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पियात्सा माचेओ में आयोजित ख्रीस्तयाग के दौरान संत पापा का प्रवचन

In Church, Journey on March 28, 2012 at 6:17 am

जोसेफ कमल बाड़ा

पियात्सा माचेओ सांतियागो दे क्यूबा 27 मार्च 2012 (सेदोक) संत पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने 26 मार्च को सांतियागो दे क्यूबा के पियात्सा माचेओ में आयोजित समारोही ख्रीस्तयाग के दौरान प्रवचन करते हुए कहा कि वे ईश्वर को धन्यवाद देते हैं जिन्होंने उन्हें यहाँ आने तथा बहुप्रतीक्षित यात्रा को सम्पन्न करने की अनुमति प्रदान की।

संत पापा ने कहा कि इस देश की प्रेरितिक यात्रा करते समय यह पहला ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए उन्हें खुशी है जो इस भूमि में मरियम प्रतिमा की खोज की 400 वीं वर्षगाँठ के अवसर पर क्यूबा की संरक्षिका अवर लेडी ओफ चारिटी ऑफ एल कोब्रे के सम्मान में मरियम जुबिली के तहत अर्पित की जा रही है। वे जुबिली की तैयारी, विशेष रूप से आध्यात्मिक तैयारी के लिए किये गये बलिदान और समर्पण को नहीं भूल सकते हैं।

इस द्वीप के हर भाग में मरिया प्रतिमा ले जायी गयी और जिस तत्परता से लोगों ने इसका स्वागत किया गया इसने उनके दिल को गहरे रूप से स्पर्श किया है।

क्यूबा के चर्च में इन महत्वपूर्ण घटनाओं का विशेष आकर्षण है क्योंकि आज पूरे विश्व में स्वर्गदूत गाब्रियल द्वारा कुँवारी माता मरियम को प्रभु के जन्म का संदेश दिये जाने का पर्व मनाया गया।

संत पापा ने कहा कि ईशपुत्र का देहधारण करना ईसाई विश्वास का केन्द्रीय रहस्य है और इसमें मरियम को केन्द्रीय स्थान प्राप्त है।

देहधारण के रहस्य पर मनन चिंतन करते हुए हम आश्चर्य कृतज्ञता और प्रेम भाव से भर जाते हैं कि इस दुनिया में आते हुए ईश्वर चाहते हैं कि अपनी एक सृष्टि की स्वतंत्र स्वीकृति पर निर्भर हों। स्वर्गदूत को कुँवारी द्वारा यह जवाब दिये जाने के क्षण से ही देखिए मैं प्रभु की दासी हूँ आपक कथन मुझ में पूरा हो जाये।

पिता ईश्वर के अनन्त शब्द ने मानवीय अस्तित्व धारण किया। यह देखना ह्दय को स्पर्श करता है कि ईश्वर न केवल मानव की स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि उन्हें मानव की जरूरत है। और ईशपुत्र का पार्थिव जीवन के आरम्भ होने में पिता ईश्वर की मुक्तिदायी योजना में ख्रीस्त और मरिया की स्वीकृति है। ईश्वर के प्रति यह आज्ञाकारिता ही दुनिया के द्वार को सत्य और मुक्ति के लिए खोलती है।

संत पापा ने कहा कि ख्रीस्त के रहस्य में अपनी अद्वितीय भूमिका के द्वारा कुँवारी माता मरियम कलीसिया के लिए माडल और उदाहरण को प्रस्तुत करती है। वे जानते हैं कि क्यूबावासी प्रतिदिन बहुत मेहनत, साहस और आत्म बलिदान द्वारा देश की ठोस परिस्थितियों में काम करते हैं और इतिहास के इस क्षण में कलीसिया अपना सही चेहरा बेहतर तरीके से प्रस्तुत करेगी जो मानवजाति को ईश्वर के समीप लाती है।

संत पापा ने कहा कि इस दुनिया में ईश वचन का प्रसार करने तथा येसु के शरीर द्वारा प्रत्येक जन को पोषण प्रदान करके लिए वे सबको प्रोत्साहन देते हैं।

पास्का पर्व समीप आ रहा है, बिना किसी डर या संदेह के येसु के क्रूस पथ पर चलने के लिए हम मनसूबा बांधें। धैर्य और विश्वासपूर्वक हर विरोध का सामना करें। प्रभु लोगों के उदारतापूर्ण समर्पण के लिए बहुत फल प्रदान करेंगे।

