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सन्त पापा ने राष्ट्रपति कास्त्रो से की मुलाकात, परिवर्तनों का किया निवेदन

In Church on March 29, 2012 at 5:51 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर
हवाना, 28 मार्च सन् 2012 (सेदोक): क्यूबा की राजधानी हवाना में मंगलवार को सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने राष्ट्रपति राऊल कास्त्रो से औपचारिक मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने साम्यवादी पार्टी द्वारा प्रशासित क्यूबा में काथलिक कलीसिया की भूमिका को समृद्ध बनाने हेतु उपयुक्त परिवर्तनों का निवेदन किया।

क्यूबा के राष्ट्रपति तथा सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें की बातचीत लगभग आधे घण्टे तक चली जिसके बाद वाटिकन ने इस बात की पुष्टि की कि बातचीत के दौरान क्यूबा से “मानवतावादी निवेदन” किया गया। इससे इन अटकलों को तूल मिला है कि वाटिकन क्यूबा में क़ैद राजनैतिक बन्दियों की अथवा कारावास में बन्द अमरीका के एलेन ग्रॉस की रिहाई चाहता है।

हवाना के क्राँति भवन में, मुलाकात के अवसर पर सन्त पापा ने राऊल कास्त्रो से यह भी अनुरोध किया कि वे प्रभु येसु के दुखभोग दिवस यानि गुड फ्रायडे को सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दें ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार 14 वर्ष पूर्व, सन् 1998 में, धन्य सन्त पापा जॉन पौल द्वितीय की क्यूबा यात्रा के समय पूर्व राष्ट्रपति फीदेल कास्त्रो ने क्रिसमस को सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दिया था।

पूर्व राष्ट्रपति फीदेल कास्त्रो ने मंगलवार रात को एक वेब साईट पर प्रकाशित किया था कि वे बुधवार को सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें से मुलाकात करेंगे। वाटिकन प्रवक्ता फादर फेदरीको लोमबारदी ने कहा कि इस बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है क्योंकि अब तक फीदेल कास्त्रो सन्त पापा के किसी भी समारोह में शरीक नहीं हो पाये थे।

चार वर्षों पूर्व अपनी बीमारी के कारण फीदेल कास्त्रो ने राष्ट्रपति पद त्याग कर अपने भाई राऊल कास्त्रो को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त कर दिया था।

राऊल कास्त्रो ने क्यूबा की सोवियत शैली वाली अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिये अनेक सराहनीय कदम उठाये हैं तथा सामाजिक मुद्दों पर काथलिक कलीसिया को एक प्रभावशाली मध्यस्थ घोषित कर कलीसिया के साथ सम्बन्धों में सुधार का प्रयास किया है।

क्यूबा की कलीसिया तथा यहाँ के नागरिकों की आशा है कि आर्थिक और सामाजिक सुधारों के साथ साथ राजनैतिक सुधारों की भी बहाली हो ताकि सभी नागरिक स्वतंत्रता में जीवन यापन का आनन्द प्राप्त कर सकें।

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‘आवर लेडी ऑफ एल कोब्रे’ तीर्थस्थल में संत पापा का संदेश

In Church on March 29, 2012 at 5:50 am

जस्टिन तिर्की, ये.स.

सान्तियागो दि क्यूबा, 28 मार्च, 2012 (सेदोक, वीआर) मेरे अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, कुँवारी मरियम के जिस तीर्थस्थल को आप प्यार से ‘ला ममबीसा’ कहते हैं, उस ‘आवर लेडी ऑफ चैरिटी’ के तीर्थस्थल पर मैं एक तीर्थयात्री रूप में आया हूँ। कुँवारी मरियम की उपस्थिति एल कोब्रे के लिये एक ईश्वरीय वरदान है।

मुझे खुशी है कि मैं यहाँ उपस्थित प्रत्येक जन का हार्दिक अभिवादन करुँ। आप मेरे स्नेह को ग्रहण कीजिये और आप जहाँ भी जायें इसे लेकर जायें ताकि दूसरे इससे सांत्वना और अपने विश्वास में दृढ़ता का अनुभव कर सकें।

आज प्रत्येक व्यक्ति चाहे वह यहाँ हो या न हो यह जाने कि मैंने आपके प्रिय राष्ट्र के भविष्य को ईशमाता मरिया को सौंप दिया है ताकि आशा और नवीनीकरण के मार्ग में आगे बढ़ते हुए आपका राष्ट्र क्यूबावासियों के हित के लिये कार्य करे।

मैंने कुँवारी मरियम से उन लोगों के लिये प्रार्थनायें कीं हैं जो दुःख उठा रहे हैं, जो पूर्ण रूप से स्वतंत्र नहीं है, जो अपने प्रिय जन से बिछुड़े हुए हैं और जो विभिन्न कष्ट झेल रहे हैं।

मैंने देश के युवाओं को निष्कलंक माता मरिया के ह्रदय में चढ़ा दिया ताकि वे प्रभु येसु के वफ़ादार मित्र बनें और उन कमजोरियों के शिकार न बनें जिन्हें जानने के बाद परेशानी होती है।

