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सीरिया के ईसाईं अत्याचार के भय में जीवन जी रहे

In Church on March 10, 2012 at 11:00 pm

जोसेफ कमल बाड़ा

येरूसालेम 9 मार्च 2012 (सीएनएस) फिलिस्तीन के लिए पोंटिफिकल मिशन के अधिकारी ने कहा कि सीरिया में रह रहे ईसाई भी भय के वातावरण में रह रहे हैं जैसा कि इराक में हो रहे अत्याचारों में देखा गया है। लेबनान तथा सीरिया के क्षेत्रीय निदेशक तथा पोंटिफिकल मिशन के उपाध्यक्ष इस्साम बिसहारा ने कहा कि इराक में हो रहा पैटर्न उभर रहा है, इस्लामिक शस्त्रधारी सीरिया में ईसाईयों का अपहरण कर उनकी हत्या कर रहे हैं। बिसहारा ने एक ई मेल इंटरव्यू में कहा कि सीरियाई शहर होमस में सरकारी सैनिकों तथा विद्रोहियों के बीच हिंसक संघर्षों में 200 से अधिक ईसाईयों की हत्या हो गयी है।

जोर्डन और इराक के लिए पोंटिफिकल मिशन के क्षेत्रीय निदेशक राईद बाहाउ ने कहा कि क्षेत्र में घट रही घटनाओं की प्रतिक्रियाओं पर ईसाईयों को चिंता है। उन्हें भय है कि इराक और लेबनान के अनुभव जो गृहयुद्ध की पृष्ठभूमि में हुए इनकी पुनरावृत्ति उनकी अपनी भूमि में हो सकती है।

ये चिंता सीरियाई ईसाईयों को व्यथित करता है। हमने इराक में ईसाईयों को खोया यदि हम सीरियी में उन्हें खो दें तो फिर मध्य पूर्व के ईसाईय़ों का क्या होगा।

ईसाई क्षेत्र से पलायन कर रहे हैं और हमें इस क्षति को रोकने के लिए काम करना है। हमारे पास समय नहीं है। मध्य पूर्व में सीरिया ही ईसाईयों का अंतिम गढ़ है। यदि वे सीरिया से पलायन करने लगें तो क्षेत्र में ईसाईयत की समाप्ति की यह शुरूआत है।

काथलिक न्यूज सर्विस को दिये टेलीफोन वार्ता में बहाउ ने कहा कि आधिकारिक आंकड़े नहीं हैं लेकिन लगभग 200 ईसाई उन सीरियाई शरणार्थियों में शामिल थे जिन्होंने हाल में जोर्डन में प्रवेश किया।

उन्होंने कहा कि इनमें अनेक शरणार्थी वे ही लोग थे जिन्होंने ईराक से सीरिया में प्रवेश किया था। वे एक देश से दूसरे देश में शरणार्थी बने हैं। यह स्थिति न केवल जोर्डन में लेकिन लेबनान, तुर्की सब तरफ है। लोगों के इस तरह आवागमन से मध्य पूर्व क्षेत्र की स्थिति बदल रही है।

प्रवसन को अवसर के रूप में देखने का आग्रह

In Church, Human Rights on March 10, 2012 at 10:59 pm

जोसेफ कमल बाड़ा

रोम 9 मार्च 2012 (सीएनए) संयुक्त राष्ट्र संघ की शरणार्थी एजेंसी में वाटिकन के उच्च पदस्थ अधिकारी ने रोम में आयोजित कांफ्रेस को सम्बोधित करते हुए कहा कि चुनौतियों को बावजूद प्रवसन से अंततः सबको लाभ ही होता है।

संयुक्त राष्ट्र संघ के शरणार्थियों संबंधी उच्चायोग में परमधर्मपीठीय (होली सी) के स्थायी पर्यवेक्षक महाधर्माध्यक्ष सिल्वानो एम तोमासी ने वाटिकन के लिए अमरीका के दूतावास द्वारा रोम स्थित पोंटफिकल नोर्थ अमरीकन कालेज में “Building Bridges of Opportunity: Migration and Diversity” शीर्षक से आयोजित कांफ्रेस को 8 मार्च को सम्बोधित करते हुए कहा कि दीर्घकाल में प्रवसन ने सिद्ध किया है कि प्रवसन से जुड़े दोनों देशों अर्थात प्रवासियों की मातृभूमि और आश्रयदाता देश तथा सबको अधिकाँशतः प्रवासियों को लाभ ही होता है।

