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कोलकाता में बाईबल शोभायात्रा पहली बार

In Church on March 13, 2012 at 9:05 am

जस्टिन तिर्की, ये.स.
कोलकाता, 12 मार्च, 2012(कैथन्यूज़) में लोगों में बाईबल के प्रति जागरूकता लाने के लिये कोलकाता में आयोजित प्रथम बाईबल शोभा यात्रा में 5000 काथलिकों ने हिस्सा लिया। कोलकाता के महाधर्माध्यक्ष थोमस डीसूज़ा के जुलूस की अगवाई की।

शोभायात्रा के संयोजक फादर इग्नासियुस फिलो सारतो ने बतलाया, “काथलिक अनुयायियों में बाईबल के प्रति लगाव कम है इसलिये निश्चय ही शोभा यात्रा ने लोगो में जागरुकता लायी है और उन्होंने ईशवचन के महत्व को समझा है।

उन्होंने बताया कि पश्चिमी बंगाल की राजधानी कोलकाता को जुलूसों का शहर माना जाता रहा है विशेष करके मार्क्सवादियों 34 वर्षों के शासन काल को जब जुलूसों का आयोजन होता रहा। अब वे चाहते हैं कि क्यों न बाईबल जुलूस निकाला जाये ताकि इसके द्वारा ख्रीस्तीय विश्वास को प्रकट किया जा सके।

फादर सारतो ने बतलाया कि बाईबल जुलूस का आयोजन वाटिकन द्वितीय का एक दस्त्तावेज़ ‘देई वेरबुम’ की याद में ‘विश्वास वर्ष’ के अवसर पर ‘रीजनल कौंसिल ऑफ द स्मॉल क्रिश्चियन कम्युनिटीस’(एससीसी) ने इस शोभायात्रा का आयोजन किया।

बाईबल यात्रा के बारे में बोलते हुए एक प्रतिभागी रेजीना ख़लख़ो ने कहा कि हमें चाहिये कि हम दूसरी कलीसियाओं से बाईबल के भक्ति करना सीखें, ईश वचन को गंभीरतापूर्वक लें और अपने घरों में उचित स्थान दें।

मालूम हो कि पश्चिम बंगाल की 92 मिलियन आबादी की सिर्फ़ 0.6 प्रतिशत जनता ख्रीस्तीय है।

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एकजुटता से ही देश की प्रगति संभव

In Church on March 13, 2012 at 9:04 am

जस्टिन तिर्की, ये.स.

कोची, 12 मार्च,2012 (कैथन्यूज़) भारत के नवनियुक्त कार्डिनल जोर्ज अलेन्चेरी ने कहा है भारत की प्रगति के लिये एकता बहुत ज़रूरी है। कार्डिनल जोर्ज शनिवार 10 मार्च को कोची के संत मेरीस बसीलिका में आयोजित एक अभिनन्दन समारोह में लोगों को संबोधित कर रहे थे।

कार्डिनल अलेन्चेरी ने कहा,”सत्य सब धर्मों का सार है और इसे हमारे विचार-विमर्श में सत्य को पूर्ण महत्व दिया जाना चाहिये।”

उन्होंने कहा, “हमारा देश विभिन्नताओं से समृद्ध है और ऐसी स्थिति में एकता के लिये प्रयास करने से ही देश की प्रगति संभव है।”

उन्होंने बतलाया कि सामाजिक और सांस्कृतिक विविधतायें लोगों को न बाँटे बल्कि उन्हें एकसुत्र में बाँधने के प्रयास किये जायें।

कार्डिनल ने कहा,” मानव कल्याण ही व्यक्ति का लक्ष्य हो और इसके लिये प्रत्येक व्यक्ति अपना योगदान दे तब ही ईश्वर के राज्य की स्थापना हो सकती है।”

कोची में आयोजित नागरिक अभिनन्दन समारोह में भारत में वाटिकन के प्रेरितिक राजदूत महाधर्माध्यक्ष सल्वातोरे पेन्नाकियो और तिरुवल्ला के महाधर्माध्यक्ष थोमस मार कुरिलोस सहित सिरो मलाबार कलीसिया के 40 धर्माध्यक्ष और अन्य कलीसियाओं के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

केरल के कृषि मंत्री के.वी.थोमस और कर मंत्री के. बाबू भी इस समारोह में मंत्रीमंडल का प्रतिनिधित्व किया।

बीसीएम की पहली महिला पुरोहित

In Church on March 13, 2012 at 9:04 am

जस्टिन तिर्की, ये.स.