आज मैं उन लोगों की भी याद करता हूँ जो अफ्रीकी तथा हैती के आसपास के राष्ट्र के लोगों की वंशज हैं जिन्होंने हाल दो वर्ष पहले भयंकर भूकंप का विनाश झेला है।

आज मैं उन्हें भी नहीं भूल सकता जो अपने घरों में सुसमाचार के वचनों के अनुसार जीना चाहते हैं और जिन्होंने अपने घरों को यूखरिस्तीय बलिदान के केन्द्र रूप में प्रयोग करने के लिये उपलब्ध कर दिया है।

मैं आप सभी बेटे – बेटियों को इस बात के लिये प्रोत्साहन देता हूँ कि आप कुँवारी माता मरिया के उदाहरण के अनुसार चलते हुए अपना घर उस चट्टान पर बनाइये जो और कोई दूसरा नहीं, प्रभु येसु ही हैं, न्याय के लिये कार्य कीजिये, विपत्तियों के समय धैर्यवान बने रहिये और प्रेम के सेवक बनिये।

आपके आन्तरिक आनन्द को कोई भी न छीन ले जो क्यूबाई जीवन की आत्मा है है। आप सबों को बहुत धन्यवाद। ईश्वर आपको आशीर्वाद प्रदान करे।

चार सौ वर्षों से आशा एवं सांत्वना का स्रोत

In Church on March 29, 2012 at 5:49 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

सान्तियागो दे क्यूबा, 28 मार्च सन् 2012 (सेदोक): क्यूबा में एल कोब्रे का “वेरजन देला कारिदाद” मरियम तीर्थ विगत चार सौ वर्षों से तीर्थयात्रियों के लिये श्रद्धा और भक्ति का लक्ष्य बना हुआ है।

सन् 1612 ई. में क्यूबा में नाईप की खाड़ी में एक तूफान के बाद तीन मछियारों ने काठ की छोटी सी मरियम प्रतिमा को पाया था।

15 इंच लम्बी, बालक येसु को हाथ में लिये काठ की मरियम प्रतिमा उस तख्ते से जुड़ी थी जिसपर लिखा थाः “यो सोय ला वेरजन दे ला कारिदाद” अर्थात् मैं उदारता की कुँवारी हूँ। बताया जाता है कि जब मछियारों ने प्रतिमा को समुद्र में से बाहर निकाला तब चमत्कारी ढंग से न तो प्रतिमा और न ही इसके वस्त्र गीले थे।

एल कोब्रे उसी समय से क्यूबा में मरियम भक्ति के गढ़ रूप में प्रसिद्ध हो गया। पहले पहल एक छोटे से प्रार्थनालय में मरियम प्रतिमा को प्रतिष्ठापित किया गया किन्तु 18 वीं शताब्दी में मरियम के आदर में एक गिरजाघर का निर्माण करवा दिया गया। देश विदेश से यहाँ तीर्थ यात्री आने लगे जिसके चलते सन् 1927 में एक महागिरजाघर का निर्माण किया गया।

आठ सितम्बर को मरियम के जन्म दिवस पर इसका अनुष्ठान किया गया। आज भी मरियम की यह प्रतिमा महागिरजाघर में प्रधान वेदी के निकट सुरक्षित हैं।

स्पेन से मिली स्वतंत्रता को स्वतंत्रता संग्रामियों ने एल कोब्रे की रानी मरियम की मध्यस्थता से सम्पादित चमत्कार बताकर सन् 1916 ई. में, परमधर्मपीठ से अनुमोदन प्राप्त कर, एल कोब्रे स्थित उदारता की कुँवारी मरियम को क्यूबा की संरक्षिका घोषित कर दिया था।

सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें की क्यूबा यात्रा के लिये नागरिकों को तैयार करने के उद्देश्य से क्यूबा के काथलिक धर्माध्यक्षों ने उक्त प्रतिमा की एक प्रति बनाकर द्वीप के ओर छोर तक शोभायात्राओं का आयोजन किया था जिसमें कोमबीनादो देल एस्ते कारावास भी शामिल था।

कलीसियाई अधिकारियों का कहना है कि इतनी विशाल संख्या में शोभायात्राओं में शामिल क्यूबा के नागरिकों के धर्मोत्साह से वे आश्चर्यचकित रह गये थे। मरियम की इसी प्रति को सोमवार सन्ध्या सान्तियागो दे क्यूबा ले जाया गया था जहाँ सन्त पापा ने सोने का गुलाब अर्पित किया था।

एल कोब्रे में तीर्थयात्री रोगियों की चंगाई, परीक्षा, खेल या व्यापार में सफलता तथा प्राकृतिक प्रकोपों से सुरक्षा के लिये धन्यवाद अर्पित करने आते हैं किन्तु इसके साथ साथ अपनी चिन्ताओं, उत्कंठाओं, आशाओं एवं आकाँक्षाओं को भी वे मरियम के चरणों में रखते तथा बेहतर भविष्य के लिये उनसे मध्यस्थता की याचना करते हैं।

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