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काथलिक धर्मबहन सिस्टर अन्ना मैथ्यू पुरस्कृत

In Church on March 20, 2012 at 11:15 am

जस्टिन तिर्की, ये.स.

शिमला. 19 मार्च, 2012 (कैथन्यूज) हिमाचलप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य और सफाई के लिये अपनी सेवा देने वाली काथलिक धर्मबहन सिस्टर अन्ना मैथ्यू को पुरस्कृत किया गया।

सिस्टर्स ऑफ चैरिटी ऑफ जीज़स एंड मेरी धर्मसमाज की सिस्टर मैथ्यू हिमाचलप्रदेश के चम्बा जिले के 25 पंचायतों में पूर्ण सफाई अभियान के तहत् लोगों को सफाई के लिये जागृत किया।

सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्री सरवीन चौधरी ने सिस्टर मैथ्यू के कार्यों की सराहना की और उन्हें पुरस्कृत किया। सिस्टर मैथ्यू ने सरकार द्वारा दिये गये सम्मान और प्रोत्साहन के लिये अपनी कृतज्ञता प्रकट की और कहा, “स्थानीय लोगों के प्रेम एवं सहयोग से उन्होंने यह लक्ष्य पूरा किया।”

उन्होंने बतलाया कि “आरंभ में लोगों में सार्वजनिक और व्यक्तिगत सफाई के प्रति जागरुकता नहीं थी पर बाद में लोगों के साथ लगातार सम्पर्क बनाये रखने के बाद लोगों में इस संबंध में जागरुता बढ़ी। तब से लोगों ने अशुद्ध जल से होने वाली बीमारियों, वातावरण की सफाई और व्यक्तिगत सफाई पर ध्यान दिया।”

उन्होंने बतलाया कि “सफाई के क्षेत्र में 95 प्रतिशत कामयाबी मिल गयी है और अब सफ़ाई पर ध्यान देना लोगों की आदत बन गयी है।”

सिस्टर मैथ्यू ने यह भी बतलाया कि राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील द्वारा पुकरी पंचायत को सन् 2010 में ही ‘निर्मल ग्राम पुरस्कार’ से सम्मानित किया जा चुका है।

‘सेल्फ हेल्प’ दलों के गठन से लोगों आर्थिक रूप से भी मजबूत हो चुके हैं। अब उन्हें पशुपालन का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा ताकि उससे प्राप्त आमदनी से वे बचत कर सके।
सिस्टर का विश्वास है इससे निर्धनों की प्रगति हो पायेगी।

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इंटरपोल के कब्ज़े में फादर जेयापॉल

In Church on March 20, 2012 at 11:14 am

जस्टिन तिर्की, ये.स.

एरोद, 19 मार्च, 2012(कैथन्यूज़) तमिलनाडू के एक काथलिक पुरोहित जेयापॉल को पुलिस ने बाल यौन दुराचार मामले में गिरफ़्तार कर लिया है।

57 वर्षीय जोसेफ पलानिभेल जेयापॉल का इंटरपोल 5 वर्षों से तलाश कर रही थी। पुलिस ने फादर जेयापौल को तमिलनाडू के उत्तकामुंद के एरोद के निकट एक पल्ली से गिरफ़्तार कर लिया और एरोद के जुडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया। और अब उसे दिल्ली में इंटरपोल के अधिकारियों को सौंप दिया जायेगा।

ज्ञात हो कि फादर जेयापौल सन् 2004 में मिन्नेसोता के क्रूकस्टोन धर्मप्रांत में बाल आश्रम में कार्य किया था।

दो नाबालिग लड़कियों ने उस पर यौन-शोषण का आरोप लगाया है। यद्यपि सन् 2005 में अमेरिका में फादर के विरुद्ध एक केस दायर किया गया था वे उसी वर्ष भारत लौट आये थे।

अमेरिकी सरकार ने मामला इंटपोल को सौंप दिया था और इंटरपोल ने गिरफ़्तारी का वारंट जारी कर दिया था।

