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हार्वर्ड विश्व मॉडल संयुक्त राष्ट्र के प्रतिभागियों को संत पापा का सम्बोधन

In Church on March 17, 2016 at 3:47 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 17 मार्च 2016 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने बृहस्पतिवार 17 मार्च को वाटिकन स्थित पौल षष्ठम सभागार में हार्वर्ड विश्व मॉडल संयुक्त राष्ट्र के प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए स्मरण दिलाया कि विश्व की समस्याओं का हमेशा ही मानव चेहरा रहा है।

हवार्ड विश्वविद्यालय द्वारा विश्व भर के उच्च विद्यालयों के विद्याथियों के लिए रोम में चार दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया था ताकि वे अंतरराष्ट्रीय संबंधों को सीख सकें।

उन्हें सम्बोधित कर संत पापा ने कहा कि उच्च विद्यालयों के विद्यार्थी होने के कारण उन्हें सत्य की खोज करने एवं समझदारी एवं विवेक में बढ़ने हेतु खास रास्ते का ज्ञान प्राप्त हो रहा है जो न केवल उनके व्यक्तिगत किन्तु उनके स्थानीय समुदायों एवं बृहद स्तर पर पूरे समाज लाभ के लिए है। संत पापा ने उन्हें स्मरण दिलाया कि वे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में सहयोग और एकजुटता के ढांचों के मूल्यों की सराहना करने हेतु बुलाये गये हैं।

उन्होंने कहा कि ये संरचनाएँ उस समय अधिक प्रभावशाली हो जाती हैं जब ये विश्व के कमजोर एवं हाशिये पर जीवन यापन कर रहे लोगों की सेवा हेतु संलग्न होती है।

संत पापा ने रोम में उनके इस आयोजन का महत्व बतलाते हुए कहा कि इस आयोजन में भाग लेकर उन्होंने न केवल कूटनीति के बारे सीखा अथवा संस्थागत प्रणालियों से परिचित हुए किन्तु विश्व भर के विभिन्न लोगों से मुलाकात की जो अपने साथ न सिर्फ आधुनिक युग की चुनौतियों का प्रतिनिधित्व करते बल्कि मानव परिवार की क्षमताओं एवं गुणों को भी प्रकट करते हैं।

संत पापा ने कहा कि प्रतिभागियों की विविधता अपने आप में विश्व में समस्याओं के मानव चेहरे का बड़ा प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि इन दिनों हम एक-दूसरे से बहुत कुछ सीख सकते हैं तथा हमारी दुनिया जिन समस्याओं से होकर गुजर रही है उसमें एक-दूसरे को साथ दे सकते हैं। इस समय लोग कई तरह की समस्याओं से गुजर रहे हैं। आज की सबसे बड़ी समस्या है हिंसा एवं असहिष्णुता जो बहुतों को शरणार्थी बनने के लिए मजबूर कर दिया है वे अपनी स्वतंत्रता से भी वंचित कर दिये गये हैं।

संत पापा ने प्रतिभागियों को सम्बोधित कर कहा कि समस्या से घिरे ये ही लोग हैं जिन्हें उनकी सहायता की आवश्यकता है जो मदद की गुहार लगा रहे हैं। वे न्याय, शांति और एकात्मता हेतु हमारे हर प्रयास के योग्य हैं।

उन्होंने कहा कि हम ख्रीस्तीय येसु द्वारा हमारे भाइयों एवं बहनों के लिए सेवक बनने हेतु बुलाये गये हैं। यह बुलावा न केवल काथलिकों के लिए है किन्तु समस्त विश्व के लिए क्योंकि यह मानवता के मूल में निहित हैं।


(Usha Tirkey)

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