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तमिलनाडुः परमाणु बिजली संयंत्र का विरोध कर रहे 200 लोग गिरफ्तार

In Church on March 23, 2012 at 9:04 am

जोसेफ कमल बाड़ा
कुडनकुलाम तमिलनाडु 22 मार्च 2012 (एशिया न्यूज) एशिया समाचार सेवा की एक रिपोर्ट के अनुसार तमिलनाडू में पुलिस ने लगभग 200 लोगों को गिरफ्तार किया है जो परमाणु बिजली संयंत्र बनाये जाने का विरोध कर रहे थे। इन्में कुटापुल्ली गाँव के एक पुरोहित फा सुसीलन सहित उनके पल्ली के कुछ सदस्य भी शामिल हैं। कुडनकुलाम परमाणु विद्युत संयंत्र के निर्माण का विरोध करने के लिए लगभग 5000 लोग जमा हुए थे।

सोवियत निर्मित पावर प्लांट बनाने के लिए भारत सरकार ने 1988 में समझौता किया था जिसपर काम 1997 में ही आरम्भ हुआ। विगत वर्ष जापान के फुकुशीमा में हुई दुर्घटना के बाद परमाणु बिजली संयंत्र के समीप रहनेवाले निवासी नियमित रूप से विरोध प्रदर्शन करते रहे हैं।

चैन्ने स्थित लोयोला कालेज में एंटोमोलोजी रिसर्च इंस्टीच्यूट के निदेशक पुरोहित फादर एस इग्नासिमुथु ये. स. कुडनकुलाम पावर पलांट के समर्थन में हैं। उनका कहना है कि परमाणु विद्युत ऊर्जा देश की ऊर्जा सुरक्षा संबंधी जरूरतों को पूरा करने में बडी भूमिका अदा कर सकता है। इससे वातावरण प्रदूषण को कम कर आर्थिक लाभ भी पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि लोगों को इस बारे में शिक्षित किये जाने की जरूरत है। न्युकलियर ऊर्जा ग्रीनहाउस गैसों (कार्बन डाइआक्साइड, मिथेन, क्लोरोफ्लोरोकार्बन) का उर्त्सजन नहीं करती हैं तथा इनका संचालन खर्च सापेक्षिक रूप से कम है। उन्होंने कहा कि परमाणु कचड़े का प्रबंध करना प्रमुख बात है लेकिन भारत अपनी स्थिति का लाभ उठा सकता है।

फादर इग्नासिमुथु ने कहा कि भारत में धारणीय विकास के लिए परमाणु विद्युत संयंत्र महत्वपूर्ण है तथा लोगों को ऊर्जा के इस नये स्वरूप के बारे में शिक्षित किया जाना चाहिए। भारत में परमाणु ऊर्जा विद्युत उत्पादन का चौथा प्रमुख स्रोत है।

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यूरोप, ईसाई विरोधी कृत्यों का नया लक्ष्य

In Church on March 23, 2012 at 9:02 am

वियेना 22 मार्च 2012 ऊकान आस्ट्रिया आधारित एक पर्यवेक्षण केन्द्र Observatory on Intolerance and Discrimination Against Christians in Europe की एक रिपोर्ट के अनुसार ईसाईयत की आधारभूमि यूरोप भी ईसाई विरोधी कृत्यों का नया लक्ष्य बन गया है। पिछले साल यूरोप में हेट क्राइम या नफरत अपराध के तहत हुए 85 फीसदी मामलों में ईसाईयों को निशाना बनाया गया। आस्ट्रिया आधारित पर्यवेक्षण केन्द्र के निदेशक गुडरून कुगलर के अनुसार यह समय है कि सार्वजनिक विचार गोष्ठियों और बहसों में महाद्वीप की इस सच्चाई का प्रत्युतर देनेवाली प्रवृत्ति पर विचार किया जाये। रिपोर्ट में धार्मिक संकेतों और प्रतीकों पर दबाव, अपवित्रीकरण, घृणा अपराध तथा धर्म की आड़ में उत्प्रेरित हिंसा की घटनाओं का सार भी प्रस्तुत किया गया है।

