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ग्वानाहुआतो हवाई अडडे पर मेक्सिको के नागरिकों के लिए संत पापा का संबोधन

In Church, Journey on March 25, 2012 at 7:09 am

जोसेफ कमल बाड़ा

लेओन 24 मार्च 2012 ( सेदोक) मेक्सिको के लेओन शहर में ग्वानाहुआतो अंतरराष्ट्रीय हवाई अडडे में आयोजित स्वागत समारोह के दौरान संत पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने मेक्सिको के राष्ट्रपति, धर्माध्यक्षों, विशिष्ट प्रशासनिक अधिकारियो और गुवानाहुआतो तथा मेक्सिको की प्रिय लोगो को सम्बोधित करते हुए कहा कि यहाँ होने पर वे बहुत आनन्दित हैं।

वे ईश्वर को धन्यवाद देते हैं कि उन्होंने इस इच्छा को साकार करने की उन्हें अनुमति प्रदान की जो बहुत समय से उनके दिल में थी कि इस महान राष्ट्र की भूमि में ईश प्रजा को विश्वास में सुदृढ़ करें।

संत पापा ने कहा कि मेक्सिको की जनता का स्नेह जो संत पेत्रुस के उत्तराधिकारी के लिए है और जिसे वे हमेशा अपनी प्रार्थना में याद करते हैं, वह विख्यात है। वे इस बात को यहाँ कहते हैं जिसे उनके पूर्वाधिकारी धन्य जोन पौल द्वितीय अपनी पहली प्रेरितिक यात्रा के समय इस स्थल का दर्शन करना चाहते थे।

यद्यपि वे उस समय नहीं आ सके लेकिन उन्होंने (30 जनवरी 1979) यहाँ के हवाई क्षेत्र से उडान भरते हुए यहाँ के निवासियों के लिए कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उत्साह का संदेश भेजा था।

संत पापा ने कहा कि मेक्सिको और लातिनी अमरीका के अधिकाँश देश हाल के वर्षों में अपनी आजादी की दूसरी शताब्दी का समारोह मना रहे हैं। इस महत्वपूर्ण और सार्थक क्षण के लिए ईश्वर को धन्यवाद देने के लिए अनेक धार्मिक समारोहों का आयोजन किया जा रहा है।

ग्वादालुपे की माता मरियम, हमारी स्वर्गीय माता ने इन देशों के निर्माण के लिए अपनी संतान के विश्वास प्रशिक्षण पर दृष्टि रखी है।

संत पापा ने कहा कि वे विश्वास, आशा और प्यार के तीर्थयात्री रूप में यहां आये हैं। वे उन लोगों को विश्वास में सुदृढ़ करना चाहते हैं जो ख्रीस्त में विश्वास करते हैं ताकि वे ईश वचन को सुनकर तथा संस्कारों को ग्रहण कर अपने विश्वास में मजबूत हों और नवीकृत हों। और इस तरह वे अपने विश्वास को दूसरों के साथ बाँटते हुए समाज में खमीर के समान काम करते हुए हर व्यक्ति की प्रतिष्ठा के आधार पर मर्यादापूर्ण और शांतिमय सहअस्तित्व के लिए योगदान देंगे।

संत पापा ने कहा कि इस देश और सम्पूर्ण महाद्वीप के लोगों का आह्वान किया जाता है कि वे ईश्वर पर अपनी आशा को गहन दृढ़ता के साथ जीयें। इसे दिल की मनोवृत्ति और व्यवहारिक समर्पण में परिणत कर बेहतर दुनिया बनाने के लिए एक साथ चलें। आशा और विश्वास के साथ मसीही विश्वासी वस्तुतः सम्पूर्ण कलीसिया अपने मिशन के अपरिहार्य तत्व के रूप में परोपकार को जीती और अभ्यास करती है।

संत पापा ने कहा कि वे इन दिनों में प्रभु से तथा ग्वादालुपे की माता मरिया से सबके लिए प्रार्थना करेंगे ताकि वे अपने विश्वास के प्रति निष्ठावान बने रहें जिसे उन्होंने पाया है। वे विशेष रूप से पुरानी तथा नयी रंजिश, नफरत तथा हर प्रकार की हिंसा के कारण पीड़ा सह रहे लोगों तथा जरूरतमंदों के लिए प्रार्थना करेंगे। वे जानते हैं कि वे ऐसे देश में हैं जिसे अपने आतिथ्य सत्कार पर गर्व है तथा जो हर किसी का स्वागत करता है। वे इसे जानते हैं, देख सकते हैं और अपने दिल में महसूस कर रहे हैं।

संत पापा ने कहा उनकी आशा है कि मातृभूमि से दूर रह रहे अनेक मेक्सिको वासी भी इसी मनोभाव को महसूस करते हैं तथा कोई भी वजह उन्हें इसे भूलने न दे और यह सौहार्द तथा यथार्थ आंतरिक विकास में बढ़े।

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