संत पापा ने कहा कि देहधारण का रहस्य जिसमें ईश्वर हमें अपने समीप लाते हैं और हमें हर मानव जीवन की अतुलनीय प्रतिष्ठा को दिखाते हैं।

उन्होंने सृष्टि के आरम्भ से ही विवाह पर आधारित मानव परिवार को समाज की बुनियादी ईकाई और यथार्थ घरेलू चर्च बनने का मिशन सौंपा है। वे दम्पतियो से कलीसिया के लिए ख्रीस्त के प्यार का सच्चा और प्रत्यक्ष चिह्न बनने का आह्वान करते हैं।

क्यूबा को आपकी निष्ठा, एकता और मानव जीवन का स्वागत करने की क्षमता का साक्ष्य की जरूरत है।

संत पापा ने कहा कि अवर लेडी ऑफ चारिटी ऑफ एल कोब्रे की दृष्टि में अपने विश्वास को नवीकृत करने की वे विश्वासियों से अपील करते हैं ताकि वे ख्रीस्त में और ख्रीस्त के लिए जीवन जीयें, शांति, क्षमा और समझदारी के साथ नवीन और खुला समाज बनाने का प्रयास करें जो ईश्वर की भलाई को बेहतर तरीके से प्रतिबिम्बित करता है।

सांतियागो दे क्यूबा हवाई अडडे में संत पापा का स्वागत संबोधन

In Church on March 28, 2012 at 6:15 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

सांतियागो दे क्यूबा 27 मार्च 2012 (सेदोक) संत पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने सांतियागो दे क्यूबा स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अडडे में 26 मार्च को आयोजित स्वागत समारोह के दौरान क्यूबा के राष्ट्रपति राऊल कास्त्रो, कार्डिनलों और धर्माध्यक्षों, प्रशासनिक अधिकारियों, विशिष्ट नागरिकों और समस्त देशवासियों का हार्दिक अभिवादन किया।

उन्होंने कहा कि क्यूबा की सरकार और जनता की ओर से संत पेत्रुस के उत्तराधिकारी के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए वे राष्ट्रपति महोदय के स्वागत सम्बोधन के लिए धन्यवाद देते हैं।

यहाँ खडे होते हुए वे अपने पूर्वाधिकारी धन्य जोन पौल द्वितीय की ऐतिहासिक क्यूबा यात्रा का स्मरण कराते हैं जिसने क्यूबावासियों की आत्मा में गहन छाप छोड़ी थी। उनकी इस द्वीप की यात्रा मंद हवा के समान थी जिसने क्यूबा की कलीसिया में नवीन शक्ति का संचार किया था।

विश्वास के महत्व के प्रति नवीन जागरूकता जगा कर लोगों को ख्रीस्त के लिए अपने दिल के दरवाजों को खोलने के लिए प्रेरणा प्रदान किया था तथा आशा प्रदान कर बेहतर भविष्य के लिए निर्भयतापूर्वक काम करने की इच्छा को प्रोत्साहन प्रदान किया था।

उनकी प्रेरितिक यात्रा का एक फल था कि क्यूबा में राज्य और कलीसिया के मध्य संबंध का एक नया चरण सहयोग और भरोसा की भावना में आरम्भ हुआ यद्यपि कुछ क्षेत्र हैं जहाँ और अधिक प्रगति किये जाने की जरूरत है विशेष रूप से समाज के जीवन में धर्म अपना विशिष्ट योगदान दे सके।

संत पापा ने केहा कि अवर लेडी ओफ चारिटी ओफ एल कोब्रे की पवित्र मूर्ति की खोज की 400 वीं वर्षगाँठ समारोह पर क्यूबावासियों की खुशी में शामिल होते हुए उन्हें प्रसन्नता है।

अनेक सदियों से मरियम के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने के लिए आनेवाले तीर्थयात्रियों के समान ही उनकी इच्छा है कि एल कोब्रे जाकर ईश माता के चरणों में घुटने टेक कर क्यूबा के सबलोगों के लिए उन्हें धन्यवाद दें तथा उनसे याचना करें कि वे इस देश के भविष्य को निर्देशित करें ताकि यह न्याय, शांति, स्वतंत्रता और मेलमिलाप के पथ पर बढे।

संत पापा ने कहा कि वे परोपकार के तीर्थयात्री रूप में क्यूबा आये हैं ताकि भाई बहनों को विश्वास में सुदृढ़ करें, उनकी आशा को मजबूत करें जो हमारे जीवन में ईश्वर के प्रेम की उपस्थिति से उत्पन्न होती है।

