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पत्रकारों से सन्त पापा ने कहा कलीसिया कोई राजनैतिक सत्ता अथवा पार्टी नहीं

In Church, Journey on March 25, 2012 at 7:08 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

वाटिकन सिटी, 24 मार्च सन् 2012 (सेदोक): रोम से मेक्सिको की यात्रा के दौरान शुक्रवार को पत्रकारों के प्रश्नों का त्तर देते हुए सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने कहा कि कलीसिया न तो कोई राजनैतिक सत्ता है और न ही कोई राजनैतिक पार्टी।

स्पानी उपनिवेशियों से स्वतंत्रता पाने की दूसरी शताब्दी मना रहे लातीनी अमरीका के सन्दर्भ में सन्त पापा ने कहा, “यह स्वभाविक है कि कलीसिया को सदैव स्वतः से यह पूछना चाहिये कि क्या इस विशाल महाद्वीप पर सामाजिक न्याय की बहाली के लिये पर्याप्त प्रयास किये गये जा रहे हैं अथवा नहीं? इसलिये कि कलीसिया कोई राजनैतिक सत्ता अथवा राजनैतिक पार्टी नहीं है अपितु एक नैतिक वास्तविकता तथा नैतिक शक्ति है।”

मेक्सिको और क्यूबा की छः दिवसीय यात्रा करते हुए सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें को कैसा लग रहा था इस सवाल के जवाब में सन्त पापा ने कहा, “यह मेरे लिये हर्ष का विषय है क्योंकि यह उस अभिलाषा का उत्तर है जिसे मैं अपने मन में लम्बे समय से संजोए हुए था।”

अपने हृदय की भावनाओं का वर्णन करते हुए सन्त पापा ने कहा, “द्वितीय वाटिकन महासभा के शब्द मेरे मन में आते हैं: गाओदियुम एत स्पेस, लुकतुस एत आंगोर – आनन्द और आशा किन्तु दुख एवं व्यग्रता भी।” सन्त पापा ने कहा कि वे मेक्सिको एवं क्यूबा के आनन्द में शरीक होते हुए इन राष्ट्रों की कठिनाइयों में भी उनके साथ हैं। उन्होंने कहा कि काथलिक विश्वासियों में आशा का संचार करना तथा बुराई के खिलाफ संघर्ष हेतु उनके संकल्प को मज़बूत करना उनका मिशन है।

मेक्सिको में नशीले पदार्थों की तस्करी तथा मादक पदार्थों सम्बन्धी हिंसा को कम करने के लिये काथलिक कलीसिया की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर सन्त पापा ने कहा, “मेक्सिको के सौन्दर्य से हम भलीभाँति परिचित हैं किन्तु साथ ही मादक पदार्थों सम्बन्धी भारी समस्याओं से भी वाकिफ़ हैं।

निश्चित्त रूप से इसमें काथलिक कलीसिया की बड़ी ज़िम्मेदारी है क्योंकि मेक्सिको के 90 प्रतिशत लोग काथलिक धर्मानुयायी हैं। मानवजाति तथा, विशेष रूप से, युवाओं का विनाश करनेवाली इस बुराई के विरुद्ध संघर्ष को जारी रखने के लिये हम कृतसंकल्प हैं।”

सन्त पापा ने कहा कि इस कार्य में सबसे पहला कार्य लोगों में ईश प्रेम की चेतना जाग्रत करना है क्योंकि इसी से लोग सत्य की ओर अग्रसर होंगे तथा बुराई का बहिष्कार करने का सम्बल प्राप्त करेंगे।

न्होंने कहा कि कलीसिया की ज़िम्मेदारी है कि वह अन्तःकरणों को शिक्षित करे तथा समाज से झूठे वादों, धन की पूजा एवं बुराई के नकाब को हटाये।

क्यूबा के विषय में पूछे जाने पर सन्त पापा ने कहा, “इस यात्रा से सहयोग और संवाद का नया रास्ता खुला है जिसपर धैर्यपूर्वक आगे बढ़ते रहना अनिवार्य है।”

सन्त पापा ने कहा कि यह स्पष्ट हो गया है मार्क्सवादी विचारधारा वास्तविकता का जवाब देने में समर्थ नहीं रही है इसलिये धैर्य के साथ नवीन आदर्शों की खोज अनिवार्य है।

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