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पास्का रविवार

In Church on April 7, 2012 at 11:21 pm

8 अप्रैल, 2012
प्रेरित चरित 10, 34-43
1 कुरिन्थियों के नाम पत्र 15,1-11
योहन 20, 1-18
जस्टिन तिर्की, ये.स.

‘ईस्टर’ या पास्का – पार होना
आज पास्का का पर्व है अंग्रेजी में इसे लोग ‘ईस्टर’ के नाम से जानते हैं। आज सारे संसार में येसु के अनुयायी पूरे उल्लास के साथ येसु के पुनरुत्थान का पर्व को मना रहे हैं। इसी दिन प्रभु येसु क्रूस की अपमानजनक मृत्यु का आलिंगन कर दुनिया को इस रहस्य को समझने का मौका तो दिया ही कि वे एक मनुष्य थे पर तीसरे दिन महिमा के साथ जीवित होकर उन्होंने इस बात की भी घोषणा कि वे ईशपुत्र है।

अच्छाई, सच्चाई और भलाई की जीत
उधर सवेरा क्या हो रहा था, सूर्य अपनी लालिमा बिखेरने लगी थी, पंक्षी अपने नीड़ छोड़ने लगे थे और इधर समग्र विश्व के गिरजेघरों के घंटों की आवाज़ सिर्फ एक ही संदेशा बिखेर रही थी – ‘ईसा मसीह जीवित हैं’। ईसा मसीह अपने बोले अनुसार तीसरे दिन महिमा के साथ जी उठे हैं। ईसा मसीह ने पाप और मृत्यु पर विजय प्राप्त कर ली है। सच्चाई, भलाई और अच्छाई की जीत हुई है। आप जिधर भी कान लगाकर सुनें, अगर आपने येसु का साथ कलवारी के मार्ग मे करीबी से दिया है तो आप घंटे की आवाज़ में, पंक्षी के कलरव में और प्रातः की भीनी-भीनी खुशबुदार वायु में बस यही विजय गीत सुन पायेंगे। । “प्रभु जी उठे हैं। अल्लेलूईया ! अल्लेलूईया अल्लेलूईया ! दुनिया के लोगो खुशी मनाओ। तुम्हारे प्रभु जी उठे हैं।”
प्रभु के जी उठने की खुशी को सुरों में बाँधा है ईस्टर के लिये ख़ास तौर से बनायी इस गीत ने ।

दो सैनिकों की कहानी
इस गीत को सुनते-सुनते मुझे एक एक कहानी याद आ गयी। दो देशों के बीच लड़ाई चल रही थी। एक किसान था, उसका नाम था – जोन । उसके दोनों बेटे पीटर और ग्रेगोरी लडा़ई के मैदान में देश की रक्षा की में लगे हुए थे। एक दिन जोन को एक पत्र मिला और पर वह उस पत्र को वह पढ़ नहीं पाया। तब उसने उसे अपनी एकमात्र पुत्री को पढ़ने को दिया। उस पत्र को ग्रेगोरी के कमान्डर ने लिखा था कि प्रिय न, बड़े ही अफसोस के साथ आपको यह समाचार दिया जा रहा है कि आपका पुत्र ग्रेगोरी 12 मार्च को बैरियों का सामना करते हुए युद्ध में मारा गया। इतना सुनना था कि ग्रेगोरी के पिता फूट-फूट कर रोने लगा।उस दिन से उसने खाना-पीना छोड़ दिया। वह तब से उन्होंने खत को अपने तकिये के पास रखा और उसे बार-बार अपनी बेटी से पढ़ने को कहता और रोता रहता था। वह लोगों से बताता था कि उसने अपने बेटे के लिये क्या-क्या सपने देखे थे पर सब कुछ मिट्टी में मिल गया। श्रोताओ, करीब एक सप्ताह के बाद एक विचित्र घटना घटी। जोन के नाम पर एक और पत्र आया। जोन उस पत्र को देखते ही और जोरों से रो पड़ा सोचा कि उसका दूसरा पुत्र भी वीरगति को प्राप्त कर लिया होगा। उसने अपनी बेटी को पत्र पढ़ने के लिये दिया तब उसकी पुत्री ने पत्र पढ़ना आरंभ किया। उसमें लिखा था प्रिय जोन गलत सूचना के लिये हमें ख़ेद है। आपका पुत्र ग्रेगोरी मरा नहीं है सिर्फ़ घायल हुआ है। वहाँ शहर के ‘आर्मी हॉस्पीटल’ में है और एक महीने के बाद वह पूर्णतः स्वस्थ हो जायेगा। इतना सुनना था कि जोन बाँसों उछल पड़ा और सबको बताने लगा मेरा बेटा जीवित है, ग्रेगोरी मरा नहीं है। वह कहने लगा कि उसके दिल को इसका पूर्वाआभास था कि ग्रेगोरी, उसका प्यारा बेटा नहीं मर सकता है। जो भी उसके घर में आते सबको सिर्फ़ एक ही बात बतलाता कि ‘उसका बेटा मरा नहीं है जीवित है’। उसमें एक नया जीवन आ गया। जोन बिल्कुल नये उत्साह, आशा और खुशी से भर गया।