आइज्वल, 12 मार्च, 2012 (कैथन्यूज़) ‘बैपटिस्ट चर्च ऑफ मिजोरम’(बीसीएम) ने रविवार 11 मार्च को अपने कार्यकारिणी समिति द्वारा उठाये गये अवरोधों का हल निकालते हुए आइजवल के आर.एल. नुनी को अपना पहला महिला पुरोहित नियुक्त कर दिया है।

आर. एल. नुनी आइजवल में अवस्थित अकाडेमी ऑफ इन्टेग्रेटेड क्रिश्चियन स्टडीस की प्रिंसिपल हैं।

विदित हो कि पिछले साल बैपटिस्ट चर्च की समिति ने नुनी के पुरोहिताभिषेक के अनुमोदन पर आपत्ति जतायी थी। लेकिन बाद में अनेक दौर के विचार-विमर्श के बाद नुनी को मिजोरम का पहल बैपटिस्ट महिला पुरोहित नियुक्त कर दिया गया है। कैथन्यूज़ के अनुसार नुनी पुरुष पुरोहितों की तरह मेषपालीय कार्य नहीं भी कर सकती है।

रविवार को बैपटिस्ट चर्च ऑफ मेथोडिस्ट की महासभा में लुंगलेई चर्च के अध्यक्ष रेभरेन्त रल्तावन्गा ने नुनी का अभिषेक किया।

विदित हो कि नवाभिषिक्त महिला पुरोहित नुनी ‘यूनियन थियोलोजिल कॉलेज बंगलोर’ से थियोलॉजी में मास्टर्स और डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त है। उन्हें पुराने व्यवस्थान विशेषज्ञ और ईशशास्त्री के रूप में पहले से ही ख्याति प्राप्त है।

नुनी ने आइज्वल थियोलोजीकल कॉलेज और ईस्टर्न थियोलोजीकल कॉलेज व्याख्याता या लेक्चरर कार्य भी किया है। पश्चिमी बंगाल के सेराम्पुर कॉलेज की कोषाध्यक्ष भी रही हैं।

मिजोरम के पुरुष प्रधान ईसाई समाज में नुनी के पुरोहिताभिषेक को महिलाओं की सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

संत पापा की मेक्सिको प्रेरितिक यात्रा का प्रसारण 100 चैनलों में

In Church, Journey on March 13, 2012 at 9:03 am

जस्टिन तिर्की, ये.स.

मेक्सिको सिटी, 12 मार्च, 2012 (एजेन्शिया फीदेस) 100 से भी अधिक टेलेविज़न चैनल संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें की मेक्सिको की प्रेरितिक यात्रा का प्रसारण करेंगे।

उक्त बात की जानकारी देते हुए ‘एजिन्शिया फीदेस’ ने बताया कि इसके पूर्व भी धन्य संत पापा जोन पौल द्वितीय 5 बार मेक्सिको का दौरा किया पर इतने बड़े पैमाने पर उनके कार्यक्रमों का प्रसारण नहीं हुआ था।

उन्होंने कहा कि संत पापा की प्रेरितिक यात्रा के मद्देनज़र लेयोन धर्मप्रांत के तकनीशियन जोर-शोर से अपनी तैयारी कर रहे हैं ताकि अन्तरराष्ट्रीय सिग्नल उन सबों के लिये उपलब्ध हो जो संत पापा के चित्रों का इस्तेमाल करना चाहें।

प्राप्त जानकारी के अनुसार मेक्सिको का राष्ट्रीय टेलेविज़न केन्द्र और मेक्सिकन एपिस्कोपल कोन्फेरेन्स(सीईएम) एक साथ मिल कर कार्य कर रहे हैं।

सीईएम के मीडिया कमीशन के अध्यक्ष लुईस कारलोस फ्रियास ने कहा, “अंतरराष्ट्रीय सिग्नल के लिये कोई ‘लोगो’ या ‘ब्रांड’ नहीं होगा। इसमें मेक्सिकन टेलेविज़न की टीम कार्य करेगी और पहली बार कैथोलिक कलीसिया इसका वितरण करेगी।”

उन्होंने बतलाया कि टेलेविज़न नेटवर्क लोगों के लिये उपलब्ध होगा और ‘फाईबर ऑप्टिक सर्विसेस’, ‘ग्राउँड सटेलाइट यूनिट’, ‘इन्टरनैशनल ब्रॉडकास्टिंग सेन्टर’ आदि की सुविधा भी दी जायेगी।

इसके अलावा सीईएम ने पहले ही प्रसारण के लिये एक ऐसे ढाँचे का विकास किया है कि इससे पूरी दुनिया में संत पापा की यात्रा का प्रसारण हो सके।

