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येसु ने करुणा को दृश्यमान और असीम प्रेम के रूप में प्रकट किया

In Church on April 6, 2016 at 2:29 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 6 अप्रैल 2016 (वीआ सेदोक): बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर, संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में विश्व के कोने-कोने से एकत्रित हजारों तीर्थयात्रियों को सम्बोधित किया।

उन्होंने इतालवी भाषा में कहा, ख्रीस्त में मेरे अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात,  पुराने व्यवस्थान से ईश्वर की करुणा पर चिंतन करने के पश्चात् अब हम गौर करेंगे कि किस तरह येसु ने उसे पूर्णता तक पहुँचाया। येसु, वास्तव में, ईश्वर की करुणा हैं जिन्होंने शरीर धारण किया। एक ऐसी दया जो पृथ्वी पर उनके जीवन के हरेक पल प्रकट हुई, महसूस की गयी तथा दूसरों तक पहुँचायी गयी। लोगों से मुलाकात करते, सुसमाचार का प्रचार करते, रोगियों को चंगा करते, दीन-दुखियों से मुलाकात तथा पापियों को क्षमा दान देने हुए येसु ने इसे एक दृश्यमान और असीम प्रेम के रूप में प्रकट किया। यह एक विशुद्ध, मुफ्त तथा परिपूर्ण प्रेम है। प्रेम जिसकी पराकाष्ठा क्रूस पर बलिदान से पूर्ण हुई। जी हाँ, सुसमाचार निश्चय ही, करुणा का सुसमाचार है क्योंकि येसु करुणा हैं।

येसु की प्रेरिताई यर्दन नदी में विनीत समर्पण से शुरू हुई जहाँ वे योहन से बपतिस्मा ग्रहण करने हेतु पापियों की पंक्ति में खड़े हुए। येसु की बपतिस्मा के समय पिता ने उनकी प्रेरिताई की पुष्टि दी जब उन्होंने पवित्र आत्मा को उनके ऊपर भेजा तथा कहा, ″तू मेरा प्रिय पुत्र है मैं तुमसे अत्यन्त प्रसन्न हूँ।″ (मती.1:11) संत पापा ने कहा कि हम इस रहस्य को क्रूस पर निहारते हुए चिंतन कर सकते हैं क्योंकि उसी क्रूस पर येसु ने संसार के पाप तथा हमारे पापों को पिता को चढ़ाया। क्रूस पर से येसु हमें दिखलाते हैं कि ईश्वर के करुणावान प्रेम से कोई भी वंचित नहीं रह सकता है। ″पिता इन्हें क्षमा कर क्योंकि ये नहीं जानते कि क्या कर रहे हैं।″ (लू.23:34)

अतः हमें अपने पापों को स्वीकार करने तथा मेल-मिलाप संस्कार में भाग लेने से कभी नहीं हिचकिचाना चाहिए क्योंकि मेल-मिलाप संस्कार हमें क्षमाशीलता की शक्ति को प्रस्तुत करता है जो क्रूस से बहता तथा हमारे जीवन में करुणा की कृपा को नवीकृत करता है जिसे येसु ने हमारे लिए अर्जित किया है। हमें अपनी दयनीय स्थिति से भय नहीं खाना चाहिए। क्रूसित येसु के प्रेम की शक्ति बाधाओं पर ध्यान नहीं देती और उनसे दूर कभी नहीं भागती है।

संत पापा ने भक्त समुदाय से कहा, ″प्रिय मित्रो, इस जयन्ती वर्ष में हम ईश्वर से कृपा की याचना करें कि सुसमाचार की शक्ति को अनुभव कर सकें। सुसमाचार की शक्ति जो परिवर्तित करती, ईश्वर के हृदय में प्रवेश कराती, क्षमा करने तथा विश्व को अच्छाई के दृष्टिकोण से देखने हेतु कृपा प्रदान करती है। यदि हम क्रूसित तथा पुनर्जीवित ख्रीस्त के सुसमाचार को स्वीकार करेंगे तो हमारे जीवन की आकृति नवीकृत करने वाले ख्रीस्त के प्रेम की शक्ति के अनुरूप बनेगी।

धर्मशिक्षा माला समाप्त करने के उपरांत उन्होंने भारत, इंगलैंड, स्कोटलैंड, एयरलैंड, डेनमार्क, निदरलैंड, नार्वे, केनिया, जिम्बाबे, ऑस्ट्रेलिया, चीन, मलेशिया, फिलीपींस,  इंडोनेशिया, थाईलैंड,  अमेरिका और देश-विदेश के तीर्थयात्रियों, उपस्थित लोगों तथा उनके परिवार के सदस्यों को विश्वास में बढ़ने तथा पुनर्जीवित प्रभु के प्रेम और दया का साक्ष्य देने की कामना करते हुए अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।


(Usha Tirkey)

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