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चालीसा का चौथा रविवार

In Church, Sunday Reflection on March 16, 2012 at 7:24 am

चालीसा का चौथा रविवार

2 इतिहास ग्रंथ 36:14-16, 19-23;                                                                                                                                                    एफ़ेसियों 2:4-10;
योहन 3:14-21
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जस्टिन तिर्की, ये.स.

प्रकाश की कहानी
आज आप लोगों को एक कहानी बतलाता हूँ – एक बालक के बारे में, उसका नाम था – प्रकाश। प्रकाश सात साल का था। उसकी बहुत इच्छा थी की वह एक दिन पहाड़ पर चढ़े और पूरी दुनिया की सुन्दरता को निहारे। एक दिन स्कूल के शिक्षक ने एक योजना बनायी और उसके तहत् 20 विद्यार्थियों को पास के एक पहाड़ में ले जाया गया। सभी बच्चों ने पहाड़ का आनन्द लिया। जब बच्चे पहाड़ पर थे तो बच्चों का एक और दल भी पहाड़ पर पहुँचा। बच्चे चिल्लाने लगे और अपने आवाज़ की प्रतिध्वनि सुन-सुनकर बहुत आनन्दित थे। प्रकाश भी प्रसन्न था क्योंकि पहाड़ पर जाने का उसका यह पहला अनुभव था। जब सभी बच्चे खाना खा चुके थे तो शिक्षक ने कहा कि उनके पास अब सिर्फ़ एक घंटा है वे अंतिम बार पहाड़ के ऊपर से दुनिया को देखने का आनन्द ले लें फिर वे अपने घर वापस जायेंगे। प्रकाश बिना समय गँवाये अपने दोस्तों से हटकर एक पत्थर पर चढ़ गया और चिल्लाया “हैलो” और आवाज़ आयी ‘हैलो’ प्रकाश ने कहा, “तुम कौन? ” आवाज़ आयी ‘तुम कौन’? प्रकाश ने चिल्लाया,”पहले तुम” आवाज़ आयी, ‘पहले तुम’ प्रकाश ने कहा, “मैंने पहले पूछा” प्रतिध्वनि गूँजी, ‘मैने पहले पूछा’ प्रकाश ने कहा, “मैंने पहले” आवाज़ आयी,”मैंने पहले” प्रकाश ने नाराज़ होते हुए कहा, “आइ हेट यू” और उसका जवाब भी वही था ‘आइ हेट यू’।

प्रकाश रुँआसा हो कर शिक्षक के पास गया और कहा, सर आपने कहा कि यह पहाड़ इतना सुन्दर है अच्छा है पर उसने मुझे ‘आइ हेट यू’ कहा। शिक्षक ने कहा, “प्रकाश जाओ उसी पत्थर पर चढ़ो और तीन बार चिल्लाओ, “आइ लव यू, आइ लव यू, आइ लव यू” प्रकाश तुरन्त गया और चिल्लाया “आइ लव यू” और आवाज़ आयी “आइ लव यू”। प्रकाश खुश हो गया और बार-बार चिल्लाया आइ लव यू और बार-बार प्रतिध्विनि सुनाई पड़ी आइ लव यू, लव यू, लव यू —–।

जो हम दुनिया को देते हैं वही पाते हैं। प्रेम बाँटने से प्रेम वापस आता है प्रेम प्रतिध्वनित होता है और प्रेम का विस्तार होता है। Read the rest of this entry »

कब्रों को क्षतिग्रस्त करनेवाले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन

In Church on March 16, 2012 at 7:22 am

जोसेफ कमल बाड़ा

गोआ 15 मार्च 2012 (ऊकान) भारत में गोआ के मुख्य मंत्री मनोहर पाणिकर ने कहा कि एक सौ से अधिक कब्रों को क्षतिग्रस्त करने का काम संभवतः उन लोगों का है जो हाल के विधानसभा चुनाव परिणाम से खुश नहीं हैं। उन्होंने ईसाई और मुसलमान समुदाय को आश्वासन दिया कि हमलावरों को शीघ्र ही गिरफ्तार कर न्यायालय के सामने लाया जायेगा।

मुख्यमंत्री महोदय ने कहा कि 10 मार्च को हुई उक्त असामाजिक घटना ऐसे क्षेत्र में हुई है जहाँ भारतीय जनता पार्टी के ईसाई उम्मीदवारों ने विगत सप्ताह विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की। उन्होंने कहा कि हमलों का उद्देश्य उनकी सरकार को बदनाम करना है। वे बताना चाहते हैं कि इस घटना के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

गोआ की राजधानी पणजी से 50 किलोमीटर दक्षिण स्थित कुरचोरेम में गाजिंयन एंजेल चर्च कब्रिस्तान में 45 कब्रों और क्रूस प्रतिमाओं को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था। असामाजिक तत्वों ने कुरचोरम स्थित मुसलमान कब्रिस्तान में भी 67 कब्रों को निशाना बनाया।

मुख्यमंत्री पाणिकर ने कहा कि पुलिस को निर्देश दिया गया है कि हमले में शामिल लोगों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए सब संसाधन का उपयोग करें। क्षेत्र में स्थित धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किये गये हैं। उन्होंने कहा कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू करने पर विचार करेंगे ताकि दोषियों को हमेशा के लिए सलाखों के पीछे कैद किया जा सके।

गोआ महाधर्मप्रांत ने असमाजिक तत्वों के हमले से कुद्ध ईसाई और मुसलमान समुदाय से संयम बरतने का आग्रह किया है। एक वक्तव्य में कहा गया है कि लोगों के अंतिम विश्राम स्थान का महत्व आराधनालयों और प्रार्थनालयों के बाद आता है अतः उनके प्रति गहन सम्मान और श्रद्धा की भावना रखी जाये।

गोआ मुसलिम फोरम के अकबर अली ने कहा कि वे नहीं जानते कि इन हमलों के पीछे किनका हाथ है, पुलिस जाँच पड़ताल कर रही है और वे उनकी खोज का परिणाम जानने के लिए प्रतीक्षा कर रहे हैं।

संत पापा की आगामी मेक्सिको यात्रा के लिए आधिकारिक संगीत का लोकार्पण

In Church, Peace & Justice on March 16, 2012 at 7:20 am

जोसेफ कमल बाड़ा

मेक्सिको सिटी 15 मार्च 2012 (सीएनए) संत पापा बेनेदिक्त 16 वें 23 से 25 मार्च तक मेक्सिको की प्रेरितिक यात्रा करेंगे। मेक्सिको धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने उनकी यात्रा को देखते हुए आधिकारिक संगीत का लोकार्पण किया है।

11 मार्च को जारी संदेश में आयोजको ने यह आशा व्यक्त की है कि यह संगीत परिवारों, पड़ोसियों और लोगों को भाईचारा, सह्दयता और बंधुत्व की भावना में एकताबद्ध करने का संदर्भ बिन्दु होगा।

‘Mensajero de Paz’ अर्थात् ‘शांति के संदेशवाहक’ शीर्षक से तैयार गीत में मेक्सिको के अनेक लोकप्रिय और विख्यात गायकों ने अपनी आवाज दी है जो संत पापा बेनेदिक्त 16 वें का हार्दिक स्वागत करने के लिए मेक्सिको की जनता के साथ संयुक्त होना चाहते हैं।

संगीत की रचना कारलोस लारा ने की है तथा अनेक विख्यात गायकों ने इसमें अपना योगदान दिया है।
मेक्सिको धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अनुसार उक्त संगीत के शब्द लोगों को उत्साहित करेंगे ताकि शांति, विश्वास और आशा के लिए वे अपने दिल को खोलें।

