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देवदूत संदेश प्रार्थना में संत पापा का संदेश

In Audience, Church on March 13, 2012 at 9:03 am

जोसेफ कमल बाड़ा

वाटिकन सिटी 12 मार्च 2012 (सेदोक, एशिया न्यूज) संत पापा बेनेडिरक्ट 16 वें ने रविवार 11 मार्च को संत पेत्रुस बासिलिका के प्रांगण में देश विदेश से आये हजारों तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को देवदूत संदेश प्रार्थना का पाठ करने से पूर्व सम्बोधित किया। उन्होंने इताली भाषा में सम्बोधित करते हुए कहा-

अतिप्रिय भाईयो और बहनो, चालीसाकाल के तीसरे रविवार के लिए सुसमाचार पाठ में येरूसालेम स्थित मंदिर से जानवरों की ब्रिक्री करनेवालों तथा सर्राफों के निष्कासन के प्रसंग का वर्णन है। वस्तुतः सभी सुसमाचार लेखकों ने इस प्रसंग का वर्णन किया है जो पास्का पर्व के निकट घटित हुआ था तथा लोगों और उनके शिष्यों पर गंभीर असर हुआ।

येसु के इस कदम की हम कैसी व्याख्या करें। पहला यह देखें कि इस कृत्य ने सार्वजनिक व्यवस्था पर कोई दबाव नहीं बनाया लेकिन इसे नबूवती कृत्य के रूप में देखा गया वस्तुतः नबी, ईश्वर के नाम में बहुधा दुरूपयोगों की निन्दा करते हैं तथा यदा कदा सांकेतिक कृत्यों से प्रकट करते हैं।

समस्या यदि कोई थी तो उनका प्राधिकार। इसलिए यहूदी येसु से पूछते हैं कि आप हमें कौन सा चमत्कार दिखा सकते हैं जिससे हम जानें कि आपको ऐसा करने का अधिकार है। हमें दिखायें कि कौन वास्तव में ईश्वर की ओर से करता है।

मंदिर से सर्राफों के निष्कासन की व्याख्या राजनैतिक क्रांति के रूप में देखी गयी, येसु को भी यहूदी राष्ट्रवादी (जेलटस) के अभियान की पंक्ति में रखा गया।

यहूदी राष्ट्रवादी वस्तुतः ईश्वर के विधान के लिए उत्साही थे तथा इसे लागू करने के लिए हिंसा का उपयोग करने को तैयार थे। येसु के समय में मुक्तिदाता या मसीहा के आने की प्रतीक्षा थी जो इस्राएल को रोमी शासन से मुक्त करायेगा। लेकिन येसु ने उनकी इस आशा को पूरा नहीं कर उन्हें निराश किया।

उनके कुछ शिष्य और यहाँ तक कि यूदस इस्कारियोति ने उनके साथ विश्वासघात किया। वस्तुतः येसु की हिंसक व्यक्ति के समान व्याख्या करना असंभव है, हिंसा ईश्वर के राज्य के विपरीत है यह ख्रीस्तविरोधी का साधन है। हिंसा कदापि मानवता की सहायता नहीं करती लेकिन उसे अमानवीय ही बनाती है।

मंदिर से बिक्री करनेवाले और सर्राफों के निष्कासन के कृत्य को देखते हुए येसु के शब्दों को सुनें- यह सब यहाँ से हटा ले जाओ। मेरे पिता के घर को बाजार मत बनाओ।

शिष्यों को धर्मग्रंथ का यह कथन याद आया- तेरे घर का उत्साह मुझे खा जायेगा। यह भजन शत्रुओं की नफरत के कारण अत्यधिक खतरेवाली परिस्थिति में सहायता के लिए करूण पुकार है। वह परिस्थिति जिसे येसु अपने दु-खभोग के समय अनुभव करेंगे। पिता और उनके घर के लिए उत्साह ने येसु को क्रूस तक लिया- उनका उत्साह है जो कि उन्हें अपने प्रथम पुरूष के रूप में अदा किया न कि वैसा व्यक्ति जो हिंसा के द्वारा ईश्वर की सेवा करना चाहता है।

वस्तुतः येसु अपने प्राधिकार के प्रमाण रूप में जो चिह्न देते हैं वह उनकी अपनी मृत्यु और पुनरूत्थान है। इस मंदिर को ढा दो और मैं इसे तीन दिनों के अन्दर फिर खड़ा कर दूँगा।

संत योहन लिखते हैं- ईसा तो अपने शरीर रूपी मंदिर के विषय में कह रहे थे। येसु के पुनरूत्थान के साथ ही एक नया पंथ, प्यार के सम्प्रदाय और एक नयी कलीसिया जो स्वयं ख्रीस्त हैं का आरम्भ हुआ। पुनर्जीवित ख्रीस्त, जिनके द्वारा हर विश्वासी आत्मा और सत्य में पिता ईश्वर की आराधना कर सकता है।

प्रिय मित्रो, पवित्र आत्मा ने कुँवारी माता मरिया के गर्भ में इस नये मंदिर का निर्माण करना आरम्भ किया है। हम उनकी मध्यस्थता से प्रार्थना करें कि हर ईसाई इस आध्यात्मिक घर का पत्थर बने।

इतना कहने के बाद संत पापा ने देवदूत संदेश प्रार्थना का पाठ किया और सबको अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।

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