Vatican Radio HIndi

Archive for March 25th, 2012|Daily archive page

द्वितीय वाटिकन महासभा के आरंभ होने के पचासवें वर्षगाँठ के अवसर पर संत पापा का वीडियो संदेश

In Church, Journey on March 25, 2012 at 7:09 am

जस्टिन तिर्की,ये.स.

मेरे अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, मुझे खुशी है कि आप फ्रांस के धर्माध्यक्षों के आह्वान पर वाटिकन द्वितीय के आरंभ होने के 50वें वर्षगाँठ मनाने के लिये बड़ी संख्या में लूर्दस् में एकत्र हुए हैं । मैं अपनी प्रार्थना के द्वारा मसाबियेले ग्रोटो के पास सम्पन्न हो रह आपके विश्वास की यात्रा में शामिल हूँ।

द्वितीय वाटिकन महासभा हमारे लिये ईश्वरीय कृपा का एक विशेष चिह्न रहा है। यदि हम इसका अध्ययन करें और कलीसिया की परंपरा और शिक्षण के निर्देशन के अन्तर्गत स्वीकार करें तो यह भावी कलीसिया को एक नयी शक्ति प्रदान करेगा।

मैं विश्वास करता हूँ कि यह वर्षगाँठ समारोह फ्रांस और पूरी कलीसिया में आध्यात्मिक और मेषपालीय नवीनीकरण लायेगा।

सचमुच, यह समय हमें यह अवसर प्रदान करता है कि हमें उन विषयों को जाने जिन्हें महासभा के आचार्यों ने हमारे लिये एक अमूल्य धरोहर के रूप में छोड़ दिया है। यह वह समय है जब हम इसका आत्मसात करकें और आज की कलीसिया के लिये उत्तम फल उत्पन्न करें।

नवीनीकरण का यह समय विश्वास के वर्ष का ही एक भाग है जो एक दूसरे रूप में हमारे लिये आया है जिसे मैं पूरी कलीसिया के लिये प्रस्तुत करना चाहता था।

यह हमारे विश्वास को जागृत करे और सुसमाचार के साथ हमारे संबंध को गहरा करे। इसके लिये यह ज़रूरी है कि हम येसु के प्रति खले रहें विशेष करके ईशवचन के प्रति रुचि बढ़ायें ताकि हमारा मन दिल परिवर्तित हो और हम पूरी दुनिया में सम्मानपूर्ण वार्तामय वातावरण में आशा के संदेश की उद्घोषणा कर सकें।

यह एक ऐसा अवसर भी हो जब काथलिक कलीसिया जीवन मजबूत हो और द्वितीय वाटिकन महासभा का अन्तरकलीसियाई एकता सुदृढ़ करने का जो एक महत्त्वपूर्ण लक्ष्य था, वह भी पूर्ण हो।

येसु द्वारा दिये गये दिव्य वचन से प्रेरित हो ख्रीस्तीयों के जीवन कलीसिया के नवीनीकरण का साक्ष्य बने।

प्रिय भाइयो एवं बहनो, लूर्द्स की संत बेर्नादेत्त की नम्रता और अटूट विश्वास तथा पौलिन जारीकोट और फ्रांस के कई अन्य मिशनरियों के समान आप भी येसु के ज्ञान में बढ़ें।

इन संतों ने हमें दिखलाया है कि विश्वास का पहलु व्यक्तिगत और सामुदायिक दोनों है जिसके लिये साक्ष्य और सार्वजनिक समर्पण की आवश्यकता होती है।

आज हम जोन दि आर्क की भी याद करें जिसका उदाहरण हमारे लिये महत्वपूर्ण है जिन्होंने ऐसे समय में सुसमाचार के प्रचार के लिये कार्य किया जब कलीसिया कठिन दौर से गुज़र रही थी।

नये सुसमाचार के लिये विश्वास के आनन्द और उत्साह को फिर से जागृत करने की ज़रूरत है ताकि इसके अर्थ का प्रचार किया जा सके। पूरी कलीसिया को इस बात के लिये आमंत्रित किया जाता है कि वे निर्भीक होकर सबों को येसु के करीब ला सकें।

प्रिय भाइयो एवं बहनो, लूर्द की निष्कलंक कुँवारी मरियम जिसने ईश्वरीय रहस्य को पूर्ण करने में अहम भूमिका अदा की आपके लिये ज्योति का कार्य करे ताकि आप येसु तक पहुँच सकें और अपने विश्वास में सुदृढ़ हो सकें।

