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‘रोता रोमाना’ के प्रशिक्षणार्थियों से संत पापा ने कहा

In Church on March 12, 2016 at 4:01 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 12 मार्च 2016 (वीआर सेदोक): ″मैं आप से अपील करता हूँ कि अपने कार्य को पेशा अथवा शक्ति की तरह न देखें किन्तु आत्माओं की सेवा के रूप में पूरा करें, विशेषकर, घायल लोगों के लिए।″ यह बात संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 12 मार्च को पौल षष्ठम सभागार में आपोस्तोलिक अदालत ‘रोता रोमाना’ के तत्वधान में आयोजित प्रशिक्षण में भाग ले रहे 700 प्रशिक्षणार्थियों से मुलाकात में कही।

परिवार की पृष्ठभूमि पर आधारित विगत धर्माध्यक्षीय धर्मसभा में विवाह की शुन्यता की प्रक्रिया में तेजी एवं प्रभावी उपाय अपनाने की बात पर बल दिया गया था। कई विश्वासियों को वैवाहिक जीवन में तनाव हो जाने के कारण कठिनाईयों से होकर गुजरना पड़ता है तथा वे इस संदेह के घेरे में रहते हैं कि क्या उनका विवाह मान्य था अथवा नहीं। ऐसे विश्वासियों के लिए कलीसिया के कानून तंत्र में जटिलता थी, जिसे सरल बनाये जाने की आवश्यकता महसूस की गयी थी।

संत पापा ने कहा कि उनके प्रति दया तथा उदारता का भाव अपनाते हुए एवं उनके अनुभवों पर चिंतन करते हुए कलीसिया ने विगत वर्ष ‘इयूदेक्स मितिस’ तथा ‘मितिस एत दोमिनुस येसुस मिसेरीकोरस येसुस’ नामक दो दस्तावेजों को अनुमोदन दिया है। इनका खास प्रेरितिक उद्देश्य है – उन विश्वासियों के प्रति कलीसिया की चिंता जो अपने वैवाहिक स्थिति के बारे शीघ्र जाँच कराना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि नया कानून लागू किया गया है तथा कलीसियाई अदालतों में गम्भीरता से ध्यान दिया गया है ताकि परिवारों के प्रति न्याय एवं उदारतापूर्ण सेवा प्रदान की जा सके। उन्होंने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण अवसर है कि इस प्रक्रिया द्वारा निराश व्यक्ति को उसकी निराशा से बाहर निकाल कर, जीवन में सुचारु रूप से आगे बढ़ने में मदद दिया जाए।

संत पापा ने सभी प्रशिक्षणार्थियों को सलाह दी कि इस प्रशिक्षण में उन्होंने जो सीखा है उसे अपने जीवन में अमल करें तथा कलीसिया के सर्वोच्च नियम का सदा ख्याल रखते हुए कार्य करें।  उन्होंने कहा कि कलीसिया एक माता है और वह ईश्वर के प्रेम, करुणा तथा आशा को अपने सभी विश्वासियों को प्रदान करना चाहती है। उन असफल विवाहों के घावों का मरहम पट्टी लगाते हुए  उन विवाहों का सम्मान करें जो कठिनाईयों के बावजूद अपने वैवाहिक संबंध में निष्ठावान बने रहे तथा अन्यों को भी ऐसे जीवन के लिए प्रोत्साहन दिया जाए। संत पापा ने उनसे अपील की कि वे अपने इस कार्य को पेशा अथवा शक्ति के रूप में न देखें किन्तु आत्माओं की सेवा के रूप में लें।


(Usha Tirkey)

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