इंटरपोल एरोद पुलिस महाधीक्षक एस. पन्नीरसेल्भम की मदद से थलावादी क्षेत्र के सिम्मीत्तीहाली क्षेत्र में एक सहायक पुरोहित के रूप में कार्य करते पाये।

जेयापॉल ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि वे निर्दोष हैं और अमेरिका जाने का विरोध नहीं करेंगे ताकि उनका मामला बिल्कुल साफ हो सके।

विदित हो कि इस मामले में स्थानीय लोगों ने वाटिकन को इससे जोड़ने का प्रयास किया था।

उनके अनुसार क्रूकस्टन के धर्माध्यक्ष विक्टर बाल्के ने इस संबंध में वाटिकन को जानकारी दी थी पर वाटिकन ने कोई अनुशासनात्मक कारवाई नहीं की।

यह भी बताया गया कि सन् 2011 ईस्वी के सिंतम्बर माह में क्रूकस्टन धर्मप्रांत ने मुकदमा नहीं लड़ने का निर्णय किया और पीड़ितों को 7 लाख 50 हज़ार की राशि चुका दी।

हर्ज़ाना देने के साथ धर्मप्रांत ने यह भी स्वीकार किया था कि वह भारतीय पुरोहित की तस्वीर तथा घटना के बारे में अपने आधिकारिक वेबपेज़ में प्रकाशित करेगा। धर्मप्रांत यौन दुराचार के शिकार अन्य लोगों को भी खोजने का प्रयास करेगा।

कंधमाल में इताली पर्यटकों का अपहरण

In Church on March 20, 2012 at 11:13 am

जस्टिन तिर्की, ये.स.

कंधमाल, 19 मार्च, 2012 (कैथन्यूज़) उड़ीसा के कंधमाल और गंजाम जिला सीमा क्षेत्र में माओवादियों ने दो इताली पर्यटकों को कथित रूप से अपहरण कर लिया है।
स्थानीय पुलिस महानिदेशक मनमोहन प्रहराज ने प्रेस ट्रस्ट को फोन में सूचित किया कि गृह मंत्री के सचिव यू.एन. बेहेरा ने अपहरण की पुष्टि करते हुए बतलाया कि शनिवार की रात को कंधमाल और गंजाम जिले के सीमावर्त्ती क्षेत्र में यह घटना घटी। जिला प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नज़र रखे हुए है।

माओवादियों ने कहा है कि पर्यटक को उस समय बंधक बना लिया गया जब उन्होंने प्रतिबंधित आदिवासी क्षेत्र में आपत्तिजनक तस्वीर खींचा। इताली बंधकों को छोड़ने के लिये माओवादियो ने 13 सूत्रीय माँग रखी है।
उन माँगों में नक्सल विरोधी गतिविधियाँ बन्द करने, जेल में बन्द माओवादियों के विरुद्ध दायर मामलों को वापस लेने और विगत वर्ष फरवरी माह में मल्कानगरी जिला के पूर्व आयुक्त के साथ हुए ‘समझौते’ को लागू करना शामिल है।

विदित हो कि पिछले वर्ष मल्कानगरी के कलेक्टर आर. विनेल कृष्ण औऱ एक जूनियर अभियंता का अपहरण हुआ था और तीन सरकारी मध्यस्थों की सहायता से उन्हें रिहा कराया गया था।

कंधमाल के पुलिस महानिधीक्षक जे.एन. पंकज ने बतलाया कि उन्होंने इताली पर्यटकों को पहले ही चेतावनी दी थी कंधमाल का दरिंजीबादी इलाके में माओवादियों का खतरा बना रहता है।

मेक्सिको – क्यूबा यात्रा – आशा की यात्रा

In Church on March 20, 2012 at 11:12 am

जस्टिन तिर्की, ये.स.

