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पुरोहित पुनर्मिलन संस्कार में बाधक ‘कठोरता’ में बदलाव लायें

In Church on March 5, 2016 at 3:54 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 5 मार्च 2016 (एशियान्यूज़): संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार 4 फरवरी को संत पेत्रुस महागिरजाघर में पश्चाताप की विशेष धर्मविधि का अनुष्ठान किया। उन्होंने विश्वासियों को उस व्यवहार तथा कठोरता में बदलाव लाने की सलाह दी जो पुनर्मिलन संस्कार में भाग लेने हेतु येसु की उपस्थिति को देख पाने में बाधक है।

उन्होंने कहा, ″हमें क्या करना चाहिए उन स्त्री एवं पुरुषों की मदद के लिए जो एक पिता को प्राप्त करने हेतु पुनर्मिलन संस्कार के लिए आते हैं। हम एक ऐसे पिता का स्वभाव धारण करें जो उनका इंतजार करता तथा उन्हें क्षमा कर देता है।″

संत पापा ने ‘24 घंटे प्रभु के लिए’ प्रार्थना की शुरूआत करते हुए धर्मविधि के दौरान खुद पुनर्मिलन संस्कार में भाग लेकर, अपने पापों की क्षमा प्राप्त की तथा पापमोचक के रूप में विश्वासियों के लिए पुनर्मिलन संस्कार भी प्रदान किया।

पश्चाताप की धर्मविधि के दरमियान उन्होंने प्रवचन में प्रस्तावित पाठ पर चिंतन किया जहाँ अंधा बरतेमेयुस का येसु से मुलाकात की घटना का जिक्र है। उन्होंने कहा, ″इस सुसमाचार पाठ का हमारे जीवन में विशेष महत्व है क्योंकि हम भी अपने को बरतेमेयुस के समान पाते हैं। उसके अंधेपन ने उसे ग़रीब बना दिया तथा उसे शहर के बाहर जीवन जीने हेतु मजबूर कर दिया। उसे अपनी हर आवश्यकता के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था।″

संत पापा ने कहा कि पाप का प्रभाव भी ऐसा ही है। यह हमें शक्तिहीन और एकाकी बना देता है। यह आत्मा का अंधापन है जो हमें देखने से रोक देता है कि कौन सी बात अधिक महत्वपूर्ण है। उस प्रेम को देख पाने नहीं देता जो हमें जीवन प्रदान करता है। यह अंधापन हमें धीरे-धीरे सतही बनाकर, दूसरों की भलाई करने के प्रति उदासीन कर देता है।

संत पापा ने कहा, ″यह विश्वास करना कितना मूर्खतापूर्ण है कि जीवन सिर्फ हमारी भौतिक वस्तुओं, सफलताओं तथा समर्थन पर ही निर्भर है। जब हम मात्र अपने आप को देखते हैं तो हम अंधे, बेजान तथा आत्मकेंद्रित होकर सच्चा आनन्द एवं स्वतंत्रता से वंचित हो जाते हैं।

संत पापा ने विश्वासियों से कहा कि हम भी उसी भिखारी की तरह ईश्वर के प्रेम की भिक्षा मांगें तथा अपने पास से गुजरते हुए उनसे अपने आप को वंचित होने न दें। देख पाने की हमारी सच्ची चाह की आवाज ऊंची करें। करूणा की जयन्ती ईश्वर का स्वागत करने हेतु एक सुनहरा समय है। हमें सुरक्षा का एहसास कराने वाली सभी वस्तुओं का परित्याग करते हुए हम बरतेमेयुस के समान येसु की ओर आगे बढ़े तथा प्यार किये गये पुत्र-पुत्रियों की तरह अपनी प्रतिष्ठा को पुनः प्राप्त करें।

संत पापा ने पुरोहितों को सम्बोधित कर कहा कि वे उन सभी लोगों की आवाज सुनने के लिए बुलाये गये हैं जो प्रभु से मुलाकात करना चाहते हैं और बहुधा दबे होते हैं। उन्होंने कहा, ″हमें पुनः अपने व्यवहार पर गौर करने की आवश्यकता है क्योंकि यह कई बार लोगों को येसु के करीब लाने में मदद नहीं करता। कार्यक्रमों की लम्बी सूची के कारण हम लोगों से मिल नहीं पाते हैं। हमारी कठोरता उन्हें ईश्वर से दूर कर सकती है।″ उन्होंने उन्हें पिता के समान स्वभाव धारण करने की सलाह दी। संत पापा ने पुरोहितों को प्रेरितों के समान लोगों की मदद करने का परामर्श दिया जिन्होंने बरतेमियुस को येसु के पास आने में मदद की। उन्होंने कहा कि हम उन्हें प्रेरित करने, सहयोग देने तथा येसु के पास ले जाने के लिए भेजे गये हैं अतः जो कोई इस संस्कार में भाग लेने आते हैं वे पुरोहितों में, एक इंतजार करने तथा क्षमा प्रदान करने वाले पिता को प्राप्त कर सकें।

संत पापा ने कहा कि जब हम येसु के करीब आते हैं तो हम पुनः देख सकते हैं जो हमें भविष्य की आशा प्रदान करता तथा आगे बढ़ने हेतु नयी शक्ति और साहस देता है। संत पापा ने प्रत्येक विश्वासी को एक विश्वस्त शिष्य की तरह येसु का अनुसरण करते हुए ईश्वर के करुणावान प्रेम और आनन्द का अनुभव करने की सलाह दी।


(Usha Tirkey)

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