कुगलर ने इस तथ्य पर संतोष जाहिर किया कि अनेक लोग सोचते थे की तीसरी दुनिया के देशों में ही ईसाई विरोधी अत्याचार होता था वे अब महसूस करने लगे हैं कि यूरोप में ईसाईयों की स्वतंत्रता और अधिकारों पर पाबंदी अब हमारा ध्यान आकर्षित कर रही है। रिपोर्ट में कहा गया कि स्काटलैंड में हुए 95 फीसदी धर्म उत्प्रेरित हिंसा का लक्ष्य ईसाईयों को बनाया गया तथा फ्रांस में तोड़फोड़ की 84 फीसदी घटनाएँ ईसाई प्रार्थनालयों या आराधना स्थलों के खिलाफ निर्देशित थीं। पर्यवेक्षण केन्द्र ने देखा कि मजिस्ट्रेट, चिकित्सक, नर्स, मिडवाइफ और फार्मासिस्ट जैसे पेशों में ईसाईयों की अंतकरण की स्वतंत्रता को कम करने पर दबाव बढ़ रहा है। सरकार द्वारा परिभाषित यौन नैतिकता से असहमत होनेवाले अभिभावक और शिक्षक भी मुश्किल में पड़ जाते हैं।

यूनाइटेड किंगडम में सर्वेक्षण में शामिल होनेवाले 74 फीसदी लोगों ने कहा कि अन्य धर्मों के लोगों की अपेक्षा ईसाईयों के खिलाफ अधिक नकारात्मक भेदभाव है। काथलिक धर्माध्यक्ष अन्देस वेरेज जो यूरोप में धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों की समिति की गतिविधियों पर पर्यवेक्षण समिति के कार्यों की निगरानी करते हैं उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट ईसाईयों को साहसी बनाये ताकि वे अज्ञात होने के भय से बाहर निकलें यदि उन्होंने धर्म के कारण भेदभाव या असहिष्णुता का अनुभव किया है। यूरोप के धर्माध्यक्ष उनका समर्थन करते हैं जिनके अधिकारों का सम्मान नहीं किया गया है। धार्मिक स्वतंत्रता बहुमूल्य तथ्य है जो हमारे महाद्वीप में अब भी शांति का स्तंभ बना हुआ है।

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मेक्सिको और क्यूबा में कलीसिया

In Church on March 23, 2012 at 9:01 am

जोसेफ कमल बाड़ा
रोम 22 मार्च 2012 (जेनित) संत पापा बेनेडिक्ट 16 वें शुक्रवार 23 मार्च को मेक्सिको और क्यूबा की प्रेरितिक यात्रा के लिए रोम से रवाना होंगे। 23 से 29 मार्च तक सम्पन्न होनेवाली संत पापा की यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब मेक्सिको की स्वतंत्रता की 200 वीं वर्षगाँठ तथा क्यूबा में कारिदाद देल कोबरे की माता मरिया की प्रतिमा की खोज की 400 वीं वर्षगाँठ भी है। कलीसिया के केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा सन 2010 तक अद्यतन किये गये आंकड़ो के अनुसार मेक्सिको की आबादी 10 करोड़ 84 लाख है जिसका 91.89 प्रतिशत काथलिक हैं। यहाँ 6744 पल्लियाँ और 7169 मेषपालीय केन्द्र हैं। वर्तमान समय में 1163 धर्माध्यक्ष, 16234 पुरोहित, 30023 धर्मसमाजी, सेक्यूलर संस्थानों के 505 सदस्य, 25846 लोकधर्मी मिशनरी तथा 2,95,462 धर्मशिक्षक हैं। काथलिक कलीसिया द्वारा संचालित 8991 शिक्षण संस्थानों में 1856735 विद्यार्थी अध्ययन करते हैं तथा 1822 शिक्षा के विशेष केन्द्र हैं। कलीसिया या पुरोहितों और धर्मसमाजियों द्वारा 257 अस्पतालों, 1602 क्लिनिकों, 8 कुष्ठ रोगी कालोनियों, विकलाँगों या वृद्धों के लिए 372 केन्द्र, 329 अनाथालय, 2134 परिवार परामर्श तथा जीवन समर्थक केन्द्र एवं 340 अन्य संस्थानों का संचालन किया जाता है।

