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कंधमाल में 10 हज़ार लोगों ने एक साथ ईस्टर मनाया

In Church on April 16, 2012 at 7:12 am

भुबनेश्वर, 13 अप्रैल, 2012 (एशियान्यूज़) उड़ीसा के कंधमाल जिले के करीब दस हज़ार ईसाई और हिन्दुओं ने रायकिया के वजिय कैथोलिक स्कूल में ईस्टर का त्योहार मनाया।

समारोह के बारे में जानकारी देते हुए फादर जोरलाल सिंह ने कहा कि इस समारोह से लोगों की एकता मजबूत हुई है और ईसाइयों ने अपने ख्रीस्तीय जीवन का साक्ष्य दिया है।

एशियान्यूज़ के अनुसार ईस्टर समारोह के लिये 12 घंटे की प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया था जिसमें बच्चों, महिलाओं, बुजूर्गों, सरपंचों पुरोहितों, धर्मबहनों के अलावा सरकारी अधिकारियों और विभिन्न धार्मिक नेताओं ने हिस्सा लिया। समारोह में विभिन्न कलीसियाओं तथा सम्प्रदाय के लोगों ने प्रार्थनायें की,बाईबल पाठ किये और नृत्य भी प्रस्तुत किये।

विदित हो कि सन् 2008 में हुए ईसाई विरोधी हिंसा के बाद एकता एवं सद्भावना के लिये किया यह पहला महत्वपूर्ण प्रयास था।

समारोह की सफलता के बारे में बोलते हुए फादर जोरलाल सिंह ने कहा, “ईस्टर त्योहार एक साथ मनाने का लक्ष्य था एकता और सद्भावना को सुदृढ़ करना।” सभासुन्दर नामक एक धर्मप्रचार ने कहा, “येसु का पुनरुत्थान ने हमारी आशा को ताज़ा कर दिया है और हमारा विश्वास है कि हम जीवन की चुनौतियों को जीत पायेंगे। यह एक सुनहला अवसर है जब हम एक राष्ट्र के नागरिक रूप में शांति एकता और न्याय के लिये कार्य करें।”

शिक्षा के अधिकार कानून की वैधता बरक़रार

In Church on April 16, 2012 at 7:11 am

नई दिल्ली, 13 अप्रैल, 2012 (कैथन्यूज़, देशबन्धु) सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून की संवैधानिक वैधता बरकरार रखते हुए सरकारी स्कूलों एवं गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें गरीब बच्चों के लिए आरक्षित रखने की सरकार की पहल पर मुहर लगा दी।

न्यायालय के इस फैसले से अब छह से 14 साल के बच्चों को अनिवार्य एवं मुफ्त शिक्षा उपलब्ध हो सकेगी।

न्यायालय के इस फैसले का केंद्र सरकार और बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने स्वागत किया है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि इस ऐतिहासिक फैसले ने सरकार का मनोबल मजबूत किया है।

वहीं, गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों ने न्यायालय के इस फैसले पर निराशा जताई है।
न्यायालय ने अपने फैसले में हालांकि, स्पष्ट किया है कि यह प्रावधान गैर सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक संस्थानों पर लागू नहीं होगा।

सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस. एच. कपाड़िया, न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार और न्यायमूर्ति के. एस. राधाकृष्णन की पीठ ने बहुमत से शिक्षा के अधिकार कानून की धारा 12 1सी की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा, जिसमें गरीब और कमजोर तबके के बच्चों के लिए 25 फीसदी सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है।

न्यायालय ने इस प्रावधान के विरोध में सोसायटी फॉर अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स, इंडिपेंडेंट स्कूल फेडरेशन ऑफ इंडिया और अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।

न्यायालय ने कहा कि यह फैसला गुरुवार से स्वत: प्रभावी हो जाएगा, लेकिन अब तक हो चुके दाखिले इससे प्रभावित नहीं होंगे।

न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा, “मैं बहुत खुश हूं कि न्यायालय ने सभी विवादों को खारिज कर दिया। सबसे बड़ा विवाद यह था कि सामाजिक एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का फैसला निजी स्कूलों पर लागू हो या नहीं? न्यायालय ने इसे स्पष्ट कर दिया है। न्यायालय के फैसले से सरकार का मनोबल मजबूत हुआ है।”

उन्होंने कहा, “मैं सर्वोच्च न्यायालय को इस फैसले के लिए धन्यवाद देता हूं। अधिनियम के तहत प्रावधान बच्चों पर केंद्रित होना चाहिए, न कि संस्थानों पर। बड़े स्कूल निश्चित रूप से यह भार वहन कर सकते हैं।”