संत पापा ने कहा कि विश्व के विभिन्न भागों में आर्थिक कठिनाईयाँ महसूस की जा रही हैं यह न केवल गहन आध्यात्मिक और नैतिक संकट है बल्कि व्यक्ति और परिवार की यथार्थ भलाई का बहुत कम ध्यान रखनेवाली कुछेक ताकतों की महत्वकांक्षाओं और स्वार्थ के सामने मानवजाति को मूल्यरहित तथा सुरक्षाविहीन कर दिया है।

उन्होंने कहा कि हम इस सांस्कृतिक और नैतिक दिशा में बढ़ना नहीं जारी रख सकते हैं जिसने अनेकों के लिए दुःखद परिस्थिति उत्पन्न कर दी है। सच्ची प्रगति ऐसी नैतिकता का आह्वान करती है जो मानव पर केन्द्रित हो तथा उसकी गहनतम जरूरतों, विशेष रूप से, मानव की आध्यात्मिक और धार्मिक पहलूओं का भी ख्याल करती है।

संत पापा ने कहा कि समाज के पुर्नजन्म के लिए सुदृढ़ नैतिक मूल्योंवाले स्त्री पुरूषों की जरूरत है जो मानव प्राणी की अपरिवर्तनीय और पारलौकिक प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना रखते हैं।

क्यूबा भविष्य की ओर देख रहा है और इस तरह से अपने क्षितिज को नया और विस्तृत करने के लिए प्रयास कर रहा है। वे ईश्वर से ईश्वर से निवेदन करते हैं कि इस भूमि और यहाँ के सब निवासियो को बहुतायत में आशीष दें। अवर लेडी ओफ चारिटी ओफ एल कोब्रे की मध्यस्थता द्वारा वे ईश्वर से याचना करते हैं कि इस देश को आशा, सहदयता और सौहार्द से पूर्ण भविष्य मिले।

क्यूबा में विश्वास को नवीकृत करने हेतु सन्त पापा का मिशन जारी

In Church on March 28, 2012 at 6:15 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

सान्तियागो दे क्यूबा, 27 मार्च सन् 2012 (सेदोक): क्यूबा की धरती पर पैर रखते ही सोमवार को सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने कहा था कि वे उदारता के तीर्थयात्री रूप में क्यूबा पहुँचे थे तथा शान्ति, स्वतंत्रता एवं पुनर्मिलन के लिये प्रार्थना करना चाहते थे।

उन्होंने क्यूबा के समस्त नागरिकों की “न्यायसंगत आकाँक्षाओं के प्रति सहानुभूति का भी प्रदर्शन किया।

सान्तियागो दे क्यूबा हवाई अड्डे पर स्वागत समारोह के बाद सन्त पापा यहाँ से चार किलो मीटर की दूरी पर स्थित सान्तियागो के क्राँति चौक “ला प्लाज़ा आन्तोनियो माचेओ” गये जहाँ उन्होंने लगभग दो लाख तीर्थयात्रियों के लिये ख्रीस्तयाग अर्पित किया।

क्यूबा के स्वतंत्रता सेनानी आन्तोनियो माचेयो को यह चौक समर्पित है जिन्होंने स्वतंत्रता के लिये लड़े गये 19 वीं शताब्दी के दो युद्धों में भाग लिया था तथा पश्चिमी क्यूबा में लड़ते लड़ते शहीद हो गये थे। इस प्लाज़ा में लगभग दो लाख व्यक्तियों की व्यवस्था है।

सोमवार को सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें द्वारा अर्पित ख्रीस्तयाग का आयोजन एल कोब्रे की कुँवारी मरियम की मूर्ति की पुनः प्राप्ति की चौथी शताब्दी के उपलक्ष्य में किया गया था। सन् 1612 ई. में मछियारों ने मरियम की इस मूर्ति को क्यूबा की खाड़ी में तैरता पाया था। मरियम की यह प्रतिमा क्यूबा के सभी स्वतंत्रता सेनानियों की संरक्षिका हैं।

26 मार्च को काथलिक कलीसिया मरियम को मिले देवदूत सन्देश का पर्व मनाती है। इसी के उपलक्ष्य में सोमवार को ख्रीस्तयाग के लिये मरियम की इस अनमोल प्रतिमा को प्लाज़ा आन्तोनियो माचेओ में प्रतिष्ठापित किया गया था। ख्रीस्तयाग के दौरान सन्त पापा ने मरियम के के चरणों में एक सोने का एक गुलाब अर्पित किया।

