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देवदूत संदेश प्रार्थना का पाठ करने से पूर्व संत पापा द्वारा दिया गया संदेश

In Church on March 27, 2012 at 9:44 pm

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

लेओन मेक्सिको 26 मार्च 2012 ( सेदोक) संत पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने लेओन स्थित बायसेन्टिनल पार्क में रविवार 25 मार्च को आयोजित भव्य ख्रीस्तयाग समारोह के बाद देवदूत संदेश प्रार्थना का पाठ करने से पूर्व विश्वासियों को स्पानी भाषा में सम्बोधित करते हुए कहा-

मेरे प्रिय भाईयो और बहनो, आज के सुसमाचार में येसु गेहूँ के दाना के बारे में कहते हैं जो जमीन पर गिरकर मर जाता तथा बहुत फल उत्पन्न करता है। यह उनका जवाब है कुछ यूनानियों के लिए जो फिलिप के पास आये और बोले कि हम येसु को देखना चाहते हैं।

आज हम कुंवारी माता मरिया से याचना करते हैं कि हमें येसु को दिखायें। हमारी दृष्टि आध्यात्मिक रूप से तेपेयाक पहाड़ी की और जाती हैं जहाँ मेलमिलाप के प्रतीक और संसार के लिए ईश्वर की असीम भलाई के प्रतीक रूप में अवर लेडी औफ ग्वादालुपे शीर्षक के तहत ईश माता की सदियों से आराधना और वंदना की जाती है।

मेरे पूर्वाधिकारी ने उन्हें अवर लेडी ओफ मेक्सिको तथा लातिनी अमरीका की स्वर्गीय संरक्षिका, महाद्वीप की माता और साम्राज्ञी जैसी उपाधियों से सम्मानित किया। उनके निष्ठावान संतान जो उनकी सहायता को अनुभव करते हैं उन्हें स्नेह और विश्वासपूर्वक मेक्सिको का गुलाब, स्वर्ग की रानी, कुँवारी मोरेना, तेपायाक की मदर, नोबेल इनदिता जैसे सम्बोधन से पुकारते हैं। Read the rest of this entry »

लेओन में आयोजित यूखरिस्तीय समारोह में संत पापा का प्रवचन

In Church, Journey on March 27, 2012 at 9:43 pm

जस्टिन तिर्की, ये.स.

मेरे अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, मुझे खुशी है कि मैं आज आप लोगों के बीच हूँ। मैं आप लोगों का ध्यान आज के भजन स्तोत्र की ओर खींचना चाहता हूँ जिसमें हमने कहा, “हे ईश्वर मेरे ह्रदय को पवित्र बना।” यह हमें आमंत्रित करता है हम पास्का रहस्य अर्थात् येसु के दुःखभोग,मृत्यु और पुनरुत्थान को समझने के लिये अपने को तैयार करें।

स्तोत्र भजन हमें इस बात के लिये भी आमंत्रित करता है कि हम अपने ह्रदय में झाँक कर देखें विशेष करके ऐसे समय में जब मेक्सिको और पूरे लैटिन अमेरिका में दुःख किन्तु आशा का माहौल है।
ईश्वर की चुनी हुई इस्राएली प्रजा में भी पवित्र, ईमानदार, नम्र और ईश्वर को ग्राह्य होने की इच्छा तब तीव्र हो गयी थी जब उसने अपने आपको पाप और बुराइयों के बीच ऐसा फँसा पाया जहाँ से निकल पाना बिल्कुल असंभव था। ऐसे समय में ईश्वर की चुनी हुई प्रजा के समक्ष असहनीय, अंधकारमय आशाविहीन स्थिति से निकलने के लिये ईश्वर की दया पर पूर्ण भरोसा और आशा करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था। और ऐसे ही समय में उन्होंने यह अनुभव किया कि ईश्वर की महत्ती दया अपार है जो पापी की मृत्यु नहीं, पर उसका पश्चात्ताप और जीवन चाहती है। (एजेकियेल 33,11) Read the rest of this entry »

लेओनः क्यूबा में सान्तियागो दे क्यूबा तथा हवाना सन्त पापा की यात्रा के पड़ाव

In Church, Journey on March 27, 2012 at 9:43 pm

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

लेओनः 26 मार्च सन् 2012 (सेदोक): मेक्सिको की तीन दिवसीय प्रेरितिक यात्रा सफलतापूर्वक समाप्त कर सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें सोमवार सन्ध्या क्यूबा के लिये रवाना हो रहे हैं। यहाँ सान्तियागो दे क्यूबा तथा हवाना शहरों का दौरा कर 28 मार्च को वे पुनः रोम लौट रहे हैं।

क्यूबा में एक ओर सामान्य जनता सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें के आगमन की आतुरता से प्रतीक्षा कर रही है वहीं दूसरी ओर उनकी इस यात्रा को राजनैतिक रंग भी चढ़ाया जा रहा है।