मृत्यु और पत्थर से ऊपर येसु
येसु के शिष्यों की हालत इसी घटना से मिलती-जुलती है। येसु की मृत्यु के बाद कहाँ तो वे सोचते लगे थे कि सब कुछ समाप्त हो गया है। वे सोचने लगे थे कि जिस येसु के लिये उन्होंने अपने घर-द्वार छोड़े और उसका साथ दिया पर सब कुछ व्यर्थ चला गया। एक ओर तो वे डर के मारे लोगों से कतराने लगे थे तो दूसरी ओर अपने अंधेरे भविष्य से निराश हो अपने-अपने पुराने कामों की ओर लौटने लगे थे। उन्होंने ने तो कल्पना की थी कि एक दिन ऐसा आयेगा जब येसु सबका उद्धार करेंगे और वे येसु के राज्य में अधिकारी बन कर जीवन बिताएंगे। पर ऐसा नहीं हुआ येसु को क्रूस पर ढोंक दिया गया। येसु को मार दिया गया। गौ़रतलब बात तो ये है कि येसु को न क्रूस अपने साथ रख सका न कब्र के पत्थर। येसु के दिव्य ताकत के सामने वे टिक नहीं पाये। येसु ने पाप मृत्यु और दुनियावी ताकत के बंधन तोड़कर पूरी महिमा से जीवित होकर यह बता दिया कि वे ही अंतिम रूप से विजयी हैं।

आज हम लोग पूजन विधि पंचांग के वर्ष ‘ब’ पास्का पर्व के लिये प्रस्तावित पाठों के आधार पर मनन चिन्तन कर रहें हैं। आज के पाठ हमें बताएँगे कि सत्य के लिये जीने वाले, सत्य के लिये कार्य करने वाले, लोगों की भलाई और दुनिया की अच्छाई के लिये अपना जीवन अर्पित करने वाले, मरते नहीं हैं। वे सिर्फ़ इस दुनिया से चले जाते हैं और ईश्वर उन्हें अनन्त जीवन प्रदान करता है। ईसा मसीह का जीवन अल्पकालीन रहा पर उनके जीवन का प्रभाव युगों-युगों तक बना रहेगा। बस, इसीलिये क्योंकि उन्होंने सत्य के लिये कार्य किया, प्रेम का मार्ग दिखाया और दुनिया को सुन्दर और बेहतर बनाने के लिये दुःख को गले लगाया।

सच्चाई, अच्छाई और भलाई की कमाई बेकार नहीं जाती है। और यही हुआ ईसा मसीह को। ईसा के ईश्वर ने जिसे ईसा मसीह ‘पिता’ कह कर पुकारते थे मृत्यु के तीसरे दिन जीवित कर दिया। आईये, हम उन अनेक घटनाओं में से एक का वर्णन सुनें जिससे लोग चकित हुए यह जानकर कि येसु की मृत्यु कोई साधारण मृत्यु नहीं थी । ऐसी विस्मयकारी चमत्कारिक और ऐतिहासिक घटना से लोगों को जो ताकत मिली उससे पूरी दुनिया के लोगों का जीवन, दुःख, मृत्यु और नया जीवन के संबंध में जो धारणायें थी उसे एक नयी दिशा मिली। और तब से ईसा मसीह के समान जीने उसके समान परहित में जीने और सत्य के लिये तकलीफ झेलने वालों की लम्बी कतार बनी जो न तो छोटा हुआ है न ही इसके समाप्त होने के कोई आसार दिखाई पड़ते हैं। आईये हम प्रभु के उस वचन पर मनन करें जिसे संत योहन के सुसमाचार के 20वें अध्याय के 1 से 9 पदों से लिया गया है।