अन्त में धर्माध्यक्षो, लूर्दस के तीर्थयात्रियो, धर्मसमाजियो, धर्मबहनो और विश्वासियो को मेरा प्यार भरा अभिवादन।

ग्वानाहुआतो हवाई अडडे पर मेक्सिको के नागरिकों के लिए संत पापा का संबोधन

In Church, Journey on March 25, 2012 at 7:09 am

जोसेफ कमल बाड़ा

लेओन 24 मार्च 2012 ( सेदोक) मेक्सिको के लेओन शहर में ग्वानाहुआतो अंतरराष्ट्रीय हवाई अडडे में आयोजित स्वागत समारोह के दौरान संत पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने मेक्सिको के राष्ट्रपति, धर्माध्यक्षों, विशिष्ट प्रशासनिक अधिकारियो और गुवानाहुआतो तथा मेक्सिको की प्रिय लोगो को सम्बोधित करते हुए कहा कि यहाँ होने पर वे बहुत आनन्दित हैं।

वे ईश्वर को धन्यवाद देते हैं कि उन्होंने इस इच्छा को साकार करने की उन्हें अनुमति प्रदान की जो बहुत समय से उनके दिल में थी कि इस महान राष्ट्र की भूमि में ईश प्रजा को विश्वास में सुदृढ़ करें।

संत पापा ने कहा कि मेक्सिको की जनता का स्नेह जो संत पेत्रुस के उत्तराधिकारी के लिए है और जिसे वे हमेशा अपनी प्रार्थना में याद करते हैं, वह विख्यात है। वे इस बात को यहाँ कहते हैं जिसे उनके पूर्वाधिकारी धन्य जोन पौल द्वितीय अपनी पहली प्रेरितिक यात्रा के समय इस स्थल का दर्शन करना चाहते थे।

यद्यपि वे उस समय नहीं आ सके लेकिन उन्होंने (30 जनवरी 1979) यहाँ के हवाई क्षेत्र से उडान भरते हुए यहाँ के निवासियों के लिए कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उत्साह का संदेश भेजा था।

संत पापा ने कहा कि मेक्सिको और लातिनी अमरीका के अधिकाँश देश हाल के वर्षों में अपनी आजादी की दूसरी शताब्दी का समारोह मना रहे हैं। इस महत्वपूर्ण और सार्थक क्षण के लिए ईश्वर को धन्यवाद देने के लिए अनेक धार्मिक समारोहों का आयोजन किया जा रहा है।

ग्वादालुपे की माता मरियम, हमारी स्वर्गीय माता ने इन देशों के निर्माण के लिए अपनी संतान के विश्वास प्रशिक्षण पर दृष्टि रखी है।

संत पापा ने कहा कि वे विश्वास, आशा और प्यार के तीर्थयात्री रूप में यहां आये हैं। वे उन लोगों को विश्वास में सुदृढ़ करना चाहते हैं जो ख्रीस्त में विश्वास करते हैं ताकि वे ईश वचन को सुनकर तथा संस्कारों को ग्रहण कर अपने विश्वास में मजबूत हों और नवीकृत हों। और इस तरह वे अपने विश्वास को दूसरों के साथ बाँटते हुए समाज में खमीर के समान काम करते हुए हर व्यक्ति की प्रतिष्ठा के आधार पर मर्यादापूर्ण और शांतिमय सहअस्तित्व के लिए योगदान देंगे।

संत पापा ने कहा कि इस देश और सम्पूर्ण महाद्वीप के लोगों का आह्वान किया जाता है कि वे ईश्वर पर अपनी आशा को गहन दृढ़ता के साथ जीयें। इसे दिल की मनोवृत्ति और व्यवहारिक समर्पण में परिणत कर बेहतर दुनिया बनाने के लिए एक साथ चलें। आशा और विश्वास के साथ मसीही विश्वासी वस्तुतः सम्पूर्ण कलीसिया अपने मिशन के अपरिहार्य तत्व के रूप में परोपकार को जीती और अभ्यास करती है।

संत पापा ने कहा कि वे इन दिनों में प्रभु से तथा ग्वादालुपे की माता मरिया से सबके लिए प्रार्थना करेंगे ताकि वे अपने विश्वास के प्रति निष्ठावान बने रहें जिसे उन्होंने पाया है। वे विशेष रूप से पुरानी तथा नयी रंजिश, नफरत तथा हर प्रकार की हिंसा के कारण पीड़ा सह रहे लोगों तथा जरूरतमंदों के लिए प्रार्थना करेंगे। वे जानते हैं कि वे ऐसे देश में हैं जिसे अपने आतिथ्य सत्कार पर गर्व है तथा जो हर किसी का स्वागत करता है। वे इसे जानते हैं, देख सकते हैं और अपने दिल में महसूस कर रहे हैं।