ख्रीस्तयाग समारोह से कुछ समय पूर्व “साम्यवाद को गिराओ” नारा लगाने वाले एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया था। सन्त पापा के दर्शन को उमड़े जनसमुदाय ने भी रंग में भंग करनेवाले इस व्यक्ति के प्रति रोष प्रकट करते हुए, “क्यूबा, क्यूबा, क्यूबा” के नारे लगाये।

पर्यवेक्षकों का कहना है कि हाल के वर्षों में क्यूबा में कलीसिया तथा राज्य के बीच सम्बन्धों में काफ़ी सुधार आया है।

राष्ट्रपति राऊल कास्त्रो ने राजनैतिक क़ैदियों की रिहाई आदि के मामलों में कलीसिया की मध्यस्थता को स्वीकार किया है तथा इस तथ्य को भी पहचाना है कि साम्यवादी सरकार के अतिरिक्त क्यूबा में यदि कोई प्रभावशाली संस्था है तो वह काथलिक कलीसिया ही है।

इस पृष्टभूमि में सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें की तीन दिवसीय क्यूबा यात्रा, द्रुतगामी परिवर्तनों के युग में, कलीसिया एवं राज्य के बीच सम्बन्धों को सुधारने के साथ साथ क्यूबाई समाज में काथलिक कलीसिया की भूमिका को सुदृढ़ करने के प्रयास रूप में देखी जा रही है।

सान्तियागो दे क्यूबाः क्यूबा में सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें का स्वागत

In Church on March 28, 2012 at 6:14 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

सान्तियागो दे क्यूबा, 26 मार्च सन् 2012 (सेदोक): साम्यवादी क्यूबा में विश्वास के नवीकरण की आशा मन में लिये सोमवार को सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें क्यूबा के सान्तियागो दे क्यूबा नगर पहुँचे जहाँ पूर्ण राजकीय ठाट-बाठ के साथ उनका हार्दिक स्वागत किया गया।

क्यूबा गणतंत्र कैरिबियन सागर स्थित एक द्वीप देश है जिसकी कुल आबादी लगभग 12 लाख है। कई द्वीपों के समूह से बने क्यूबा देश की राजधानी हवाना है जो देश का सर्वाधिक विशाल शहर भी है। क्यूबा का दूसरा सबसे बड़ा शहर सानितयागो दे क्यूबा है जिसकी आबादी लगभग चार लाख है। क्यूबा के साठ प्रतिशत लोग काथलिक धर्मानुयायी हैं।

क्यूबा की सामान्य जनता, भले ही, सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें के आगमन की आतुरता से प्रतीक्षा करती रही है किन्तु इस यात्रा को राजनैतिक रंग भी चढ़ाया गया है। रोम से मेक्सिको की यात्रा के दौरान शुक्रवार को पत्रकारों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए सन्त पापा ने स्पष्ट किया था कि कलीसिया न तो कोई राजनैतिक सत्ता है और न ही कोई राजनैतिक पार्टी।

क्यूबा के विषय में उन्होंने कहा था कि “इस यात्रा से सहयोग और संवाद का नया रास्ता खुला है जिसपर धैर्यपूर्वक आगे बढ़ते रहना अनिवार्य है।” क्यूबा तथा अन्य साम्यवादी सत्ता वाले देशों की वर्तमान स्थिति के मद्दे नज़र उन्होंने यह भी कहा था कि यह स्पष्ट हो गया है कि मार्क्सवादी विचारधारा वास्तविकता का जवाब देने में समर्थ नहीं रही है इसलिये धैर्य के साथ नवीन आदर्शों की खोज अनिवार्य है।

स्पानी उपनिवेशियों से स्वतंत्रता पाने की दूसरी शताब्दी मना रहे लातीनी अमरीका के सन्दर्भ में सन्त पापा ने कहा, “यह स्वभाविक है कि कलीसिया को सदैव स्वतः से यह पूछना चाहिये कि क्या इस विशाल महाद्वीप पर सामाजिक न्याय की बहाली के लिये पर्याप्त प्रयास किये गये जा रहे हैं अथवा नहीं? इसलिये कि कलीसिया कोई राजनैतिक सत्ता अथवा राजनैतिक पार्टी नहीं है अपितु एक नैतिक वास्तविकता तथा नैतिक शक्ति है।”