सुसमाचार पाठ
1) मरियम मगदलेना सप्ताह के प्रथम दिन, तडके मुँह अँधेरे ही कब्र के पास पहुँची। उसने देखा कि कब्र पर से पत्थर हटा दिया गया है।
2) उसने सिमोन पेत्रुस तथा उस दूसरे शिष्य के पास, जिसे ईसा प्यार करते थे, दौडती हुई आकर कहा, ”वे प्रभु को कब्र में से उठा ले गये हैं और हमें पता नहीं कि उन्होंने उन को कहाँ रखा है।”
3) पेत्रुस और वह दूसरा शिष्य कब्र की ओर चल पडे।
4) वे दोनों साथ-साथ दौडे। दूसरा शिष्य पेत्रुस को पिछेल कर पहले कब्र पर पहुँचा।
5) उसने झुककर यह देखा कि छालटी की पट्टियाँ पडी हुई हैं, किन्तु वह भीतर नहीं गया।
6) सिमोन पेत्रुस उसके पीछे-पीछे चलकर आया और कब्र के अन्दर गया। उसने देखा कि पट्टियाँ पडी हुई हैं।
7) और ईसा के सिर पर जो अँगोछा बँधा था वह पट्टियों के साथ नहीं बल्कि दूसरी जगह तह किया हुआ अलग पडा हुआ है।
8) तब वह दूसरा शिष्य भी जो कब्र के पास पहले आया था भीतर गया। उसने देखा और विश्वास किया,
9) क्योंकि वे अब तक धर्मग्रन्थ का वह लेख नहीं समझ पाये थे कि जिसके अनुसार उनका जी उठना अनिवार्य था।

मेरा पूरा विश्वास है कि आपने प्रभु के दिव्य वचनों को ध्यान से पढ़ा है। आपने सुना सुसमाचार की बातों को येसु जिस कब्र में रखे गये थे वह शिष्यों के द्वारा खाली पाया गया। येसु कब्र में नहीं थे। येसु कब्र छोड़ चुके थे। येसु दुनिया के बन्धन को तोड़ चुके थे। येसु ने पाप और मृत्यु पर विजय प्राप्त की थी।येसु ने अपने बैरियों पर विजय पायी थी।

किसी ख्रीस्त भक्त ने ठीक ही कहा है-

येसु ने अपने जीवन को ऐसा जीया था
प्रेम, दया, क्षमा और सद्भाव से सबको ऐसा सींचा था
कि बैरियों के भी दिल पिघल गये
कब्रों के पत्थर लुढ़क गये
चेलों के नयन खुल गये
भय और दहशत के दिन पूरे हुए
धर्मग्रंथ के शब्द अक्षरशः ऐसे पूरे हुए
और बड़े तड़के
नासरेत के ईसा – क्रूसित और अपमानित येसु से जगत् मसीहा बन गये।

सुखद अविश्वनीय सत्य
कई बार हमने लोगों को कहते हुए सुना है कि सत्य इतनी सुखद है कि विश्वास नहीं होता है। जब येसु का मृतकों में से जी उठे तो सभी चेलों के दिल में यही एक ही मनोभावना थी। और वह थी आश्चर्य की कि प्रभु जी उठे हैं। काथलिक कलीसिया येसु के जी उठने को ‘ईसा का पुनरूत्थान’ कहती है। येसु का पुनरूत्थान अर्थात् येसु का जी उठना, फिर कभी नहीं मरना, पर सदा-सदा के लिये राज्य करना।
कभी-कभी लोग हिचकिचाते हैं यह विश्वास करने से कि प्रभु जी उठे हैं। श्रोताओ, कई बार तो मेरा मन भी इस सत्य को नहीं समझ पाता है कि प्रभु के शरीर को क्या हुआ? प्रभु कहाँ चले गये? क्या ईसा सचमुच जी उठे? जब मैं ऐसा सोचने लगता हूँ तो मैं सन्त पौलुस की उन पंक्तियों को याद करता हूँ जिसमें उसने बहुत ही विश्वास के साथ कहा है कि ‘अगर ईसा मसीह जीवित नहीं हुए हैं तो मेरा विश्वास बेकार है मेरा सुसमाचार प्रचार करना बेकार है।‘

