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एकजुटता में ही शरणार्थियों की जटिल समस्या का समाधान

In Church on April 16, 2016 at 3:32 pm

 

लेसवोस, शनिवार, 16 अप्रैल 2016 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने लेसवोस के अधिकारियों एवं वहाँ की जनता को सम्बोधित करते हुए उनके कार्यों की सराहना की।

उन्होंने कहा, मैं ग्रीक के लोगों की प्रशंसा करना चाहता हूँ अपनी कई बड़ी-बड़ी समस्याओं के बावजूद उन्होंने अपना हृदय और द्वार खोला है। कई साधारण लोगों ने अपने पास मौजूद थोड़े में से उन्हें बांटा है जिन्होंने अपना सब कुछ खो दिया। इस उदारता का बदला ईश्वर जरूर देंगे।

संत पापा ने कहा कि आपके द्वीप में अनेकानेक उदार स्वयंसेवक एवं कई संगठन हैं जो जनता के साथ मिलकर अपना योगदान दे रहे हैं तथा दृश्यमान रूप से अपने भ्रातृत्व को प्रकट कर रहे हैं।

संत पापा ने अधिकारियों से कहा कि इस विकट परिस्थिति में पड़े लोगों के प्रति आपके कर्तव्य एवं एकात्मता प्रदर्शित करने हेतु मैं अपना हार्दिक अपील दोहराता हूँ। आप्रवासी जो इस द्वीप तथा ग्रीक के अन्य जगहों में आयें हैं, वे आर्थिक संकट एवं भविष्य की अनिश्चितता के कारण चिंता, भय तथा निराशा से घिरे हैं। हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि आप्रवासी, लोगों का एक सामान्य आँकड़ा मात्र नहीं किन्तु व्यक्ति हैं जिनकी पहचान, नाम और अपना इतिहास है। यूरोप मानव अधिकार की भूमि है तथा जो कोई भी यहाँ पाँव रखता है उसे इसका अनुभव होना चाहिए अतः उन अधिकारों का सम्मान एवं रक्षा करना एक कर्तव्य बन जाता है। दुर्भाग्य से, कुछ लोग जिनमें बच्चे भी शामिल थे इन तटों पर, उसे महसूस नहीं कर पाये, वे समुद्र में डूब कर मर गये। असुरक्षा, अमानवीय परिवहन तथा बेईमानी के शिकार हो गये।

संत पापा ने लेसवोस वासियों से कहा कि यह भूमि सभ्यता का उद्गम स्थल है, मानवता का केंद्र। एक ऐसी मानवता जो सबसे पहले दूसरे भाई-बहनों को पहचानती है जो सेतु का निर्माण करना चाहती है और सुरक्षित महसूस करने के लिए दीवार का निर्माण नहीं करती। वास्तव में दीवार लोगों के सच्चे विकास के बदले विभाजन लाती है तथा विभाजन टकराव।

उन लोगों के साथ होने के लिए जो अपने घरों से भागने के लिए मजबूर हैं हमें इस नाटकीय स्थिति को ठीक करना होगा। यह काफी नहीं है कि हम तात्कालिक आवश्यकताओं तक ही सीमित हो जाएँ।

संत पापा ने कहा कि हमें राजनीतिक जिसका क्षेत्र व्यापक है उसके प्रयासों को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है। सब कुछ से बढ़कर शांति स्थापित करना जरूरी है जहाँ युद्ध के कारण विनाश और मृत्यु है। इसको पूरा करने के लिए शस्त्रों के व्यापार, हथियारों की तस्करी तथा उनके साथ संलग्न छिपित साज़िशों को रोकना होगा। घृणा तथा हिंसा को समर्थन देने वाले हर साधन को दूर करना होगा। संत पापा ने देशों के बीच आपस में सहयोग करने की सलाह दी तथा आशा व्यक्ति की कि इस्तम्बुल में होने वाले प्रथम विश्व मानवीय शिखर सम्मेलन में इन बातों पर विचार किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि एक साथ कार्य करने के द्वारा ही शरणार्थियों की जटिल समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।

संत पापा ने ईश्वर की करुणा की याद दिलाते हुए कहा, ″ईश्वर न तो उदासीन हैं और न ही मानवता को घायल करने वाली दुखद परिस्थितियों में हमसे दूर हैं। वे हमारे पिता हैं जो भलाई करने एवं बुराई का बहिष्कार हेतु हमारी मदद करते हैं। वे न केवल हमारी मदद करते किन्तु येसु ने हमें शांति का रास्ता दिखलाया है। इस संसार की बुराई के सामने उन्होंने अपने को हमारा सेवक बनाया तथा प्रेममय सेवा द्वारा दुनिया की सेवा की है। यही सच्ची शक्ति है जो शांति लाती है। वे ही लोग शांति स्थापित कर सकते हैं जो प्रेम से सेवा करते हैं। सेवा हमें अपने आप से बाहर आने तथा दूसरों की भलाई करने की प्रेरणा देती है। वह उस समय खड़ी नहीं रहती जब व्यक्ति एवं वस्तुएँ नष्ट किये जाते किन्तु उनकी रक्षा करती है। सेवा उदासीनता पर विजय पाती तथा हृदय एवं मन में छाये बादल को हटा देती है।

संत पापा ने उन्हें ख्रीस्त के शरीर रूपी भूखे, परदेशी तथा दुःख झेल रहे लोगों की देखभाल एवं सेवा करने हेतु धन्यवाद दिया।


(Usha Tirkey)

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