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कितनी अंधेरी घाटियाँ हैं लेकिन येसु हमारे साथ हैं

In Church on March 14, 2016 at 3:46 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार, 14 मार्च 2016 (सेदोक) संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन के संत मार्था के प्रार्थनालय में सोमवार को अपने प्रातःकालीन मिस्सा बलिदान के दौरान प्रवचन में कहा कि रोम के ठंढ में बेघर व्यक्ति की मृत्यु, यमन में मदर तेरेसा की धर्मबहनों की हत्या, गोली-बारी स्थलों में लोगों की विकट जिन्दगी, ये हमारे जीवन की अंधेरी घाटियाँ हैं जिसका जवाब येसु ख्रीस्त के पास है। बच्चों की दुलर्भ बीमारी जिसे हम नहीं समझ सकते फिर भी आइये हम अपने को ईश्वर के हाथों में विश्वास के साथ सौंप दें क्योंकि वे अपने लोगों को कभी नहीं छोड़ते हैं।

नबी दानियल के ग्रंथ से प्रेरित संत पापा ने जोर देते हुए कहा कि सुसाना एक धर्मी नारी, दो न्यायकर्ताओं के दुष्ट विचारों का शिकार बनी लेकिन उसने ईश्वर में विश्वास किया और उन लोगों की इच्छा की उपेक्षा कर मरना पसन्द किया। जब हमें भी अन्धकारमय घाटी से होकर गुजरना होता है तो हमें डरने की जरूरत नहीं क्योंकि ईश्वर हमारे साथ चलते, वे  हमें प्यार करते और हमें कभी नहीं छोड़ते हैं।

संत पापा ने अंधेरी घाटियों का जिक्र करते हुए कहा, “आज भी हम इसे अपने जीवन में देखते हैं बहुत सारी मुसीबतें, असंख्य लोगों का भूखों मरना, बच्चों की विकलांगता, कितने सारी कठिनाइयाँ। माता-पिता से पूछिये कौन सी बीमारी है, किसी को नहीं पाता लेकिन यह एक दुलर्भ बीमारी कहलाती है। हम इन सारी चीजों का क्या कर सकते हैं, गोली बारी हो रहे जमीं पर लोगों की भयानक स्थिति जब हम इन सारी चीजों को देखते हैं तो हमारे जेहन में सवाल उठता हैं ईश्वर कहाँ हैं? क्या वे हमारे साथ चलते हैं? सुसाना की यही स्थिति थी और हमारी स्थिति भी यही है। आप चार धर्मबहनों के जीवन को देख सकते हैं जो प्रेम का जीवन व्यतीत करते थे घृणा के कारण गोलियों का शिकार हुई। जब आप देखते हैं कि प्रवासियों के लिए दरवाजे बन्द कर दिये जाते और उन्हे ठंढ़ में बाहर रहना पड़ता है तो ईश्वर आप कहाँ रहते हैं?”

संत पापा ने कहा “लेकिन जब हम इन चीजों को अपने रोज दिन के जीवन में देखते हैं तो कैसे हम अपने को ईश्वर को सौंप दे सकते हैं?” संत पापा ने कहा, “केवल इस सवाल का जवाब है लेकिन हम इसका वर्णन नहीं कर सकते। बच्चे क्यों बीमारी से पीड़ित हैं हम नहीं समझते यह हमारे लिए एक रहस्य है लेकिन यह हमें एक ज्योति प्रदान करती है हमारे दिमाग को नहीं वरन् हमारी आत्मा को।” गेतसेमानी बारी में येसु अपने पिता से प्रार्थना करते हैं कि यह प्याला मुझ से दूर हो जाये लेकिन आप की इच्छा पूरी हो। वे अपने पिता की इच्छा पर अपने को छोड़ देते हैं।  वे अपने को पिता के हाथों में सौंप देते हैं यह कहते हुए पिता मैं अपनी आत्मा तेरे हाथों में सौंप देता हूँ। यह येसु के अपने पिता में विश्वास को दिखलाता है। हम ईश्वर पर विश्वास करें जो हमारे साथ चलते हैं। हम नहीं जानते की ऐसा क्यों होता है लेकिन विश्वास में हम अपने को ईश्वर को सौंप दें।

बुराई सबकुछ नहीं हैं क्योंकि ईश्वर हमारे साथ हैं। संत पापा ने कहा, “जो ईश्वर में विश्वास करता है, जो भले चरवाहे हैं उसे किसी चीज की कमी नहीं होगी, यद्यपि उसे अंधेरी घाटी से होकर जाना पड़े। हमें मालूम है कि बुराई है लेकिन अन्त में ईश्वर हमारे साथ हैं। ईश्वर का डंडा हमारी साहस का कारण है। यह हमारे लिए कृपा है जिसे हम सभों को माँगने की जरूरत है। “येसु हमें अपने को तेरे हाथों में समर्पित करना सीखा। हमारे बुरे समय में, हमारी विपत्ति, अधंकार और हमारे मरण के समय में।

संत पापा ने कहा, “बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिनकी चिन्ता कोई नहीं करता। तीन दिन पहले सड़क पर एक बेघर व्यक्ति की मृत्यु हो गई, रोम के बीच शहर में जहाँ सहायता हेतु बहुत सारी सुविधाएं उपलवब्ध है। येसु ऐसा क्यों होता हैं? कोई सुधि नहीं लेता, संत पापा ने कहा, “लेकिन मैं सोचता हूँ कि आप मेरे साथ हैं और आप मुझे निराश नहीं होने देते।”


(Dilip Sanjay Ekka)

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