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संत पापा को सवाल एवं चित्रकला भेजने में राँची की मानसी एक्का

In Church on February 25, 2016 at 3:33 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 25 फरवरी 2015 (न्यूज़ भा): संत पापा फ्राँसिस ने विश्व भर से विभिन्न बच्चों द्वारा प्रेषित 30 सवालों का उत्तर दिया है जिन्हें लोयोला प्रेस द्वारा 1 मार्च को ‘प्यारे संत पापा फ्राँसिस’ (डियर पॉप फ्राँसिस) शीर्षक किताब में प्रकाशित किया जाएगा।अमरीका के इस जेस्विट प्रकाशन केंद्र ने, संत पापा के पास यह विचार गत वर्ष रखा था जिसका उन्हें सकारात्मक जवाब भी मिला। तब उन्होंने दुनिया भर के जेस्विटों से आग्रह किया कि वे 6 से 13 साल के बच्चों के प्रश्नों को जमा करें। उन्होंने बच्चों को चित्रांकन भी भेजने हेतु प्रोत्साहन दिया। उन्हीं प्रश्नों, संत पापा द्वारा उनके जवाब तथा बच्चों के चित्रांकन को ‘प्यारे संत पापा फ्राँसिस’नामक किताब में संकलित किया गया है।

ज्ञात हो कि इस प्रतियोगिता में 26 देशों से 14 भाषाओं में 259 सवाल जमा हुए थे। किताब के सम्पादक फादर पौल कम्पबेल एस. जे ने अपनी समिति के साथ उन सवालों का चयन किया जिन्हें संत पापा के पास भेजा जा सके।

झारखंड की 12 वर्षीय मानसी एक्का ने इस बाल प्रतियोगित्ता में भाग लेकर भारत का नाम रोशन किया। उसने चित्रकला में बेहतर प्रदर्शन द्वारा उन 14 बच्चों के बीच अपना नाम दर्ज करा लिया जिन्हें रोम में संत पापा फ्राँसिस से व्यक्तिगत मुलाकात करने का सुअवसर प्राप्त हुआ।

फादर कम्पबेल ने किताब के बारे बतलाते हुए वाटिकन रेडियो से कहा, ″किताब में हमने एक बात का जिक्र किया है कि ‘छोटे बच्चों के सवाल बड़े हैं।’″

उन्होंने कहा, ″जी हाँ ये सवाल छोटे बच्चों के हैं किन्तु अत्यन्त गम्भीर। संत पापा ने यह स्पष्ट रूप से कहा है कि इस सवालों का उत्तर देना सचमुच कठिन था।″

फादर कम्पबेल ने बतलाया कि बच्चों के सवालों का उत्तर देने में संत पापा की एक खूबी स्पष्ट परिलक्षित हुई है और वह है विश्व के पीड़ित बच्चों के प्रति उनकी गहन सहानुभूति।

उन्होंने कहा, ″मैं याद करता हूँ कि वह अमरीका का विलियम था जिसने संत पापा से यह प्रश्न किया था कि ‘यदि आप एक चमत्कार कर सकते तो वह कौन सा चमत्कार होता? जिसका उत्तर देते हुए संत पापा ने कहा है कि वे बच्चों के दुःख को रोक देते।″ फादर ने कहा कि इसे साफ जाहिर होता है कि संत पापा का हृदय दुःख झेल रहे लोगों के प्रति सहानुभूति से पूर्ण है।

फादर के अनुसार किताब का मकसद दुःख झेल रहे वालों के लिए आशा प्रदान करने का एक छोटा रास्ता है। उन्होंने कहा कि संत पापा उन बच्चों, युवाओं और सभी लोगों तक पहुँचना चाहते हैं जो कष्टमय स्थिति में हैं। इसके द्वारा वे हमें यह बतलाना चाहते हैं कि यद्यपि वे दुखों का रहस्य नहीं समझते किन्तु इस बात पर अवश्य विश्वास करते हैं कि येसु ने हमारे लिए दुःख उठाया है और यही विश्वास हमें आशा और दिलासा प्रदान कर सकता है।


(Usha Tirkey)

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