उन्होंने इसकी व्याख्या करते हुए कहा कि प्रवसन की प्रक्रिया शुरू में चुनौती लाती है जिसमें भाषा, आदतों और संस्कृतियों संबंधी कठिनाईयां, तनाव तथा टकराव होता है लेकिन यदि आश्रयदाता समुदाय प्रवसन के इस पहले चरण को पार कर जाता है तो वे देख सकते हैं कि कैसे प्रवासी नये आश्रयदाता देश में अच्छे नागरिक बन जाते हैं तथा न केवल अपने श्रम और काम से लेकिन अपने दिमाग और सृजनात्मकता से समाज को अधिक समृद्ध और रुचिकर समाज बनाते हैं।

महाधर्माध्यक्ष तोमासी ने कहा कि परदेशियों का स्वागत करने की हमारी ईसाई परम्परा और आश्रयदाता देश के जनहित को ध्यान में रखने की जरूरत के मध्य संतुलन बना कर रखा जाये।

हम लोगों को ले सकते हैं लेकिन उस देश के श्रमिकों के हित को भी नुकसान नहीं पहुँचा सकते हैं जहाँ लोग पहुँचने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि प्रवसन सबके लिए अच्छा है लेकिन हमें स्वयं को शिक्षित करने की जरूरत है ताकि प्रभाव के आरम्भिक बर्षों की कठिनाईयों पर विजय पा सकें।

प्रवसन को अवसर के रूप में देखने का आग्रह

In Church on March 10, 2012 at 10:58 pm

जोसेफ कमल बाड़ा

रोम 9 मार्च 2012 (सीएनए) संयुक्त राष्ट्र संघ की शरणार्थी एजेंसी में वाटिकन के उच्च पदस्थ अधिकारी ने रोम में आयोजित कांफ्रेस को सम्बोधित करते हुए कहा कि चुनौतियों को बावजूद प्रवसन से अंततः सबको लाभ ही होता है।

संयुक्त राष्ट्र संघ के शरणार्थियों संबंधी उच्चायोग में परमधर्मपीठीय (होली सी) के स्थायी पर्यवेक्षक महाधर्माध्यक्ष सिल्वानो एम तोमासी ने वाटिकन के लिए अमरीका के दूतावास द्वारा रोम स्थित पोंटफिकल नोर्थ अमरीकन कालेज में “Building Bridges of Opportunity: Migration and Diversity” शीर्षक से आयोजित कांफ्रेस को 8 मार्च को सम्बोधित करते हुए कहा कि दीर्घकाल में प्रवसन ने सिद्ध किया है कि प्रवसन से जुड़े दोनों देशों अर्थात प्रवासियों की मातृभूमि और आश्रयदाता देश तथा सबको अधिकाँशतः प्रवासियों को लाभ ही होता है।

उन्होंने इसकी व्याख्या करते हुए कहा कि प्रवसन की प्रक्रिया शुरू में चुनौती लाती है जिसमें भाषा, आदतों और संस्कृतियों संबंधी कठिनाईयां, तनाव तथा टकराव होता है लेकिन यदि आश्रयदाता समुदाय प्रवसन के इस पहले चरण को पार कर जाता है तो वे देख सकते हैं कि कैसे प्रवासी नये आश्रयदाता देश में अच्छे नागरिक बन जाते हैं तथा न केवल अपने श्रम और काम से लेकिन अपने दिमाग और सृजनात्मकता से समाज को अधिक समृद्ध और रुचिकर समाज बनाते हैं।

महाधर्माध्यक्ष तोमासी ने कहा कि परदेशियों का स्वागत करने की हमारी ईसाई परम्परा और आश्रयदाता देश के जनहित को ध्यान में रखने की जरूरत के मध्य संतुलन बना कर रखा जाये।