क्यूबा की एक मात्र साम्यवादी पार्टी द्वारा गठित सरकार ने कभी भी धर्म को अवैध घोषित नहीं किया किन्तु सन् 1959 ई. में फिदेल कास्त्रो के सत्ता में आ जाने के बाद से सैकड़ों पुरोहितों को देश से निष्कासित कर दिया तथा काथलिक स्कूलों में धर्मशिक्षा पर प्रतिबन्ध लगा दिये थे।

धन्य सन्त पापा जॉन पौल द्वितीय के प्रयासों के परिणामस्वरूप नब्बे के दशक से काथलिक कलीसिया के प्रति सरकार का रुख कुछ नम्र हुआ किन्तु अभी भी तनाव व्याप्त हैं। 14 वर्ष पूर्व सन्त पापा जॉन पौल द्वितीय ने क्यूबा की यात्रा की थी।

सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें की यह पहली क्यूबा यात्रा है।

लेओनः लेओन के महागिरजाघर में धर्माध्यक्षों के साथ सान्ध्य वन्दना

In Church on March 27, 2012 at 9:42 pm

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

लेओनः 26 मार्च सन् 2012 (सेदोक): मेक्सिको के लेओन शहर स्थित प्रकाश की माता मरियम को समर्पित महागिरजाघर में, रविवार, 25 मार्च को सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने मेक्सिको तथा लातीनी अमरीका के धर्माध्यक्षों के साथ सान्ध्य वन्दना का पाठ किया।

मरियम को समर्पित लेओन के महागिरजाघर की आधार शिला येसु धर्मसमाजी पुरोहितों द्वारा सन् 1746 ई. में रखी गई थी किन्तु स्पानी शासकों द्वारा येसु धर्मसमाजियों को देश से निष्कासित कर दिये जाने के कारण महागिरजाघर के निर्माण का कार्य 19 वीं शताब्दी तक रुक गया था। इसके बाद सन् 1902 ई. में ही इसका निर्माण पूरा हो सका। महागिरजाघर में 500 श्रद्धालुओं की व्यवस्था है।

मेक्सिको की स्वतंत्रता की दूसरी शताब्दी मनाने हेतु एकत्र मेक्सिको तथा लातीनी अमरीकी देशों के लगभग 130 काथलिक धर्माध्यक्षों ने सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें के नेतृत्व में सान्ध्य वन्दना का पाठ किया।

लेओनः मेक्सिकी धर्माध्यक्ष ने तस्करों का किया खण्डन

In Church on March 27, 2012 at 9:41 pm

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

लेओनः 26 मार्च सन् 2012 (सेदोक): लेओन के बायसेन्टिनल पार्क में रविवार को यहाँ के महाधर्माध्यक्ष होसे मार्टिन राबागो ने भक्त समुदाय की ओर से सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें का अभिवादन किया।

इस अवसर पर उन्होंने मेक्सिको की पीड़ाओं को परिभाषित किया जो मादक पदार्थों के तस्करों तथा सरकार के बीच चल रहे झगड़ों से जूझ रहा है। विगत पाँच वर्षों में, इन झगड़ों के कारण, कम से कम पचास हज़ार लोगों की जानें गई हैं।

सन्त पापा के आदर में अभिवादन पत्र पढ़ते हुए महाधर्माध्यक्ष राबागो ने कहा, “हम हिंसा और मौत की घटनाओं को देखते हुए जीवन यापन कर रहे हैं जिसने हममें भय, निस्सहायता एवं शोक के भावों को उत्पन्न कर दिया है।” मेक्सिको की समस्याओं की भ्रष्ट जड़ों की उन्होंने निन्दा की और कहा कि मेक्सिको की प्रमुख समस्याएँ हैं निर्धनता, अवसरों का अभाव, दण्डाभाव, अन्याय तथा कुछेक लोगों की मिथ्या धारणा कि जीवन का लक्ष्य केवल सम्पत्ति एवं सत्ता बटोरना है।

महाधर्माध्यक्ष राबागो ने सन्त पापा से कहा, “मेक्सिको की अधिकांश जनता मृत्यु के रास्ते पर नहीं चलना चाहती, वह शान्ति में जीवन यापन करना चाहती है।”

लेयोन के बायसेन्टीनल पार्क में अर्पित ख्रीस्तयाग में सन्त पापा के साथ 250 कार्डिनलों, लातीनी अमरीकी देशों के 22 धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों के अनेकानेक धर्माध्यक्षों तथा लगभग तीन हज़ार पुरोहितों ने भाग लिया। इस अवसर पर 60 संगीतज्ञों एवं 200 गायकों के गायक मण्डल ने धर्मविधिक गीतों से ख्रीस्तयाग समारोह को अनुप्राणित किया।

