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तुर्की की काथलिक कलीसिया द्वारा 200 सम्पत्तियों की वापसी की मांग

In Church on April 25, 2012 at 5:15 pm

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

इस्तानबुल, 24 अप्रैल सन् 2012 (एशियान्यूज़): तुर्की की काथलिक कलीसिया अंकारा की सरकार से उन दो सौ अचल सम्पत्तियों की वापसी का प्रयास कर रही है जिन्हें तुर्की का सरकार ने सन् 1930 के दशक में जब्त कर लिया था।

विगत दिनों, तुर्की के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष महाधर्माध्यक्ष रुज्जेरो फ्राँचेसकीनी सहित कुछेक धर्माध्यक्षों ने तुर्की संसद के पुनर्मिलन आयोग से मुलाकात की। यह आयोग अतातुर्क के शासनकाल के दौरान ग़ैरमुसलमानों से जब्त की गई सम्पत्तियों की वापसी पर अध्ययन कर रहा है। किन्तु काथलिकों को ग़ैरमुसलमानों की सूची में नहीं गिनाया गया है क्योंकि उस समय उनकी पहचान एक विदेशी समुदाय रूप में की गई थी।

तुर्की की काथलिक कलीसिया ने ऑटोमन साम्राज्य एवं फ्राँस के अधीन सन् 1913 ई. में निर्धारित की गई सम्पत्तियों की सूची सरकार के समक्ष प्रस्तुत की है।

सूत्रों के अनुसार, तुर्की में कलीसियाई सम्पत्ति की वापसी में आनेवाली सबसे बड़ी बाधा कलीसिया की वैध मान्यता को लेकर है। आज तक काथलिक कलीसिया सम्पत्ति की मालिक नहीं हो सकी है। कलीसियाई सम्पत्ति का मालिकाना हक या तो किसी संस्था के नाम पर है अथवा किसी निजी नागरिक के नाम पर है।

तुर्की में वाटिकन के प्रेरितिक राजदूत महाधर्माध्यक्ष अन्तोनियो लूचीबेल्लो ने एशिया समाचार से कहा, “विगत दशकों में कई बार सरकार ने कलीसिया को मान्यता देने विषय पर बातचीत की है।

सात जनवरी सन् 2010 को वाटिकन में तुर्की के राजदूत का प्रत्यय पत्र स्वीकार करते हुए सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने भी काथलिक कलीसिया को वैध मान्यता प्रदान करने का आग्रह किया था।

उन्होंने कहा, “यह मान्यता बहुत पहले मिल जानी चाहिये थी क्योंकि विगत साठ वर्षों से तुर्की तथा परमधर्मपीठ के बीच कूटनैतिक सम्बन्ध बने हुए हैं।”

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