हम लोगों को ले सकते हैं लेकिन उस देश के श्रमिकों के हित को भी नुकसान नहीं पहुँचा सकते हैं जहाँ लोग पहुँचने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि प्रवसन सबके लिए अच्छा है लेकिन हमें स्वयं को शिक्षित करने की जरूरत है ताकि प्रभाव के आरम्भिक बर्षों की कठिनाईयों पर विजय पा सकें।

 

 

 

अमरीकी धर्माध्यक्षों के लिए संत पापा का संदेश

In Church on March 10, 2012 at 10:56 pm

जोसेफ कमल बाड़ा

वाटिकन सिटी 9 मार्च 2012 (सेदोक) संत पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने अमरीका के सप्तम से नवम क्षेत्रों के धर्माध्यक्षों को पंचवर्षीय पारम्परिक मुलाकात की समाप्ति पर शुक्रवार को सामूहिक रूप से वाटिकन में सम्बोधित किया।

उन्होंने वर्तमान समय की बौद्धिक और नैतिक चुनौतियों के आलोक में अमरीकी संस्कृति के सुसमाचारीकरण के कुछेक पहलूओं पर प्रकाश डालते हुए विवाह और परिवार के सामने व्यापक संकट और हयूमन सेक्सुआलिटी के ईसाई दर्शन पर चर्चा की।

संत पापा ने कहा कि विवाह की अभिशून्यता के प्रति कम होती स्वीकृति तथा ब्रहमचर्य पर आधारित जिम्मेदार, प्रौढ़ यौन नैतिकता का व्यापक रूप से खारिज किये जाने के फलस्वरूप गंभीर सामाजिक समस्याएं खड़ी हो रही हैं जिसके लिए बहुत अधिक मानवीय और आर्थिक कीमत अदा करनी पड़ रही है।

उन्होंने कहा कि धन्य संत पापा जोन पौल द्वितीय ने देखा था कि मानवता का भविष्य परिवार से होकर जाता है। परिवार और विवाह ऐसी संस्थाएँ हैं जिनकी रक्षा और प्रसार किया जाना है क्योंकि जो कुछ भी परिवार के लिए हानिकर है वह समाज को ही हानि पहुँचाता है।

संत पापा ने कहा कि शक्तिशाली राजनैतिक और सांस्कृतिक धाराएं विवाह की कानूनी परिभाषा को ही बदल देने का प्रयास कर रही हैं।

विवाह रूपी संस्थान की रक्षा करना सामाजिक वास्तविकता है क्योंकि अंततः यह न्याय का सवाल है जो सम्पूर्ण मानव समुदाय के कल्याण की रक्षा करने तथा अभिभावकों और बच्चों के अधिकारों की रक्षा से जुड़ा है।

विवाह और परिवार के बारे में कलीसिया की शिक्षा को समग्र रूप से बताने के समय आनेवाली कठिनाईयों तथा विवाह संस्कार के लिए आनेवाले युवाओं की संख्या में गिरावट को देखते हुए संत पापा ने कहा कि कलीसिया की शिक्षा और कलीसिया की सामाजिक शिक्षा के सार संग्रह को प्रवचनों और धर्मशिक्षाओं में उचित स्थान दिये जाने की जरूरत है।

उन्होंने विवाह तैयारी कार्यक्रमों में यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि धर्मशिक्षा के पहलूओं सहित ईसाई विवाह के सामाजिक और कलीसियाई जिम्मेदारियों को भी अच्छी तरह प्रस्तुत किया जाये।

विवाह पूर्व युग्मों के एक साथ रहने से उत्पन्न होनेवाली कठिनाईयों को देखते हुए संत पापा ने धर्माध्यक्षों को उत्साहित किया कि विवाह समारोह के मामले में स्पष्ट मेषपालीय और धर्मविधि सम्मत नियमन विकसित करें जिसमें ईसाई नैतिकता की वस्तुनिष्ठ माँग हो तथा जो युवा जोड़ों के प्रति संवेदनशीलता एवं परवाह को दर्शाये।