आज मैं काथलिक कलीसिया के एक महान् लेखक संत अगुस्टीन की बातों की भी याद करता हूँ जिनका कहना था “पहले तुम विश्वास करो तो तुम्हें खुद ही सारे रहस्य समझ में आ जायेगें।” मैं अनुभव करता हूँ कि कई बार मैं अपने आप से कहता हूँ कि मैं पहले समझ लूँगा तब विश्वास करुँगा। श्रोताओ, अच्छी भली और आध्यात्मिक बातों को जब हम विश्वास करने के लिये लालायित हो जाते हैं तो हमें समझने की अन्तर्दृष्टि मिलती है और इस आन्तरिक ज्ञान से हमें नया जीवन मिलता है

इसलिये ईसा का पुनरूत्थान को समझना ईश्वर की ओर से दिया गया एक अनुपम वरदान है जिसके गहरे अनुभव से हमारा जीवन बदल जाता है और हम इस धरा में ही अलौकिक सुख का अनुभव करने लगते हैं।
तो फिर क्या है पास्का पर्व मेरे लिये और आपके लिये? क्या संदेश लेकर आता है पास्का पर्व? मेरे लिये तो पास्का का पर्व सिर्फ एक त्योहार नहीं हैं जब हम खाते-पीते और खुशियाँ मनाते हैं।यह है – ईश्वर की ओर से दिया गया एक सुनहला अवसर जब हम येसु की मृत्यु के द्वारा अपने जीवन का सही अर्थ समझते हैं।
मेरे लिये तो पास्का पर्व है – खुद को इस बात की याद दिलाना कि येसु ने मेरे लिये अपना जीवन दिया और इस दुनिया में जीने और इसे मृत्यु के द्वार से पार होने का एक ऐसा रास्ता दिखाया जिसमें चलने से मेरे जीवन का अन्त नहीं होता है पर मुझे एक ऐसा जीवन मिलता है जो सदा-सदा के लिये जीवित रहेगा।

पास्का पर्व मेरे लिये सिर्फ तीन दिनों में येसु के दुःख, दर्द, पीड़ा और महिमामय विजय की घटना को याद कर लेने का त्योहार नहीं है। पास्का या ईस्टर तो है नये जीवन पाने का त्योहार, खुद को बदलने का त्योहार, खुद के पापों कमजोरियों और झुकाओं पर विजयी होने का त्योहार और नये उत्साह और आशा से परहितमय और सेवामय जीने के लिये खुद को समर्पित करने का त्योहार जिससे हम जहाँ भी रहें या काम करें दुनिया को लगे कि जीवित येसु उनके साथ में हैं।

परहित-प्रेममय जीवन
अगर हर व्यक्ति ऐसा सोचकर कि प्रभु येसु ने अपने प्राण देकर उसे बचाया अनन्त जीवन का मार्ग दिखाया है और उसे भी येसु में अमरत्व को प्राप्त करना है परहितमय और प्रेममय जीवन जीये तो इससे जो आंतरिक खुशी प्राप्त होगी उसे हम खुद तो अनुभव करेंगे ही, इसे बताने के लिये हम उस सैनिक ग्रेगोरी के पिता जोन के समान लालायित और उत्साहित हो जायेंगे जिसने यह कहते हुए थकावट का अनुभव कभी नही किया कि ‘उसका बेटा ज़िन्दा है’। और दुनिया के लोगों ने आन्तरिक खुशी पाने के लिये प्रयास करना अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया तो पास्का पर्व का अर्थ पूर्ण हो जायेगा- व्यक्ति पार हो जायेगा और उस लोक का अधिकारी होगा जहाँ खुशी है, संतुष्टि है और है अनन्त जीवन।

वाटिकन सिटीः ओक्तावा दियेज़ में लोमबारदी ने क्रूस मार्ग पर किया चिन्तन

In Church on April 7, 2012 at 11:19 pm

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

वाटिकन सिटी, 07 अप्रैल सन् 2012 (सेदोक): वाटिकन टेलेविज़न के साप्ताहिक रूपक “ओक्तावा दियेज़” में वाटिकन रेडियो एवं टेलेविज़न के महानिर्देशक फादर फेदरीको लोमबारदी ने, इस सप्ताह, परिवार के दृष्टिकोण से क्रूस मार्ग पर चिन्तन किया।