एनसीपीसीआर की अध्यक्ष शांता सिन्हा ने भी कहा कि इससे समाज में असमानता की खाई पाटने में मदद मिलेगी। सिन्हा ने कहा, “यह ऐतिहासिक फैसला है। मैं समझती हूँ कि यह सभी बच्चों के लिए अच्छा है। यह गरीबों के लिए इस मायने में अच्छा है कि इससे उनके तथा अन्य छात्रों के बीच असमानता की खाई पाटने में मदद मिलेगी। साथ ही सांस्कृतिक मूल्यों का आदान-प्रदान होगा और स्कूल में समानता एवं न्याय के संवैधानिक मूल्यों को मजबूती मिलेगी।”

उन्होंने कहा, “यह आर्थिक रूप से सम्पन्न छात्रों के लिए भी अच्छा है, क्योंकि इस प्रावधान से वे अन्य छात्रों के जीवन तथा सांस्कृतिक विविधता के बारे में जान सकेंगे।”

इतालवी नागरिक की रिहाई करने का स्वागत

In Church on April 16, 2012 at 7:10 am

भुबनेश्वर, 13 अप्रैल, 2012 (एशियान्यूज़) इतालवी नागरिक बोसुस्को को माओवादियों द्वारा रिहा कर दिये जाने पर प्रोटेस्टंट नेता साजन के जोर्ज ने अपनी प्रसन्नता व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें अब भी इन्तज़ार कि माओवादी आदिवासी नेता झिना हिकाका की रिहाई कर दें।

उन्होंने कहा कि उन्हें अब भी याद है ओडिशा सरकार का रवैया आदिवासियों और ईसाइयों के प्रति भेदभावपूर्ण रहा है।

ग्लोबल कौसिल ऑप इंडियन क्रिश्चियन के अध्यक्ष साजन जोर्ज ने कहा कि सन् 2008 में ईसाई विरोधी हिंसा के शिकार ईसाइयों द्वारा स्थानीय पुलिस थाने में दायर 3300 मामलों में सिर्फ़ 831 मामलों की एफआईआर लिखी गयी।

साजन ने बतलाया कि कंधमाल सन् 2007 के दिसंबर से अगस्त 2008 तक अंतरराष्ट्रीय मीडिया में छाया रहा पर अब तक कंधमाल में शांति और व्यवस्था नहीं लौट पायी है। अब तक कंधमाल के ख्रीस्तीयों में दहशत है और कई जिलों में उन्हें विभिन्न भेदभावों को शिकार होना पड़ता है।

विदित हो कि मार्च सन् 2012 में ‘यूएस कमीशन ऑन इंटरनैशनल रेलिजियस फ्रीडम’ ने पाया कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों को जमकर हनन हुआ है।

उन्होंने भारत के संबंध में इस प्रकार के निर्णय इस लिये दिये क्योंकि साम्प्रदायिक हिंसा के विभिन्न मामलों में न्याय की प्रक्रिया बिल्कुल धीमी रही है या लोगों को न्याय नहीं मिला है।

स्वतंत्र फेडेरल एजेन्सी ने भारत सरकार को इस का सुझाव दिया था कि वे राज्य और केन्द्रीय पुलिस को मजबूत करे और साम्प्रदायिक हिंसा रोके, इसके अपराधियों को दंडित करे और पीड़ितों और गवाह देनेवालों को सुरक्षा प्रदान करे।

उन्होंने यह भी कहा कि कई बेगुनाह और गरीब आदिवासियों को माओवादी करार कर जेल में डाल दिया गया और उनके लिये कोई वकील में मुहैया नहीं कराया गया।

उनके मित्र भी इस भय से कि उन्हें भी पुलिस गिरफ़्तार न कर ले कोई सहायता नहीं पहुँचा पाते हैं।

804 माताओं ने गर्भपात न करने का निर्णय किया

In Church on April 16, 2012 at 7:09 am

फ्रेड्रिक्सबर्ग,13 अप्रैल, 2012 (सीएनए) ‘फॉर्टी डेस फॉर लाइफ कम्पेन’ के निदेशक शॉन कारनी ने कहा है कि उनके जीवन समर्थक अभियान के तहत् उनके दल की प्रार्थनाओं और 40 दिनों के सम्पर्क अभियान ने 804 माताओं को इस बात के लिये आश्वस्त कर लिया गया कि वे गर्भपात न करें।

अभियान के निदेशक ने बतलाया कि उनका चालीस दिवसीय अभियान 1 अप्रैल को समाप्त हुआ और इस वर्ष उन्हें अभूतपूर्व सफलता मिली।

उन्होंने बतलाया कि उसके दल के सदस्यों ने गर्भपात क्लिनकों का दौरा किया और इसके पाँच कार्यकर्त्ताओं को इस बात का विश्वास दिलाया कि गर्भपात उचित नहीं है।