संत पापा ने अमरीकी धर्माध्यक्षीय सम्मेलन द्वारा तैयार सन 2009 के पत्र “मैरिज लव एंड लाइफ इन द डिवाइन प्लैन” की सराहना की जिसमें कलीसिया की शिक्षा को स्पष्ट और आधिकारिक रूप से प्रस्तुत किया गया है।

उन्होंने परिवारों को समर्थन देने के लिए पल्लियों, स्कूलोँ और लोकोपकारी संस्थानों की भी सराहना की जो कठिन वैवाहिक परिस्थितियों में जी रहे दम्पतियों, अलग या तलाकशुदा व्यक्तियों, एकल अभिभावकों, किशोर आयु में मातृत्व धारण करनेवाली युवतियों, गर्भपात का विचार करनेवाली महिलाओं एवं परिवार टूटने से त्रासदीपूर्ण स्थिति झेल रहे बच्चों की सहायता करते हैं।

संत पापा ने सम्पूर्ण मसीही समुदाय फिर से ब्रह्मचर्य के सदगुण की सराहना करने की पुर्नखोज करने की नितांत आवश्यकता को रेखांकित किया।

युवाओं के लिए जरूरी होगा कि कलीसिया की शिक्षा को इसकी समग्रता में लें। यदि हम ख्रीस्त को अपने जीवन में प्रवेश करने दें तो हम कुछ खोते नहीं हैं जो वास्तव में जीवन को स्वतंत्र, सुंदर और महान बनाता है।

संत पापा ने कहा कि इस क्षेत्र में हमारे प्रयास अंततः बच्चों के कल्याण को ध्यान में रखते हैं जिनका मूलभूत अधिकार है कि यौन नैतिकता के स्वस्थ वातावरण में उनकी परवरिश हो तथा मानव संबधों में इनका उचित स्थान हो।

संत पापा ने कहा कि बच्चे हर समाज का भविष्य तथा सच्ची निधि हैं। उनका देखभाल करने का अर्थ है कि नैतिक मूल्यों को जीने और उनकी शिक्षा देने तथा रक्षा करने की अपनी जिम्मेदारी को पहचानना।

अंततः संत पापा ने यह कामना व्यक्त की कि अतीत की घटनाओं से शिक्षा पाकर अमरीका में कलीसिया युवाओं को शिक्षा देने के अपने ऐतिहासिक मिशन को बनाये रखेगी और इस प्रकार स्वस्थ परिवार की बुनियाद को मजबूत रखने में योगदान देगी जो विभिन्न पीढियों के मध्य सह्दयता और समाज के स्वस्थ की सुनिश्चित गारंटी है।

पश्चाताप और नवीन सुसमाचार का संबंध

In Church on March 10, 2012 at 10:54 pm

जोसेफ कमल बाड़ा

वाटिकन सिटी 9 मार्च 2012  (सेदोक, वीआरवर्ल्ड) संत पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने वाटिकन के आंतरिक फोरम अपोस्तोलिक पेनिटेंशियरी द्वारा आयोजित वार्षिक बैठक के लगभग 1300 प्रतिभागियों को शुक्रवार को सम्बोधित किया।

उनका सम्बोधन मेलमिलाप का संस्कार तथा नवीन सुसमाचार प्रचार के मध्य लिंक पर केन्द्रित रहा।

संत पापा ने प्रतिभागियों से कहा कि मेल मिलाप का संस्कार सहित अन्य संस्कारों को कभी भी सुसमाचार की उदघोषणा करने से अलग नहीं सोचा जाना चाहिए।

किस भाव में पापस्वीकार करना नवीन सुमसाचार प्रचार का मार्ग है इसके जवाब में उन्होंने कहा कि कलीसिया की संतान की पवित्रता से नवीन सुसमाचार प्रचार पोषण करता है।

 पवित्रता तथा मेलमिलाप के संस्कार के मध्य निकट संबंध है जिसका साक्ष्य इतिहास के सब संतों ने दिया है।

संत पापा ने कहा कि दिल का सच्चा परिवर्तन जो कि स्वयं को परिवर्तनकारी और नवीन बनानेवाली ईश्वर की शक्ति के लिए स्वयं को खोलना है, यह किसी भी सुधार का इंजन है तथा इसका फल सुसमाचार प्रचार की सच्ची ताकत है।