संत पापा ने कहा उनकी आशा है कि मातृभूमि से दूर रह रहे अनेक मेक्सिको वासी भी इसी मनोभाव को महसूस करते हैं तथा कोई भी वजह उन्हें इसे भूलने न दे और यह सौहार्द तथा यथार्थ आंतरिक विकास में बढ़े।

पत्रकारों से सन्त पापा ने कहा कलीसिया कोई राजनैतिक सत्ता अथवा पार्टी नहीं

In Church, Journey on March 25, 2012 at 7:08 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

वाटिकन सिटी, 24 मार्च सन् 2012 (सेदोक): रोम से मेक्सिको की यात्रा के दौरान शुक्रवार को पत्रकारों के प्रश्नों का त्तर देते हुए सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने कहा कि कलीसिया न तो कोई राजनैतिक सत्ता है और न ही कोई राजनैतिक पार्टी।

स्पानी उपनिवेशियों से स्वतंत्रता पाने की दूसरी शताब्दी मना रहे लातीनी अमरीका के सन्दर्भ में सन्त पापा ने कहा, “यह स्वभाविक है कि कलीसिया को सदैव स्वतः से यह पूछना चाहिये कि क्या इस विशाल महाद्वीप पर सामाजिक न्याय की बहाली के लिये पर्याप्त प्रयास किये गये जा रहे हैं अथवा नहीं? इसलिये कि कलीसिया कोई राजनैतिक सत्ता अथवा राजनैतिक पार्टी नहीं है अपितु एक नैतिक वास्तविकता तथा नैतिक शक्ति है।”

मेक्सिको और क्यूबा की छः दिवसीय यात्रा करते हुए सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें को कैसा लग रहा था इस सवाल के जवाब में सन्त पापा ने कहा, “यह मेरे लिये हर्ष का विषय है क्योंकि यह उस अभिलाषा का उत्तर है जिसे मैं अपने मन में लम्बे समय से संजोए हुए था।”

अपने हृदय की भावनाओं का वर्णन करते हुए सन्त पापा ने कहा, “द्वितीय वाटिकन महासभा के शब्द मेरे मन में आते हैं: गाओदियुम एत स्पेस, लुकतुस एत आंगोर – आनन्द और आशा किन्तु दुख एवं व्यग्रता भी।” सन्त पापा ने कहा कि वे मेक्सिको एवं क्यूबा के आनन्द में शरीक होते हुए इन राष्ट्रों की कठिनाइयों में भी उनके साथ हैं। उन्होंने कहा कि काथलिक विश्वासियों में आशा का संचार करना तथा बुराई के खिलाफ संघर्ष हेतु उनके संकल्प को मज़बूत करना उनका मिशन है।

मेक्सिको में नशीले पदार्थों की तस्करी तथा मादक पदार्थों सम्बन्धी हिंसा को कम करने के लिये काथलिक कलीसिया की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर सन्त पापा ने कहा, “मेक्सिको के सौन्दर्य से हम भलीभाँति परिचित हैं किन्तु साथ ही मादक पदार्थों सम्बन्धी भारी समस्याओं से भी वाकिफ़ हैं।

निश्चित्त रूप से इसमें काथलिक कलीसिया की बड़ी ज़िम्मेदारी है क्योंकि मेक्सिको के 90 प्रतिशत लोग काथलिक धर्मानुयायी हैं। मानवजाति तथा, विशेष रूप से, युवाओं का विनाश करनेवाली इस बुराई के विरुद्ध संघर्ष को जारी रखने के लिये हम कृतसंकल्प हैं।”

सन्त पापा ने कहा कि इस कार्य में सबसे पहला कार्य लोगों में ईश प्रेम की चेतना जाग्रत करना है क्योंकि इसी से लोग सत्य की ओर अग्रसर होंगे तथा बुराई का बहिष्कार करने का सम्बल प्राप्त करेंगे।

न्होंने कहा कि कलीसिया की ज़िम्मेदारी है कि वह अन्तःकरणों को शिक्षित करे तथा समाज से झूठे वादों, धन की पूजा एवं बुराई के नकाब को हटाये।