लेओनः मेक्सिको में सन्त पापा ने दिया आशा का सन्देश

In Church on March 27, 2012 at 9:41 pm

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

लेओनः 26 मार्च सन् 2012 (सेदोक): मेक्सिको के लेओन शहर स्थित विशाल बायसेन्टिनल पार्क में रविवार को सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने ख्रीस्तयाग अर्पित किया जिसमें लगभग पाँच लाख श्रद्धालु उपस्थित हुए। शुक्रवार को रोम से मेक्सिको और क्यूबा में अपनी छः दिवसीय प्रेरितिक यात्रा के लिये रवाना हुए, काथलिक कलीसिया के परमधर्मगुरु, सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें मेक्सिको में अपनी तीन दिवसीय प्रेरितिक यात्रा पूरी कर सोमवार अपरान्ह क्यूबा के लिये रवाना हो रहे हैं।

रविवार, 25 मार्च को, मेक्सिको में काथलिक धर्म के सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रतीक, ख्रीस्त राजा की विशाल प्रतिमा, की छत्र छाया में विस्तृत लेओन के विशाल बायसेन्टिनल पार्क में एक दिन पहले से भक्तों का आना शुरु हो गया था। कईयों ने रात वहीं बताई ताकि रविवार प्रातः के ख्रीस्तयाग में जगह मिल सके। लगभग पाँच लाख विश्वासियों से भरा बायसेन्टिनल पार्क उस समय तालियों की गड़गड़ाहट और बैण्ड बाजों की ध्वनि से गूँज उठा जब सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें को लाने वाले मेक्सिकी सेना के हेलीकॉप्टर ने पार्क के ओर छोर चक्कर लगाये। उत्साह एवं हर्षोल्लास के साथ भक्त समुदाय ने अपने बीच काथलिक कलीसिया के परमाध्यक्ष का हार्दिक स्वागत किया।

पार्क के द्वार पर सन्त पापा अपनी पारदर्शी मोटर गाड़ी पर सवार हुए ताकि उत्साही भक्तों को दर्शन दे सकें। बीच में किसी ने सन्त पापा को मेक्सिको की सोमब्रेरो टोपी प्रदान की जिसे पहन कर उन्होंने मेक्सिको की जनता के प्रति स्नेह और सम्मान का प्रदर्शन किया। लेओन में जीन्स की एक फेक्टरी की मालिकन 50 वर्षीय लोरेना डायज़ ने कहा, “हम उनके लिये प्रार्थना करते हैं ताकि वे हमारी मदद कर सकें, ताकि हमारे देश से हिंसा समाप्त हो। हम प्रार्थना करते हैं कि वे हमें शांति दिलायें।”

पत्रकारों से बातचीत में वाटिकन के प्रवक्ता फादर फेदरीको लोमबारदी ने कहा कि सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें, विशेष तौर पर, गुआनाहुआतो आना चाहते थे ताकि ख्रीस्त राजा की उस प्रतिमा को देख सकें तथा आशीर्वाद दें सकें जिसके दर्शन की चाह धन्य सन्त पापा जॉन द्वितीय के मन में सदैव बनी रही किन्तु जिसे वे देख नहीं पाये थे।

72 फुट ऊँची, बाँहें फैलाये ख्रीस्त राजा की ताम्ब्र प्रतिमा, मेक्सिको के लोगों के लिये, सन् 1926 से 1929 ई. तक सरकार तथा उसके याजकवर्ग विरोधी कानूनों के विरुद्ध चली, रोमी काथलिक कलीसिया की क्राँन्ति की याद का एक शक्तिशाली स्मारक है।

ख्रीस्त राजा की विशाल प्रतिमा के विषय में मेक्सिकी काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के महासचिव महाधर्माध्यक्ष विक्टर रॉडरिग्ज़ ने कहा, “यह प्रतिमा मेक्सिकी लोगों की पहचान है, यह उनकी अस्मिता को अभिव्यक्ति प्रदान करती है, इसमें विश्वास का साक्ष्य प्रदान करनेवालों तथा धार्मिक स्वतंत्रता के लिये मर मिटनेवालों का इतिहास समाहित है।”

बायसेन्टिनल पार्क में सन्त पापा के आगमन से पूर्व मेटल डिटेक्टर को पार करने के लिये खड़े, श्वेत और श्याम परिधान धारण किये, सैकड़ों युवा पुरोहित क्रिस्तेरो क्राँन्ति के विख्यात नारे लगाते रहेः “ख्रीस्त जीवित हैं, ख्रीस्तराजा ज़िन्दाबाद”।

20 वीं शताब्दी के आरम्भ में कलीसिया एवं याजकों पर लगे प्रतिबन्धों के तहत विशाल मैदानों एवं चौकों में सार्वजनिक स्तर पर ख्रीस्तयाग अर्पित करना अथवा किसी भी प्रकार के धार्मिक समारोह का आयोजन करना वर्जित था। रविवार को क्रान्ति के इसी स्थल पर सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने पाँच लाख लोगों के लिये ख्रीस्तयाग अर्पित किया मानों इस तथ्य की पुष्टि कर रहे हों कि प्रभु ईश्वर के प्रेम एवं उनकी दया के आगे मानवीय अहंकार से उत्पन्न बड़ी से बड़ी विचारधाराएँ धराशायी हो जाती हैं।

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