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समाज को रूपान्तरित करने हेतु पत्रकारिता में “नैतिकता” का आह्वान

In Church, Media on March 8, 2012 at 10:46 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

मुम्बई, 07 मार्च सन् 2012 (एशियान्यूज़): मुम्बई के काथलिक धर्माधिपति तथा भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष कार्डिनल ऑसवर्ल्ड ग्रेशियस ने कहा है कि सामाजिक रूपान्तरण में मीडिया की भूमिका अपरिहार्य है इसलिये पत्रकारिता में नैतिकता पर ध्यान केन्द्रित किया जाना अनिवार्य है।

तीन मार्च को, मुम्बई के सेन्ट पौल मीडिया कॉम्प्लेक्स में, “प्रिंट मीडिया” पर आयोजित राष्ट्रीय शिविर में कार्डिनल ग्रेशियस ने यह बात कही। सोसाईटी ऑफ सेन्ट पौल के सम्प्रेषण विभाग द्वारा आयोजित शिविर का शीर्षक थाः “सामाजिक रूपान्तरण भारतीय प्रेस का दायित्व”।

शिविर में भाग लेने वाले भारतीय पत्रकारों एवं मीडिया कर्मियों को सम्बोधित अपने उदघाटन भाषण में कार्डिनल ग्रेशियस ने कहा, “स्वतंत्रता का अति ख़तरनाक है। इसीलिये यह आवश्यक है कि पत्रकार अपने अनुशासन के लिये ख़ुद अपने नियम निर्धारित करें।” उन्होंने धन्य सन्त पापा जॉन पौल द्वितीय को याद करते हुए कहा कि स्व. सन्त पापा ने विश्व में उपलब्ध सभी सम्प्रेषण माध्यम तरीकों का उपयोग ईश प्रेम के प्रसार हेतु किया।

हिन्दुस्तान टाईम्ज़ तथा इन्डियन एक्सप्रेस के पूर्व पत्रकार बी.जी. वरग़ीज़ ने मीडिया के अधिकारों एवं दायित्वों पर अपने विचार व्यक्त किये।

उन्होंने कहा, “प्रेस के पास अपार क्षमता है तथा उससे सभी भय खाते हैं। इस क्षमता के कारण ही मीडिया की ज़िम्मेदारियाँ अत्यधिक गम्भीर होती हैं।

संसद में विचारित 80 प्रतिशत बातें वही होती हैं जो हम समाचार पत्रों में पढ़ते हैं। प्रेस की स्वतंत्रता एक खास स्वतंत्रता है इसीलिये इसमें नियमों का होना भी ज़रूरी है।”

उन्होंने कहा कि मीडिया को लोगों के बीच मैत्री और भाईचारा बढ़ाने का काम करना चाहिये। उसे सामाजिक न्याय एवं मानव प्रतिष्ठा को प्रोत्साहन देना चाहिये।

वेस्टमिन्सटर भजन मंडली रोम के सन्त पेत्रुस महागिरजाघर में गायेगी

In Church on March 8, 2012 at 10:45 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

वाटिकन सिटी, 07 मार्च सन् 2012 (सेदोक): यू.के. स्थित, विश्व विख्यात वेस्टमिन्सटर मठ की भजन मंडली को, परमधर्मपीठ ने रोम स्थित सन्त पेत्रुस महागिरजाघर में, वाटिकन के सिस्टीन प्रार्थनालय की भजन मंडली के साथ, इस वर्ष सन्त पेत्रुस और सन्त पौलुस के महापर्व के उपलक्ष्य में, गायन हेतु आमंत्रित किया है।

सितम्बर सन् 2010 में सन्त पापा बेनवेडक्ट 16 वें ने अपनी यू.के. प्रेरितिक यात्रा के दौरान वेस्टमिन्सटर मठ की भेंट की थी तथा यहाँ एंगलिकन धर्माचार्य कैनटरबरी के महाधर्माध्यक्ष डॉ. रॉवन विलियम्स के साथ सन्त एडवर्ड की समाधि पर श्रद्धार्पण किया था।

