगभग छः हज़ार ख्रीस्तीय धर्मानुयायियों ने, एक साथ मिलकर, पदुआ के सन्त अन्तोनी का समारोह मनाया।

पुर्तगाल के फ्राँसिसकन धर्मसमाजी पदुआ के सन्त अन्तोनी मछियारों एवं समुद्र तटों पर जीवन यापन करनेवालों के संरक्षक सन्त हैं जिनका पर्व प्रतिवर्ष तीन और चार मार्च को मनाया जाता है।

इस वर्ष इस दो दिवसीय वार्षिक समारोह की व्यवस्था श्री लंका की नौसेना द्वारा की गई। नौसेना ने तीर्थयात्रियों के भोजन, स्नान तथा शयन आदि की बखूबी व्यवस्था की थी।

श्री लंका एवं भारत के काथलिकों द्वारा मनाये गये इस संयुक्त समारोह ने नई दिल्ली एवं कोलोम्बो को अपनी द्वीपक्षीय मैत्री को मज़बूत करने का मौका दिया क्योंकि समारोह दोनों देशों को अलग करने वाले जल के बीच स्थित द्वीप पर आयोजित किया गया था।

मैत्री के प्रतीकवश श्री लंका की ओर से चालीस धर्मसमाजी तथा भारतीय काथलिक कलीसिया की ओर से 150 प्रतिनिधि रविवार को ख्रीस्तयाग समारोह में शरीक हुए।

कर्नाटक में पेन्टेकोस्टल पादरी की पिटाई एवं गिरफ्तारी

In Church on March 7, 2012 at 11:38 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

कर्नाटक, 06 मार्च सन् 2012 (एशियान्यूज़): कर्नाटक के आनकोला में रविवार को हिन्दु अतिवादियों ने पेन्टेकोस्टल चर्च की प्रार्थना सभा पर हमला कर श्रद्धालुओं को तितर बितर कर दिया। सन् 2012 के आरम्भ से कर्नाटक में इस प्रकार का यह छठवाँ ख्रीस्तीय विरोधी हमला था।

प्राप्त समाचारों के अनुसार, आनकोला के पेन्टेकोस्टल चर्च में रविवारीय प्रार्थना सभा का नेतृत्व करनेवाले पादरी के. मनोहर पर हिन्दु चरमपंथियों ने धर्मातरण का आरोप लगाकर उनकी पिटाई की तथा उन्हें एवं उनकी धर्मपत्नी को पुलिस स्टेशन तक घसीटा।

“ग्लोबल काऊन्सल ऑफ इन्डियन क्रिस्टियन” संगठन के हस्तक्षेप के बाद रविवार सन्ध्या पत्नी को रिहा कर दिया गया किन्तु, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप में, पादरी मनोहर को पुलिस हिरासत में ही रखा गया।

एशिया न्यूज़ से बातचीत में “ग्लोबल काऊन्सल ऑफ इन्डियन क्रिस्टियन” के अध्यक्ष साजन के. जॉर्ज ने आरोप लगाया कि पुलिस हिन्दु अतिवादियों के साथ मिली है तथा इसी मिलीभगत के कारण ख्रीस्तीयों पर धर्मातरण का झूठा आरोप लगाकर उन्हें उत्पीड़ित किया जाता है।

उन्होंने कहा, “संघ परिवार द्वारा लगाये मनगढ़न्त आरोपों के आधार पर पुलिस ख्रीस्तीयों को गिरफ्तार करने के लिये हमेशा तत्पर रहती है। पुलिस, अतिवादी तथा उनके राजनैतिक उस्तादों की मिलिभगत ने ख्रीस्तीय समुदायों में भय एवं असुरक्षा का वातावरण उत्पन्न कर दिया है।”

श्री जॉर्ज ने शिकायत की कि कर्नाटक में ख्रीस्तीय धर्मानुयायी अपने घरों में भी प्रार्थना नहीं कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि साल के आरम्भ से अब तक दूसरी बार पादरी मनोहर पर हमला किया गया है जबकि कानून भंग कर निर्दोष लोगों पर आक्रमण करनेवाले हिन्दु चरमपंथियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

