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परिवार को कमज़ोर करनेवाली विचारधाराओं का सन्त पापा फ्राँसिस ने किया खण्डन

In Church on February 16, 2016 at 4:44 pm

तूक्सला गुटियेरेस, मंगलवार, 16 फरवरी 2016 (सेदोक): मेक्सिको के दक्षिण पूर्वी क्षेत्र स्थित  तूक्सला गुटियेरेस नगर के स्टेडियम में मेक्सिको के परिवारों से मुलाकात कर सन्त पापा फ्राँसिस ने उनके साक्ष्य सुनें तथा उन विचारधाराओं का खण्डन किया जो परिवार की संरचना को कमज़ोर बनाते हैं।

परिवार सम्मेलन में उपस्थित परिवारों को सम्बोधित शब्दों में सन्त पापा फ्राँसिस ने आधुनिक समाज में व्याप्त उन भ्रष्ट विचारधाराओं की उपस्थिति के प्रति सचेत कराया जो समग्र समाज के स्वास्थ्यकर आधार अर्थात् परिवार को नष्ट करती हैं तथा उनके अलगाव को प्रश्रय देती हैं।

परिवारों के साक्ष्य सुनने के उपरान्त उन्होंने उनसे कहा, “चियापास की धरती पर पैर रखने के लिये मैं आभारी हूँ। इस धरती पर जो आपके कारण परिवार की खुशबू से, घर की खुशबू से परिपूर्ण है।”

उन्होंने कहा, “मेरा विश्वास है कि पवित्रआत्मा हमारे बीच अनवरत ऐसा ही करना चाहते हैं, वे हममें एक नया हृदय रखना चाहते हैं। हमें हमारी आशा आकाँक्षाओं तथा जीवन के निर्माण हेतु प्रेरित करते हैं क्योंकि इसी में घर और परिवार का मर्म छिपा है।”

साक्ष्य प्रस्तुत करनेवाले युवा मानुएल एवं युवती बियात्रीचे को सम्बोधित शब्दों में सन्त पापा ने कहा, “मानुएल तुमने मुझसे उन अनेक किशोरों के लिये प्रार्थना की याचना की है जो भ्रम में पड़े हैं, ग़लत रास्ते निकल चुके हैं, थक चुके हैं तथा आशाविहीन हो चुके हैं। ऐसा व्यवहार एकाकीपन की भावना से उत्पन्न होता है और इस पर मुझे बियात्रीचे की बात याद आती है जिसने कहा कि हमारा जीवन संघर्ष अनिश्चित्तताओं एवं एकाकीपन के कारण और अधिक कठिन हो जाता है।”

सन्त पापा ने कहा, “अनिश्चित्तता और जीवन की प्राथमिक आवश्यकताओं का न होना प्रायः निराशा का कारण बनता है और हमें गहनतम ढंग से उत्कंठित कर देता है, विशेष रूप से, जब हम पर बच्चों की देखरेख का भार होता है। अनिश्चित्तता हमारे भौतिक जीवन को ही नहीं अपितु हमारी आत्मा को भी जोखिम में डाल देती है, हमें हताश कर देती है तथा हमारी ऊर्जा को नष्ट कर देती है।”

अनिश्चित्तता को दूर करने का समाधान सुझाते हुए सन्त पापा ने कहा, “इसके लिये एक ओर ज़रूरी है ऐसे कानूनों की जो परिवारों को सुरक्षा प्रदान करें तो दूसरी ओर ज़रूरत है सेवा और उदारता की जो ईश प्रेम का अनुभव कराती हैं।”

सन्त पापा ने कहा, “यह सच है कि परिवार में रहना सब समय सरल नहीं होता और प्रायः यह दुःख कष्टों से भरा होता है, तथापि, जैसा कि मैं सदैव कलीसिया के लिये कहता रहा हूँ मैं अलगाववाद एवं प्रेम के भय से बीमार समाज के बजाय ऐसे परिवारों को पसन्द करता हूँ जो दिन ब दिन अपने कार्यों द्वारा प्रेम की अभिव्यक्ति का प्रयास करते हैं। भोगविलास के नशे में चूर आत्ममोही समाज के बजाय ऐसे परिवार को मैं पसन्द करता हूँ जो प्रतिदिन नये सिरे से अपने जीवन को संवारना आरम्भ करता है।”


(Juliet Genevive Christopher)

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