क्यूबा की आबादी 1 करोड़ 12 लाख 43 हजार है जिसका 60.19 फीसदी काथलिक हैं। 11 कलीसियाई धर्मप्रांतों में 304 पल्ली तथा विभिन्न प्रकार की सेवा प्रदान करनेवाला 2210 मेषपालीय केन्द्र हैं। इस समय 17 धर्माध्यक्ष, 361 पुरोहित, 656 धर्मसमाजी, सेक्यूलर इंस्टीच्यूट के 24 सदस्य 2122 लोकधर्मी मिशनरी तथा 4133 धर्मशिक्षक हैं। लघु गुरूकुल छात्रों की संख्या 13 तथा गुरूकुल छात्रों की संख्या 78 है। काथलिक शिक्षा के 12 केन्द्रों में 1113 विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं तथा 10 विशेष शिक्षा के केन्द्र हैं। कलीसिया या पुरोहितों और धर्मसमाजियों द्वारा क्यूबा में चलाये जा रहे अन्य केन्द्रों में 2 क्लिनिक, एक कुष्ठ रोग कालोनी, वृद्धों या विकलांगों के लिए 8 केन्द्र, 3 अनाथालय तथा अन्य प्रकार के 3 संस्थानों का संचालन किया जा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव का विश्व जल दिवस के लिए संदेश

In Church on March 23, 2012 at 9:00 am

जोसेफ कमल बाड़ा
न्यूयार्क 22 मार्च 2012 (यूएन) 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया गया। संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव बान की मून ने इस दिवस के लिए दिये गये अपने संदेश में कहा कि हम अपने समर्पण की पुनर्पुष्टि करें ताकि 800 मिलियन लोगों की पीड़ा समाप्त कर सकें जो स्वच्छ पेयजल और शौचालय की सुविधा से वंचित हैं तथा यह सब सम्मान और अच्छे स्वास्थ्य से पूर्ण जीवन जीने के लिए जरूरी हैं।
उन्होंने कहा कि विश्व सस्टेनेबल फ्यूचर या धारणीय भविष्य के लिए चार्ट बना रहा है पानी, भोजन और ऊर्जा की महत्वपूर्ण जरूरत है। बिना जल के मर्यादा नहीं है और गरीबी से बचा नहीं जा सकता है। वैश्विक आबादी का लगभग 60 फीसदी शहरों और नगरों में निवास करता इसलिए इस वर्ष के जल दिवस का शीर्षक है ” शहरों के लिए जल ” । यह शीर्षक शहरी भविष्य के सामने आनेवाली प्रमुख चुनौतियों को रेखांकित करता है। विगत दशक में शहरों में रहनेवाले लोंगो जिनके घरों में या निकटवर्ती क्षेत्र में पानी के नल नहीं हैं यह संख्या लगभग 114 मिलियन बढ़ी है तथा जिनके पास शौचालय सुविधा नहीं है यह संख्या बढ़कर 134 मिलियन हो गयी है। इस 20 फीसदी बढ़ोत्तरी का मानव स्वास्थ्य तथा आर्थिक उत्पादकता में बहुत अवरोधात्मक असर हुआ है। लोग बीमार हैं तथा काम नहीं कर पा रहे हैं। सन 2012 में रियो दि जनेरो में धारणीय विकास पर सम्पन्न होनेवाले आगामी संयुक्त राष्ट्र संघीय सम्मेलन में जल संबंधी समस्याएँ प्रमुखता से उठायी जायेंगी।
संयुक्त राष्ट्र संघीय महासचिव बान की मून ने कहा कि जल संबंधी संयुक्त राष्ट्र संघीय उच्च स्तरीय पैनल इन उपायों की जाँच कर रहा है ताकि जल, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के मध्य बिन्दुओं को जोड़ सके एवं रोजगार उत्पन्न करने तथा निर्धनता और असमानता, पर्यावरण पर पडनेवाले दबाव और जलवायु परिवर्तन के खतरों को कम किया जा सके। उन्होंने सरकारों से आग्रह किया कि शहरी क्षेत्रों के जल संकट को स्वीकारेँ क्योंकि यह प्रशासन, कमजोर नीतियों और कमजोर प्रबंधन का संकट है न कि संसाधन की कमी का मामला है।

