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भाइयों का सुधार हमारा फर्ज़

In Uncategorized on September 8, 2014 at 1:35 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 8 सितम्बर 2014 (वीआर सेदोक)꞉ संत पापा फ्राँसिस ने रविवार, 7 सितम्बर को संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में उपस्थित भक्त समुदाय के साथ, देवदूत प्रार्थना का प्रार्थना का पाठ किया। देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा,
अति प्रिय भाइयो एवं बहनो,
सुप्रभात,

इस रविवार का सुसमाचार पाठ संत मती रचित सुसमाचार के 18 वें अध्याय से लिया गया है जो विश्वासी समुदाय में भाइयों के सुधार की शिक्षा देता है। इस शिक्षा के अनुसार, यदि कोई ख्रीस्तय धर्मानुयायी ग़लती करता है तो हमें उसके सुधार का प्रयास करना चाहिए।″
संत पापा ने कहा, ″येसु सिखलाते हैं कि यदि एक ख्रीस्तीय भाई हमारे विरूद्ध अपराध करता है, हमें कष्ट पहुँचाता है, तो हमें उसके साथ रहम से पेश आना चाहिए। सर्वप्रथम, व्यक्तिगत रूप से मिलकर उसे अवगत कराना चाहिए कि उसने अनुचित बात या काम किया है। पर यदि वह सुनने से इन्कार करता है, तो येसु एक दूसरा उपाय अपनाने की सलाह देते हैं जिसके तहत हम अपने साथ दो या तीन लोगों को लेकर उसे समझाएँ, तिसपर भी यदि वह आपके परामर्श को अस्वीकार करता है, तो इस बात को समुदाय में रखें और यदि वह समुदाय की भी नहीं सुनता तो उसे एहसास दिलाएँ कि उसने भाई-बहनों के प्रति अपराध कर समुदाय से अपने को अलग कर लिया है।″

संत पापा ने कहा कि यह पहल दर्शाती है कि अगर समुदाय में किसी से ग़लती हो जाए तो हमारा फर्ज़ है कि ग़लती में सुधार लाने में हम उनका साथ दें, प्रभु हम से यही चाहते हैं जिससे कि हम अपने भाइयों को न खो दें। उन्होंने कहा कि हमारे लिए यह आवश्यक नहीं है कि हम उनकी गलतियों को फैलाएँ या समुदाय के अन्य लोगों के साथ मिलकर उस पर बहस करें। यह पहला चीज है जिसका हमें बहिष्कार करना चाहिए। हमें जाकर उसे अकेले में समझाना चाहिए।।
संत पापा ने कहा, ″जिन्होंने हमारे विरूद्ध अपराध किया है उनके प्रति कोमलता, विवेकी, विनम्रता और सावधानी की भावना नहीं अपनाना, उसके लिए निराशा का कारण हो सकता है और इस कारण हम अपने भाई की मृत्यु के कारण बन सकते हैं क्योंकि शब्द में व्यक्ति को मार डालने की शक्ति है। जब किसी की बुरी आलोचना की जाए तो यह व्यक्ति के सम्मान को नष्ट करता है।

संत पापा ने कहा कि उपरोक्त बात का हमें ध्यान रहे किन्तु दूसरी बात भी ध्यान देने योग्य है कि हमारी बातों से उसके चरित्र में अनावश्यक कलंक न लगे। उसे आपस में ही सुलझाने का प्रयास किया जाना चाहिए और अगर अवश्य हो तो समुदाय का सहारा लिया जाना चाहिए। किन्तु उसका उद्देश्य व्यक्ति को उसकी गलतियों का एहसास दिलाना कि उसने उस बात के द्वारा न केवल एक व्यक्ति को किन्तु समुदाय के सभी लोगों को कष्ट दिया है।

हमें गुस्से से बचना चाहिए क्योंकि यह हमें हानि पहुँचाता है, व्यक्ति के अपमान और उसपर आक्रमण करने के लिए प्रेरित करता है। एक ख्रीस्तीय के चेहरे को आक्रामक देखना अत्यन्त दुखद और खराब है।

