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ईश्वर सम्मान के साथ उठने की शक्ति प्रदान करते

In Church on April 15, 2016 at 2:48 pm

ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा – OSS_ROM

15/04/2016 15:32
वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 15 अप्रैल 2016 (वीआर सेदोक): वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में शुक्रवार 15 अप्रैल को, संत पापा फ्राँसिस ने ख्रीस्तयाग अर्पित किया। उन्होंने प्रवचन में कहा कि एक कठोर हृदय जो पवित्र आत्मा के प्रति आज्ञापालन द्वारा उदार बनने का निर्णय लेता है, ईश्वर उसे उठने हेतु कृपा और सम्मान प्रदान करते हैं और यदि आवश्यक हो तो अपमान भी।

संत पापा ने कहा, ″धार्मिक कार्यों के प्रति उत्साह का अर्थ नहीं है कि व्यक्ति का हृदय ईश्वर के प्रति खुला है।″

प्रवचन में संत पापा ने प्रेरित चरित से लिए गये पाठ पर चिंतन किया जहाँ पौलुस के मन परिवर्तन की घटना का जिक्र है। यद्यपि वह अपने विश्वास में अत्यन्त उत्साही था किन्तु उसका हृदय ख्रीस्त के प्रति बंद था।

संत पापा ने कहा कि अपमान हृदय को पिघला देता है। अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए जब पौल सड़क पर गिर गया तो उसके लिए यह घटना एक इतिहास बन गया क्योंकि उसने ईश्वर को अपने हृदय परिवर्तन हेतु अनुमति दी। पौल एक चकाचौंध कर देने वाले प्रकाश की शक्ति से घिर गया था तब उसने एक आवाज सुनी और वह गिर गया। एक शक्तिशाली व्यक्ति भूमि पर गिर पड़ा और ऐसी स्थित में उसने उस सच्चाई को समझा कि मनुष्य को ईश्वर की बराबरी नहीं करनी चाहिए क्योंकि ईश्वर ने हम सभी की सृष्टि इसलिए की है कि हम सिर ऊँचा कर खड़े हो सकें। स्वर्ग से आती हुए आवाज ने न केवल पौल से ″तुम मुझपर क्यों अत्याचार करते हो″ का प्रश्न किया किन्तु उसे अपने चरणों के पास बुलाया। ″उठो और शहर जाओ। तुम्हें जो करना है वह तुम्हें बताया जायेगा।″ पौल जब उठने लगा तो उठ नहीं पाया, तब उसे मालूम हुआ कि वह देख भी नहीं पा रहा था। वह दूसरों के सहारे आगे बढ़ा तथा धारे-धीरे अपना हृदय द्वार खोला। भूमि पर गिर पड़ने बाद उसने तुरन्त महसूस किया कि उसे अपने अपमान को स्वीकार करना चाहिए। संत पापा ने कहा कि हृदय को खोलने का अच्छा उपाय है अपमान। ईश्वर हमें अपमानित होने देते हैं ताकि हम उदार और विनम्र बन सकें और प्रभु येसु को स्वीकार कर सकें। संत पापा ने कहा कि पौल के मन-परिवर्तन की घटना में पवित्र आत्मा का हाथ प्रमुख था। पवित्र आत्मा ही वह माध्यम है जो लोगों को कलीसिया की ओर ले चलता है। पौल ने भी बपतिस्मा संस्कार ग्रहण किया और वह पुनः देखने लगा तथा पवित्र आत्मा के प्रति आज्ञाकारी बन गया।

संत पापा ने कहा कि यह देखना कितना सुन्दर है कि ईश्वर किस तरह हृदय परिवर्तन करते हैं वे कठोर हृदय का स्पर्श कर उसे पवित्र आत्मा के प्रति आज्ञाकारी बना देते हैं।

संत पापा ने विश्वासियों से कहा कि हम सभी का हृदय भी कठोर है। हम ईश्वर से प्रार्थना करें कि अपमानित किये जाने पर हम अपनी कमज़ोरियों को देख सकें। ईश्वर हमारे लिए आवश्यक कृपादान प्रदान करें ताकि हम अपमान में पड़े न रहकर ऊपर उठ सकें तथा उस प्रतिष्ठा को प्राप्त कर सकें जिसे ईश्वर हमें प्रदान करते हैं। हम पवित्र आत्मा के प्रति आज्ञाकारी बन सकें।


(Usha Tirkey)

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