ईराक बगदाद के सेन्ट मैथ्यू गिरजाघर पर भी विस्फोट

In Church on March 23, 2012 at 8:58 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

ईराक, 21 मार्च सन् 2012 (एशिया समाचर): ईराक में मंगलवार को इस्लामी रूढिवादियों ने अमरीका पर ईराकी आक्रमण की नौवीं बरसी पर कई धमाके किये।

एशियान्यूज़ को सूत्रों ने बताया कि बगदाद, किरकूक, करबाला तथा हिल्लाह शहरों में किये गये कम से कम 20 बम विस्फोटों में 39 व्यक्तियों की मौत हो गई है तथा कम से कम 200 लोग घायल हो गये हैं।

बगदाद के ख्रीस्तीय सूत्रों ने एशिया समाचार को बताया कि बगदाद स्थित सिरियाई ऑरथोडोक्स सेन्ट मैथ्यू गिरजाघर पर भी हमला किया गया जिसमें गिरजाघर के बाहर तैनात दो संतरियों की मौत हो गई है, पाँच अन्य व्यक्ति घायल हो गये हैं तथा गिरजाघर को भारी क्षति पहुँची है।

20 मार्च सन् 2003 को अमरीका ने तत्कालीन तानाशाह सद्दाम हुसैन को अपदस्थ करने के लिये ईराक पर आक्रमण किया था।

पर्यवेक्षकों के अनुसार अमरीकी आक्रमण के बाद से ईराक में सुरक्षा की स्थिति अत्यधिक ख़तरनाक हो गई है। देश के अरबी, कुर्दी तथा तुर्की समुदायों में सत्ता के लिये संघर्ष जारी है। अल्पसंख्यक ख्रीस्तीय समुदाय को विदेशी ताकतों का साथ देनेवाला माना जाता रहा है तथा कई बार उन पर हमले किये गये हैं।

कन्धमाल के पीड़ितों ने की संयुक्त राष्ट्र संघीय प्रतिनिधि से मुलाक़ात

In Church on March 23, 2012 at 8:57 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

नई दिल्ली, 21 मार्च सन् 2012 (ऊका): उड़ीसा के कन्धामाल ज़िले में, सन् 2008 के दौरान हुई ख्रीस्तीय विरोधी हिंसा के शिकार बने पीड़ितों के एक सात सदस्यीय प्रतिनिधिमण्डल ने, नई दिल्ली में, मंगलवार को, संयुक्त राष्ट्र संघ के विशेष दूत से मुलाकात कर, उनपर हुए अन्याय से उन्हें अवगत कराया।

सदस्यों ने संयुक्त राष्ट्र संघीय दूत क्रिस्टोफ हेयन्स को, न्यायेतर तथा अन्धाधुन्ध हत्याओं के बारे में बताया तथा शिकायत की कि जानबूझकर पुलिस एवं प्रशासन ने ख्रीस्तीयों के विरुद्ध हिन्दु चरमपंथियों के हमलों को रोकने के लिये कुछ नहीं किया था।