वाटिकन सिटी, 19 मार्च, 2012 (सेदोक) वाटिकन प्रेस कार्यालय के निदेशक जेस्टविट फादर फेदेरिको लोम्बारदी ने कहा, “लैटिन अमेरिकी देशों की स्वतंत्रता की 200वीं जयन्ती और क्यूबा के ‘आवर लेडी ऑफ कोबरे’ के पाये जाने के 400वें वर्षगाँठ मनाने के लिये संत पापा का मेक्सिको और क्यूबा जाने से लोगों का विश्वास सुदृढ़ होगा।

उक्त बातें फादर लोमबारदी ने उस समय कहीं जब उन्होंने वाटिकन टेलेविज़न के साप्ताहिक कार्यक्रम ‘ऑक्तावा दियेस’ में संत पापा की मेक्सिको औ क्यूबा यात्रा में चर्चा की।

उन्होंने बतलाया कि संत पापा की यात्रा का मकसद है लोगों में आशा का संचार करना। यह भी सत्य है कि संसाधनों से पूर्ण होने पर भी मेक्सिको में फैली हिंसा से जन-जीवन पर बुरा असर पड़ा है।

संत पापा की यात्रा से क्यूबा के लोगों में आशा का संचार होगा जो इस बात का गहरा अनुभव करते हैं धन्य संत पापा जोन पौल द्वितीय के शब्द सत्य सिद्ध होंगे और क्यूबा में एक दिन विकास, स्वतंत्रता और मेल-मिलाप का वातावरण तैयार होगा।

संत पापा की यात्रा से पूरे लैटिन अमेरिका में भी आशा का संचार होगा जहाँ काथलिक कलीसिया ने ‘अपारेतचिदा’ की महासभा के महादेश के विकास में अपना विशेष योगदान दिया है और विभिन्न चुनौतियों के बावजूद मानव और ख्रीस्तीय मूल्यों का प्रचार-प्रसार हुआ है जो मानव विकास के लिये अहम है।

देवदूत संदेश प्रार्थना से पूर्व संत पापा का संदेश

In Church on March 20, 2012 at 11:11 am

जोसेफ कमल बाड़ा

वाटिकन सिटी 19 मार्च 2012 (सेदोक, एशिया न्यूज) संत पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने रविवार 18 मार्च को संत पेत्रुस बासिलिका के प्रांगण में देश विदेश से आये हजारों तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को देवदूत संदेश प्रार्थना का पाठ करने से पूर्व सम्बोधित किया।

उन्होंने इताली भाषा में सम्बोधित करते हुए कहा –
अतिप्रिय भाईयो और बहनो, पास्का की ओर हमारी यात्रा में, हम चालीसाकाल के चौथे रविवार में हैं। यह यात्रा येसु के साथ मरूस्थल में है अर्थात एक अवधि जिसमें हम ईश्वर की आवाज़ को और अधिक सुनें तथा हमारे अंदर होनेवाले प्रलोभनों को निकालें।

मरूस्थल के क्षितिज पर क्रूस है। येसु जानते हैं कि यह उनके मिशन का शिखर है। वस्तुतः ख्रीस्त का क्रूस प्रेम की पराकाष्ठा है जो हमें मुक्ति प्रदान करता है। वे स्वयं आज के सुसमाचार में कहते हैं – जिस तरह मूसा ने मरूभूमि में साँप को ऊपर उठाया था उसी तरह मानवपुत्र को ऊपर उठाया जाना होगा जिससे जो उस में विश्वास करे वह अनन्त जीवन प्राप्त करे।

यह संदर्भ उस प्रसंग के संगत है जिसमें मिस्र से निर्गमन करते समय, इस्राएलियों पर विषैले साँपों ने हमला किया था और अनेक लोग मारे गये थे तब ईश्वर ने मूसा को आदेश दिया था कि काँसे का साँप बनाकर उसे एक डण्डे पर लगाओ। जब किसी को साँप काटता था तो वह काँसे के साँप की ओर दृष्टि डालकर अच्छा हो जाता था।

यहाँ तक कि येसु भी क्रूस पर ऊपर उठाये जायेंगे ताकि जो भी पाप के कारण मृत्यु के खतरे में हो, विश्वास में उनकी ओर मुड़े जो हमारे लिए मर गये वह बच जायेगा। संत योहन लिखते हैं – ईश्वर ने अपने पुत्र को संसार में इसलिए नहीं भेजा कि वह संसार को दोषी ठहराये। उसने उसे इसलिए भेजा है कि संसार उसके द्वारा मुक्ति प्राप्त करे।