क्यूबा के विषय में पूछे जाने पर सन्त पापा ने कहा, “इस यात्रा से सहयोग और संवाद का नया रास्ता खुला है जिसपर धैर्यपूर्वक आगे बढ़ते रहना अनिवार्य है।”

सन्त पापा ने कहा कि यह स्पष्ट हो गया है मार्क्सवादी विचारधारा वास्तविकता का जवाब देने में समर्थ नहीं रही है इसलिये धैर्य के साथ नवीन आदर्शों की खोज अनिवार्य है।

लेओनः मेक्सिको में सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें का स्वागत

In Church on March 25, 2012 at 7:07 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

लेओन, 24 मार्च सन् 2012 (सेदोक): “बेनवेनिदो आल कोराज़ोन दे मेस्सिको”, “मेक्सिको के हृदय में आपका हार्दिक स्वागत”, इन शब्दों से शुक्रवार सन्ध्या मेक्सिको ने देश में काथलिक कलीसिया के परमाध्यक्ष सन्त पापा बेनेडिक्ट 16वें का भावपूर्ण स्वागत किया।

सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें इस समय मेक्सिको की प्रेरितिक यात्रा पर हैं। रोम से 14 घण्टों की यात्रा पूरी कर सन्त पापा शुक्रवार सन्ध्या मेक्सिको के लेओन शहर पहुँचे। रोम तथा मेक्सिको में लगभग सात घण्टों का अन्तर है।

रोम से लेओन तक की लम्बी विमान यात्रा तथा सात घण्टों के समयान्तर को ध्यान में रखकर ही 85 वर्षीय सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें के प्रथम दो दिनों के कार्यक्रमों को कुछ हल्का रखा गया था। इटली से फ्राँस, यू.के., आयरलैण्ड, डेनमार्क, ग्रीनलैण्ड, कनाडा तथा उत्तरी अमरीका से होते हुए, शुक्रवार को सन्त पापा, मेक्सिको समयानुसार, सन्ध्या साढ़े चार बजे लेओन शहर के ग्वानाहुआतो अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुँचे।

विमान के उतरते ही सारा वातावरण करतल ध्वनि एवं जयनारों से गूँज उठा। प्रशंसकों ने वाटिकन एवं मेक्सिको के धवजों को फहराकर अपने खास अतिथि के प्रति सम्मान का प्रदर्शन किया। मेक्सिको में कार्यरत परमधर्मपीठ के राजदूत महाधर्माध्यक्ष क्रिस्टोफ पियेर तथा नयाचार अध्यक्ष ने विमान पर जाकर सन्त पापा का अभिवादन किया।

विमान की सीढ़ी के नीचे मेक्सिको के राष्ट्रपति फिलिप दे येसुस कालदेरॉन एवं उनकी धर्मपत्नी तथा लेओन के महाधर्माध्यक्ष होसे ग्वादालूपे मार्टिन राबागो सहित अनेकानेक वरिष्ठ सरकारी एवं कलीसियाई अधिकारियों की उपस्थिति में, लगभग साढ़े तीन हज़ार प्रशंसकों के जयनारों तथा गिरजाघरों के घण्टों का आवाज़ ने मेक्सिको में खास मेहमान के आगमन की सूचना विश्व को दी।

वाटिकन तथा मेक्सिको के राष्ट्रीय गीतों की धुनें बजाई गई तथा सैन्य शानोशौकत के साथ सार्वभौमिक काथलिक कलीसिया तथा वाटिकन के राष्ट्राध्यक्ष के प्रति सम्मान का प्रदर्शन किया गया।

राष्ट्रपति कालदेरॉन ने सन्त पापा के आदर में अभिवादन पत्र पढ़ा तथा मेक्सिको की भूमि को अपने चरणों से कृतार्थ करने के लिये उनका शत् शत् धन्यवाद किया।

राष्ट्रपति ने स्मरण दिलाया कि मेक्सिको विश्व के सर्वाधिक विशाल काथलिक देशों में से एक है। उन्होंने कहा कि विगत शताब्दी में, राज्य के साथ संघर्ष के इतिहास के बावजूद मरियम भक्ति, सार्वभौमिक काथलिक कलीसिया एवं उसके परमाध्यक्ष के प्रति निष्ठा तथा मानवाधिकारों की रक्षा के लिये मेक्सिको की कलीसिया सराही जाती है।