दलित मानवाधिकार सम्बन्धी राष्ट्रीय अभियान के महासचिव एस.डी,जे.एम. प्रसाद के नेतृत्व में उक्त प्रतिनिधिमण्डल ने श्री क्रिस्टोफ हेयन्स से बातचीत की।

ग़ौरतलब है कि सन् 2008 के दौरान उड़ीसा के कन्धमाल तथा अन्य ज़िलों में ख्रीस्तीयों के विरुद्ध हिन्दु चरमपंथियों की हिंसा में लगभग 100 व्यक्ति मारे गये थे, कई गिरजाघरों एवं ख्रीस्तीय आवासों को आग हवाले कर दिया गया था तथा लगभग 50,000 से अधिक लोग शरणार्थी हो गये थे। बहुत से पीड़ित अभी भी न्याय की प्रतीक्षा में हैं।

संयुक्त राष्ट्र संघीय दूत क्रिस्टोफ हेयन्स 17 मार्च से दिल्ली में हैं तथा न्यायेतर एवं अन्धाधुन्ध हत्याओं पर एक रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। यह रिपोर्ट जिनिवा में संयुक्त राष्ट्र संघीय मानवाधिकार समिति के समक्ष प्रस्तुत की जायेगी।

काहिराः शिनोडा की अन्तयेष्टि में हज़ारों उपस्थित

In Church on March 23, 2012 at 8:57 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

काहिरा, 21 मार्च सन् 2012न (रायटर): मिस्र की राजधानी काहिरा के सेन्ट मार्क महागिरजाघर में, मंगलवार को, हज़ारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने एकत्र होकर, मिस्र के कॉप्टिक ऑरथोडोक्स समुदाय के धर्मगुरु, प्राधिधर्माध्यक्ष पोप शिनोडा की अन्तयेष्टि में भाग लिया। इस दिन, दिवंगत पोप शिनोडा के आदर में सम्पूर्ण मिस्र में शोक दिवस मनाया गया तथा राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रहे।

मध्यपूर्व के सर्वाधिक विशाल ख्रीस्तीय समुदाय, मिस्र की कॉप्टिक ऑरथोडोक्स ख्रीस्तीय कलीसिया के प्राधिधर्माध्यक्ष, 88 वर्षीय पोप शिनोडा का निधन शनिवार को हो गया था।

इथियोपियाई ऑरथोडोक्स कलीसिया के धर्माधिपति प्राधिधर्माध्यक्ष आबूना पौलोस ने काहिरा के सेन्ट मार्क महागिरजाघर में अन्तयेष्टि याग अर्पित किया जिसमें विश्व के विभिन्न भागों से मिस्र पहुँचे कॉप्टिक धर्माध्यक्षों सहित देश के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने भाग लिया।

अन्तयेष्टि याग के बाद दिवंगत प्राधिधर्माध्यक्ष पोप शिनोडा को सन्त बुशॉय को समर्पित मठ के कब्रस्तान में मिट्टी दी गई। यह वही मठ है जहाँ, चार वर्षों तक (सन् 1981 से 1985 तक) पोप शिनोडा को, मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति अनवर-अल-सादात के शासन की आलोचना करने के लिये, दण्डित कर नज़रबन्द कर दिया गया था।

प्राप्त समाचारों के अनुसार अन्तयेष्टि से एक दिन पूर्व दिवंगत पोप शिनोडा के दर्शानार्थ आये श्रद्धालुओं की संख्या इतनी अधिक थी कि भगदड़ में कम से कम तीन व्यक्ति दबकर मर गये तथा 139 घायल हो गये। इसी के मद्देनज़र मंगलवार को सेन्ट मार्क महागिरजाघर के आस पास अधिकारियों ने कड़ा पहरा लगा रखा था तथा शव यात्रा एवं कब्रस्तान के आसपास भी कड़े सुरक्षा उपाय किये गये थे। कई एम्बूलेन्स और मेडिकल स्टाफ मौजूद थे।