फीदेस के अनुसार मेक्सिको के गुवानाजुवातो के बाईचेन्तिनियल पार्क जहाँ संत पापा यूखरिस्तीय बलिदान अर्पित करेंगे 17 कैमरे लगे होंगे।

वृत्तचित्र, फीचर फिल्म, साक्षात्कार और वीडिया क्लिप और अन्य आवश्यक जानकारियों का संकलन पहले ही किया जा चुका है जो मीडियाकर्मियों के लिये उपयोगी सिद्ध होगा। इन सबको तैयार करने में कैथोलिक मीडिया संस्थान-‘ग्वादालूपे कम्युनिकेशन्स’ और ‘पोन्तिफिकल मिशन सोसायटीस’ ने अपना योगदान दिया है।

विदित हो संत पापा शुक्रवार 23 मार्च को मेक्सिको की प्रेरितिक यात्रा आरंभ करेंगे।

देवदूत संदेश प्रार्थना में संत पापा का संदेश

In Audience, Church on March 13, 2012 at 9:03 am

जोसेफ कमल बाड़ा

वाटिकन सिटी 12 मार्च 2012 (सेदोक, एशिया न्यूज) संत पापा बेनेडिरक्ट 16 वें ने रविवार 11 मार्च को संत पेत्रुस बासिलिका के प्रांगण में देश विदेश से आये हजारों तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को देवदूत संदेश प्रार्थना का पाठ करने से पूर्व सम्बोधित किया। उन्होंने इताली भाषा में सम्बोधित करते हुए कहा-

अतिप्रिय भाईयो और बहनो, चालीसाकाल के तीसरे रविवार के लिए सुसमाचार पाठ में येरूसालेम स्थित मंदिर से जानवरों की ब्रिक्री करनेवालों तथा सर्राफों के निष्कासन के प्रसंग का वर्णन है। वस्तुतः सभी सुसमाचार लेखकों ने इस प्रसंग का वर्णन किया है जो पास्का पर्व के निकट घटित हुआ था तथा लोगों और उनके शिष्यों पर गंभीर असर हुआ।

येसु के इस कदम की हम कैसी व्याख्या करें। पहला यह देखें कि इस कृत्य ने सार्वजनिक व्यवस्था पर कोई दबाव नहीं बनाया लेकिन इसे नबूवती कृत्य के रूप में देखा गया वस्तुतः नबी, ईश्वर के नाम में बहुधा दुरूपयोगों की निन्दा करते हैं तथा यदा कदा सांकेतिक कृत्यों से प्रकट करते हैं।

समस्या यदि कोई थी तो उनका प्राधिकार। इसलिए यहूदी येसु से पूछते हैं कि आप हमें कौन सा चमत्कार दिखा सकते हैं जिससे हम जानें कि आपको ऐसा करने का अधिकार है। हमें दिखायें कि कौन वास्तव में ईश्वर की ओर से करता है।

मंदिर से सर्राफों के निष्कासन की व्याख्या राजनैतिक क्रांति के रूप में देखी गयी, येसु को भी यहूदी राष्ट्रवादी (जेलटस) के अभियान की पंक्ति में रखा गया।

यहूदी राष्ट्रवादी वस्तुतः ईश्वर के विधान के लिए उत्साही थे तथा इसे लागू करने के लिए हिंसा का उपयोग करने को तैयार थे। येसु के समय में मुक्तिदाता या मसीहा के आने की प्रतीक्षा थी जो इस्राएल को रोमी शासन से मुक्त करायेगा। लेकिन येसु ने उनकी इस आशा को पूरा नहीं कर उन्हें निराश किया।

उनके कुछ शिष्य और यहाँ तक कि यूदस इस्कारियोति ने उनके साथ विश्वासघात किया। वस्तुतः येसु की हिंसक व्यक्ति के समान व्याख्या करना असंभव है, हिंसा ईश्वर के राज्य के विपरीत है यह ख्रीस्तविरोधी का साधन है। हिंसा कदापि मानवता की सहायता नहीं करती लेकिन उसे अमानवीय ही बनाती है।

मंदिर से बिक्री करनेवाले और सर्राफों के निष्कासन के कृत्य को देखते हुए येसु के शब्दों को सुनें- यह सब यहाँ से हटा ले जाओ। मेरे पिता के घर को बाजार मत बनाओ।