इसी अवसर पर सन्त पापा ने यह मंशा व्यक्त की थी कि वेस्टमिन्स्टर एवं वाटिकन की भजन मंडलियाँ एक साथ मिलकर गायें तथा ख्रीस्तीय धर्म में भजन मंडिलयों की बुलाहट को प्रतिबिम्बित करें। साथ ही, काथलिक एवं एंग्लिकन धर्मविधियों एवं सांस्कृतिक परम्पराओं के वरदानों का परस्पर आदान प्रदान करें।

सन्त पेत्रुस एवं सन्त पौलुस का महापर्व प्रतिवर्ष 29 जून को मनाया जाता है। प्रकाशित कार्यक्रम के अनुसार महापर्व की पूर्व सन्ध्या, 28 जून को, रोम स्थित सन्त पौल महागिरजाघर में आयोजित सान्ध्य वन्दना के अवसर पर तथा 29 जून को वाटिकन स्थित सन्त पेत्रुस महागिरजाघर में आयोजित ख्रीस्तयाग के अवसर पर दोनों भजन मंडलियाँ एक साथ मिलकर गायेंगी।

बेनेडिक्ट 16 वें करेंगे कमालदोली भिक्षुओं के सहस्राब्दि समारोह का नेतृत्व

In Church on March 8, 2012 at 10:44 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

वाटिकन सिटी, 07 मार्च सन् 2012 (सेदोक): सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने कमालदोली काथलिक भिक्षुओं के धर्मसंघ के सहस्राब्दि समारोह का नेतृत्व करने का आमंत्रण स्वीकार कर लिया है। शनिवार 10 मार्च को सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें रोम स्थित सन्त ग्रेगोरी मठ के गिरजाघर में सान्ध्य वन्दना का नेतृत्व करेंगे।

कमालदोली मठवासी इस वर्ष अपनी स्थापना की सहस्राब्दि मना रहे हैं। रोम का सन्त ग्रेगोरी मठ एवं गिरजाघर कमालदोली काथलिक धर्मबन्धुओं द्वारा स्थापित किया गया था किन्तु बाद में एंग्लिकन ख्रीस्तीयों के सिपुर्द कर दिया गया था।

सहस्राब्दि समारोह के लिये एंग्लिकन कलीसिया के विश्वाध्यक्ष, कैनटरबरी के एंग्लिकन महाधर्माध्यक्ष रॉवन विलियम्स भी रोम पहुँच रहे हैं।

शनिवार प्रातः महाधर्माध्यक्ष विलियम्स, वाटिकन में, सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें से मुलाकात करेंगे तथा सन्ध्या समय सन्त ग्रेगोरी मठ के गिरजाघर में आयोजित प्रार्थना सभा में शरीक होंगे।

बुधवारीय-आमदर्शन में संत पापा का संदेश

In Church on March 8, 2012 at 10:43 am

जस्टिन तिर्की, ये.स.

वाटिकन सिटी, 7 मार्च, 2012 (सेदोक, वी.आर) बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें ने वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में एकत्रित हज़ारों तीर्थयात्रियों को विभिन्न भाषाओं में सम्बोधित किया।

उन्होंने अंग्रेजी भाषा में कहा – मेरे अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, प्रार्थना विषय पर धर्मशिक्षा का समापन करते हुए आज हम ईश्वर के साथ हमारे संबंध और मौन की महत्ता पर चिन्तन करें।

येसु मसीह के प्रार्थनामय जीवन में विशेष करके क्रूस पर उनके आध्यात्मिक अनुभव में हम ‘शब्द’ और ‘मौन’ दोनों के अनुपम मेल को देखते हैं। येसु का क्रूस पर प्राणघाती मौन, अपने पिता ईश्वर के लिये अंतिम शब्द और सर्वोत्तम प्रार्थना थी।

ईश्वर के दिव्य शब्दों को सुनने के लिये बाह्य और आंतिरक मौन की ज़रूरत होती है ताकि ईश्वर की आवाज़ हमारे मन-दिल में गूँजे और हमें जीवन दे। येसु आज हमें इस बात की शिक्षा देते हैं कि हम दुःख के समय में विश्वास में सुदृढ़ रहें और उनकी प्रतिज्ञाओं पर पूरा भरोसा रखें।