अनेक देशों में अभी भी धार्मिक स्वतंत्रता कुण्ठित

In Church on March 7, 2012 at 11:35 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

 जिनिवा, 06 मार्च सन् 2012 (सेदोक): वाटिकन के एक वरिष्ठ धर्माधिकारी ने चेतावनी दी है कि विश्व के अनेक देशों में अभिव्यक्ति तथा अन्तःकरण और धर्म पालन की स्वतंत्रता का घोर उल्लंघन हो रहा है।

संयुक्त राष्ट्र संघ तथा जिनिवा स्थित अन्य अन्तरराष्ट्रीय संगठनों में वाटिकन और परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक महाधर्माध्यक्ष सिलवानो थॉमासी ने संयुक्त राष्ट्र संघीय मानवाधिकार समिति की उच्च स्तरीय बैठक के 19 वें सत्र में विश्व प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए उक्त चेतावनी दी।

उन्होंने कहा कि परमधर्मपीठ इस दिशा में संयुक्त राष्ट्र संघीय मानवाधिकार समिति के प्रयासों की सराहना करती है किन्तु इस बात की ओर ध्यान भी आकर्षित कराती है कि अभी भी कई देशों में लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता कुण्ठित की जा रही है तथा अभिव्यक्ति एवं विश्वास के कारण उनपर अत्याचार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि हालांकि कुछेक देशों में अभिव्यक्ति एवं धार्मिक स्वतंत्रता को सिद्धान्तवश स्वीकार किया जाता है तथापि दैनिक जीवन में इन सिद्धान्तों को लागू नहीं किया जाता है। उन्होंने कहा कि आँकड़े दर्शाते हैं कि कई देशों में धार्मिक स्वतंत्रता का घोर उल्लंघन जारी है।

उन्होंने कहा, “ख्रीस्तीय केवल अत्याचारों और उत्पीड़न का शिकार ही नहीं बनाये जाते बल्कि सन् 2003 से सन् 2010 के बीच अफ्रीका, मध्य पूर्व एवं एशिया के कई क्षेत्रों में ख्रीस्तीयों के विरुद्ध किये गये आतंकवादी हमलों में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।”

इसके अतिरिक्त, उन्होंने कहा, “अनुमानतः विश्व की 70 प्रतिशत जनता उन देशों में जीवन यापन करती है जहाँ धार्मिक स्वतंत्रता पर तरह तरह के प्रतिबन्ध लगे हैं तथा धार्मिक अल्पसंख्यकों को लगातार उत्पीड़ित किया जाता है। आम तौर पर विश्व के दो अरब दो करोड़ लोग धार्मिक स्वतंत्रता पर लगे प्रतिबन्धों से पीड़ित हैं।”

महाधर्माध्यक्ष थॉमासी ने कहा कि इन आँकड़ों के मद्देनज़र यह आवश्यक है कि अन्तरराष्ट्रीय समुदाय लोगों को उनके धर्मपालन एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करने हेतु ठोस उपाय करे।

 

 

 

 

 

 

कार्डिनल कोरदेस की पुस्तक में ख्रीस्तीय जीवन का मर्म

In Church on March 7, 2012 at 11:30 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

वाटिकन सिटी, 06 मार्च सन् 2012 (सेदोक): वाटिकन के उदारता कार्यों का समन्वय करनेवाली परमधर्मपीठीय समिति “कोर ओनुम” के पूर्वाध्यक्ष, कार्डिनल पौल कोरदेस की, उदारता एवं आध्यात्मिकता पर लिखी नई पुस्तक का प्राक्कथन सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने लिखा है।

इसमें सन्त पापा ने ख्रीस्तीय जीवन के मर्म को समझाया है। उन्होंने लिखा है कि भागीदारी एकता को प्रेरित करती है इसलिये ख्रीस्तीय धर्मानुयायियों को प्रभु ख्रीस्त का अनुसरण करते हुए अपने हिस्से में से अन्यों को भी बाँटकर समुदाय में एकता का प्रयास करना चाहिये।