शिष्यों को धर्मग्रंथ का यह कथन याद आया- तेरे घर का उत्साह मुझे खा जायेगा। यह भजन शत्रुओं की नफरत के कारण अत्यधिक खतरेवाली परिस्थिति में सहायता के लिए करूण पुकार है। वह परिस्थिति जिसे येसु अपने दु-खभोग के समय अनुभव करेंगे। पिता और उनके घर के लिए उत्साह ने येसु को क्रूस तक लिया- उनका उत्साह है जो कि उन्हें अपने प्रथम पुरूष के रूप में अदा किया न कि वैसा व्यक्ति जो हिंसा के द्वारा ईश्वर की सेवा करना चाहता है।

वस्तुतः येसु अपने प्राधिकार के प्रमाण रूप में जो चिह्न देते हैं वह उनकी अपनी मृत्यु और पुनरूत्थान है। इस मंदिर को ढा दो और मैं इसे तीन दिनों के अन्दर फिर खड़ा कर दूँगा।

संत योहन लिखते हैं- ईसा तो अपने शरीर रूपी मंदिर के विषय में कह रहे थे। येसु के पुनरूत्थान के साथ ही एक नया पंथ, प्यार के सम्प्रदाय और एक नयी कलीसिया जो स्वयं ख्रीस्त हैं का आरम्भ हुआ। पुनर्जीवित ख्रीस्त, जिनके द्वारा हर विश्वासी आत्मा और सत्य में पिता ईश्वर की आराधना कर सकता है।

प्रिय मित्रो, पवित्र आत्मा ने कुँवारी माता मरिया के गर्भ में इस नये मंदिर का निर्माण करना आरम्भ किया है। हम उनकी मध्यस्थता से प्रार्थना करें कि हर ईसाई इस आध्यात्मिक घर का पत्थर बने।

इतना कहने के बाद संत पापा ने देवदूत संदेश प्रार्थना का पाठ किया और सबको अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।

एकान्त और सामुदायिक जीवन’ से समृद्ध है – मठवासी जीवन

In Church on March 13, 2012 at 9:02 am

जस्टिन तिर्की, ये.स.

वाटिकन सिटी, 12 मार्च, 2012(सेदोक, वीआर) कंटेरबरी के अंगलिकन महाधर्माध्यक्ष डॉ रोवान विलियम्स ने रोम स्थित सान ग्रेगेरियो अल चेलियो मठ में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा, “विभिन्न ख्रीस्तीय समुदायों को एक कठिन पर महत्त्वपूर्ण बात को जानने की आवश्यकता है कि वे एक-दूसरे के बिना जीवित नहीं रह सकते; कोई एक कलीसिया दूसरे के बिना येसु मसीह के सुसमाचार पर पूर्ण अधिकार का दावा नहीं कर सकता।”

उन्होंने कहा,”मठवासी जीवन विभिन्न कलीसियाओं के मतभेदों को दूर करने के लिये एक रास्ता दिखाता है।”

महाधर्माध्क्ष ने कहा, “मठवासी का जीवन दो विपरीत दिखाई पड़ने वाले ध्रुवों – एकांत और सेवामय सामुदायिक जीवन को एक साथ जोड़ता है। ठीक इसी प्रकार विभाजित कलीसियायें अपने मेल-मिलाप के प्रयास में मठवासी सुधारों की तरह एक-दूसरे के वरदानों और परंपराओं से बहुत कुछ सीख सकतीं हैं।”

कायेलियन पर्वत पर स्थित कमालदोली के बेनेदिक्तिन समुदाय की ओर इंगित करते हुए महाधर्मध्यक्ष विलियम्स ने कहा,”मठवासीवाद का इतिहास इस बात पर पुनर्खोज़ और चिन्तन करने का आमंत्रण है कि स्वकेन्द्रित ढाँचों और रणनीतियों के कारण क्या हमने ईशवचन पर अत्यधिक बल दिया है या इसे अस्पष्ट कर दिया है।”

संत पापा के प्रवचन की बातों को दुहराते हुए उन्होंने कहा,” जिस प्रकार येसु ने ‘धर्मविक्रताओं’ को येरूसालेम की मंदिर से निकाल बाहर किया था उसी तरह मठवासी आदर्श, लोगों को चुनौती प्रदान करे ताकि हम भी स्वार्थसेवा को दिल से निकाल फेकें और अपनी कलीसिया के साथ-साथ ईशवचन के अर्थ खोजें।”

विदित हो कि महाधर्माध्यक्ष रोवान विलयम्स ने रविवार को सान ग्रेगोरिया अल चेलियो में ‘मठवासी गुण और अन्तरकलीसियाई आशा’ विषय पर वक्तव्य दिया। अंगलिकन कलीसिया के अध्यक्ष डॉ. रोवान विलियम्स तीन दिवसीय यात्रा पर इटली आये हुए हैं।

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