उन्होंने कहा कि पापस्वीकार पीठिका में पश्चातापी पापी दिव्य कृपा प्राप्त कर क्षमा पाता तथा पवित्र किया जाता है वह पुराना मानव को छोड़कर नया मानव बन जाता है।

संत पापा ने धन्य संत पापा जोन पौल द्वितीय के कथन का स्मरण किया जिसमें उन्होंने मसीही समुदायों को इस संस्कार के महत्व के बारे में शिक्षा देने का आह्वान किया था जो ख्रीस्त के दयालु ह्दय को प्रकट करता है।

पुरोहितों तथा पुरोहिताई की तैयारी कर रहे डीकनों को विशिष्ट रूप से सम्बोधित करते हुए संत पापा ने कहा कि मेलमिलाप का संस्कार उनके लिए अवसर है कि वे ईश्वर के साथ नवीकृत साक्षात्कार के साधन बनें क्योंकि अनेक लोग परिवर्तन के एक अवसर के लिए, दया माँगने के लिए तथा उससे बढ़कर पवित्रता के निष्ठावान साक्षी बनने के लिए उनकी ओर देखेंगे जो कि नवीन सुसमाचार प्रचार का लक्ष्य है।

पश्चाताप और नवीन सुसमाचार का संबंध

In Church on March 10, 2012 at 10:53 pm

जोसेफ कमल बाड़ा

वाटिकन सिटी 9 मार्च 2012  (सेदोक, वीआरवर्ल्ड) संत पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने वाटिकन के आंतरिक फोरम अपोस्तोलिक पेनिटेंशियरी द्वारा आयोजित वार्षिक बैठक के लगभग 1300 प्रतिभागियों को शुक्रवार को सम्बोधित किया।

उनका सम्बोधन मेलमिलाप का संस्कार तथा नवीन सुसमाचार प्रचार के मध्य लिंक पर केन्द्रित रहा।

संत पापा ने प्रतिभागियों से कहा कि मेल मिलाप का संस्कार सहित अन्य संस्कारों को कभी भी सुसमाचार की उदघोषणा करने से अलग नहीं सोचा जाना चाहिए।

किस भाव में पापस्वीकार करना नवीन सुमसाचार प्रचार का मार्ग है इसके जवाब में उन्होंने कहा कि कलीसिया की संतान की पवित्रता से नवीन सुसमाचार प्रचार पोषण करता है।

 पवित्रता तथा मेलमिलाप के संस्कार के मध्य निकट संबंध है जिसका साक्ष्य इतिहास के सब संतों ने दिया है।

संत पापा ने कहा कि दिल का सच्चा परिवर्तन जो कि स्वयं को परिवर्तनकारी और नवीन बनानेवाली ईश्वर की शक्ति के लिए स्वयं को खोलना है, यह किसी भी सुधार का इंजन है तथा इसका फल सुसमाचार प्रचार की सच्ची ताकत है।

उन्होंने कहा कि पापस्वीकार पीठिका में पश्चातापी पापी दिव्य कृपा प्राप्त कर क्षमा पाता तथा पवित्र किया जाता है वह पुराना मानव को छोड़कर नया मानव बन जाता है।

संत पापा ने धन्य संत पापा जोन पौल द्वितीय के कथन का स्मरण किया जिसमें उन्होंने मसीही समुदायों को इस संस्कार के महत्व के बारे में शिक्षा देने का आह्वान किया था जो ख्रीस्त के दयालु ह्दय को प्रकट करता है।

पुरोहितों तथा पुरोहिताई की तैयारी कर रहे डीकनों को विशिष्ट रूप से सम्बोधित करते हुए संत पापा ने कहा कि मेलमिलाप का संस्कार उनके लिए अवसर है कि वे ईश्वर के साथ नवीकृत साक्षात्कार के साधन बनें क्योंकि अनेक लोग परिवर्तन के एक अवसर के लिए, दया माँगने के लिए तथा उससे बढ़कर पवित्रता के निष्ठावान साक्षी बनने के लिए उनकी ओर देखेंगे जो कि नवीन सुसमाचार प्रचार का लक्ष्य है।

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