सन्त पापा लिखते हैं कि प्रेरित चरित ग्रन्थ में सन्त लूकस आरम्भिक कलीसियाई समुदाय की चार विशिष्टताओं का वर्णन करते हैं, लिखते हैं: “नये विश्वासी दत्तचित्त होकर प्रेरितों की शिक्षा सुना करते थे, भ्रातृत्व के निर्वाह में ईमानदार थे और प्रभु – भोज तथा सामूहिक प्रार्थनाओं में नियमित रूप से शामिल हुआ करते थे।” और फिर, “वे सब मिलकर प्रतिदिन मन्दिर जाया करते थे और निजी घरों में प्रभु-भोज में सम्मिलित होकर निष्कपट हृदय से आनन्दपूर्वक एक साथ भोजन करते थे।”

सन्त पापा ने कहा कि उनका प्रार्थनाओं में नियमित रूप से एकत्र होना तथा एक साथ मिलकर भोजन करना ख्रीस्तीय जीवन का केन्द्रबिन्दु है जो हमें प्रेरितों के साथ प्रभु येसु के भोजन की भी याद दिलाता है।

सन्त पापा ने कहा, “अपनी दैनिक रोटी को अन्यों के साथ बाँटना एक अर्थपूर्ण कृत्य है जो समुदाय के बीच मैत्री, सदभाव एवं एकता को प्रोत्साहित करता है।

भागीदारी दान का एक सर्वोत्तम तरीका है जो अतिथि को भी परिवार का हिस्सा बना देता है।” उन्होंने कहा कि इसी प्रकार की उदारता ख्रीस्तीय जीवन को अर्थ प्रदान करती है तथा विश्व में प्रेम एवं मैत्री को प्रोत्साहन देती है।

अपनी नई पुस्तक “मदद स्वर्ग से यू ही नहीं गिरती” में कार्डिनल पौल कोरदेस ने काथलिक कलीसिया द्वारा विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में किये जा रहे कल्याणकारी कार्यों पर अपने अनुभवों को लिखा है तथा कहा है कि स्वतः को मिले वरदानों में अन्यों को भागीदार बनाने से व्यक्ति के मन में आध्यात्मिकता के फल प्रस्फुटित होते हैं।

 

 

पोलैण्ड की रेल दुर्घटना पर सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने जताया शोक

In Church, Solidarity on March 7, 2012 at 11:21 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

वाटिकन सिटी, 06 मार्च सन् 2012 (सेदोक): पोलैण्ड में

शनिवार को हुई रेल दुर्घटना पर, सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने, शोक व्यक्त कर मृतकों के परिजनों के प्रति गहन सहानुभूति का प्रदर्शन किया है।

पोलैण्ड के सेज़कोचीनी नगर के निकट शनिवार को वॉरसो से क्रेकाव की ओर जानेवाली गाड़ी राजधानी की ओर चली आ रही

एक अन्य रेलगाड़ी से टकरा गई थी जिसमें 16 यात्रियों के प्राण चले गये हैं तथा अनेक घायल हो गये हैं।

वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल तारचिसियो बेरतोने ने सन्त

 पापा की ओर से पोलैण्ड के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष, महाधर्माध्यक्ष जोसफ माखालिक, को प्रेषित एक तार सन्देश में कहा कि रेल दुर्घटना की ख़बर सुनकर सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें बहुत दुखी हुए हैं तथा मृतकों के परिवारों के प्रति गहन सहानुभूति का

 प्रदर्शन करते हैं।

सन्देश में कहा गया कि मृतकों को सन्त पापा प्रभु ईश्वर की करुणा के सिपुर्द करते ताकि वे चिर शान्ति प्राप्त कर सकें। शनिवार की रेल दुर्घटना से प्रभावित सभी लोगों को सन्त पापा अपनी प्रार्थनाओं में याद करने का आश्वासन देते हैं।

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