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सन्त पापा फ्राँसिस एवं प्राधिधर्माध्यक्ष किरिल के बीच मुलाकात, आतंकवाद एवं उत्पीड़न के अन्त का आह्वान

In Church on February 13, 2016 at 3:31 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 13 फरवरी 2016 (सेदोक): काथलिक कलीसिया के परमधर्मगुरु सन्त पापा फ्राँसिस ने, शुक्रवार 12 फरवरी को, रूसी ऑर्थोडोक्स कलीसिया के शीर्ष प्राधिधर्माध्यक्ष किरिल से मुलाकात कर आतंकवाद एवं ख्रीस्तीय धर्मानुयायियों के विरुद्ध अत्याचारों के अन्त का आह्वान किया। काथलिक कलीसिया एवं ऑर्थोडोक्स ख्रीस्तीय कलीसिया के बीच 1000 वर्ष से अधिक व्याप्त अलगाव के बाद यह एक ऐतिहासिक मुलाकात थी।

शुक्रवार को क्यूबा में अपने लघु पड़ाव के उपरान्त सन्त पापा फ्राँसिस ने मेक्सिको में अपनी 06 दिवसीय यात्रा के लिये हवाना से प्रस्थान किया। इससे पूर्व क्यूबा के हवाना अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उन्होंने लगभग तीन घण्टों का पड़ाव कर रूसी ऑर्थोडोक्स कलीसिया के शीर्ष प्राधिधर्माध्यक्ष किरिल से मुलाकात की। प्राधिधर्माध्यक्ष किरिल का आलिंगन कर सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा, “अन्ततः” और फिर उनसे कहा, “हम भाई भाई हैं।” प्राधिधर्माध्यक्ष ने भी अपनी सहमति प्रकट करते हुए कहा, “अब हमारा काम पहले से कहीं अधिक सरल हो गया है” जिसके उत्तर में सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा, “यह ईश्वर की इच्छा है”।

परस्पर आलिंगन एवं वैयक्तिक बातचीत के उपरान्त काथलिक कलीसिया के परमधर्मगुरु सन्त पापा फ्राँसिस एवं रूसी ऑर्थोडोक्स कलीसिया के शीर्ष प्राधिधर्माध्यक्ष किरिल ने एक 30 बिन्दु संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किये। इसमें दोनों नेताओं ने घोषित किया कि अपने बीच विद्यमान ऐतिहासिक विभाजनों को दूर करने हेतु वे आवश्यक कदम उठाने के लिये तत्पर हैं, उन्होंने कहा, “हम प्रतिस्पर्धी नहीं, अपितु भाई-भाई हैं।”

संयुक्त घोषणा में दोनों धर्मगुरुओं ने विश्व के राजनैतिक नेताओं का भी आह्वान किया कि वे काथलिक एवं ऑरथोडोक्स ख्रीस्तीय कलीसियाओं की सर्वाधिक महत्वपूर्ण उत्कंठा पर ध्यान दें और वह है ईराक एवं सिरिया में ख्रीस्तीय धर्मानुयायियों की दयनीय स्थिति। इन देशों में इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों द्वारा ख्रीस्तीयों की अन्धाधुँध हत्याएँ की जा रही हैं तथा उन्हें उनके अपने घरों से बलात निष्कासित किया जा रहा है।

संयुक्त घोषणा में कहा गया, “मध्यपूर्व एवं उत्तरी अफ्रीका के अनेक राष्ट्रों में ख्रीस्त में हमारे भाइयों एवं बहनों के सम्पूर्ण परिवारों, सम्पूर्ण गाँवों एवं नगरों को नष्ट किया जा रहा है।”

सन्त पापा एवं प्राधिधर्माध्यक्ष ने उक्त घोषणा में शांति स्थापना के लिये विभिन्न धर्मों के बीच वार्ताओं की अत्यावश्यकता पर बल दिया, आतंकवाद के विरुद्ध संघर्षरत लोगों से ज़िम्मेदारी एवं विवेक के साथ काम करने की अपील की तथा केवल भूतपूर्व सोवियत संघ के देशों में ही नहीं अपितु सम्पूर्ण यूरोप एवं विश्व में धार्मिक स्वतंत्रता की बहाली का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने  निर्धनों, आप्रवासियों एवं शरणार्थियों की दयनीय स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित कराया जो उपभोक्तावाद के उन्माद में पड़े धनी देशों के दरवाज़ों पर दस्तक दे रहे हैं।

प्रभु येसु मसीह के सुसमाचार में निहित मूल्यों को पोषित करने का आह्वान कर सन्त पापा फ्राँसिस एवं प्राधिधर्माध्यक्ष किरिल ने एक पुरुष एवं एक स्त्री से निर्मित परिवार की प्रतिष्ठा को बरकरार रखने की अपील की तथा गर्भ में पलनेवाले प्रत्येक बच्चे, वृद्ध एवं रोगी व्यक्तियों के जीने के अधिकार पर बल दिया।

काथलिक कलीसिया एवं रूसी ऑरथोडोक्स कलीसिया द्वारा की गई संयुक्त घोषणा यूरोप से दूर क्यूबा में प्रकाशित की गई। इस सन्दर्भ में सन्त पापा फ्रांसिस ने कहा, “यदि यह जारी रहा तो क्यूबा एकता की राजधानी बन जायेगा।”

प्राधिधर्माध्यक्ष किरिल ने सन्त पापा के साथ अपनी मुलाकात को “तात्विक एवं सारवान”  निरूपित करते हुए कहा, “मुलाकात के रचनात्मक परिणाम यह कहना सम्भव बनाते हैं कि आज दोनों कलीसियाएँ विश्व में व्याप्त ख्रीस्तीय धर्मानुयायियों की सुरक्षा हेतु एक साथ मिलकर सक्रिय कार्य कर सकती हैं।”


(Juliet Genevive Christopher)

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