उन्होंने जानकारी दी कि उन अस्पतालों में कार्य करने वाले कई लोगों ने इच्छा व्यक्त की वे इस कार्य का त्याग करना चाहते हैं। उनके प्रयास से दो क्लिनिक बन्द कर दिये गये।

विदित हो कि जीवन समर्थक अभियान सन् 2007 ईस्वी में आरंभ हुआ था। इसके कार्यकर्त्ता स्वयंसेवियों को आमंत्रित करते हैं कि वे शांतिपूर्ण तरीके से गर्भपात क्लिनिक के बाहर चालीस दिवसीय प्रार्थना करें ताकि लोगों का मनपरिवर्तन हो और वे गर्भपात कराने के विचार का त्याग करें।

जानकारी के अनुसार इस वर्ष 258 शहरों में इस अभियान को चलाया गया। निदेशक ने बतलाया कि इस वर्ष इंगलैंड में भी चार स्थानों में जीवन रक्षा अभियान चलाया गया था जिसके समापन समारोह में वेस्टमिनस्टर के सहायक धर्माध्यक्ष बिशप अलन होप्स ने भाग लिया।

कारनी का मानना है कि जीवन समर्थक अभियान के प्रभाव का विस्तार निरंतर होता जा रहा है और कई बच्चों को जीवन प्राप्त हो रहा है।

विश्वास में सुदृढ़ हो, दूसरों के विश्वास को समझें

In Church on April 16, 2012 at 7:09 am

मुम्बई, 13 अप्रैल, 2012 (एशियान्यूज़) मुम्बई के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल ऑस्वाल्ड ग्रेशियस ने कहा है कि पास्का पर्व आनन्द और विश्वास का त्योहार है जो प्रेम और आशा को मजबूत करता है।
पास्का पर्व के द्वारा हमारा यह विश्वास में मजबूत होता है कि प्रभु येसु मृतकों में से जी उठे हैं।
उन्होंने कहा,”हमारी आशा एक स्वप्न मात्र नहीं है पर येसु मसीह ने स्वयं हमारे बीच आकर जीवन, मृत्यु और पुनर्जीवन के मर्म को समझाया है। इसीलिये हम इस बात की आशा करते हैं कि एक दिन हमारा प्रेमभरा प्रयास उचित फल उत्पन्न करेगा।”
उन्होंने कहा,” हमें बचा करके येसु ने इस बात को बतलाया कि हमें एक परिवार का सदस्य है और इसीलिये हमें चाहिये कि हम आनन्द, प्रेम और शांति के प्रचारक बनें। विश्वास को समर्पित इस पावन वर्ष में कलीसिया हमें यही संदेश दे रही है कि हम अपने विश्वास में मजबूत हों और दूसरों के विश्वास को भी समझें।
सीबीसीआई के अध्यक्ष महाधर्माध्यक्ष ग्रेशियस ने कहा कि पास्का हमारे उत्साह और मिशन को नया कर देता है ताकि हम अपने विश्वास को दूसरों को बतला सकें और कह सकें कि येसु हमारा मुक्तिदाता और मित्र है।
येसु के पुनरुत्थान ने हमें इस बात की गारंटी दी है कि हम भी मृत्यु पर विजय प्राप्त करेंगे और दूसरों की सेवा के लिये अनवरत करते रहेंगे।
कार्डिनल ने कहा कि मुम्बई धर्मप्रांत अपनी स्थापना की 125वीं वर्षगाँठ मना रहा है जिसे ‘जीवित धर्मविधि’ का वर्ष रूप में मनाया जा रहा है। हमारी आशा है कि पास्का काल पुनर्जीवित येसु की शक्ति हमारे जीवन को सचमुच जीवन्त सहभागितापूर्ण और अर्थपूर्ण बना देगा।
उन्होंने लोगों को आमंत्रित करते हुए कहा कि हम पास्का की शक्ति से अपने विश्वास को मजबूत करें और दूसरे देश के अन्य धर्मावलंबियों के साथ मिलकर सांस्कृतिक मतांतरों के बीच सेतु का कार्य करें।
उन्होंने कहा, “अंतरधार्मिक वार्ता के लिये जरूरी है कि हम अपने विश्वास में मजबूत हों। हम दूसरों के विश्वास को तबतक नहीं समझ सकते हैं जब तक कि हम अपने विश्वास में परिपक्व न हों।”
“आज हम निर्भीक होकर उन मूल्यों और संदेशों को दूनिया को बतलायें जिन्हें येसु ने हमें बतलाया है ताकि प्रेम, शांति, आनन्द और विश्वास का प्रचार हो।”

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