जहाँ तक धर्म सम्बन्धी प्रश्नों का मुद्दा है, ऐतिहासिक तौर पर मेक्सिको कई गुटों में बँटा है। सन् 1910 की काँन्ति मुख्यतः कलीसिया के पुरोहित वर्ग के विरुद्ध थी तथा सन् 1917 ई. के संविधान में धर्मशिक्षा प्रदान करना तथा सार्वजनिक स्थलों में याजकीय परिधान धारण करना भी वर्जित कर दिया गया था। इन प्रतिबन्धों ने ही क्रिस्तेरो काँन्ति को जन्म दिया था जब सरकारी सुरक्षा बलों तथा काथलिक विद्रोहियों की लड़ाई में कम से कम 90,000 मारे गये थे।

काथलिक धर्मानुयायी हैं। पाँच प्रतिशत प्रॉटेस्टेन्ट ख्रीस्तीय तथा 3 प्रतिशत नास्तिक हैं। 1520 ई. से मेक्सिको स्पेन के अधीन रहा था। दो सौ वर्ष पूर्व उसने स्वतंत्रता प्राप्त की थी।

दूसरी ओर एटलांटिक महासागर तथा मेक्सिको की खाड़ी के बीच स्थित क्यूबा द्वीप की कुल आबादी एक करोड़ 12 लाख 42 हज़ार है जिनमें 60 प्रतिशत काथलिक धर्मानुयायी हैं। सन् 1959 ई. में फिदेल कास्त्रो के नेतृत्व में हुई क्यूबा की क्रान्ति के बाद से देश साम्यवादी शासन के अधीन रहा है। 26 तथा 27 मार्च को सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें क्यूबा के सान्तियागो दे क्यूबा तथा हवाना शहरों की दो दिवसीय प्रेरितिक यात्रा करेंगे।

सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 मेक्सिको में

In Church on March 25, 2012 at 7:07 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

वाटिकन सिटी, 24 मार्च सन् 2012 (सेदोक): काथलिक कलीसिया के परमधर्मगुरु सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें, 23 से 28 मार्च तक, मेक्सिको एवं क्यूबा की प्रेरितिक यात्रा पर हैं। शुक्रवार, 23 मार्च को, रोम समयानुसार प्रातः साढ़े नौ बजे, फ्यूमिचीनो अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से मेक्सिको के लेओन शहर के लिये, सन्त पापा, रवाना हुए थे। मेक्सिको तथा क्यूबा की छः दिवसीय यात्रा सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें की 23 वीं विदेश यात्रा है। इन दोनों ही राष्ट्रों में यह यात्रा सन्त पापा की पहली प्रेरितिक यात्रा है। 25 मार्च तक सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें मेक्सिको में रहेंगे तथा 26 एवं 27 मार्च को क्यूबा की प्रेरितिक यात्रा कर 28 मार्च को पुनः रोम लौटेंगे।

अपने सात वर्षीय परमाध्यक्षीय काल में सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें पहली बार लातीनी अमरीका के स्पानी भाषी देशों की यात्रा कर रहे हैं। उत्तर में अमरीका, दक्षिण-पूर्व में बेलीज़ एवं ग्वाटेमाला की सीमा से लगा तथा पूर्व एवं पश्चिम में एटलांटिक तथा प्रशान्त सागरों को देखता हुआ, मेक्सिको, लातीनी अमरीका का सर्वाधिक विशाल स्पानी भाषी काथलिक बहुल देश है। देश की कुल आबादी 10 करोड़, 84 लाख, 26,000 है जिसमें 92 प्रतिशत काथलिक धर्मानुयायी हैं। पाँच प्रतिशत प्रॉटेस्टेन्ट ख्रीस्तीय तथा 3 प्रतिशत नास्तिक हैं। 1520 ई. से मेक्सिको स्पेन के अधीन रहा था। दो सौ वर्ष पूर्व उसने स्वतंत्रता प्राप्त की थी।

दूसरी ओर एटलांटिक महासागर तथा मेक्सिको की खाड़ी के बीच स्थित क्यूबा द्वीप की कुल आबादी एक करोड़ 12 लाख 42 हज़ार है जिनमें 60 प्रतिशत काथलिक धर्मानुयायी हैं। सन् 1959 ई. में फिदेल कास्त्रो के नेतृत्व में हुई क्यूबा की क्रान्ति के बाद से देश साम्यवादी शासन के अधीन रहा है। 26 तथा 27 मार्च को सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें क्यूबा के सान्तियागो दे क्यूबा तथा हवाना शहरों की दो दिवसीय प्रेरितिक यात्रा करेंगे।

%d bloggers like this: