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‘राष्ट्रीय अनबोर्न या अजात दिवस’ का समर्थन

In Church, Human Rights on March 18, 2012 at 6:40 pm

जस्टिन तिर्की, ये.स.

संत होसे, कोस्ता रिका, 17 मार्च, 2012 (सीएनए) कोस्टा रिका धर्माध्यक्षीय समिति के अध्यक्ष सान होसे के महाधर्माध्यक्ष ह्यूगो बार्रानतेस उरेना ने कहा,”जीवन के प्रति सामाजिक खतरे की चुनौती का सामना करने करने के लिये 25 मार्च को अजात शिशु दिवस के रूप में मनाया जाने का प्रस्ताव उपयुक्त है।”

महाधर्माध्यक्ष ने उक्त बातें उस समय कहीं जब कोस्टा रिका के विधानमंडल की एक सदस्या रीता चावेज़ कासानोवा ने इसका प्रस्ताव डाला। महाधर्माध्यक्ष उरेना ने काह कि वे जीवन समर्थक प्रस्ताव का स्वागत करते हैं।

उन्होंने कहा, “रीता चावेज़ का प्रस्ताव अति महत्त्वपूर्ण कदम है विशेष करके ऐसे समय में जब समाज तथाकथित ‘मृत्यु संस्कृति समर्थित कानूनों’ से जकड़े हुए हैं।”

महाधर्माध्यक्ष बार्रान्तेस ने कहा कि जीवन के विरोध के समर्थन में कई प्रस्ताव आ चुके हैं जैसे ‘विट्रो फरटीलाइजेशन’ या ‘विट्रो कृत्रिम गर्भाधान’ और समलिंगी विवाह और प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी कई अन्य कानून जिससे गर्भपात को बढ़ावा मिलता है।

महाधर्माध्यक्ष ऊरेना ने कहा, “कलीसिया सदा से ही गर्भाधान से लेकर ही जीवन समर्थक रही है और रीता चावेस के प्रस्ताव का स्वागत करती है जिसमे अजात शिशुओं के मर्यादा की रक्षा की प्रतिबद्धता है।”

दक्षिण अफ्रीका का पहला संत प्रकरण वाटिकन पहुँचा

In Church on March 18, 2012 at 6:39 pm

जस्टिन तिर्की, ये.स.

ज़नीन दक्षिण अफ्रीका, 17 मार्च, 2012(सीएनए) दक्षिण अफ्रीका के स्थानीय काथलिक बेनेदिक्त दासवा को धन्य घोषित करने और संत बनाये जाने का प्रयास तेज कर दिया गया है।

दक्षिण अफ्रीका के ज़नीन धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष जोआव रोड्रिग्वेज़ का विश्वास है कि “जीवन के प्रेरित” के प्रति लोगों की भक्ति बड़ेगी और लोग दास्वा की मध्यस्थता से ऐसे लोग जिनके परिवार जो जादू-टोना और अदृश्य शक्ति के बंधन में जकड़े हुए हैं “विशेष कृपा” प्राप्त करें।

धर्माध्यक्ष ने लोगों से अपील की है कि दास्वा के संत बनाये जाने वाले तथ्यों के संबंध में खोज़बीन जारी है पर लोग उनके प्रति व्यक्तिगत भक्ति करना जारी रखें और उनकी मध्यस्थता से प्राप्त वरदानों की जानकारी ज़नीन धर्मप्राप्त को भेजे।
विदित हो कि बेनेदिक्त दास्वा के संबंध में जानकारी संत घोषणा प्रकरण परिषद को उस समय भेज दी गयी जब उन्हें “सरवन्ट ऑफ गॉड” अर्थात् ‘ईश सेवक’ घोषित किया गया और उसके संबंध में धर्मप्रांतीय स्तर पर खोजबीन समाप्त हो गया।

ज्ञात हो कि बेनेदिक्त दास्वा को इस लिये मार डाला गया क्योंकि उन्होंने जादू-टोना पर विश्वास करने से इंकार कर दिया था।

सीएनए के अनुसार यदि दास्वा से संबंधित बातों को स्वीकार कर लिया जाता है तो उसे धन्य घोषित किया जायेगा जो कि संत बनाये जाने के पूर्व का चरण है।

बेनेदिक्त दास्वा ने ईसाई विश्वास के वफ़ादार रहते हे स्थानीय परंपरा के जादू-टोना पर विश्वास का विरोध किया था जिसके कारण सन् 1990 ईस्वी में उसकी हत्या कर दी गयी थी।

धर्मप्रांतीय स्तर पर की गयी जाँच-पड़ताल की रिपोर्ट के अनुसार दास्वा ने अपने ऊपर घातक वार करने के पूर्व चिल्लाया,” हे ईश्वर मेरी आत्मा को स्वीकार कर”।

ईसाई पास्टर को मृत्यु दंड नहीं

In Church on March 18, 2012 at 6:38 pm

जस्टिन तिर्की, ये.स.

स्विटरजलैंड, 17 मार्च, 2012 (ज़ेनित) संयुक्त राष्ट्र संघ के मानवाधिकार दल के दबाव पर ईरान के उच्चाधिकारी मोहम्मद जावेद लरिज़ानी ने ईसाई पास्टर के मृत्यु दंड की बात खंडन किया है।

उनका कहना है कि ईसाई पास्टर ने इस्लाम धर्म का अपमान किया है ईरान की सर्वोच्च न्यायालय ने मृत्यु दंड का फ़ैसला सुनाया था पर ऐसा नहीं है कि उन्हें मौत की सजा का सामना करना पड़े।

मोहम्मद ने उक्त बातें उस समय कहीं जब संयुक्त राष्ट्र संघ की मानवाधिकार समिति की बैठक के एक सदस्य शाहिद ने ईसाई पास्टर का मुद्दा उठाया।

लारिज़ानी ने ईसाई पास्टर पर लगाये गये पूर्व आरोपों में बदलाव लाते हुए कहा कि नादारखानी ने अपने निवास को चर्च का रूप दे दिया था, इस्लाम का अपमान करते हुए अभिभावकों की बिना अनुमति के युवा को प्रवचन दिया करता था।

उन्होंने इस बात का भी खुलासा किया कि “इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान के 33 सालों के इतिहास में इस्लाम धर्म को त्यागने के आरोप मे न किसी को मौत की सजा दी गयी है, मार गया न ही किसी पर पर दबाव डाला गया।”

उन्होंने कहा, “अनेकों अपना धर्म परिवर्तन कर इस्लाम धर्म अपना रहे हैं। हम क्यों कुछ लोगों के इस्लाम धर्म छोड़ने के प्रति इतने संवेदनशीलहो जायेँ।

उन्होंने यह भी कहा, “ईरान में ईसाई और यहूदी धर्म के बारे में प्रवचन दिये जाते हैं’यहाँ कई सिनोगॉग और गिरजाघर हैं। पर इस्लाम धर्म को अपमानित करने या नीचा दिखाने की कोई आवश्यकता नहीं है।”

एकता प्रयासों में गतिरोध बरक़रार

In Church on March 18, 2012 at 6:31 pm

जस्टिन तिर्की, ये.स.

वाटिकन सिटी, 17 मार्च, 2012 (ज़ेनित) वाटिकन से जारी एक वक्तव्य के अनुसार वाटिकन और परंपरावादी संत पीयुस दसवें समाज के बीच चल रहे एकता के प्रयासों में प्रगति नहीं हुई है।

वाटिकन ने मारचेल लेफेबरे द्वारा संस्थापित संत पीयुस दसवें समाज के अध्यक्ष धर्माध्यक्ष बेरनार्ड फेल्ले को प्रेषित पत्र में स्पष्ट किया कि धर्माध्यक्ष फेल्ले द्वारा दिये गये सिद्धांत संबंधी व्याख्यान समस्या के समाधान के लिये काफी नही हैं।

संत पापा ने संत पीयुस धर्मसमाज के अध्यक्ष धर्माध्यक्ष फेल्ले को अपन पक्ष को स्पष्ट करने के लिये आमंत्रित किया है ताकि बातचीत से समस्या का समाधान निकाला जा सके और कलीसिया को ‘कष्टमय और अकल्पनीय क्षति’ से बचाया जा सके।

