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मेक्सिको के धर्माध्यक्षों को संत पापा का संदेश

In Church on February 14, 2016 at 3:39 pm

मेक्सिको, रविवार, 14 फरवरी 2016 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने मेक्सिको की प्रेरितिक यात्रा के प्रथम दिन 13 फरवरी को असम्पशन महागिरजाघर में, मेक्सिको के धर्माध्यक्षों से मुलाकात कर उनकी प्रेरिताई को प्रोत्साहन प्रदान किया।

उन्हें सम्बोधित कर उन्होंने कहा, ″इस प्यारे देश में पहुँचने के उपरांत आप से मुलाकात करने के इस अवसर को प्राप्त कर मैं प्रसन्न हूँ। मैं अपने पूर्ववर्ती संत पापाओं के पदचिन्हों पर चलते हुए आपसे मुलाकात करने आया हूँ।″

लातीनी अमरीका के प्रथम संत पापा ने धर्माध्यक्षों को विश्वासियों का दिल जीतने का उपाय बतलाते हुए कहा कि ″लोगों का दिल जीतने के लिए एक ही शक्ति है ईश्वर की कोमलता जो आनंदित करता और अपनी ओर खींचता है, विनीत बनाता और ऊपर उठाता है जो खोलता तथा मुक्त करता है। उन्होंने कहा यह साधन अथवा कानून की शक्ति नहीं है बल्कि दिव्य प्रेम की सर्वोपरि कमजोरी है जो नम्रता की अप्रतिरोध्य शक्ति तथा उनकी दया की अटल प्रतिज्ञा है।″

ग्वादालुपे की माता मरियम के निवास स्थान मेक्सिको को संत पापा ने अनाथ और बेघर लोगों के लिए विश्राम करने हेतु शरण और घर कहा।

देश के इतिहास का स्मरण दिलाते हुए संत पापा ने कहा कि यद्यपि यह रक्तपात, अविवेकी, उथल-पुथल, हिंसा और दुर्बोधता से रहित नहीं है तथापि पुर्वजों तथा आदिवासियों की संवेदनशीलता के कारण मेक्सिको के लोगों के हृदय में ख्रीस्तीय धर्म ने जड़ पकड़ा और जिसके कारण लोगों में आधुनिक समझदारी आयी जो स्वतंत्रता चाहती है।

संत पापा ने लोगों की इसी आवश्यकता को ध्यान में रखकर धर्माध्यक्षों को लोगों के लिए विश्राम का स्थान तैयार करने को कहा। उन्होंने कहा कि बीती दुखद बातों के मेल-मिलाप करने के द्वारा ख्रीस्तीय विश्वास में विश्राम का स्थान तैयार करना सम्भव है। विश्वास के स्थान पर अपनी पहचान को खोने बिना हम नवीन मानवता की गहरी सच्चाई को खोज सकते हैं जिसमें सभी मानव ईश्वर की संतान बनने के लिए बुलाये गये हैं।

अतः संत पापा ने धर्माध्यक्षों को अपने लोगों की सेवा करने की सलाह देते हुए कहा, ″आप झुकें, शांत और आदर भाव के साथ, लोगों की भावना की गहराई में प्रवेश करें, सेवा की भावना से लोगों के बीच जाए एवं उनके चेहरे के रहस्यों को समझने का प्रयास करें।

 

संत पापा ने धर्माध्यक्षों को अपनी प्रेरिताई को भली-भांति कर पाने के लिए ईश्वर की कोमलता पर चिंतन करने का परामर्श दिया तथा उन्हें स्पष्ट लक्ष्य, हृदय की पारदर्शिता तथा प्रसन्नचित चेहरा वाला धर्माध्यक्ष बनने की आवश्यकता बतलायी। उन्होंने कहा कि वे अपारदर्शिता से न घबरायें क्योंकि अपने कार्य को आगे बढ़ाने हेतु कलीसिया को अंधकार की कोई आवश्यकता नहीं है। आप जागते रहें ताकि दुनियादारी की उदास धुंध से आपका उद्देश्य अंधकारमय न हो जाए। तुच्छ भौतिकतावाद अथवा गुप्त समझौतों की मोहक भ्रम से अपने आपको भ्रष्ट होने से बचायें। इसी दुनिया में ईश्वर चाहते हैं कि हम अपने लोगों की चीख सुन सकें। यह एक ऐसी चीख है जिसका प्रत्युत्तर दिया जाना चाहिए कि ईश्वर का अस्तित्व अब भी है जो येसु ख्रीस्त में प्रकट हुआ है। ईश्वर सच्चाई है जिनपर हमें निर्माण करना।

संत पापा ने धर्माध्यक्षों को विश्वासियों के लिए साक्ष्य बनने की सलाह दी तथा व्यर्थ की बातों एवं योजनाओं में शक्ति नहीं गवाँने को कहा। ″अपने आपको गपशप और बदनामी से बचायें।″ उन्होंने पुरोहितों के प्रति उनके दायित्वों का भी स्मरण दिलाया तथा कहा कि पिता के कार्यों से दूर होकर हम अपनी पहचान खोते हैं तथा अपनी गलतियों से उनकी कृपा को खाली करते हैं।

संत पापा ने धर्माध्यक्षों को युवाओं का विशेष ख्याल रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा, ″आपका उद्देश्य युवाओं से मुलाकात करने, उन्हें प्रेम करने तथा युवा किस चीज की खोज करते हैं उसे समझने में सक्षम होना चाहिए।″

संत पापा ने धर्माध्यक्षों को चुनौती दी कि वे नैतिकता को कम महत्व न दें और न ही मादक पदार्थो के अवैध व्यापार जैसे असामाजिक चुनौतियों को बढ़ावा दें।

संत पापा ने धर्माध्यक्षों को अपने रेवड़ के बीच एकता स्थापित करने के लिए उन्हें हमेशा और सिर्फ ख्रीस्त पर आस्था रखने की सलाह दी। 

उन्होंने कहा कि प्रेरिताई का क्षेत्र व्यापक है तथा उसे आगे ले चलने के लिए अनेक उपाय अपनाने पड़ते हैं अतः उन्होंने धर्माध्यक्षों से अपील की कि वे विश्वासी समुदाय की रक्षा करें उनके बीच एकता को बनाये रखें। उन्होंने कहा कि एकता ही कलीसिया का असल रूप है तथा एक चरवाहा इस सच्चाई को प्रमाणित करता है। हमारे लिए ख्रीस्त ही एक मात्र प्रकाश हैं, जीवन्त जल के स्रोत। उन्होंने शुभकामनाएँ की कि वे एक साथ ख्रीस्त के प्रकाश को फैलायें।

संत पापा ने धर्माध्यक्षों के कार्यों की सराहना की जो विस्थापन जैसी इस युग की बड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कलीसिया की लाखों पुत्र -पुत्रियाँ हैं जो विस्थापित हैं। उन्होंने धर्माध्यक्षों को उनकी सुधि लेने हेतु कहा कि वे सीमा पार कर उन लोगों तक पहुँचें तथा उन्हें दृढ़ता प्रदान करें । उन्होंने उन्हें सच्चे चरवाहे का साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा जो मानवीय स्रोतों तक ही सीमित नहीं होता।
(Usha Tirkey)

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