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स्वर्ग की रानी आनन्द मना प्रार्थना से पूर्व सन्त पापा का सन्देश

In Church on April 24, 2012 at 9:36 am

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

वाटिकन सिटी, 09 अप्रैल सन् 2012 (सेदोक): श्रोताओ, रविवार, 22 अप्रैल को, रोम स्थित सन्त पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में, देश विदेश से एकत्र तीर्थयात्रियों को दर्शन देकर, सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने भक्त समुदाय के साथ स्वर्ग की रानी आनन्द मना प्रार्थना का पाठ किया। इस प्रार्थना से पूर्व उन्होंने भक्तों को इस प्रकार सम्बोधित कियाः

“अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, आज, पास्का के तीसरे रविवार के दिन के लिये निर्धारित सन्त लूकस रचित सुसमाचार के अनुसार, हम उन येसु का साक्षात्कार करते हैं जो शिष्यों के समक्ष स्वतः को प्रकट करते हैं (दे. लूक 24,36)। आशंकित एवं भयभीत शिष्य जिन्होंने समझा कि वे भूतप्रेत को देख रहे थे (दे. लूक 24,37)। रोमानो ग्वारदीनी लिखते हैं: “प्रभु परिवर्तित हुए हैं। वे पहले की तरह जीवन यापन नहीं करते। उनका अस्तित्व…… बुद्धि के परे है। तथापि, शारीरिक है, जिसमें… उनके द्वारा व्यतीत सम्पूर्ण जीवन, पार की गई नियति, उनका दुखभोग और उनकी मृत्यु, सबकुछ, समाहित है। सब यथार्थ है, असली है। यद्यपि वे परिवर्तित हैं तथापि, स्पर्शनीय, ठोस एवं सुनिश्चित्त वास्तविकता हैं” (IL SIGNORE, MEDITAZIONI SULLA PERSONA E LA VITA DI N.S. GESÙ CRISTO, MILANO 1949,433)। Read the rest of this entry »

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