सन्त पापा के इन शब्दों ने काथलिक कलीसिया के मिशन को स्पष्टतः परिभाषित कर दिया है तथा इस बात की पुष्टि कर दी है कि प्रत्येक मानव प्राणी को प्रतिष्ठा और सम्मान के साथ न्याय एवं शांति में जीने का अधिकार है और इसी लक्ष्य की प्राप्ति हेतु अनवरत प्रयास करते रहना कलीसिया का मिशन है।

क्यूबा की एक मात्र साम्यवादी पार्टी द्वारा गठित सरकार ने कभी भी धर्म को अवैध घोषित नहीं किया किन्तु सन् 1959 ई. में फिदेल कास्त्रो के सत्ता में आ जाने के बाद से सैकड़ों पुरोहितों को देश से निष्कासित कर दिया तथा काथलिक स्कूलों में धर्मशिक्षा पर प्रतिबन्ध लगा दिये थे।

धन्य सन्त पापा जॉन पौल द्वितीय के प्रयासों के परिणामस्वरूप नब्बे के दशक से काथलिक कलीसिया के प्रति सरकार का रुख कुछ नम्र हुआ किन्तु अभी भी तनाव व्याप्त हैं। 14 वर्ष पूर्व सन्त पापा जॉन पौल द्वितीय ने क्यूबा की यात्रा की थी। सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें की यह पहली क्यूबा यात्रा है।

23 मार्च को आरम्भ मेक्सिको तथा क्यूबा की छः दिवसीय यात्रा के द्वितीय चरण में सन्त पापा क्यूबा के सान्तियागो दे क्यूबा तथा हवाना शहरों का दौरा कर रहे हैं।

सोमवार सन्ध्या क्यूबा समयानुसार सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें का विमान सान्तियागो दे क्यूबा विमान पत्तन पर उतरा जहाँ क्यूबा के राष्ट्रपति राऊल कास्त्रो ने उनका स्वागत किया। हवाई अड्डे पर प्रशंसकों की वह भीड़ नहीं देखी गई जो तीन दिन पहले मेक्सिको के गुआनाहुआतो हवाई अड्डे पर देखी गई थी।

क्यूबा में लागू कड़े नियमों का पालन करते हुए स्वागत समारोह भी उसी स्थल पर आयोजित किया गया जहाँ राजकीय समारोह हुआ करते हैं तथा जहाँ सामान्य नागरिकों को प्रवेश नहीं दिया जाता।

स्वागत समारोह के लिये तैयार मंच पर सन्त पापा, राष्ट्रपति राऊल कास्त्रो, देश में कार्यरत कूटनीतिज्ञों के प्रतिनिधि, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी तथा क्यूबा के काथलिक धर्माध्यक्षों के साथ कुछ विश्वासी शामिल थे।

इस अवसर पर क्यूबा तथा वाटिकन के राष्ट्रीय गीतों की धुनें बजाई गई तथा 21 तोपों की सलामी देकर देश में वाटिकन राज्य के राष्ट्राध्यक्ष एवं काथलिक कलीसिया के परमाध्यक्ष का स्वागत किया गया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति राऊल कास्त्रो ने कहा कि समाजवादी क्यूबा ने अपने नागरिकों को धर्म की स्वतंत्रता प्रदान की तथा काथलिक कलीसिया के साथ भी उसके सम्बन्ध अच्छे ही रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्वव्यापी निर्धनता, असमानता तथा पर्यावरण के ह्रास के प्रति सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें की चिन्ता में क्यूबा भी उनके साथ है।

स्वागत समारोह के अवसर पर दोनों ही नेताओं ने 14 वर्षों पूर्व सम्पन्न धन्य सन्त पापा जॉन पौल द्वितीय की क्यूबा यात्रा का ज़िक्र किया तथा उसे क्यूबा के लिये रचनात्मक एवं महत्वपूर्ण घटना निरूपित किया।

सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने कहा कि सन्त पापा जॉन पौल द्वितीय की क्यूबा यात्रा “मन्द हवा की तरह थी जिसने क्यूबा की कलीसिया में नवीन शक्ति का संचार किया था।”

