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संत पापा ने दी समानता और प्रतिष्ठापूर्ण समाज के निर्माण की सलाह

In Church on February 18, 2016 at 4:06 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 18 फरवरी 2016 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने मेक्सिको की प्रेरितिक यात्रा के अंतिम दिन 17 फरवरी को मेक्सिको के स्वीदाद स्वारेस स्थित पालात्सेत्तो स्पोर्त में श्रमिक जगत के विभिन्न संगठनों तथा वाणिज्य और व्यापार संघों के 3,000 प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उन्हें आदर्श मेक्सिको के निर्माण की प्रेरणा प्रदान की।उन्होंने कहा, ″मैं स्वारेस की इस भूमि पर आप से मुलाकात करना चाहा क्योंकि इस शहर का श्रमिक जगत से खास संबंध है। मैं कृतज्ञ हूँ न केवल आपके स्वागत भाषण और चिंता, आनन्द एवं परेशानी के साक्ष्य के लिए किन्तु उस अवसर के लिए भी कि हम एक साथ चिंतन कर रहे हैं।″

संत पापा ने भविष्य निर्माण तथा स्थायी संबंधों के लिए आवश्यक ढांचा प्रदान करने में सक्षम बनाने हेतु वार्ता, मुलाकात तथा बेहतर विकल्प एवं बीते अवसरों को महत्व दिये जाने को, एकमात्र रास्ता करार दिया।

संत पापा ने कहा, ″आज यहाँ विभिन्न प्रकार के श्रमिक संगठन तथा वाणिज्य और व्यापार संघ उपस्थित हैं। पहली नजर में यह एक विरोधाभास के समान प्रतीत होता है किन्तु सभी एक ही प्रकार की जिम्मेदारी से बंधे हैं, ‘रोजगार के अवसर उत्पन्न करने की खोज’ करने की जिम्मेदारी। जो समाज के लिए प्रतिष्ठापूर्ण एवं लाभदायक है, विशेषकर, यहाँ के युवाओं के लिए। यहाँ की एक गंभीर समस्या है युवाओं के लिए अध्ययन के अवसर की कमी तथा सुविधाजनक नौकरी का अभाव जो उन्हें भविष्य में काम करने का अवसर प्रदान करे। इसी अभाव से उत्पन्न गरीबी उन्हें मादक पदार्थों की अवैध तस्करी तथा हिंसा के लिए बढ़ावा देता है। यह एक विलासिता है जिसे कोई बर्दाश्त नहीं कर सकता।

संत पापा ने कहा कि दुर्भाग्यवश, यह युग जिसमें हम जी रहे हैं, आर्थिक उपयोगिता के प्रतिमान को व्यक्तिगत संबंध के रूप में थोपता है तथा अधिक से अधिक लाभ अर्जित करने, तत्काल और किसी भी हालत में प्राप्त करने की प्रचलित मानसिकता का समर्थन करता है। जिसके द्वारा न केवल व्यापार का नैतिक आयाम खोता किन्तु यह भी भूला दिया जाता है कि एक उत्तम निवेश हम व्यक्ति अथवा परिवारों में भी कर सकते हैं। संत पापा ने कहा कि सबसे उत्तम निवेश है अवसर का निर्माण।

संत पापा ने कलीसिया की सामाजिक धर्मशिक्षा के सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अक्सर आपत्ति जतायी जाती है कि यह शिक्षा उदार संगठनों के लिए होना चाहिए किन्तु उन्होंने कहा कि कलीसिया की धर्मशिक्षा का एक मात्र उद्देश्य लोगों की सच्चाई एवं समाज के ढाँचे की रक्षा करना है। किसी भी कारण से जब कभी यह सच्चाई संकट में पड़ जाती अथवा उपभोग की वस्तु तक सीमित हो जाती है तो कलीसिया की धर्मशिक्षा एक नबी की आवाज बनकर हम सभी को महत्वाकांक्षा की मोहक समुद्र में खोने से बचाती है। जब कभी व्यक्ति की प्रतिष्ठा का हनन होता तब समाज का भी पतन होता है। यह सिद्धांत किसी के विरूद्ध नहीं है किन्तु इसमें सभी लोगों की भलाई है। सभी विभागों का दायित्व है कि वे लोगों के हित का ख्याल रखे क्योंकि हम सभी एक नाव पर सवार हैं। हम सभी को यह सुनिश्चित करने हेतु मेहनत करना है कि कार्य मानव के हित में हो तथा भविष्य की आशा प्रदान करे। समाज निर्माण हेतु स्थान एवं उसमें सभी लोगों की सहभागिता हो। संत पापा ने कहा कि संस्कृति बहुधा तनाव से उत्पन्न होती है जो नये प्रकार के संबंधों को जन्म देती है और अंततः एक नये प्रकार के राष्ट्र का निर्माण होता है।

संत पापा ने श्रमिक जगत से प्रश्न किया कि हम अपने बच्चों के लिए किस प्रकार की दुनिया छोड़ना चाहते हैं? निश्चय ही, यह हमारी अपनी क्षितिज है जिसके लिए हमें मिलकर कार्य करना है। यह हमेशा उत्तम है कि जो अच्छी चीज हम अपने बच्चों के लिए छोड़ने की सोचते हैं वह दूसरों के लिए भी सोचें। हम अपने बच्चों के लिए किस प्रकार का मेक्सिको छोड़ना चाहते हैं क्या हम शोषण, अपर्याप्त वेतन, कार्य स्थल में प्रताड़ना आदि की यादें छोड़ना चाहते हैं अथवा एक ऐसी संस्कृति जो सम्मानपूर्ण कार्य, उत्तम छत एवं काम करने लायक जमीन की याद दिलाती है। क्या हमारे बच्चे भ्रष्टाचार, हिंसा, असुरक्षा और संदेह से दूषित हवा को सांस लेंगे है अथवा विकल्प, नवीनीकरण तथा परिवर्तन उत्पन्न करने में समर्थ हवा को।

संत पापा ने कहा कि जो मुद्दे उठाये गये हैं वे आसान नहीं हैं किन्तु भविष्य को भ्रष्टाचार, निष्ठुरता तथा असमानता के हाथों छोड़ना बदतर है। यद्यपि सभी दलों को एक साथ मिलाना आसान नहीं है तथापि सम्भव है कि समझौता और एक-दूसरे की सराहना के अभाव का परिणाम  अधिक बुरा सिद्ध हो सकता हैं। प्रतिस्पर्धा की दुनिया में निश्चय ही यह आसान नहीं है किन्तु इस प्रतिस्पर्धा को लोगों का भाग्य बिगाड़ने देना बुरा है। मानव व्यक्ति से बढ़कर लाभ अच्छा नहीं हो सकता उन्हें सार्वजनिक हित समर्थक होना चाहिए। जब सार्वजनिक वस्तु को मात्र लाभ के लिए प्रयोग किया जाता है उसका एक परिणाम ‘बहिष्कार’ ही हो सकता है।

संत पापा ने लोगों को एक ऐसे मेक्सिको के निर्माण की सलाह दी जहाँ सभी समानता की भावना रख सकें तथा एक-दूसरे को ईश्वर की संतान की गरिमा से देख सकें।


(Usha Tirkey)

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