संत अगुस्टीन टिप्पणी करते हुए लिखते हैं – चिकित्सक जैसा कि उस पर निर्भर है कि बीमार को चंगा करे। यदि डाक्टर की पर्ची न हो तो मरीज का नाश हो जायेगा।

मुक्तिदाता इस दुनिया में आये यदि आप उनके द्वारा नहीं बचाया जाना चाहते हैं आप अपने लिए निर्णय करें। अतः अनन्तता ईश्वर की असीम प्रेम है जो इस बिन्दु तक आये कि बहुतों के प्राण के लिए अपने एकलौते पुत्र को रक्षा शुल्क के रूप में दे दिया, हमारा उत्तरदायित्व महान है।

हर तथ्य को स्वीकार किया जाये कि जो बीमार है उसे चंगा किया जाये, हरएक जन अपने पाप को स्वीकार करे क्योंकि ईश्वर की क्षमाशीलता क्रूस पर दी जा चुकी है जो उनके जीवन और दिल में प्रभावी हो।

संत अगुस्टीन लिखते हैं – ईश्वर आपके पापों की भर्त्सना करते हैं और यदि आप इसकी निन्दा करते हैं आप ईश्वर के साथ संयुक्त होते हैं। जब आप उनके प्रति घृणा करते हैं जिसे आपने किया है तब आप भला काम करना शुरू करते हैं क्योंकि यह आपके बुरे काम की निन्दा करती है। बुरे कृत्य को पहचानने के साथ ही अच्छा काम शुरू होता है।

कभी कभी मानव प्रकाश से अधिक अंधकार को चाहता है क्योंकि अपने पाप से उसकी आसक्ति है। लेकिन केवल प्रकाश के लिए स्वयं को खोलने से ही, खुले रूप से ईश्वर के सामने अपने अपराध स्वीकारने से ही, हम सच्ची शांति और सच्चा आनन्द पा सकते हैं।

यह महत्वपूर्ण है कि नियमित रूप से पापस्वीकार संस्कार ग्रहण करें। विशेष रूप से चालीसाकाल में, ताकि प्रभु की क्षमा पा सकें और मनपरिवर्तन के पथ पर आगे बढ़ने को गति मिले।

प्रिय मित्रो, कल संत जोसेफ का पर्व है। मैं उन सबको हार्दिक धन्यवाद देता हूँ जो मेरे लिए प्रार्थना करते हैं विशेष रूप से मेरे नाम दिवस के संत के पर्व दिवस पर। विशेष रूप से मैं मेक्सिको और क्यूबा की प्रेरितिक यात्रा के लिए आपसे प्रार्थना करने का आग्रह करता हूँ जिसे मैं अगले शुक्रवार से आरम्भ करूँगा।

हमारी याचना को धन्य कुँवारी माता मरिया की मध्यस्थता के सिपुर्द करता हूँ इन दोनों देशों में इनके प्रति बहुत श्रद्धा और स्नेह है जिनका मैं दौरा करनेवाला हूँ।

इतना कहने के बाद संत पापा ने देवदूत संदेश प्रार्थना का पाठ किया और सबको अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।

In Church on March 20, 2012 at 11:10 am

जस्टिन तिर्की, ये.स.

वाटिकन सिटी, 19 मार्च, 2012(सेदोक) संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें ने अलेक्सान्द्रिया के पैट्रियार्क शेनाउदा तृतीय के निधन पर शोक संदेश भेजा है।

अपने शोक संदेश में उन्होंने कहा, ” संत मार्क द एवानजेलिस्ट परमधर्मपीठ अलेसान्द्रिया के पैट्रियार्क शेनाउदा तृतीय के स्वर्ग सिधार जाने का समाचार पाकर मैं परमधर्मपीठ के पुरोहितों और विश्वासियों के प्रति अपनी सहानुभूति प्रकट करता हूँ।”

“मैं कृतज्ञतापूर्वक 10 मई सन् 1973 के उन पलों की याद करता हूँ जब पैट्रियार्क शेनाउदा तृतीय ने तत्कालीन संत पापा पौल षष्टम् के साथ मुलाक़ात की थी और ख्रीस्तीय एकता के लिये कार्य करने के अपने समर्पण को दुहराया था।”

