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यूरोप में इस्लाम धर्मानुयायी भेदभाव के शिकार

In Church on April 25, 2012 at 5:24 pm

जूलयट जेनेविव क्रिस्टफर

पेरिस, 25 अप्रैल सन् 2012 (ए.पी.): मानवाधिकार संगठन अन्तरराष्ट्रीय क्षमादान आयोग “एमनेस्टी इंटरनेशनल” के अनुसार यूरोप के कई देशों में इस्लाम धर्मानुयायी भेदभाव का शिकार बनाये जाते हैं।

संगठन का कहना है कि दैनिक जीवन में अपने रीति रिवाज़ों का पालन करने के कारण मुसलमान लोग भेदभाव का शिकार बनते हैं। उदाहरणार्थ उनकी पारम्परिक वेशभूषा उन्हें शिक्षा, रोज़गार तथा व्यवसाय की दुनिया से वंचित करती है।

फ्राँस तथा बैलजियम का उदाहरण देते हुए संगठन ने कहा कि इन देशों के स्थानीय कानून बुर्का या हिजब पहनना वर्जित करते हैं जिसके कारण मुसलमान महिलाओं को कई प्रकार की कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। कई लड़कियों को उनके विरुद्ध भेदभाव के कारण नौकरी नहीं मिली तथा कई अन्यों को अपना स्कूल बदलना पड़ा।

एमनेस्टी इनटरनेशनल ने यूरोप की सरकारों का आह्वान किया कि वे मुसलमानों को केवल वोट बैंक की दृष्टि से नहीं देखें बल्कि उनके विरुद्ध व्याप्त पूर्वधारणाओं एवं भ्रामक विचारों को दूर करने का प्रयास करें।

एमनेस्टी इनटरनेशनल की रिपोर्ट में कहा गया कि “धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक या पोशाक पहनना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है और यह अधिकार सभी को मिलना चाहिये।

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