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धर्माध्यक्ष सेवा का पद है सम्मान का नहीं

In Church on March 19, 2016 at 3:10 pm

 

वाटिकन सिटी, शनिवार, 19 मार्च 2016 (वीआर सेदोक): ″हमारे प्रभु येसु ख्रीस्त पिता द्वारा मानव मुक्ति के लिए भेजे गये, जिन्होंने बाद में बारह चेलों को दुनिया में भेजा ताकि वे पवित्र आत्मा की शक्ति से सभी लोगों के बीच सुसमाचार का प्रचार कर सकें तथा उन्हें एक चरवाहे के झुण्ड में ला सकें। उन्हें शुद्ध कर मुक्ति के रास्ते पर आगे ले चलें।″ यह बात संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 19 मार्च को संत पेत्रुस महागिरजाघर में, धर्माध्यक्षीय पावन अभिषेक समारोह के दौरान प्रवचन में कही।

ज्ञात हो कि संत पापा ने संत पेत्रुस महागिरजाघर में मोन्सिन्योर पीटर ब्रैन वेल्स तथा मोन्सिन्योर मिग्वेल एंजेल अयूसो ग्वीक्सोत का धर्माध्यक्षीय अभिषेक सम्पन्न किया।

इस अवसर पर संत पापा ने धर्माध्यक्षों की कलीसिया में जिम्मेदारियों के महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा, ″इस प्रेरितिक दायित्व को पीढ़ी दर पीढ़ी सुनिश्चित करने के लिए बारह प्रेरितों ने शिष्यों पर हाथ रखकर ख्रीस्त द्वारा प्राप्त पवित्र आत्मा के वरदान को उनपर हस्तांतरित किया जो एक संस्कार बन गयी। इस प्रकार जीवित कलीसिया की यह आरम्भिक परम्परा, धर्माध्यक्षों की निर्बाध उत्तराधिकार द्वारा आज भी मुक्ति के कार्य को जारी रखकर आगे बढ़ रही है। धर्माध्यक्ष  अपने पुरोहितों के माध्यम से महा पुरोहित ख्रीस्त की वही उपस्थिति लोगों के बीच प्रकट करते हैं।

संत पापा ने कहा कि ख्रीस्त द्वारा मुक्ति के सुसमाचार की घोषणा तथा विश्वासियों के पवित्रीकरण का कार्य धर्माध्यक्षों द्वारा आगे बढ़ता है। धर्माध्यक्षों के पितृत्व में ही ख्रीस्त कलीसिया रूपी अपने शरीर में नये सदस्यों को प्राप्त करते हैं तथा उनकी प्रज्ञा एवं विवेक के माध्यम से ईश्वर हमें पृथ्वी की तीर्थयात्रा द्वारा अनन्त आनन्द की ओर आगे ले जाते हैं।

संत पापा ने नये धर्माध्यक्षों को सम्बोधित कर कहा कि वे प्रभु द्वारा चुने गये हैं किन्तु विश्वासियों के बीच में से और उन्हीं की सेवा के लिए, ताकि ईश्वर के मध्यस्थ बन सकें। उन्होंने कहा कि धर्माध्यक्ष ″सेवा″ का पद है न कि सम्मान का। धर्माध्यक्ष गुरूवर प्रभु येसु के उस मनोभाव को धारण करते हैं जिसमे वे कहत हैं, ″तुम लोगों के बीच जो सबसे बड़ा है वह सबसे छोटा बने तथा जो शासक है वह सबका सेवक बने।″

संत पापा ने उनके दायित्वों का स्मरण दिलाते हुए कहा कि वे हर परिस्थिति में ईश वचन की घोषणा करें। प्रार्थना तथा बलिदान अर्पित कर लोगों के लिए पवित्रता तथा दिव्य वरदानों को प्राप्त करें। कलीसिया उन्हें एक विश्वस्त गड़ेरिये एवं ख्रीस्त के रहस्य के कारिंदे की तरह नियुक्त करती है। भला गड़ेरिया जो अपना प्राण अर्पित करने से नहीं हिचकते तथा परिवार की अच्छी देखभाल करने वाले पिता के उदाहरणों पर चलकर वे अपनी प्रजा का सदा ख्याल रखें।

संत पापा ने उन्हें परामर्श दिया कि वे ख्रीस्त के झुण्ड से बाहर के लोगों का विशेष ख्याल रखें क्योंकि वे भी प्रभु द्वारा उन्हें सौंपे गये हैं। अंततः उन्होंने कहा कि पवित्र आत्मा द्वारा धर्माध्यक्ष अपनी प्रजा की प्रेमपूर्ण देखभाल करें।


(Usha Tirkey)

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