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संत पापा परिवारों से मिले और उनका साक्ष्य सुना

In Church on February 16, 2016 at 4:38 pm

मेकेसिको, मंगलवार, 16 फरवरी 2016 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने मेक्सिको की प्रेरितिक यात्रा के दौरान सोमवार 15 फरवरी को टूक्सट्ला गुटेरेज़ स्थित स्टेडियम में परिवारों के साथ मुलाकात की जहाँ चार परिवारों ने अपना साक्ष्य प्रस्तुत किया।

पहला साक्ष्य हूमबेरतो तथा क्लौदिया गोमेज़ के परिवार ने दी जो तलाक के बाद नये संबंध से स्थापित है। उन्होंने कहा, ″हम हूमबेरतो तथा क्लौदिया गोमेज हैं। हूमबेरतो अविवाहित था और क्लौदिया 3 बच्चों के साथ तलाक शुदा। न्यायालय में हमारी शादी के 16 साल हो चुके हैं तथा प्रभु ने हमें आशीर्वाद दी और हमारा बेटा पैदा हुआ जो अब 11 साल का हो चुका है तथा अभी वेदी सेवक है।

उन्होंने बतलाया कि यद्यपि उनके बीच प्रेम का संबंध था तथापि वे कलीसिया से अलग थे किन्तु डी. वी. सी में शामिल होने के द्वारा उन्हें प्रभु की वाणी सुनाई पड़ी जिसके कारण विगत तीन सालों से पुनः गिरजा आ रहे हैं। उन्होंने बतलाया कि गिरजा आकर उन्हें प्रभु का स्नेह और लोगों का सहयोग एवं प्यार प्राप्त होता है।

उन्होंने साक्ष्य में कहा कि डीवीसी द्वारा वे जरूरतमंद लोगों की मदद करते हैं तथा उन्हें ईश्वर का प्रेम बांटते हैं। उन्होंने कहा कि प्रभु अनोखे हैं तथा हमें सेवा करने का अवसर प्रदान करते हैं। परिवार एवं वैवाहिक जीवन अति सुन्दर बन जाते हैं जब उनके केंद्र में ईश्वर होते हैं।

दूसरा साक्ष्य एक कुंवारी माता बीयात्रिज़ का था। उन्होंने कहा, ″मैं एक नर्स हूँ तथा कुँवारी माँ। मैं बारह में तीसरी संतान हूँ। बचपन में गरीबी, हिंसा तथा पिता की उपेक्षा का सामना करना पड़ा। मैं किशोरावस्था में ही गर्भवती हो गयी जिसके कारण समाज से बहिष्कार का सामना करना पड़ा। मैंने उदासी तथा एकाकी पन का गहरा अनुभव किया।

उन्हें ईश्वर के प्रेम का एहसास तब हुआ जब उसने गिरजाघर में प्रभु की वाणी सुनी। नर्स होने के कारण उसे कई बार दूसरों के गर्भपात में साथ देने का प्रलोभन मिला किन्तु ईश्वर की कृपा से उस पर विजय पायी। उन्होंने कहा कि सच्चा आनन्द वह नहीं है जिसे समाज देती है। हम उसे तब तक प्राप्त नहीं कर सकते हैं जब तक कि पिता के प्रेम, कलीसिया की दया तथा ख्रीस्त द्वारा पापों की क्षमा से दूर होते हैं।

परिवार का अगला साक्ष्य एक विकलांग किशोरी मैनुएल ने दिया। उसने संत पापा को विकलांग लोगों के करीब होने के लिए धन्यवाद दिया। मैनुएला ने बतलाया कि वह 14 वर्ष की है, अपने जीवन की शुरूआत में एक सामान्य बालिका की तरह थी किन्तु पाँच वर्ष होते-होते उसके शरीर में कमजोरी परिलक्षित होने लगी जिसने उसे व्हिल चेर पर बैठा दिया। उसने बतलाया कि अन्य बच्चों की तरह कुछ भी नहीं कर पाने के कारण वह बहुत दुःखी थी किन्तु माता-पिता ने उदासी दूर किया तथा आशा प्रदान की। मनुएला ने बतलाया कि वह अब इसे ईश्वर का विशेष आशीर्वाद मानती है। मैंने ईश्वर पर विश्वास किया तथा गिरजा जाना आरम्भ किया तथा वहाँ किशोर बच्चों के साथ आनन्द का अनुभव करती हूँ।

परिवारों के साक्ष्य में अंतिम साक्ष्य तापाकुला धर्मप्रांत के एक परिवार का था। उन्होंने बतलाया कि उनका वैवाहिक जीवन 50 वर्षों से भी अधिक हो चुका है। उन्होंने परिवार में प्रार्थना तथा ईश वचन को स्थान दिया है। उन्होंने संस्कारों में भाग लेने के महत्व को समझा है तथा एक-दूसरे को ईश्वर के उपहार के रूप में स्वीकार करना सीखा है।


(Usha Tirkey)

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