In Church on March 16, 2012 at 7:19 am

जोसेफ कमल बाड़ा

जिनिवा 15 मार्च 2012 (सेदोक, वी आर वर्ल्ड) जिनिवा स्थित संयुक्त राष्ट्रसंघीय कार्यालय तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों में परमधर्मपीठ (होली सी) के स्थायी पर्यवेक्षक महाधर्माध्यक्ष सिल्वानो तोमासी ने अल्पसंख्यकों के अधिकार मुददे पर मानवाधिकार समिति की 19 वें सत्र को 14 मार्च को सम्बोधित किया।

उनका सम्बोधन राष्ट्रीय, जातीय, धार्मिक या भाषायी अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र संघ की उदघोषणा की 20 वीं वर्षगाँठ के अवसर पर सम्बोधित था।

महाधर्माध्यक्ष तोमासी ने कहा कि सहनशीलता तथा परस्पर सम्मान की भावना, शैक्षणिक प्रोग्राम जो संवाद करने की संस्कृति, शांति निर्माण, लोकतंत्र तथा बहुलवाद को समर्थन देते हैं ।

ये एक नयी शुरूआत को प्रोत्साहन दे सकते हैं जो अधिक शांतिमय भविष्य के लिए मार्ग प्रशस्त कर सकता है जहाँ बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक के रूप में वर्गीकरण किये बिना ही ईश्वर प्रदत्त हमारी सामान्य मानवता के आधार पर हर व्यक्ति की मर्यादा का सम्मान किया जायेगा।

वाटिकन रेडियो से बातचीत करते हुए महाधर्माध्यक्ष तोमासी ने कहा कि यह अवसर है अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह अवसर है कि वह आलोचनात्मक नजरिये से देखे कि अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है। उन्होंने और अधिक शांतिमय भविष्य का पथ तैयार करने के लिए शिक्षा के महत्व पर जोर दिया।

महाधर्माध्यक्ष तोमासी ने कहा कि अपने अधिकारों के बारे में अल्पसंख्यकों के मध्य सजगता बढ़ी है लेकिन इसके साथ ही सरकारों तथा कुछ समूहों द्वारा उनके अधिकारों का हनन थमा नहीं है।

इन समस्याओं का कारण उदासीनता, समाज के हाशिये में डालने की राजनैतिक इच्छा, या जातीय धार्मिक या भाषायी आधार पर भिन्न समुदायों को दबाने अथवा समाप्त करना है।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार के संचालन के लिए सबलोगों की वैध भागीदारी को बढ़ावा दिया जाना है तो क्षेत्र में रहनेवाले सब नागरिकों को इसमें शामिल होने का अधिकार होना चाहिए। इस प्रकार की सहभागिता का फल शांतिमय सहअस्तित्व, सामाजिक विकास तथा संघर्षों पर रोकथाम होगी।

बस दुर्घटना प्रभावितों के लिए संत पापा की शोक संवेदना

In Church on March 16, 2012 at 7:18 am

जोसेफ कमल बाड़ा

वाटिकन सिटी 15 मार्च 2012 (सेदोक, बीबीसी) स्विटजरलैंड के सियेर शहर के समीप बुधवार को हुई एक सड़क बस दुर्घटना में बेल्जियम के 22 स्कूली बच्चों तथा 6 वयस्कों की मृत्यु हो गयी।

बस में 52 लोग सवार थे जो स्विटजरलैंड के आल्पस पर्वतीय क्षेत्र में स्कूली स्कीईंग ट्रिप सम्पन्न करने के बाद बेल्जियम लौट रहे थे। बस एक सुरंग में दीवार से जा टकरायी। घटना में 24 बच्चे घायल हो गये जिन्में कुछ की हालत गंभीर है।

दुर्घटनाग्रस्त बस में लोमेल स्थित स्टेकसे प्राथमिक विद्यालय और लुभेन में हेभेरली स्थित संत लम्बेरतुस विद्यालय के विद्यार्थी सवार थे। दो अन्य बस सुरक्षित बेल्जियम पहुंच गये हैं।

स्विस अधिकारियों के अनुसार मृतकों में अधिकांश बेल्जियम के तथा सात डच नागरिक हैं। घायलों में तीन डच, एक पोलिश तथा एक जर्मन है:

दुर्घटना के बाद बेल्जियम में एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया जबकि स्विटजरलैंड और यूरोपीय संसद में घटना के शिकार हुए लोगों की स्मृति में एक मिनट का मौन रखा गया।

हाल के दशकों में सिवटजरलैंड के इतिहास में यह सर्वाधिक गंभीर सड़क दुर्घटना में से एक है। बेल्जियम के विदेश मंत्रालय के अनुसार घटना के शिकार हुए अधिकांश बच्चे लगभग 12 बर्ष के थे।

मालिनेस ब्रसेल्स के महाधर्माध्यक्ष मान्यवर आन्द्रे जोसेफ लेओनार्द के नाम संत पापा बेनेडिक्ट 16 वें की ओर से वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल तारचिसियो बेरतोने द्वारा हस्ताक्षरित शोक संवेदना का तार संदेश भेजा गया है। संत पापा ने दुर्घटना में अनेक लोगों की मृत्यु हो जाने पर गहन शोक व्यक्त किया है।

उन्होंने प्रभावित परिवारों के प्रति अपनी सहानुभूति व्यक्त करते हुए उन्हें अपनी प्रार्थना का आश्वासन दिया तथा मृतकों को ईश्वर की करूणा के सिपुर्द किया।

संत पापा ने सब शोकित परिजनों के लिए दिव्य सांत्वना, शक्ति तथा प्रार्थना की कामना किया है तथा इस घटना से प्रभावित सब लोगों के प्रति अपनी समीपता व्यक्त करते हुए उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया है।

श्रोताओं व पाठकों के पत्र

In Church on March 16, 2012 at 7:17 am

प्रभु येसु मसीह के पवित्र और मधुर नाम में सप्रेम नमस्कार एवं आपको कोटिशः धन्यवाद। मैंने 15 जनवरी को इन्दौर के सत प्रकाशन केन्द्र द्वारा प्रसारित नाटक ” शरारत ” सुना जो मुझे बहुत ही अच्छा लगा। इस नाटक के जरिये यह संदेश मिला कि शरारत एक सीमित दायरे तक ही होनी चाहिए। जिन्दगी बहुत ही अनमोल चीज है, वह शरारत के कारण मौत का कारण न बन जाये। जिस तरह शरारत नाटक में सुनने को मिला कि विक्रम किस तरह लखन से हार जाता है और हारने के बाद बदला लेने के लिए लखन की मोटर साइकिल का ब्रेक फेल कर देता है। लखन मोटर साइकिल से जाने पर दुर्घटनाग्रस्त होकर घायल हो जाता है। मेरे विचार से शरारत, शरारत तक ही सीमित होनी चाहिए उसे जिंदगी और मौत के साथ प्रयोग नहीं करनी चाहिए। मैंने 22 जनवरी को साप्ताहिक कार्यक्रम चेतना जागरण में ” सूरत और सीरत ” नामक नाटक सुना। इस नाटक से यह ज्ञान प्राप्त हुआ कि मनुष्य बाहरी सौंदर्य देखकर यह न समझ ले कि आदमी सुदर्शन है तो उसका मन भी उदार होगा और वह अच्छा आदमी होगा। पति देखने में बदसूरत भी हो लेकिन वह अन्दर से बहुत ही उदार और अच्छा हो तो उस पत्नी के लिए वह असली पति है। इसलिए एक पति या पत्नी को सूरत के बजाय सीरत देखनी चाहिए।
उज्ज्वल सिंह धनबाद झारखंड