येसु हमारे लिये प्रार्थना के सबसे महान् गुरु हैं। वे चाहते हैं कि हम सभी पिता ईश्वर की उसकी प्रिय संतान की तरह पूर्ण विश्वास के साथ बातें करें जैसा कि उन्होंने हमें सिखाया है।

येसु की प्रार्थना से हम यह भी सीखते हैं कि हम ईश्वर प्रदत्त कृपाओं को अपने जीवन में पहचानें और उसकी इच्छा को सदा पूर्ण करें ताकि इससे हमें सही दिशा मिले और हमारा जीवन अर्थपूर्ण हो सके।

इतना कहकर संत पापा ने अपना संदेश समाप्त किया।

उन्होंने अमेरिका के ‘कोस्ट गार्ड अकाडमी’, ‘कैथोलिक यूनिवर्सिटी ऑफ अमेरिका’, ‘सेंट मेरीस सेमिनरी’, ‘फ्रांसिस्कन यूनिवर्सिटी ऑफ स्टेबेनविल’, ‘काँग्रेस ऑफ इंटरनैशनल सोसायटी ऑफ प्लास्टिक रिजेनेरेटिव सर्जरी’ के सदस्यों, इंगलैंड, डेनमार्क के तीर्थयात्रियों, उपस्थित लोगों एवं उनके परिवार के सभी सदस्यों पर प्रभु की कृपा और शांति की कामना करते हुए उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

In Church on March 8, 2012 at 9:44 am

जस्टिन तिर्की, ये.स.

वाटिकन सिटी, 7 मार्च, 2012 (सेदोक, वी.आर) बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें ने वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में एकत्रित हज़ारों तीर्थयात्रियों को विभिन्न भाषाओं में सम्बोधित किया।

उन्होंने अंग्रेजी भाषा में कहा – मेरे अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, प्रार्थना विषय पर धर्मशिक्षा का समापन करते हुए आज हम ईश्वर के साथ हमारे संबंध और मौन की महत्ता पर चिन्तन करें।

येसु मसीह के प्रार्थनामय जीवन में विशेष करके क्रूस पर उनके आध्यात्मिक अनुभव में हम ‘शब्द’ और ‘मौन’ दोनों के अनुपम मेल को देखते हैं। येसु का क्रूस पर प्राणघाती मौन, अपने पिता ईश्वर के लिये अंतिम शब्द और सर्वोत्तम प्रार्थना थी।

ईश्वर के दिव्य शब्दों को सुनने के लिये बाह्य और आंतिरक मौन की ज़रूरत होती है ताकि ईश्वर की आवाज़ हमारे मन-दिल में गूँजे और हमें जीवन दे। येसु आज हमें इस बात की शिक्षा देते हैं कि हम दुःख के समय में विश्वास में सुदृढ़ रहें और उनकी प्रतिज्ञाओं पर पूरा भरोसा रखें।

येसु हमारे लिये प्रार्थना के सबसे महान् गुरु हैं। वे चाहते हैं कि हम सभी पिता ईश्वर की उसकी प्रिय संतान की तरह पूर्ण विश्वास के साथ बातें करें जैसा कि उन्होंने हमें सिखाया है।

येसु की प्रार्थना से हम यह भी सीखते हैं कि हम ईश्वर प्रदत्त कृपाओं को अपने जीवन में पहचानें और उसकी इच्छा को सदा पूर्ण करें ताकि इससे हमें सही दिशा मिले और हमारा जीवन अर्थपूर्ण हो सके।

इतना कहकर संत पापा ने अपना संदेश समाप्त किया।

उन्होंने अमेरिका के ‘कोस्ट गार्ड अकाडमी’, ‘कैथोलिक यूनिवर्सिटी ऑफ अमेरिका’, ‘सेंट मेरीस सेमिनरी’, ‘फ्रांसिस्कन यूनिवर्सिटी ऑफ स्टेबेनविल’, ‘काँग्रेस ऑफ इंटरनैशनल सोसायटी ऑफ प्लास्टिक रिजेनेरेटिव सर्जरी’ के सदस्यों, इंगलैंड, डेनमार्क के तीर्थयात्रियों, उपस्थित लोगों एवं उनके परिवार के सभी सदस्यों पर प्रभु की कृपा और शांति की कामना करते हुए उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

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