उन्होंने कहा कि पुण्य सप्ताह की धर्मविधियों में सर्वाधिक हृदयस्पर्शी समारोह पवित्र क्रूस का मार्ग है। क्रूस मार्ग में येसु हर युग के स्त्री पुरुषों के निकट आये तथा उनकी पीड़ा में एक हुए। उन्होंने कहा कि पीड़ा, मानव जीवन का मूलभूत हिस्सा है जिसका अनुभव किसी न किसी प्रकार हर व्यक्ति ने किया है।

फादर लोमबारदी ने कहा कि पीड़ा को ख्रीस्त की पीड़ा की दृष्टि से देखने से हमारी पीड़ा सार्थक हो उठती है क्योंकि यह एक ईश्वरीय वरदान है जो पुनःरुत्थान के मर्म को समझने का विवेक प्रदान करती है।

फादर लोमबारदी ने कहा कि इस वर्ष रोम के ऐतिहासिक स्मारक कोलोसेयुम पर सम्पादित क्रूस मार्ग पर चिन्तन, मिलान शहर के एक वृद्ध दम्पति के सिपुर्द किया था। जून माह में मिलान में होने जा रहे परिवार सम्मेलन की पृष्टभूमि में यह एक यह एक बहुत ही नेक एवं अर्थपूर्ण विचार था।

उन्होंने कहा कि कलीसिया अनवरत परिवार की सुरक्षा हेतु प्रयासरत रही है, विशेष रूप से, उन दिनों में जब वर्तमान मानसिकता पारिवारिक मूल्यों के विपरीत चल रही है।

उन्होंने कहा कि परिवार को हर प्रकार का समर्थन दिया जाना चाहिये। कठिन समय में उसकी रक्षा की जानी चाहिये तथा उसके आध्यात्मिक विकास हेतु प्रयास किये जाने चाहिये ताकि ग़लतफहमियाँ, दम्पत्तियों के बीच दरार का कारण न बनें तथा बच्चे माता पिता से कभी अलग न होवें।

विश्व के समस्त परिवारों को पास्का अथवा ईस्टर की हार्दिक शुभकामनाएँ अर्पित कर फादर लोमबारदी ने आशा व्यक्त की प्रभु ईश्वर के प्रेम से पोषित होकर सभी परिवार प्रभु ख्रीस्त के पुनःरुत्थान का आनन्द उठा सकें।

रोमः कोलोसेऊम में सन्त पापा ने क्रूस मार्ग की विनती का किया नेतृत्व

In Church on April 7, 2012 at 11:19 pm

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

रोम, 07 अप्रैल सन् 2012 (सेदोक): रोम के ऐतिहासिक स्मारक कोलोस्सेऊम में शुक्रवार सन्ध्या सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने पवित्र क्रूस मार्ग की विनती का नेतृत्व किया। इस वर्ष का चिन्तन काथलिक लोकधर्मी समुदाय फोकोलारी अभियान के एक इताली दम्पत्ति द्वारा लिखा गया था।

क्रूस मार्ग की प्रार्थना के अवसर पर वाटिकन के महापुरोहित कार्डिनल अगोस्तीनो वालिनी के नेतृत्व में, इसराएल में पवित्र भूमि की देखरेख करनेवाले फ्राँसिसकन धर्मसमाज के दो पुरोहितों तथा इटली, आयरलैण्ड, अफ्रीका तथा लातीनी अमरीका से रोम पहुँचे परिवारों ने क्रूस की प्रतिमा को ढोया।

क्रूस मार्ग के 14 मुकामों पर प्रार्थना के उपरान्त सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने अपना चिन्तन व्यक्त किया। भक्त समुदाय सम्बोधित कर उन्होंने कहा, “एक बार फिर चिन्तन, प्रार्थना एवं गीतों में हमने प्रभु येसु मसीह की क्रूस यात्रा पर मनन किया। यह यात्रा आशा विहीन प्रतीत हुई तथापि, इसने मानव जीवन एवं इतिहास को बदल कर रख दिया तथा जैसा कि प्रकाशना ग्रन्थ में कहा गया हैः “नये स्वर्ग एवं नई धरती के द्वार खोल दिये” (दे. प्रकाशना ग्रन्थ 21:1)।

सन्त पापा ने कहा कि प्रभु येसु की मृत्यु एवं उनके क्रूस में काथलिक कलीसिया उस जीवन वृक्ष को देखती है जिससे नई आशा प्रस्फुटित होती है।