मैं प्रातःकाल में अपनी दैनिक व्यस्तता के बावजूद वाटिकन रेडियो प्रसारण को सुनने के लिए समय देती हूँ। बुधवार प्रातः कलीसियाई दस्तावेज एक अध्ययन के अंतर्गत एशिया में कलीसिया द्वारा अनेक जानकारी मिली। वाटिकन सिटी से दूर रहने पर भी इस प्रोग्राम के द्वारा संत पापा का आशीर्वाद एवं आशिष प्राप्त होती है। आशा है आप सभी ऐसे ही ज्ञानवर्द्धक एवं गुणवत्तापूर्ण नई नई जानकारियाँ देकर श्रोताओं को सुनने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। वाटिकन रेडियो द्वारा प्रेषित वाटिकन रेडियो प्रोग्राम एवं कैलेंडर 2012 के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।
ललिता तिर्की उर्सुलाइन बालिका विद्यालय टोंगो गुमला

उड़ीसाः इस वर्ष के आरम्भ से ब तक उड़ीसा में छः ख्रीस्तीयों की हत्या

In Church on March 16, 2012 at 7:16 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

उड़ीसा, 14 मार्च सन् 2012 (एशियान्यूज़): उड़ीसा में इस वर्ष के आरम्भ से अब तक छः ख्रीस्तीय धर्मानुयायी मारे गये हैं। इस वर्ष 03 मार्च को कन्धामाल ज़िले में एंग्लिकन ख्रीस्तीय सूर्यकान्त को मार डाला गया तथा छः मार्च को गंजम ज़िले में काथलिक धर्मानुयायी गोरेसा मलिक को मार डाला गया।

एशियान्यूज़ से बातचीत में ग्लोबल काऊन्सल ऑफ इन्डियन क्रिस्टियन्स के अध्यक्ष साजन के. जॉर्ज ने इन हत्याओं पर गहन चिन्ता व्यक्त की और कहा कि सर्वाधिक दुख की बात तो यह है कि पुलिस बहुत धीमी गति से तथा लापरवाही के साथ जाँच पड़ताल कर रही है।

श्री जॉर्ज ने कहा कि दो मार्च को, एंग्लिकन ख्रीस्तीय सूर्यकान्त, रायका से, लापता हो गये थे तथा चार दिन बाद छः मार्च को उनका शव कुछ ही दूर पर पड़ा मिला। उन्होंने कहा कि शव से साफ पता चलता है कि बहुत अधिक पिटाई के बाद सूर्यकान्त की मृत्यु हो गयी।

इसी प्रकार 03 मार्च को गोरेसा मालिक ने पड़ोसी गाँव के लगभग 15 हिन्दुओं से मुलाकात की थी। कुछ पीने के बाद उनपर हमला किया गया और उनका शव जंगल में जलाकर छोड़ दिया गया। परिवार को उनका शव दूसरे दिन मिला।

पुलिस ने हत्या के आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था किन्तु उन्होंने मृत पर जादू टोने का आरोप लगाकर अपने कृत्य को उचित ठहराया। पाँच महीने पूर्व ही गोरेसा मलिक ने काथलिक धर्म अपनाया था।

श्री जॉर्ज के अनुसार ख्रीस्तीयों पर अनवरत जारी हमलों का मुख्य कारण यह है कि सन् 2008 की ख्रीस्तीय विरोधी हिंसा के अपराधियों को अब तक दण्डित नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा कि पुलिस की निष्क्रियता एवं लापरवाही के कारण हिन्दु चरमपंथियों का हौसला बढ़ा है जो सोचते हैं कि वे अल्पसंख्यक ख्रीस्तीयों को जब चाहें तब डरा धमका सकते हैं।

ऑक्सफोर्डः कुवैत में सेवारत धर्माध्यक्ष ने ख्रीस्तीय गिरजाघरों पर प्रतिबन्धों का किया खण्डन

In Church on March 16, 2012 at 7:15 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

ऑक्सफोर्ड, 14 मार्च सन् 2012 (सी.एन.एस.): कुवैत में गिरजाघरों की देखरेख करनेवाले प्रेरितिक प्रशासक धर्माध्यक्ष कामिल्लो बालिन ने कुवैत में प्रस्तावित उस विधेयक की कटु आलोचना की है जो गिरजाघरों के निर्माण आदि पर रोक लगा देगा।

