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प्यार की संहिता

In Uncategorized on September 5, 2014 at 2:23 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 5 सितम्बर 2014 (वीआर सेदोक)꞉ वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मार्था के प्रार्थनालय में संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार 5 सितम्बर को पावन ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में प्यार की संहिता हेतु उदार बनने की सलाह दी।

संत पापा ने प्रवचन में कहा कि सुसमाचार एक संदेश है इसलिए कलीसिया में परिवर्तन से न डरें।
उन्होंने कहा कि सुसमाचार नवीन है अतः पुरानी विनाशशील संरचनाओं को दूर करें। उन्होंने कहा कि ख्रीस्तीय धर्मानुयायियों को कई छोटे-छोटे नियमों का गुलाम नहीं बनना चाहिए किन्तु प्यार के नये नियम के लिए हृदय को खुला रखना चाहिए।

संत पापा ने प्रवचन में येसु द्वारा फ़रीसियों के उस प्रश्न के उत्तर पर चिंतन किया जिसे येसु के शिष्यों द्वारा यहूदी समाज की पुरानी परम्परा का पालन नहीं करने पर उन्होंने किया था।
संत पापा ने कहा, सदूकी अपने सवाल द्वारा येसु को उलझन में डालना चाहते थे किन्तु येसु ने उनकी बातों को समझते हुए स्वयं उनके सम्मुख नयी आज्ञा को रख दिया।

संत पापा ने कहा, ″सुसमाचार आनन्द एवं शुभ समाचार है न कि नियम। जबकि खुद को सहिंता के ज्ञानी समझने वाले उसी नियमों के गुलाम थे, इसीलिए तो संत पौलुस कहते हैं कि हम नियमों की कैद में रखे गये थे।
संत पापा ने याद दिलाया कि ये नियम मूसा द्वारा इस्राइली लोगों को दिये गये थे किन्तु कालांतर में नियम के पंडितों द्वारा कई छोटे-छोटे नियम जोड़ दिये गये जो नियमों के भार ने उन्हें कैद में बंद कर दिया, यही कारण था कि वे स्वतंत्र होना चाहते थे।

संत पापा ने कहा कि उसी गुलामी से मुक्ति दिलाने के लिए पिता ईश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को संसार में भेजा।
संत पापा ने उपस्थित विश्वासियों से कहा, ″आप में से कई यह प्रश्न कर सकते हैं कि क्या ख्रीस्तीयों के लिए कोई नियम नहीं हैं? संत पापा ने कहा निश्चय ही नियम हैं क्योंकि येसु ने कहा है कि मैं नियम को नष्ट करने नहीं किन्तु पूरा करने आया हूँ। पर्वत पर दिए गये प्रभु येसु के आशीर्वचन इसके ज्वलंत उदाहरण हैं। येसु ने जो सहिंता दी वह प्यार की संहिता है जो हमें स्वतंत्र होने की कृपा प्रदान करती है। आनन्द एवं स्वतंत्रता की संहिता और यही सुसमाचार का संदेश है।

Usha Tirkey

कांदिविदी Invia articolo  
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