“उस बात की याद करता हूँ जब दोनों धर्मगरुओं ने ईश्वर के एकमात्र पुत्र के धरा पर आने के विश्वास की घोषणा मिलकर की थी।”

उन्होंने कहा, “मुझे वह क्षण भी याद है जब ऐतिहासिक जुबिली समारोह के समय 24 फरवरी, सन् 2000 ईस्वी में पैट्रियार्क शेनाउदा ने धन्य जोन पौल द्वितीय से कैरो में भेंट की थी।”

संत पापा ने कहा, “मैं इस को प्रकट करना चाहता हूँ पूरी काथलिक कलीसिया ऑर्थोडॉक्स कलीसिया के दुःख में पूर्ण रूप से शामिल है और हमारे पुनरुत्थान और जीवन – येसु से निवेदन करती है कि वे पैट्रियार्क की आत्मा का अपने राज्य में स्वागत करे।

कोपटिक ऑर्थोडॉक्स कलीसिया के पैट्रियार्क का निधन

In Church on March 20, 2012 at 11:09 am

जस्टिन तिर्की, ये.स.

मिश्र, 19 मार्च, 2012 (कैथन्यूज़) कोपटिक ऑर्थोडॉक्स कलीसिया के पैट्रियार्क शेनाउदा तृतीय का निधन फेफड़े की लम्बी बीमारी से जूझने के बाद शनिवार 17 मार्च को हो गया। वे 88 वर्ष के थे।

शेनाउदा ने अपने 40 साल के शासनकाल में पूरी दुनिया में कलीसिया के विस्तार के लिये कार्य किया और मिश्र में ईसाइयों और मुसलमानों के बीच शांति के लिये प्रयासरत रहे।

मेना समाचार सूत्रों के अनुसार मध्यपूर्व के सबसे बड़े अल्पसंख्यक ख्रीस्तीय दल के धर्मगुरु शेनाउदा की हालत शनिवार को उस समय बहुत ख़राब हो गयी जब उन्हें दिल का गंभीर दौरा पड़ा।

उनकी मृत्यु की ख़बर सुनते ही बड़ी संख्या में लोग संत मार्क कथीड्रल के बाहर जमा हो गये और रात भर अपने दिवंगत धर्मगुरु को श्रद्धांजलि दी।

बीबीसी ससाचार सूत्रों के अनुसार 1 लाख से भी ज़्यादा लोगों ने रविवार को मिस्सा पूजा में भाग लिया। परंपरा के अनुसार मिस्सा के दौरान दिवंगत पैट्रियार्क को, धर्मगुरू परिधान में एक ‘पेपल चेयर’ में बैठाया गया था।

कोपटिक कलीसिया के ईसाइयों को तीन दिन का अवकाश दिया गया है ताकि वे पोप शेनाउदा के अंतिम क्रिया की तैयारी कर सकें।

मालूम हो कि कोपटिक ख्रीस्तीय मिश्र की कुल जनसंख्या 80 मिलियन के का 10 प्रतिशत है। यह समुदाय मध्यपूर्व में सबसे पुराना, बड़ा और अल्पसंख्यक समुदाय है।

संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें ने धर्मगुरु शेनाउदा के लिये प्रार्थना चढ़ायी है। अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने शेनाउदा को सहिष्णु और अंतरधार्मिक वार्ता का प्रबल समर्थक कहा है।

शेनाउदा का जन्म अपर मिश्र के में 3 अगस्त सन् 1923 को असुत में हुए था।वे सन् 1954 में एक मठवासी बने और सन् 1971 में नज़ीर गायेद से पैट्रियार्क शेनाउदा बन गये।
पोप शेनाउदा पैट्रियार्क सिरिल के उत्तराधिकारी थे।

राष्ट्रपति अनवर सदात ने उन्हें सन् 1981 में उनका आंतरिक निष्कासन कर दिया था पर चार साल के बाद राष्ट्रपति होसनी मुबारक ने उन्हें पुनः कैरो बुला लिया।

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