संत पापा ने कहा कि दूसरों का अपमान करना ख्रीस्तीयता नहीं है। वास्तव में, ईश्वर के सम्मुख हम सब के सब पापी हैं तथा हमें उन से क्षमा पाने की आवश्यकता है इसलिए येसु हमें न्याय नहीं करने की सीख देते हैं।

भाई बहनों का सुधार उनके प्रति प्यार एवं एकता की भावना से उत्पन्न होना चाहिए जो ख्रीस्तीय समुदाय में प्रबल है। यह आपसी सेवा है जिसे हमें एक-दूसरे को प्रेम से देना चाहिए। भाई का सुधार एक सेवा है और यह सम्भव है और प्रभावकारी भी। ऐसी स्थिति में जब हम सभी पापी हैं तथा प्रभु से क्षमा किये जाने की आस में हैं। यही अंतः प्रेरणा हमें उनकी गलतियों को महसूस कराता है, साथ ही अपनी गलतियों की भी याद आती है और न केवल एक बार किन्तु बार-बार।

यही कारण है कि पवित्र यूखरिस्त की शुरूआत में हमें याद दिलाया जाता है कि हम प्रभु के सम्मुख पापी हैं शब्दों एवं चिन्हों का प्रयोग करते हुए हम उदार भाव से अपने पापों के लिए पश्चाताप करते हैं और कहते हैं, प्रभु मुझ पर दया कर क्योंकि मैं पापी हूँ, न कि प्रभु मेरे बगल वाले पर दया कर। पवित्र आत्मा हमें प्रेरित करते तथा ईश वचन के प्रकाश में हमारी गलतियों का एहसास दिलाते हैं। येसु संत एवं पापी सभी को एक साथ अपने जीवन की परिस्थितियों में ही अपने भोज पर बुलाते हैं। युखरिस्त के महाभोज में भाग लेने वालों के लिए दो उत्तम बातें हैं- यह भाव रखना कि हम सभी पापी है तथा ईश्वर हमें क्षमा प्रदान करते हैं एवं दूसरा, पावन यूखरिस्त में भाग लेने के पूर्व हमें भाइयों के सुधार का सदा ख्याल रखना।

इसके लिए हम धन्य कुँवारी मरियम जिनका कल हम जन्म दिवस मनायेंगे उनकी मध्यस्थता द्वारा प्रार्थना करें।
इतना कह कर संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

देवदूत प्रार्थना समाप्त कर उन्होंने देश-विदेश से एकत्रित सभी तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों का अभिवादन किया तथा उन्हें संम्बोधित कर कहा, ″इन दिनों पूर्वी यूक्रेन के संघर्षरत क्षेत्रों में युद्ध विराम हेतु प्रयास जारी है। मैं आशा करता हूँ कि वे जनता के बीच राहत पहुँचा सकें तथा स्थायी शांति के लिए अपना योगदान दे सकें। हम प्रार्थना करें कि वार्ता की जो पहल की गयी है वह आशा का फल उत्पन्न करते रहे। माता मरिया शाँति की महारानी हमारे लिए प्रार्थना कर।

संत पापा ने लेसोथो के धर्माध्यक्ष के साथ शांति स्थापना के लिए अपील करते हुए कहा, ″मैं सभी हिंसात्मक कार्यों की निंदा करता हूँ और प्रभु से प्रार्थना करता हूँ कि उनके देश में शांति, न्याय और भाईचारा हो।

संत पापा ने सूचना देते हुए कहा कि इस रविवार इटली के 30 रेडक्रोस स्वयं सेवकों ने ईराक के एरबिल के निकट दोहुक के लिए प्रस्थान किया है। जहाँ वे ईराक के हजारों विस्थापितों की मदद करेंगे। मैं उनकी इस उदारता की सराहना करता हूँ तथा उन सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान करता हूँ।

अंत में संत पापा ने सभी से प्रार्थना का आग्रह करते हुए शुभ रविवार की मंगल कामनाएँ अर्पित की।

Usha Tirkey

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