In Church on March 28, 2012 at 6:13 am

जस्टिन तिर्की, ये.स.
गुआनाजुआतो, 26 मार्च, 2012(सेदोक, वीआर) राष्ट्रपति महोदय, विशिष्ट अधिकारियो, कार्डिनलगण, माननीय धर्माध्यक्ष बन्धुओ एवं मेक्सिको के मित्रो, मेक्सिको के अल्प किन्तु महत्वपूर्ण दौरे की समाप्ति का समय आ गया है फिर भी मैं आपको बतलाना चाहता हूँ कि यह मेरे प्रेम और आपके प्रति मेरे लगाव का अन्त नहीं है।

मैं यहाँ से विदा होते हुए मैं अनगिनत न भूलनेवाले अनुभवों और ह्रदयस्पर्शी स्नेह के पलों को अपने साथ लेता जा रहा हूँ।

मैं राष्ट्रपति महोदय को उनके नेक शब्दों के लिये धन्यवाद देते हूँ और उन सभी अधिकारियों को अपनी कृतज्ञता प्रकट करता हूँ जिनके कारण मेरी यह यात्रा अविस्मरणीय हो पायी।

मेक्सिको की जनता के प्रति मैं आभारी हूँ जिनके सहयोग और योगदान से यह यात्रा सफल हो पाया है।

ईश्वर से मेरी प्रार्थना है कि वे आपके प्रयासों का उचित पुरस्कार दें और आपको मदद दें ताकि मेक्सिको के लेओन, गुवानाजुवातो में तथा लतिनी अमेरिकी और कैरीबियन देशों के लोग विश्वास, आशा और प्रेम में सुदृढ़ हों।

प्रभु येसु में आपके दृढ़ विश्वास और माता मरिया के प्रति आपकी भक्ति को मैने करीब से देखा है।

आप माता मरिया को जिन अर्थपूर्ण नामों जैसे ‘आवर लेडी ऑफ गुवाडालूपे’ और ‘आवर लेडी ऑफ लाइट’ से पुकारते है उसके प्रकाश की झलक मैंने आपके चेहरों में देखी है।

मैं आज इस बात को दुहराना चाहता हूँ कि आप स्वयं के प्रति वफ़ादार बनिये और बुरी ताकतों को हावी होने मत दीजिये और सावधानीपूर्वक अपना काम इस तरह से कीजिये कि आपका ख्रीस्तीय जीवन आपके वर्त्तमान और भविष्य को पोषित करे।

मित्रो इस प्रिय देश के प्रति मेरे दिल में कुछ चिन्तायें हैं जिनमें कुछ तो हाल के वर्षों में उभरी हैं और कुछ तो वर्षों से यहाँ विद्यमान हैं। उन सब को मैं अपने साथ लेता जा रहा हूँ क्योंकि मैं दुःख और सुख दोनों में मेक्सिको के लोगों के साथ एक हूँ।

मैं इनको एक प्रार्थना रूप में क्रूस के नीचे और येसु के ह्रदय को चढ़ा दूँगा जहाँ से हमारी मुक्ति के लिये जल और रक्त बहता रहता है।

इन परिस्थितियों में मैं मेक्सिको के काथलिकों और यहाँ के नेक इंसानों से अर्जी करता हूँ कि आप उपयोगितावादी मानसिकता से बचें जो कमजोरों और निःसहायों को कुचल डालता है।

मैं आप लोगों को आमंत्रित करता हूँ कि आप एक साथ मिल कर प्रयास करें ताकि समाज का नवीनीकरण हो और सबों को जीवन की मर्यादा न्याय और शांति मिल सके।

काथलिकों के लिये इस तरह के जनहित के कार्य या मानव संवर्धन या प्रेम की सर्वोच्च अभिव्यक्ति – सुसमाचारी जीवन के आवश्यक पहलु हैं।

इसी लिये कलीसिया विश्वासियों को इस बात के लिये प्रोत्साहन देती है कि वे अच्छे नागरिक बने तथा अपने व्यक्तिगत एवं सार्वजनिक कर्त्तव्यों के प्रति जागरुक रहें।

मेक्सिको के मित्रो मैं आपलोगों को ‘अदियोस’ कहता हूँ जिसका परंपरागत अर्थ है “ईश्वर में बने रहिये!” जी हाँ येसु के प्रेम में ‘अदियोस’। हम उन्हीं में मिले हैं और उन्हीं में एक-दूसरे से मिलते रहेंगे।

ईश्वर आपको आशीर्वाद दे और माता मरिया आपकी रक्षा करे। आप सबों को बहुत-बहुत धन्यवाद।

Raju S

In Church on March 28, 2012 at 6:03 am

Vodpod videos no longer available.

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