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लेने नहीं देने में असल सुख

In Church on March 10, 2016 at 3:23 pm

अरिच्चा, बृहस्पतिवार, 10 मार्च 2016 (वीआर अंग्रेजी): कलीसिया की सम्पति के प्रति पारदर्शिता तथा भूख एवं भोजन नष्ट करने की प्रवृति से संघर्ष, ये थे चालीसा काल में रोम के बाहर अरिच्चा में, संत पापा फ्राँसिस एवं परमधर्मपीठीय रोमी कार्यालय के धर्माधिकारियों के लिए के आध्यात्मिक साधना में 6 वें दिन के चिंतन का विषय।आध्यात्मिक साधना के संचालक फादर एरमेस रोन्की ने अपने प्रवचन में, सुसमाचार के दस प्रश्नों पर प्रकाश डालते हुए बुधवार को रोटी बांटने के सवाल पर चिंतन किया, ″आपके पास कितनी रोटियाँ हैं?″ (मती.15:34, मार.6:38)

उन्होंने कहा, ″ख्रीस्तीयों के लिए सबसे दुःख की बात क्या है? ‘एक पुरोहित का धन पर आसक्त हो जाना’ जबकि उन्हें ‘अपनी रोटी बांटने’ के द्वारा सबसे अधिक खुशी मिलती है।

फादर रोन्की ने कहा, ″जीवन की शुरूआत भूख से होती है। यदि जीवित रहना है जो भूख का अनुभव होना चाहिए और यदि हम उसे एक कदम आगे जाएँ तो हम दुनिया के लाखों भूखे लोगों को पायेंगे। लाखों लोग हाथ पसारे कुछ खाने के लिए मांग रहे हैं। वे धार्मिक उपदेश की मांग नहीं करते, कलीसिया इसका उत्तर किस तरह दे रही है?

सुसमाचार में रोटियों और मछलियों के चमत्कार के पाठ में किया गया सवाल, उस बात की ओर संकेत करता है कि येसु जब अपने शिष्यों से रोटियों की संख्या के बारे पूछते हैं तो यह उनका एक बहुत ही व्यवहारिक शिक्षा थी।

फादर ने कहा कि सभी शिष्य और आज के शिष्य भी, अपने पास की सम्पति का हिसाब रखने के लिए प्रेरित किये जाते हैं। हमारे पास कितने रूपये हैं? कितने घर हैं? जीने का स्तर क्या है? यह भी देखना है कि हमारे पास कितनी कारें हैं तथा क्रूस अथवा अंगुठी के रूप में हमारे पास श्रृंगार के कितनी वस्तुएँ हैं।″ उन्होंने कहा कि पुरोहितों को पारदर्शिता से नहीं घबराना चाहिए।

फादर रोन्की ने उपदेश में कहा कि यदि हम पारदर्शी हैं तो हम ईमानदार हैं और जब हम ईमानदार हैं तो स्वतंत्र भी।

 

उन्होंने कहा कि येसु का मनोभाव देने का था न कि जमाखोरी का। सुसमाचार में प्यार करने का अर्थ है देना। रोटियों और मछलियों का चमत्कार दिखाता है कि येसु के लिए रोटियों की संख्या नहीं बल्कि उसे लोगों के बीच बांटे जाने की चाह अधिक महत्वपूर्ण थी।

फादर रोन्की ने संत लूकस रचित सुसमाचार पाठ का हवाला देते हुए कहा, ″दो और तुम्हें भी दिया जाएगा,…″  येसु की यह प्रतिज्ञा, देने से प्राप्त रहस्यात्मक आपार धन के लिए है जिसमें वे हमें सौ गुणा लौटा देते हैं।

आध्यात्मिक संचालक फादर ने कहा कि पाँच रोटियों का उपहार दुनिया बदलने के लिए पर्याप्त है। उन्होंने यह कहते हुए अपना प्रवचन समाप्त किया, ″पाँच रोटियों एवं दो मछलियों का चमत्कार हमें प्रेरणा देती है कि सागर में एक बूंद भी जीवन को अर्थ और आशा प्रदान कर सकती है।″


(Usha Tirkey)

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