विदित हो कि 14 सितंबर सन् 2011 में विश्वास के सिद्धांत के लिये बनी परमधर्मपीठीय समिति के प्रीफेक्ट परमधर्मपीठीय आयोग के ‘एकलेसिया देई’ के अध्यक्ष कार्डिनल विलियम लेवादा के साथ संत पीयुस दसवें धर्मसमाज के सुपीरियर जेनरल धर्माध्यक्ष बेरनार्ड फेल्ले की एक सभा हुई थी जिसमें धर्माध्यक्ष फेल्ले को सिद्धांत संबंधी दस्तावेज़ सौंपा गया था।

इस सिंद्धातात्मक प्रस्तावना में काथलिक कलीसिया के साथ संत पीयुस दसवें धर्मसमाज के पूर्ण मेल-मिलाप के लिये मूलभूत आधार भी प्रस्तुत किया गया था।

इस सिद्धांतात्मक प्रस्तावना का संत पीयुस समाज ने जनवरी अध्ययन किया था और वाटिकन को अपने विचार सौंप दिये थे। विश्वास के सिद्धांत के लिये बनी समिति ने इसका अध्ययन किया और इसे संत पापा के सुपूर्द कर दिया है।

संत पापा की लेबानोन यात्रा अगले सितंबर माह में

In Church on March 18, 2012 at 6:28 pm

जस्टिन तिर्की, ये..

रोम, 17 मार्च, 2012 (सीएनए) संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें 14 से 16 सितंबर 2012 तक लेबानोन की प्रेरितिक यात्रा करेंगे।

विभिन्न भ्रांतियों को दूर करते हुए मेलकाइट ग्रीक कैथोलिक चर्च के अध्यक्ष  पैट्रियार्क ग्रेगोरियोस तृतीय ने इस बात की पुष्टि की कि संत पापा अगले सिंतबर माह में लेबानन की यात्रा करेंगे।

पैट्रियार्क ग्रेगोरियोस तृतीय ने कहा, “हम उनके पास गये थे और अब वे हमारे बीच आयेंगे।”

उन्होंने उक्त बात की घोषणा रोम स्थित मेलकाइट कैथोलिक चर्च के मुख्यालय में 15 मार्च को की जब उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया।

लेबानोन दैनिक स्टार की रिपोर्ट के अनुसार पैट्रियार्क ने कहा, “संत पापा लेबानन जायेंगे ताकि ख्रीस्तीय एकता सुदृढ़ हो।”

लेबानोन यात्रा के कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए पैट्रियार्क ने कहा,”14 सितंबर को हरिस्सा के संत पौल गिरजाघर में संत पापा की उपस्थिति में एक सभा संपन्न होगी जिसकी अध्यक्षता पैट्रियार्क ग्रेगोरियोस खुद करेंगे।”

कार्यक्रम के अनुसार यदि सीरिया की स्थिति सामान्य रही तो संत पापा मध्य पूर्वी काथलिकों के नाम पर सिरिया के दमस्कुस में भी रुकेंगे।

संत पापा मध्यपूर्व के लोगों को एक शांति संदेश देंगे और एक दस्तावेज़ प्रस्तुत करेंगे जिसका आधार है मध्यपूर्वी कलीसिया के धर्माध्यक्ष के लिये सन् 2010 में सम्पन्न सिनॉद, जिसे ‘पोस्ट सिनॉदल अपोस्तोलिक एक्सहोर्टेशन’ के नाम से जाना जायेगा।

विदित हो कि मध्यपूर्वी राष्ट्रों के लिये आयोजित धर्माध्यक्षों के सिनॉद में काथलिकों और अन्य ईसाइयों के रक्षा और सुरक्षा पर बल दिया गया था।

मध्यपूर्व राष्ट्रों की राजनीतिक स्थायित्व डगमगाने और सीरिया में चल रहे गृहयुद्ध ने काथलिक कलीसिया की चिन्ता को और बढ़ा दी है।

विदित हो कि संत पापा को लेबानोन आने का आमंत्रण लेबानोन के सुन्नी प्रधानमंत्री नज़ीब मिकाती ने उस समय दिया जब पिछले वर्ष नवम्बर माह में उन्होंने वाटिकन में संत पापा से मुलाक़ात की थी।

ग़ौरतलब है कि मध्यपूर्व में लेबानोन ही एक ऐसा राष्ट्र है जिसे स्थायित्व और धार्मिक सहअस्तित्व के लिये आदर्श राष्ट्र माना जाता है। लेबानोन में मारोनाइट काथलिकों की संख्या कुल जनसंख्या का 21 प्रतिशत है।

 

 

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