मिस्र में तानाशाही शासन के अन्त को लाने में पोप शिनोडा की भूमिका को अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। मिस्र के ख्रीस्तीय एवं मुसलमान समुदायों के बीच मैत्री एवं सदभाव को प्रोत्साहित करने हेतु पोप शिनोडा सराहनीय प्रयास करते रहे थे।

मिस्र की आठ करोड़ की कुल आबादी में लगभग अस्सी लाख ख्रीस्तीय धर्मानुयायी हैं।

आयरी कलीसिया यौन दुराचार को समाप्त करने के लिये संघर्षरत

In Church on March 23, 2012 at 8:56 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

वाटिकन सिटी, 21 मार्च सन् 2012 (सेदोक): आयरलैण्ड में पुरोहितों द्वारा बच्चों के विरुद्ध यौन दुराचारों पर की गई जाँच पड़ताल के उपरान्त वाटिकन द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया कि अतीत की ग़लतियों के बावजूद आयरी काथलिक कलीसिया यौन दुराचार को समाप्त करने तथा बच्चों को सुरक्षा प्रदान करने के लिये कृतसंकल्प है।

वाटिकन द्वारा प्रेषित जाँचकर्ता दल की आठ पृष्ठीय रिपोर्ट, मंगलवार को, वाटिकन प्रेस द्वारा प्रकाशित की गई। इसमें अतीत की ग़लतियों के लिये क्षमा याचना तथा बच्चों के सुरक्षित भविष्य हेतु सुधारों की मांग की गई है। रिपोर्ट में कहा गया कि बच्चों के विरुद्ध यौन दुराचारों के आरोपों पर कार्रवाई करने में विलम्ब किया गया तथा कई बार इस विषय पर लापरवाही बरती गई। तथापि, कहा गया कि आज आयरलैण्ड के धर्माध्यक्ष, पुरोहित तथा लोकधर्मी विश्वासी बच्चों को सुरक्षापूर्ण वातावरण प्रदान करने के लिये प्रशंसनीय प्रयास कर रहे हैं।

वाटिकन के प्रवक्ता फादर फेदरीको लोमबारदी ने बताया कि वाटिकन द्वारा प्रेषित जाँचकर्ता दल ने आयरलैण्ड के चार महाधर्मप्रान्तों का दौरा कर काथलिक धर्माधिकारियों के साथ साथ यौन दुराचार से पीड़ित लोगों से भी मुलाकातें कीं। उन्होंने बताया कि इस विषय पर प्रकाशित लेखों एवं दस्तावेज़ों को संकलित कर ही उक्त रिपोर्ट तैयार की गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पुरोहितों के अपराधिक कृत्य एवं विश्वासघात से सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें अत्यधिक दुखी हैं जिनके कारण सार्वभौमिक काथलिक कलीसिया को कलंकित होना पड़ा है।

कहा गया, “गहन दुख और लज्जा के साथ इस बात को स्वीकार करना पड़ता है कि जिन लोगों को बच्चों, किशोरों और युवाओं के प्रशिक्षण का कार्यभार सौंपा गया था उन्हीं ने उनका शोषण किया तथा उनके विरुद्ध यौन दुराचार किया।

इसके अतिरिक्त, जिन लोगों को आरोपों पर कार्रवाई करनी थी उन्होंने भी इस समस्या को गम्भीरता से नहीं लिया तथा स्थिति को सुधारने हेतु कोई उपाय नहीं किये।”

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि वाटिकन जाँचकर्ता दल के सुझावों को स्वीकार कर आयरलैण्ड के काथलिक धर्माध्यक्षों ने आश्वासन दिया है कि अब से यौन दुराचार के प्रकरणों की शिकायत वे तुरन्त नागर अधिकारियों से करेंगे तथा काथलिक शिक्षण संस्थानों तथा गुरुकुलों में बच्चों एवं युवाओं को सुरक्षा का वातावरण प्रदान करने का हर सम्भव प्रयास करेंगे।

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