उन्होंने कहा, “पीड़ा तथा क्रूस का अनुभव सम्पूर्ण मानवजाति का स्पर्श करता है; वह परिवार का भी स्पर्श करता है। कितनी बार हमारी जीवन यात्रा चिन्ताओं एवं कठिनाईयों से भरी होती है।

ग़ैरसमझदारी, संघर्ष, बच्चों के भविष्य को लेकर उत्कंठा, रोग और अन्य प्रकार की समस्याओं से हम घिरे रहते हैं।

आज कल के दिनों में भी, बेरोज़गारी तथा आर्थिक संकट की वजह से उत्पन्न अन्य नकारात्मक परिणामों के कारण अनेक परिवारों की स्थिति अत्यधिक कठिन हो चली है। क्रूस का मार्ग, हमें और विशेष रूप से परिवारों को क्रूसित ख्रीस्त पर मनन हेतु आमंत्रित करता है ताकि समस्याओं को पार कर सकने की, हम, शक्ति अर्जित कर सकें।”

सन्त पापा ने कहा, “प्रभु ख्रीस्त का क्रूस प्रत्येक स्त्री एवं प्रत्येक पुरुष के लिये ईश्वर के प्रेम का परम संकेत है। अस्तु, कठिनाइयों की घड़ी में हम प्रभु ख्रीस्त के क्रूस को निहारें तथा उससे साहस एवं शक्ति प्राप्त करें।

कठिन निराशा की घड़ियों में हम आशा के साथ सन्त पौल के इन शब्दों को दुहरायें: “कौन हमें मसीह के प्रेम से वंचित कर सकता है? क्या विपत्ति या संकट? क्या अत्याचार, भूख, नग्नता, जोख़िम या तलवार? नहीं, इन सब बातों पर हम उन्हीं के द्वारा सहज ही विजय प्राप्त करते हैं, जिन्होंने हमें प्यार किया” (रोमियों 8:35,37)।

सन्त पापा ने कहा कि प्रभु ख्रीस्त का प्रेम ही हमें यह एहसास दिलाता है कि कठिनाइयों में हम अकेले नहीं हैं, परिवार अकेले नहीं हैं। प्रभु येसु ख्रीस्त का प्रेम सदैव हमारे साथ विद्यमान रहता तथा हमें समर्थन प्रदान करता है।

अन्त में सन्त पापा ने कहा, “येसु के क्रूस तले खड़ी माँ मरियम से हम प्रार्थना करें कि मरियम क्रूस एवं पुनःरुत्थान के रहस्य तक हमारा मार्गदर्शन करें। ख्रीस्त के पुनःरुत्थान से प्रज्वलित ज्योति तक वे हमें ले जायें जो बुराई, पीड़ा एवं मृत्यु पर प्रेम, आनन्द और जीवन की विजय को प्रकाशमान बनाती है।”

रोमः इटली के राष्ट्रपति ने सन्त पापा को पास्का महापर्व की दी हार्दिक बधाई

In Church on April 7, 2012 at 11:18 pm

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

रोम, 07 अप्रैल सन् 2012 (सेदोक): पास्का या ईस्टर महापर्व के उपलक्ष्य में इटली के राष्ट्रपति जोर्जो नापोलीतानो ने सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें के नाम एक सन्देश प्रेषित कर अपनी तथा सम्पूर्ण इटली की जनता की ओर से पास्का की हार्दिक बधाईयाँ अर्पित की हैं।

राष्ट्रपति नापोलीतानो ने लिखा, “पास्का महापर्व नवजीवन एवं शांति का महान सन्देश लेकर आता है जो ख़तरनाक संकट के दौर से गुज़र रही आज की जटिल अन्तरराष्ट्रीय परिस्थितियों में अनमोल है। इस महापर्व से इटली को भी प्रेरणा मिलेगी जिसकी राजनैतिक एवं सामाजिक शक्तियाँ, प्रतिबद्धता के साथ, अन्तरराष्ट्रीय तथा राष्ट्रीय स्तर पर छाये आर्थिक संकट से उभरने का हर सम्भव प्रयास कर रही हैं ताकि भावी पीढ़ियों के युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो सके।”

राष्ट्रपति ने लिखा, “कलीसिया के परमाध्यक्ष के प्रेरितिक मिशन के प्रति सम्मान एवं मैत्री की भावना में मैं आपके प्रति पास्का महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ व्यक्त करता हूँ।”

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