धर्माध्यक्ष बालिन ने कहा, “यदि सरकार इस प्रस्ताव को लागू करती है तो समस्या खड़ी हो जायेगी। यह कुवैत की परम्परा के विपरीत है जो अन्य धर्मों का स्वागत करनेवाले उदार एवं सहिष्णु देश होने का दावा करता है।”

12 मार्च को काथलिक न्यूज़ सर्विस से बातचीत में धर्माध्यक्ष बालिन ने कहा, “ऐसे प्रस्ताव उन लोगों द्वारा किये जाते हैं जो विश्व को मुसलमानों एवं ग़ैर-मुसलमानों में विभाजित करना चाहते हैं।”

फरवरी माह में कुवैत के नवगठित अल-अदाला न्यायिक पार्टी ने उस विधेयक का प्रस्ताव किया जिसके तहत कुवैत से ख्रीस्तीय गिरजाघरों को हटा दिया जायेगा तथा इस्लामी शरिया कानून लागू कर दिया जायेगा।

प्रस्ताव के विरुद्ध हुई प्रतिक्रियाओं के बाद पार्टी के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जो गिरजाघर अस्तित्व में हैं उन्हें नहीं हटाया जायेगा किन्तु नये गिरजाघरों तथा अन्य ग़ैरइस्लामी आराधना स्थलों के निर्माण पर रोक लगा दी जायेगी।

धर्माध्यक्ष बालिन ने कहा कि कुवैत की अल-अदाला पार्टी का दावा है कि कुवैत में जितने गिरजाघर हैं वे देश के अल्पसंख्यक ख्रीस्तीय समुदाय के लिये पर्याप्त हैं।

धर्माध्यक्ष के अनुसार पार्टी का यह दावा बिलकुल ग़लत है क्योंकि उसने ख्रीस्तीय समुदाय में केवल मूल कुवैती ख्रीस्तीयों की संख्या का हवाला दिया है जबकि कुवैत में अन्य देशों के लगभग साढ़े तीन लाख ख्रीस्तीय धर्मानुयायी विभिन्न नौकरियों पर लगे हैं।

नाईजिरियाई पल्ली पर आत्मघाती बम विस्फोट से कलीसियाई अधिकारी दुखी

In Church on March 16, 2012 at 7:13 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

लागोस, 14 मार्च सन् 2012 (सी.एन.एस.): नाईजिरिया के जोस नगर में इस सप्ताह रविवार को हुए आत्मघाती बम हमले पर नाईजिरिया के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने गहन शोक व्यक्त किया है।

उक्त हमले के बाद जोस के काथलिक महाधर्माध्यक्ष इनेशियस कैगामा ने ख्रीस्तीयों से अपील की वे शान्ति बनाये रखने का प्रयास करें तथा किसी भी हालत में बदले की कार्रवाई पर न उतरें।

ग़ौरतलब है कि नाईजिरिया के जोस नगर में रविवार को काथलिक गिरजाघर पर हुए हमले तथा उसके बाद भड़की हिंसा में कम से कम 21 व्यक्तियों के प्राण चले गये थे तथा कई घायल हो गये थे।

महाधर्माध्यक्ष कैगामा ने मृत लोगों के प्रति गहन सहानुभूति का प्रदर्शन किया तथा उनके परिजनों को कलीसिया के समर्थन का आश्वासन दिया।

उन्होंने नाईजिरियाई सरकार से अपील की है कि गिरजाघर में रविवारीय ख्रीस्तयाग के लिये एकत्र श्रद्धालुओं पर किये गये हमले की वह पूर्ण जाँच पड़ताल करे तथा अपराधियों को न्यायोचित दण्ड दिलवाये।

हमलावरों का भी उन्होंने आह्वान किया कि घात लगाकर आक्रमण करने के बदले वे ख्रीस्तीयों के साथ सम्वाद के लिये तैयार होवें। उन्होंने कहा, “इस हमले के पीछे जो लोग हैं उनसे हम निवेदन करते हैं कि वे आक्रमणों के बजाय हमसे बातचीत का मार्ग ढूँढ़े।”

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